साक्षात्कार
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: आपकी इस शानदार सफलता पर सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल की ओर से आपको हार्दिक बधाई। आप कैसा महसूस कर रही हैं?
ज़िनिया: यह अनुभव अविश्वसनीय है और मैं अत्यंत उत्साहित हूँ। अब मैं लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में अपने प्रशिक्षण की तैयारी कर रही हूँ।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: IAS अधिकारी बनने की आपकी प्रेरणा क्या रही? आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देती हैं? आपकी तैयारी और सफलता में परिवार और अन्य लोगों (शिक्षक, दोस्तों) की क्या भूमिका रही?
ज़िनिया: यह मेरी एक परिपक्व आकांक्षा थी। मैंने कॉर्पोरेट जगत और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम करके देखा है, लेकिन उन अनुभवों के बाद मुझे यह गहराई से महसूस हुआ कि वास्तविक आत्मसंतुष्टि मुझे एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में राष्ट्र सेवा में ही मिलेगी।
मैं अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर और अपनी माँ को देती हूँ। उन्होंने हर कठिन परिस्थिति में मेरा साथ दिया, यहाँ तक कि जब सब कुछ बिखरता हुआ लग रहा था, उन्होंने वर्षों तक अपनी नींद का त्याग किया ताकि मैं कुछ सार्थक कर सकूँ, मैं उनके इस मौन किंतु अटूट समर्थन के लिए सदैव आभारी रहूँगी।
परिवार और मित्र वे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो आपको एक निरंतर और प्रेरित अभ्यर्थी के रूप में ढालते हैं, जो अंततः सफलता की कुंजी हैं। मेरे लिए मेरे मार्गदर्शक एवं प्रोफेसर, प्रो. संजय राव आयडे, मेरी तैयारी के प्रकाश स्तंभ रहे, जिन्होंने हर कठिन समय में मेरा आत्मविश्वास बनाए रखा।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए क्या रणनीति अपनानी चाहिए? क्या आपने दोनों की तैयारी साथ में की थी या अलग-अलग?
ज़िनिया: तैयारी चरणबद्ध होनी चाहिए। NCERT पढ़ें, समाचार-पत्र पढ़ें, नियमित रूप से अपना आत्म-मूल्यांकन करें, ट्रेंड एनालिसिस के साथ विगत वर्षों के प्रश्न-पत्र हल करें, परीक्षक की मानसिकता को समझें और व्यावहारिक रूप से लागू होने वाली समय-सारणी बनाएँ और सबसे महत्वपूर्ण है कि रटने के बजाय अवधारणात्मक (conceptual) स्पष्टता पर ध्यान दें।
मैंने अपनी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की तैयारी को सही मायनों में एकीकृत नहीं किया था क्योंकि मेरा शुरुआती पूरा ध्यान प्रारंभिक परीक्षा पर ही अटका रहा। हालांकि, दोनों के लिए पढ़ाई वही रहती है; बस प्रस्तुत करने का तरीका अलग होता है। इसलिए दोनों को साथ-साथ करना बेहतर है।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: आपने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, साक्षात्कार और वैकल्पिक विषय के लिए कितना समय दिया? आपने प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओं में अपना समय कैसे प्रबंधित किया?
ज़िनिया: मेरी तैयारी भले ही बहुत सुनियोजित नहीं थी, लेकिन अवधारणात्मक रूप से मजबूत थी। प्रारंभिक परीक्षा से 3-4 महीने पहले मैं मुख्य परीक्षा की पढ़ाई रोक देती थी। उससे पहले, मैं अपने अध्ययन के समय को मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा के लिए 30:70 के अनुपात में बाँटती थी, क्योंकि मेरे लिए प्रारंभिक परीक्षा एक बड़ी बाधा थी, खासकर इसलिए क्योंकि मैं इस स्टेज पर पहले असफलता का सामना कर चुकी थी। 2024 की मुख्य परीक्षा से पहले के 3 महीनों में, मैंने मुख्य परीक्षा का अपना पूरा पाठ्यक्रम कवर किया और मैंने वैकल्पिक विषय तथा सामान्य अध्ययन दोनों को समान समय दिया।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसे चुनने का आधार क्या था? इसकी तैयारी के लिए क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
ज़िनिया: मेरा वैकल्पिक विषय राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध (PSIR) था। मैंने इसे रुचि और सामान्य अध्ययन के साथ समानता के कारण वैकल्पिक विषय चुना।
PSIR के लिए रणनीति: सबसे पहली कोशिश अवधारणात्मक स्पष्टता होनी चाहिए। विषयों को आपस में अंतर्संबंधित करके देखना, अपनी बुनियादी समझ के लिए किसी 1 स्रोत (जैसे- IGNOU) को चुनना और केवल सारांश पढ़ने के बजाय विचारकों द्वारा लिखी गई मूल पुस्तकों को पढ़ना। मेरे मामले में, क्योंकि मेरे नोट्स तैयार नहीं थे, मुझे मुख्य परीक्षा से 3 महीने पहले “क्विक-नोट्स” बनाने पड़े। मैं सुझाव दूंगी कि ऐसा न होने दें ताकि आप उन 3 महीनों में पूरी तरह से “उत्तर लेखन” पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: नीतिशास्त्र (एथिक्स) [जीएस पेपर-IV] के लिए आपकी रणनीति, तैयारी और पुस्तकों का चयन क्या था?
ज़िनिया: सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप पहले इस बात से परिचित हों कि किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। इसमें दो खंड होते हैं और विगत वर्षों के प्रश्नों (PYQs) को देखने से यह समझने में मदद मिलती है कि नीतिशास्त्र के प्रश्न-पत्र के लिए किस स्तर की गहराई और अध्ययन की ज़रूरत है। मैंने स्वयं सिलेबस (पाठ्यक्रम) पर रिसर्च किया और मुख्य परीक्षा से पहले कक्षाएं भी लीं। आप भी ऐसा कर सकते हैं, साथ ही सिलेबस के हर एक शब्द पर अपनी समझ विकसित करना ज़रूरी है। इसके अलावा, इस विषय की गहराई को समझने के लिए अभ्यर्थी जी. सुब्बा राव सर की एथिक्स वाली किताब पढ़ सकते हैं, जो न केवल इस प्रश्न-पत्र के लिए बल्कि आपके व्यक्तित्व विकास के लिए भी बहुत अच्छी है।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: निबंध प्रश्न-पत्र की तैयारी के बारे में कुछ बताएं।
ज़िनिया: मैं एक उत्साही पाठक रही हूँ, मुझे अच्छा साहित्य पढ़ना बहुत पसंद है और इससे निबंध के प्रश्न-पत्र में बहुत मदद मिलती है। सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’ निबंध के पाठ्यक्रम की मांग को समझना है। अंततः बात विचारों के तार्किक प्रवाह, अच्छे उदाहरणों और एक बेहतरीन अभिव्यक्ति पर आकर रुकती है। कुछ अलग तरीके अपनाकर मैंने अपना स्कोर 2024 के 90 से बढ़ाकर 2025 में 128 कर लिया; जैसे छोटे वाक्यों का प्रयोग, बेहतर उदाहरण देना और अपने जटिल विचारों को सरल भाषा में व्यक्त करना।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: आपने साक्षात्कार (इंटरव्यू) की तैयारी कैसे की? साक्षात्कार में किस तरह के प्रश्न पूछे गए? क्या आपने सभी के उत्तर दिए? क्या किसी विशिष्ट क्षेत्र पर विशेष ज़ोर दिया गया था?
ज़िनिया: मैंने स्वयं को एक स्वस्थ चर्चा के लिए तैयार किया था।
मॉक इंटरव्यू से मुझे एहसास हुआ कि सामान्य बातचीत और ‘बहस’ (debating) में फर्क होता है। मैंने यह समझने की कोशिश की कि इतने सम्मानित और अनुभवी विद्वानों के बोर्ड से बात करने के लिए किस तरह का लहजा आवश्यक है।
मैंने सवालों को हिस्सों में बांटने की कोशिश की, समस्या के संदर्भ को समझा और ऐसे जवाब दिए जो व्यावहारिक और तर्कसंगत थे। मैंने कोचिंग संस्थानों द्वारा दिए गए रटे-रटाए टेम्प्लेट का पालन नहीं किया क्योंकि मुझे लगा कि ‘वास्तविक और सहज’ उत्तर ज़्यादा बेहतर होते हैं। इसलिए, कृत्रिम रूप से 5 बिंदु बनाने के बजाय, मैं उन 2 बिंदुओं के साथ अधिक संतुष्ट थी, जो विषय पर मेरी समझ की गहराई को दर्शा रहे थे।
DAF (डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म) आधारित अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण है। मुझसे मेरे DAF पर बहुत विस्तृत और पेचीदा सवाल पूछे गए। ISI 14001 मानकों से लेकर हाइकु कविता (Haiku poetry) और स्वेज नहर संकट तक, सवालों का दायरा बहुत व्यापक था।
मैं 2024 और 2025 के अपने दोनों इंटरव्यू में 1-1 सवाल का जवाब नहीं दे पाई थी। ऐसे में बोर्ड को गुमराह न करना और ईमानदारी से इसे स्वीकार कर लेना ही सबसे अच्छा है। मुझे लगता है कि ऐसे क्षणों में बोर्ड आपसे सत्यनिष्ठा की उम्मीद करता है और वे झूठ को बहुत आसानी से पकड़ लेते हैं।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: परीक्षा की तैयारी में कोचिंग क्या भूमिका निभाती है?
ज़िनिया: यह व्यक्ति पर निर्भर करता है। किसी भी चीज़ से जुड़ने से पहले उनकी शिक्षण पद्धति और समयबद्धता पर रिसर्च करना सबसे अच्छा है। इसका उपयोग करेंट अफेयर्स को अपडेट करने और मॉक टेस्ट देने के लिए भी किया जा सकता है।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: आपकी सफलता में सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल की क्या भूमिका है?
ज़िनिया: मैंने विगत वर्षों के प्रश्नों और क्रॉनिकल में आने वाले ‘संसदीय प्रश्न खंड’ के लिए क्रॉनिकल का उपयोग किया। कभी-कभी अपने खाली समय में, करेंट अफेयर्स में अपनी बढ़त बनाने के लिए मैं क्रॉनिकल में आने वाले MCQs भी हल करती थी।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: आपकी तैयारी का स्रोत क्या था? अपनी तैयारी के दौरान आपने किन पुस्तकों, पत्रिकाओं, अखबारों और ऑनलाइन स्रोतों का उपयोग किया?
ज़िनिया: मेरी तैयारी का स्रोत मुख्य रूप से ऑनलाइन था।
- प्रारंभिक परीक्षा के लिए:
- राजव्यवस्था के लिए लक्ष्मीकांत।
- इतिहास के लिए कक्षा 6-12 तक की NCERT।
- मैंने स्पेक्ट्रम को भी 3-4 बार पढ़ा।
- अर्थशास्त्र के लिए मृणाल सर के नोट्स और मेरे अपने स्नातक स्तर के नोट्स।
- भूगोल के लिए NCERT और जी.सी. लियोन्ग। जटिल अवधारणाओं के लिए मैंने ‘यूट्यूब’ का भी उपयोग किया।
- पर्यावरण तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए न्यूज़ पेपर और किसी 1 कोचिंग संस्थान का करेंट अफेयर्स संकलन।
मुख्य परीक्षा के लिए:
- सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्न-पत्र के लिए इतिहास की NCERT पढ़ें और माइंडमैप बनाएं; भारतीय समाज के लिए PYQs पर अच्छी पकड़ के साथ नियमित न्यूज़ पेपर पढ़ना पर्याप्त है; भूगोल के लिए, मैंने PYQs, PMF IAS की किताब या इंटरनेट से डायग्राम लिए और उत्तर लेखन अभ्यास किया।
- सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्न-पत्र के लिए मैंने आतिश माथुर सर के ‘वन-पेजर्स’ के अलावा यहां अपने PSIR ज्ञान का उपयोग किया। सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्न-पत्र के लिए डेटा सबसे महत्वपूर्ण है।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: वैकल्पिक विषय के प्रश्न-पत्र 1 और 2 के लिए कौन सी पुस्तकों को आधार बनाया?
ज़िनिया: प्रश्न-पत्र 1: जे.सी. जौहरी, ओ.पी. गाबा, राजीव भार्गव; लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात है विचारकों की वास्तविक किताबें पढ़ना (उदाहरण के लिए, लेविआथन, प्लेटो की रचनाएँ, फुकुयामा की पुरानी और हालिया किताबें आदि)।
प्रश्न-पत्र 2: बुनियादी बातों को इग्नू या किसी अच्छे कोचिंग संस्थान से कवर किया जा सकता है। अन्य पुस्तकों में कारमानी (Caramani), संयुक्त राष्ट्र चार्टर, एस.पी. हंटिंगटन आदि शामिल हैं।
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल: बहुत-बहुत धन्यवाद और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।
|
जीवन परिचय
|
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः यू.पी.पी.सी.एस. में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई- आपकी सफलता में परिवार, मित्रों व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?
रश्मिलताः जी बहुत धन्यवाद! ईश्वर की असीम कृपा तथा परिवार का सहयोग, माता-पिता, भाईयों (श्री तेजेन्द्र सिह, श्री धमेन्द्र सिह, श्री सुरेन्द्र सिह) व तीनों भाभियों का आर्थिक मानसिक सहयोग मेरी सफलता में महत्वपूर्ण थी।
- शिक्षकों/ मेंटोर के रूप में श्री रोहित सर (Test World), श्री अनिल कुमार (इंफोशिक्षा) सर की आभारी हूं।
- मित्रों का विशेष सहयोग- मो. सुलेमान (असि- प्रोफेसर) अजीत सिह, अमित कुमार, एस- के- आर्या, डी- के- गुप्ता, गोविद शर्मा की मैं हृदय से आभारी हूं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?
रश्मिलताः ग्रेजुएशन करने के बाद जब मैं मेरे पिताजी के मित्र श्री प्रदीप चौधरी व श्री मानसिह से मिली तब उन्होंने मुझे इस तैयारी के लिये प्रेरित किया। इस प्रकार मैंने अपनी तैयारी शुरू की।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानती हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?
रश्मिलताः मेरा इस परीक्षा में माध्यम हिदी था, क्योंकि मैं इसमें ही सहज थी और मेरी पृष्ठभूमि भी हिदी भाषी थी। लाभ या नुकसान का तो नहीं कह सकती, लेकिन मैं अपने माध्यम में ही सहज थी।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?
रश्मिलताः मेरा वैकल्पिक विषय हिदी साहित्य था। इसके चयन में हिदी साहित्य का रफ़चिकर होना व छोटा सिलेबस भी इसकी खासियत रही।
- वैसे विषय का चुनाव व्यक्तिगत और रफ़चिकर होना चाहिये, लेकिन सेलेक्शन में अकादमिक विषयों के ट्रेंड को भी समझना आवश्यक है। विषय में रफ़चि होना सबसे आवश्यक है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानती हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?
रश्मिलताः इस परीक्षा की तैयारी की मांग, इसके सिलेबस के व्यापक होने के कारण एक से डेढ़ वर्ष में तो सिलेबस ही पूर्ण हो पाता है और फिर ठीक से समझने और परीक्षा की तैयारी तक 2 वर्ष तक का समय तो लग ही जाता है, अधिकतम तो 10 वर्ष भी लग सकता है जैसे कि मुझे एक लम्बा समय लगा।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु रणनीति- तथ्यात्मक जानकारी व बेसिक समझ व अधिकतम रिवीजन।
मुख्य परीक्षा हेतु रणनीति- वैकल्पिक विषय पर पकड़-मजबूत व लेखन शैली पर विशेष ध्यान देना। (मुख्य परीक्षा के लिये टेस्ट सीरीज महत्वपूर्ण है)।
- सामान्य अध्ययन के चारों पेपर पर विस्तृत समझा राइटिग प्रैक्टिस (फ्रलोचार्ट, डायग्राम व मैप आदि के साथ)।
- उत्तर प्रदेश स्पेशल की भूमिका (सामान्य अध्ययन के तीनों पेपर में लगभग 8-9 प्रश्न)। अतः उत्तर-प्रदेश स्पेशल अवश्य तैयार करें।
साक्षात्कार- यह व्यक्तित्व परीक्षण के रूप में होता है, अतः इसे कुछ दिनों के भीतर तैयार नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसमें लम्बा समय लगता है, अतः परीक्षा की तैयारी की शुरूआत से एक प्रशासनिक अधिकारी जैसी सोच विकसित करनी आवश्यक है। समस्या समाधान वाला व्यक्तित्व बनाएं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वोत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठ्यक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?
रश्मिलताः मुख्य परीक्षा की रणनीति-
- सर्वप्रथम सामान्य अध्ययन के चारों पेपरों में आने वाले 20 प्रश्नों को हल करने की पूरी कोशिश करें।
- टेस्ट सीरज के माध्यम से अपना मूल्यांकन करना आवश्यक है।
- सामान्य अध्ययन के चारों पेपर में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिय हेडिग, डायग्राम, फ्रलोचार्ट व मैपिग का प्रयोग।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?
रश्मिलताः हां, मैंने स्वयं के नोट्स बनाए, मैंने रिवीजन के लिये शॉर्ट नोट्स बनाएं, जो पेपर टाइम में बहुत लाभकारी होते हैं (प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा दोनों के लिए)।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा के प्रश्न-पत्र की तैयारी के लिए आपने क्या किया? छात्रों को इस संदर्भ में आप क्या मार्गदर्शन दे सकती हैं?
रश्मिलताः मैने सामान्य अध्ययन के चौथे पेपर के लिये पतंजलि व दृष्टि पब्लिकेशन के नोट्स पढ़े और जहां भाषा की क्लिष्टता दिखायी दी उसे अपने अनुसार सरल कर लिया और वर्तमान समय के उदाहरण व हिदी साहित्य (वैकल्पिक विषय) के उदाहरणों को भी जोड़ा।
सुझाव- नीतिशास्त्र सामान्य अध्ययन के तीनों अन्य पेपर की तुलना में अधिक अंकदायी है, क्योंकि इस एक विषय को पढ़कर इसमें अधिक से अधिक अंक प्राप्त किये जा सकते हैं।
- इसमें वर्तमान समय के उदाहरणों का प्रयोग, फ्रलोचार्ट इत्यादि महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने निबंध की तैयारी कैसे की और परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनाई?
रश्मिलताः निबंध का सिलेबस पूरी तरह से डिफाइन है-
1. खण्ड-अ 2. खण्ड-ब 3. खण्ड-स
- उपर्युक्त तीनों खण्डों में साहित्य, समसामयिक घटाक्रम व राजनीतिक घटनाक्रम पर निबंध आते हैं।
- प्रथम खण्ड के लिये मैंने अपने वैकल्पिक विषय (हिदी साहित्य) के माध्यम से तैयारी कर ली थी, क्योंकि इस खण्ड में साहित्य के साथ अन्य विषयों (संस्कृति, समाज, मूल्य इत्यादि) को जोड़कर पूछा जाता है।
- दूसरे और तीसरे खण्ड में समसामयिक और राजनीतिक घटनाक्रम (जलवायु परिवर्तन, कृषि कानून, आजादी का अमृत महोत्सव इत्यादि) की तैयारी भी की थी।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?
रश्मिलताः वर्तमान पाठ्यक्रम के अनुसार (सामान्य अध्ययन के 4 पेपर)।
- 20 प्रश्नों में से 10 प्रश्न 125 शब्द व 10 प्रश्न 200 शब्दों में लिखने होते हैं।
- 125 शब्दों वाले प्रश्नों को बिदुवार (प्वाइंट्स) लिखें व फ्रलोचार्ट, डायग्राम इत्यादि बनाएं।
- 200 शब्दों वाले प्रश्नों को पैराग्राफ व बिदुवार दोनों रूप में लिख सकते हैं।
- मैप अवश्य बनाएं। (उत्तर प्रदेश, भारत, विश्व)।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगी?
रश्मिलताः हां मैंने तैयारी की शुरुआत में अलग-अलग कोचिग संस्थानों में पढ़ाई की है, क्योंकि मेरे पास मार्गदर्शन की कमी थी।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगी? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?
रश्मिलताः तैयारी प्रारंभ करने से पहले किसी से मार्गदर्शन अवश्य लें, जोकि इस परीक्षा की सफलता के लिये बहुत जरूरी है। अगर सम्भव हो सके तो चयनित लोगों को भी सुनें या उनसे मिलें क्योंकि वे अपनी कमियों से अवगत कराते हुए आपका मार्गदर्शन भी करेंगे।
- कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि व ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी भी इस परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं, क्योंकि मैं खुद ग्रामीण पृष्ठभूमि से ही हूं।
- इसके लिये मार्गदर्शन के साथ-साथ निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें-
- सर्वप्रथम इस परीक्षा से सम्बन्धित जानकारी, पाठ्यक्रम, पैटर्न को अच्छे से समझें। पाठ्यक्रम (प्रारम्भिक व मुख्य परीक्षा) की एक-एक लाइन याद करें।
- विगत वर्षों के प्रश्न-पत्रों का अध्ययन (प्राथमिक/ मुख्य परीक्षा) अवश्य करें।
- इस परीक्षा की तैयारी की शुरुआत करने के लिये सामान्य अध्ययन के सभी विषयों की NCERT की बुक्स (6-12) काफी लाभदायक सिद्ध होती है।
- इसके बाद सभी स्टैंण्ड़र्ड बुक्स पढ़ें।
- अगर सम्भव हो सके तो प्री व मेंस दोनों की टेस्ट सीरीज अवश्य करें। क्योंकि परीक्षा से पूर्व अपनी परीक्षा की तैयारी का मूल्यांकन आवश्यक है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?
रश्मिलताः पत्र-पत्रिकाएं सामान्य अध्ययन के प्रश्न-पत्र में आने वाले समसामयिक विषयों तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध साइंस-टेक आदि की तैयारी में बहुत उपयोगी सिद्ध होती हैं।
मैंने प्रारम्भिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा व साक्षात्कार के लिये सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (मासिक), समसामयिक घटनाचक्र, विजन के मेंस 365 को पढ़ा, जो मेरे लिये काफी लाभकारी सिद्ध हुआ।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार के बदलाव की अपेक्षा रखती हैं?
रश्मिलताः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल की मैं नियमित रूप से पाठक रही हूं, प्रारम्भिक, मुख्य परीक्षा व साक्षात्कार में समसामयिक विषयों की तैयारी में इसका काफी योगदान रहा।
सुझाव- यह पत्रिका भविष्य में भी सिर्फ सिविल सर्विसेज की तैयारी से सम्बन्धित सामग्री प्रस्तुत करने पर केन्द्रित रहे, ताकि भविष्य में भी सिविल सर्विसेज के प्रतिभागी परीक्षार्थी इससे लाभान्वित होते रहें।
धन्यवाद!
|
जीवन परिचय
|
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः यूपीपीसीएस 2021 में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई। आपकी सफलता में परिवार, मित्रों व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?
अभिषेक प्रियदर्शीः धन्यवाद! मेरी सफलता में मेरे पिता, जी-एस- वर्ल्ड संस्थान के शिक्षकों तथा अध्ययन सामग्री का विशेष रूप से योगदान रहा।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?
अभिषेक प्रियदर्शीः मैंने परीक्षा की तैयारी बी-टेक के अंतिम वर्ष से चालू कर दी थी। तैयारी के दौरान मैंने रिविजन और शॉर्ट नोट्स बनाने पर विशेष रूप से बल दिया। तैयारी का आदर्श समय ग्रेजुएशन का अंतिम वर्ष है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?
अभिषेक प्रियदर्शीः शुरूआती शिक्षा मेरी हिदी माध्यम से हुई थी_ हालांकि परीक्षा मैंने अंग्रेजी माध्यम से दी क्योंकि अंग्रेजी में मैटेरियल काफी आसानी से उपलब्ध है। परंतु कुछ संस्थान, जैसे कि जी-एस- वर्ल्ड अब हिदी मीडियम के लिये भी सर्वश्रेष्ठ सामग्री लेकर आ रहा है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?
अभिषेक प्रियदर्शीः मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था तथा चयन अभिरुचि के आधार पर ही किया था।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपके समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?
अभिषेक प्रियदर्शीः मैं कम से कम 15 महीनों का समय उपयुक्त मानता हूं। मैंने तैयारी समन्वित तरीके से की थी, जी.एस. वर्ल्ड संस्थान की मुख्य परीक्षा की टेस्ट सीरीज जॉइन की थी।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वोत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?
अभिषेक प्रियदर्शीः मैंने पाठ्यक्रम और पिछले वर्ष में पूछे गये प्रश्नों पर ही विशेष जोर दिया तथा शॉर्ट नोट्स बनाकर उनका रिवीजन किया। सभी प्रश्नों को एक तय समय में तथा एक जैसी लगन से हल किया।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?
अभिषेक प्रियदर्शीः प्रीलिम्स के लिये तो नोट्स ज्यादा आवश्यक नहीं है। आप किताब में हाईलाइट कर लें परंतु मेन्स के नोट्स आप जहां से भी उस टॉपिक को देख रहे है, अपना बना ले और उसका बार-बार रिवीजन करें।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा के प्रश्न-पत्र की तैयारी के लिए आपने क्या किया? छात्रों को इस संदर्भ में आप क्या मार्गदर्शन दे सकते हैं?
अभिषेक प्रियदर्शीः इसमें जो भी महत्वपूर्ण मुख्य शब्द पाठ्यक्रम में दिये गये हैं, उनकी एक अच्छी परिभाषा, कम से कम 5 उदाहरण तथा कुछ महत्वपूर्ण कथन अपने पास रखें।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने निबंध की तैयारी कैसे की और परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनाई?
अभिषेक प्रियदर्शीः निबंध की कोई विशेष तैयारी नहीं की सामान्य अध्ययन की विषयवस्तु का ही प्रयोग किया। हां, एक-दो टेस्ट जरूर लिखकर चेक करा लें और टॉपर्स कैसे लिखते हैं, थोड़ा प्रारूप अवश्य देख लें। कुछ बार-बार पूछे जाने वाले विषय पर महान लोगों के कथन जरूर याद रखें।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?
अभिषेक प्रियदर्शीः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली में आपको इंट्रो, बॉडी तथा निष्कर्ष के प्रारूप को फॉलो करना पड़ेगा तथा प्रश्न की मांग को ध्यान में रखकर उसको छोटे-छोटे हेडिंग्स बनाकर उत्तर देना पड़ेगा। साथ में महत्वपूर्ण शब्दों को हाइलाइट करें।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?
अभिषेक प्रियदर्शीः साक्षात्कार के लिये मैंने जी-एस- वर्ल्ड तथा अन्य संस्थानों में मॉक दिया और अपनी भेजी गयी वीडियो को देखकर तथा दिये गये फीडबैक पर सुधार किया। मेरा बोर्ड काफी सहयोगी था।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?
अभिषेक प्रियदर्शीः मैं बोलूंगा कि आप किसी संस्थान से मार्गदर्शन जरूर ले लें, जिससे आपकी खूबी तथा कमजोरी का जल्दी पता चल जाएगा। आपके समय की बचत होगी।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?
अभिषेक प्रियदर्शीः जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं, वे अपनी इस स्थिति को अपनी ताकत बनाये और प्रेरित होकर पढ़ाई करें कि उन्हें अपनी इस स्थिति को एक दिन जरूर बदलना है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सामान्य धारणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कैरियर विकल्प भी अपने पास रखना चाहिए। क्या आपने भी कोई कैरियर विकल्प रखा था?
अभिषेक प्रियदर्शीः अगर आप UPSC की तैयारी कर रहे हैं तो राज्य सिविल सेवा को एक बैकअप के रूप में रख सकते हैं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओंका अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?
अभिषेक प्रियदर्शीः शुरुआती चरण में तथा बाद में साक्षात्कार के लिए समसामयिक मुद्दों पर जानकारी एकत्रित करने तथा अपनी राय बनाने के लिए क्रॉनिकल की CSC हिंदी मैंगजीन को मैंने पढ़ा था।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?
अभिषेक प्रियदर्शीः क्रॉनिकल पत्रिका समसामयिक मुद्दों के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किसी मुद्दों को संपूर्ण रूप से, इसके सभी प्रश्नों को विश्लेषणात्मक रूप से प्रस्तुत करती है, जो कि एक सिविल सेवा परीक्षार्थी के लिये बहुत ही उपयोगी है।
|
अनुशंसित पुस्तक सूची
|
|
जीवन परिचय
|
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः बीपीएससी में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई- आपकी सफलता में परिवार, मित्रों व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?
बमबम कुमारः बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। किसी भी व्यक्ति की सफलता में परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। मेरी सफलता में खासकर मेरे परिवार का बहुत बड़ा योगदान है। जिस परिस्थिति में रहकर उन लोगों ने मुझे पढ़ाने का सपना देखा था, वो गिने चुने लोग ही कर पाते हैं। उनकी ऐसी सोच और संघर्ष की वजह से ही मैं यहां तक पहुंच पाया हूं। हालांकि जीवन में अच्छे मित्र और मार्गदर्शक (शिक्षक) का होना अनिवार्य है, और मैं इस मामले में भी भाग्यशाली हूं कि मुझे ऐसे लोगों का साथ मिलता रहा है।
जहां तक पृष्ठभूमि की बात है तो मेरे पिता किसान हैं, मैंने उनका संघर्ष बचपन से देखा है जिसने मुझे निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?
बमबम कुमारः M.Tech करने के बाद मैंने एक संस्थान में पढ़ाना शुरू किया। परंतु मन में था कि एक बार सिविल सेवा परीक्षा देनी चाहिए। मैंने BPSC की तैयारी के लिए पटना में ही परफेक्शन आईएएस जॉइन किया और यहीं से परीक्षा की तैयारी आरंभ हुई। तैयारी आरंभ करने से पहले मैंने पाठ्यक्रम को अच्छे से देखा और उसी के अनुसार मैंने महत्वपूर्ण टॉपिक्स को चिह्नित कर पढ़ना शुरू किया।
वैसे तो परीक्षा शुरू करने का कोई मानक समय नहीं होता है। इस परीक्षा की तैयारी कोई स्नातक के पहले भी शुरू कर सकता है, कोई स्नातक के बाद भी। जहां तक मेरा सवाल है, मैंने M.Tech के 2 साल बाद तैयारी शुरू की।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?
बमबम कुमारः भाषा माध्यम के बारे में, मैं यह कह सकता हूं कि आप जिस भाषा में सहज हैं वह ले सकते हैं। मैंने हिन्दी माध्यम में परीक्षा दी, क्योंकि मुझे लगता था मैं हिन्दी भाषा में अपनी बातों को सहजता से व्यक्त कर सकता हूं। आपको लगता है कि आप अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने में अधिक सहज हैं तो अंग्रेजी से ही दीजिए, दोनों भाषाएं अपनी जगह सही हैं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?
बमबम कुमारः मेरा वैकल्पिक विषय इतिहास था। वैकल्पिक विषय के चयन में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है आपकी उस विषय में रुचि। फिर आप इतिहास को देखेंगे तो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के GS-I में इतिहास से काफी प्रश्न पूछे जाते हैं। यही मेरा आधार था। मैंने लोकप्रियता को आधार नहीं बनाया।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानते हैं? तीनों चरणोंकी तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?
बमबम कुमारः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए जहां तक समय की बात है तो 1 वर्ष में हो सकता है, हालांकि अलग-अलग छात्रों के लिए यह अवधि घट या बढ़ भी सकती है।
परीक्षा के तीन चरण प्रारंभिक मुख्य परीक्षा एवं व्यक्तित्व परीक्षण, तीनों की अलग-अलग मांग है इसलिए रणनीति भी अलग-अलग ही होगी। प्रारंभिक के लिए मैंने तथ्यों पर ज्यादा ध्यान दिया और बहुत सारे मॉक टेस्ट दिए। हालांकि तीनों में समानता यह है कि जो चीजें आप प्रारंभिकी के लिए पढ़ते हैं वो मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में भी लाभदायक होते हैं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वोत्तम तरीका क्या हो सकता है? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?
बमबम कुमारः मुख्य परीक्षा के लिए सामान्य अध्ययन को तैयार करने के लिए मैंने मूल पूस्तकों को पढ़ा था ताकि विषय वस्तु की अवधारणात्मक समझ हो जाए मेरी रणनीति रही थी कि में विगत वर्षों के प्रश्न को अच्छे से तैयार कर मुख्य बिंदु नोट कर लेता था और उसका एक स्ट्रक्चर तैयार कर बार-बार याद करने की कोशिश करता था।
परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए मैंने सबसे पहले समय प्रबंधन करने की रणनीति बनाई थी, उसके लिए मैंने Perfection IAS का Mains Test Series दिया था। जिससे मैं 3 घंटे में सारे उत्तर लिख पाया।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?
बमबम कुमारः हां। आप जब किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं तो आपको अपना नोट्स बनाना चाहिए तथा शॉर्ट नोट्स भी बनाने चाहिए। ये नोट्स आखिरी वक्त के रिवीजन में बहुत उपयोगी होते हैं।
मैंने अपने नोट्स में उन बिंदुओं को ज्यादा स्थान दिया जो परीक्षा के दृष्टिकोण से ज्यादा महत्वपूर्ण थे तथा वैसे Tricky Questions थे जहां पर मैं गलती करता था या कर सकता था उन पर भी ध्यान दिया।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?
बमबम कुमारः वैसे तो उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली का कोई मानक रूप नहीं है, परंतु यदि आप प्रश्न के अनुसार, शब्द सीमा को ध्यान में रखते हुए उत्तर लेखन करते हैं, तो इसे एक अच्छा उत्तर लेखन माना जा सकता है। मैंने तैयारी के दौरान पूर्व में पूछे गये प्रश्नों की व्याख्या को देखकर उत्तर लेखन करना शुरू किया था। धीरे-धीरे उत्तर लेखन शैली बेहतर हो गई।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए?
बमबम कुमारः साक्षात्कार के लिए मैंने बहुत सारे चयनित प्रतियोगियों के मॉक इंटरव्यू के वीडियो को देखा तथा उसी के अनुसार मैंने तैयारी शुरू की।
अपने परिचय, रुचि, समसामयिकी, स्नातक विषय तथा एच्छिक विषय को तैयार किया।
फिर मैंने परफेक्शन IAS के Mock Interview Programe को जॉइन किया था।
मेरा साक्षात्कार साधारण ही रहा था। मुझसे पहले ठेंपब सवाल पूछे गये जैसे- ग्रेजुएशन कब किया, अभी क्या कर रहे हैं, पदों की प्राथमिकताएं क्या हैं, Hobby & Optional क्या हैं।
फिर मगध के इतिहास के बारे में, रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस का तर्क और मेरा विचार क्या है? G.I tag जंह क्या होता है, गया संस्कृति आदि के बारे में प्रश्न पूछे हैं। OTT Platform और कुछ खेल से जुड़े प्रश्न भी थे।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?
बमबम कुमारः हां। कोचिंग से आपको एक निरंतरता मिलती है तथा वो माहौल मिलता है जिसमें आप खुद को Motivated रख सकते हैं। हालांकि सफलता के लिए कोचिंग लेना ही है यह जरूरी नहीं है। आप स्व-अध्ययन से भी सफल हो सकते हैं। परंतु आप अगर कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं तो जरूर लीजिए, बस आपको याद रखना होगा कि आप नियमित क्लास लें और मेहनत आपको खुद ही करनी पड़ेगी।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?
यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?
बमबम कुमारः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं उनके लिए यह सुझाव है कि आप सबसे पहले सेलेबस को ध्यान से विश्लेषित करे फिर उसी के अनुसार अपनी तैयारी को आगे बढ़ाएं। Basic Concept के लिए मानक टेक्स्ट बुक को पढ़िये।
आर्थिक रूप से कमजोर छात्र You Tube के सहारे अपनी तैयारी शुरु कर सकते हैं। You Tube पर फ्री में अच्छी सामग्री उपलब्ध है आप उनका उपयोग कर सकते हैं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सामान्य धारणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कैरियर विकल्प भी अपने पास रखना चाहिए। क्या आपने भी कोई कैरियर विकल्प रखा था?
बमबम कुमारः यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों का मानना है अगर आपके पास कैरियर विकल्प है तो आप निशि्ंचत रहेंगें और बेहतर कर पाएंगे वहीं कुछ लोगों का इसके विपरीत मानना है।
जहां तक मेरी बात है तो मैं Teaching करते हुए इस परीक्षा की तैयारी किया था।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?
बमबम कुमारः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका काफी व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत की जाती है। इसमें BPSC मुख्य परीक्षा के 10 संभावित प्रश्नों की श्रंृखला सराहनीय है। इससे मुझे अपने उत्तर लेखन शैली को बेहतर करने में मदद मिली। मुझे नहीं लगता इसमें किसी प्रकार के बदलाव की जरूरत है।
|
अनुशंसित पुस्तक सूची प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन
मुख्य परीक्षा
|
|
नाम: राजीव कुमार पिता का नाम एवं पेशा: श्री बिरेन्द्र सिंह, किसान माता का नाम एवं पेशा: श्रीमती सुनीता देवी, गृहिणी शैक्षिक योग्यता: स्नातक (गणित प्रतिष्ठा)- बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर (प्रथम श्रेणी) आदर्श व्यक्ति: मेरे पिताजी अभिरुचियां: घूमना, संगीत सुनना वैकल्पिक विषय (मुख्य परीक्षा): भूगोल पूर्व चयन: (1) C.I.S.F., HC/CLK, (2) CENTRAL EXISE - TAX ASSISTANT,(3) CGL 2008 - PREVENTIVE OFFICER, (4) CGL 2010 - EXCISE INSP.(5) CDS – 2007 |
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्रॉनिकलः 65वीं बीपीएससी में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई. आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?
राजीव कुमारः जी बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरी सफलता में ईश्वर, माता-पिता, छोटे भाई, परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग विशेष रूप से मेरी पत्नी तथा प्यारी बेटी का त्याग/सहयोग महत्वपूर्ण है। शिक्षक के रूप में अभिनव झा सर जिन्होंने भूगोल वैकल्पिक का मार्गदर्शन किया, साथ ही शाहिद इकबाल सर जो 60-62वीं एवं 63वीं बीपीएससी में डीएसपी पद पर चयनित है, उनका भी योगदान महत्वपूर्ण है। मित्र में आलोक परासर, संजीत, मुकेश जी, प्रणव प्रकाश, रणधीर ने मुझे तैयारी के प्रत्येक स्तर पर अकथनीय सहयोग किये हैं। चूंकि मैं ग्रामीण पृष्ठभूमि का छात्र रहा हूं, अतः गांव के लोगों के बारे में, उनकी समस्याओं के बारे में अच्छी तरह से अवगत हूं। अतः उन लोगों के लिए कुछ करने की इच्छा हमेशा से जागृत रही है। कहीं न कहीं इन सबने भी मुझे सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया?
राजीव कुमारः मैंने परीक्षा की तैयारी का आरंभ परीक्षा पैटर्न, सिलेबस तथा विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का गहन अध्ययन करते हुए किया। तैयारी के दौरान मैंने तीनों स्तरों (प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार) के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई। प्रारंभिक परीक्षा के लिए तथ्यात्मक अध्ययन पर जोर दिया। मुख्य परीक्षा के लिए विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों के पैटर्न को ध्यान में रखते हुए विस्तृत अध्ययन पर बल दिया तथा साक्षात्कार में अधिक से अधिक मॉक साक्षात्कार में शामिल हुआ। साक्षात्कार की तैयारी के दौरान ही मैं लक्ष्य कोचिंग दरभंगा के निदेशक आदरणीय पी.एन.झा सर से जुड़ा, उनके तथा हरिओम झा सर के मार्गदर्शन में ही मैंने साक्षात्कार में अच्छा अंक प्राप्त किया। साक्षात्कार की तैयारी के दौरान कैरियर क्वेस्ट के निदेशक संजीव कबीर सर से भी काफी सहयोग मिला।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?
राजीव कुमारः मैं हिन्दी माध्यम से इस परीक्षा में सफल हुआ हूं। जहां तक अंग्रेजी भाषी छात्रों की लाभप्रद स्थिति का सवाल है इस संबंध में, मैं यह कहना चाहूंगा कि विगत वर्षों के परिणाम से स्पष्ट है कि वर्ष दर वर्ष हिन्दी माध्यम से चयनित छात्रों की संख्या घटती जा रही है। 65वीं बी.पी.एस.सी. में ही अंतिम रूप से चयनित प्रथम 50 छात्रों में केवल दो छात्रों का माध्यम हिन्दी था। इसमें मेरा स्थान द्वितीय था। मैं अपने अनुभव के आधार पर हिन्दी माध्यम के छात्रों, अभ्यर्थियों से कहना चाहूंगा कि वो माध्यम को लेकर हतोत्साहित/निराश न हो तथा सही दिशा में, मानक अध्ययन सामग्री को आधार बनाते हुए तैयारी करें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?
राजीव कुमारः मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था। इस विषय के प्रति मेरी अभिरुचि, अध्ययन सामग्री की उपलब्धता, अंकदायी होने के कारण मैंने इस विषय का चयन किया। मैं वर्ष 2011 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली गया था। उस समय मुखर्जी नगर में सर्वत्र यह चर्चा का विषय था कि UPSC में वैकल्पिक विषय के रूप में केवल लोक प्रशासन एवं विधिशास्त्र (LAW) को ही वैकल्पिक विषय के रूप में रख सकेंगे। मैंने लोक प्रशासन विषय को चुना। लेकिन 56-59वीं एवं 64वीं बी.पी.एस.सी. में मैंने भूगोल वैकल्पिक का चयन किया तथा मुझे अंतिम रूप से इस परीक्षा में सफलता मिली।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःपरीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?
राजीव कुमारः तीनों चरणों की तैयारी के लिए उपयुक्त समय परीक्षार्थी की रणनीति, कार्य के प्रति समर्पण आदि पर निर्भर करता है। फिर भी यदि प्रयास स्नातक स्तर से ही किया जाए तो स्नातक के उपरांत एक वर्ष का समय पर्याप्त है। मुझे ज्यादा समय लगने का कारण यह है कि मैं सरकारी सेवा में कार्यरत हूं तथा तैयारी केवल परीक्षा के समय में ही अनियोजित तरीके से करता था। साथ ही पिछले 4-5 वर्षों से बी.पी.एस.सी. की परीक्षा नियमित होने लगी है, उससे पहले फार्म प्रकाशित होने से अंतिम परिणाम तक लगभग 4-5 वर्ष लगते थे, इस कारण भी देर हुई। इसके अतिरिक्त लॉकडाउन के कारण ऑफिस में रोस्टर सिस्टम लागू था, जिससे मुझे 65वीं मुख्य परीक्षा की तैयारी में काफी सहायता मिली।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?
राजीव कुमारः सामान्य अध्ययन की तैयारी का सर्वोत्तम तरीका है कि इस विषय के दोनों पेपर के विभिन्न खंडों का विभाजन कर तैयारी करना। जैसे स्टैटिक्स को अधिक बल देना ताकि इसमें अधिकतम अंक प्राप्त हो सके। इस भाग में अच्छा स्कोर मिलने पर ही उच्च रैंक प्राप्त करने की सम्भावना रहती है। परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करते समय मैंने समय प्रबंधन पर विशेष बल दिया तथा प्रत्येक खंड के सभी प्रश्नों को एक निर्धारित समय-सीमा में हल करने का प्रयत्न किया। साथ में यह भी ध्यान रखा कि कोई भी प्रश्न छूट न जाए। एक भी प्रश्न छूट जाने पर उच्च रैंक तो दूर सफलता की संभावना भी नगण्य हो जाती है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःक्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?
राजीव कुमारः वैकल्पिक विषय भूगोल तथा समान्य अध्ययन के इतिहास एवं राजव्यवस्था खंड का नोट्स बनाया था। स्वयं का बनाया नोट्स तैयारी के दौरान तथा परीक्षा के समय रिवीजन में काफी लाभप्रद साबित हुआ। मैंने किसी कोचिंग के नोट्स का उपयोग नहीं किया। मैंने मूल किताब से स्वयं नोट्स बनाया तथा इसे नियमित रूप से अपडेट किया। मैंने सामान्य अध्ययन के लिए बी.पी.एस.सी. पाठशाला टेलीग्राम चैनल द्वारा मुफ्त में आयोजित टेस्ट सीरीज में भाग लिया तथा टॉपर्स की कॉपी से अपने उत्तर तथा नोट्स को अपडेट किया।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?
राजीव कुमारः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली में निर्धारित समय में सरल भाषा में तथा प्रश्न की मांग के अनुरूप सभी भागों को कवर करना चाहिए। इसके लिए मैंने नियमित रूप से टेस्ट सीरीज में भाग लेकर अपने उत्तर को अपडेट करने का प्रयास किया।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?
राजीव कुमारः साक्षात्कार हेतु मैंने संजीव कबीर सर (Career Quest) से काफी सहयोग मिला, सर ने साक्षात्कार के दौरान क्या, क्यों, कब करना चाहिए, आपके ड्रेस पैटर्न, बैठने का तरीका, प्रवेश करने तथा निकलने के समय अभिवादन आदि के बारे में बताया। मॉक साक्षात्कार में, मैं संजीव सर, आस्था आईएएस, परम आईएएस तथा लक्ष्य कोचिंग दरभंगा में शामिल हुआ। लक्ष्य कोचिंग में ही मैंने सबसे अधिक मॉक दिया, वहां पर आदरणीय पी.एन. झा सर का सहयोग काफी प्रशंसनीय था। मेरा साक्षात्कार 6 अगस्त, 2021 को प्रथम पाली में श्री चौधरी सर के बोर्ड में था। साक्षात्कार में मुझसे ऐच्छिक विषय, वर्तमान नौकरी तथा हॉबी से संबंधित प्रश्न पूछे गए। बोर्ड का व्यवहार बहुत ही सहयोगपूर्ण था।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?
अनुशंसित पुस्तक सूचीप्रारंभिकी:
मुख्य परीक्षा:
वैकल्पिक विषय: भूगोल
|
राजीव कुमारः साक्षात्कार हेतु मार्गदर्शन व मॉक इंटरव्यू के अतिरिक्त मैंने कोई कोचिंग नहीं ली थी। जो छात्र तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें कहना चाहूंगा कि सर्वप्रथम वे वैकल्पिक विषय का चयन कर पाठयक्रम तथा विगत वर्षों के प्रश्न को ध्यान में रखते हुए एक बेस तैयार कर लें फिर कोचिंग जॉइन करें। वैसे, बिना कोचिंग के भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःजो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?
राजीव कुमारः तैयारी आरंभ करने वाले छात्र को मेरी सलाह है कि वह बिना समय गवाएं वैकल्पिक विषय का चयन कर पाठयक्रम के अनुसार, प्रामाणिक अध्ययन सामग्री को इकट्ठा कर एक सही रणनीति बनाकर तैयारी शुरु कर दे। ग्रामीण पृष्ठभूमि के तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मैं सलाह दूंगा कि वे भी उक्त रणनीति के अनुसार तैयारी करें। आज के समय में स्मार्टफोन सभी के पास उपलब्ध है, अतः उन्हें शहर की ओर जाने की कोई जरूरत नहीं है। वे सभी प्रकार की सूचना अपने निवास स्थान पर भी प्राप्त कर सकते हैं।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःतैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?
राजीव कुमारः मासिक पत्रिका जैसे क्रॉनिकल मेरी तैयारी का महत्वपूर्ण भाग था। इससे न केवल समसामयिकी बल्कि प्रत्येक माह में सामान्य अध्ययन के सभी भागों पर अध्ययन सामग्री छपने के कारण, सामान्य अध्ययन की तैयारी भी आसान हो जाती है।
सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?
राजीव कुमारः यह पत्रिका सिविल सेवा के प्रत्येक चरणों की तैयारी में काफी उपयोगी सिद्ध हुई। सामान्य अध्ययन में अच्छे अंक प्राप्त होने के साथ ही भूगोल वैकल्पिक को करेंट से जोड़ने में यह पत्रिका काफी लाभप्रद सिद्ध हुई। क्रॉनिकल टीम को धन्यवाद एवं आभार।







