Question : नाभिकीय शक्ति के रूप में स्वीकृति के लिए भारत का दावा
(2005)
Answer : नाभिकीय शक्ति के रूप में स्वीकृति के लिए भारत का दावाः भारत को दिन प्रितिदिन खराब होता जा रहा सुरक्षा महौल से सामना करना पड़ रहा है। इस असुरक्षा के मद्देनजर भारत की भौगोलिक अखंडता की रक्षा के लिए यह अपेक्षित है कि देश के पास दीर्घकालिक और आधुनिकतम रक्षा क्षमता होनी चाहिए। इसके साथ-साथ निषेधात्मक और भेदभाव पूर्ण अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्थाएं भी आवश्यक हैं। भारत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि निषेधात्मक दबावों ....
Question : गुटनिरपेक्ष आंदोलन के नेता रूप में भारत
(2005)
Answer : गुटनिरपेक्ष आंदोलन के नेता रूप में भारतः गुटनिरपेक्ष आंदोलन का औपचारिक उद्घाटन 1961 में बेलग्रेड में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में किया गया। गुट-निरपेक्षता की जिस नीति का प्रतिपादन भारत ने किया था, उसे धीरे-धीरे तृतीय विश्व के अधिकांश देशों ने अपना लिया। एशिया तथा अफ्रीका के अनेक देशों ने भारत के द्वारा दिखाये गये मार्ग पर चलकर दोनों शक्ति गुटों से अलग रहने की नीति अपना लिया था। यह आंदोलन गांधीजी की अहिंसा के ....
Question : भारत और जापान के बीच सहयोग के उभरते क्षेत्र
(2005)
Answer : भारत और जापान के बीच सहयोग के उभरते क्षेत्रः भारत तथा जापान एशिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियां हैं। वर्तमान में भारत जापान के साथ लागातार संबंधों को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। जापान का भी भारत की ओर सकारात्मक रूख है। जापान भारत में निवेश करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश है। अभी हाल के दिनों में दोनों देशों के संबंधों में प्रगाढ़ता आयी है। हाल के ही दिनों में जापानी प्रधानमंत्री ने भारत ....
Question : भारत-पाक संबंधों में हाल के विश्वास निर्माण उपायों के महत्व और परिसीमाओं को स्पष्ट कीजिए।
(2005)
Answer : भारत के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती पड़ोसियों के बिगड़े तेवर सुधारने की है जिनमें प्रमुख पाकिस्तान है। भारत-पाक संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयत्न हमेशा किये जाते रहे हैं। गुजराल सिद्धांत के पहले तथा इस सिद्धांत के तहत जिसमें बताया गया कि भारत के विशद आकार, संसाधनों तथा सामर्थ्य को देखते हुए भारत को किसी आदान-प्रदान की इच्छा रखे बिना अपने पड़ोसी देशों के प्रति एकतरफा सद्भाव रखते हुए सुनिश्चित नीति का अनुसरण करना ....
Question : संयुक्त राष्ट्र-शांति स्थापना कार्यकलापों और विश्वव्यापी निरस्त्रीकरण के उद्देश्य में भारत द्वारा निभायी गयी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
(2005)
Answer : आज भी भारत की विदेश नीति का प्रमुख मुद्दा शांति एवं निरस्त्रीकरण है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए निभाई जा रही भूमिका का दृढ़तापूर्वक समर्थन किया और भारत द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना भी की गई। संयुक्त राष्ट्र के कार्यकलापों में भारत की भागीदारी से जुड़ी अनेक प्रमुख घटनायें हैं। मूलतः भारत ने कोरिया में संयुक्त राष्ट्र की सैन्य कार्यवाही में असैनिक और प्रभावी भूमिका निभाई है। भारतीय ....
Question : विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एम.) जैसी संस्थाओं ने भारत की राजनीतिक और आर्थिक सम्प्रभुता को किस सीमा तक प्रभावित किया है? इनके प्रति भारत की क्या अनुक्रिया रही है?
(2005)
Answer : विश्व व्यापार संगठन बहुपक्षीय प्रणाली के लिए संस्थागत तथा कानूनी आधार उपलब्ध कराता है। विश्व व्यापार संगठन गैट का उत्तरवर्त्ती संगठन है। विश्व व्यापार संगठन के आदेश पक्ष में वस्तुओं का व्यापार सेवाओं का व्यापार, निवेश उपाय, व्यापार से से संबंधित बौद्धिक सम्पदा अधिकार शामिल हैं। भारत इसके संस्थापक देशों में से एक है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष नई अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक राष्ट्रवाद की रोकथाम तथा बढ़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय मेलजोल के संदर्भ व्यवस्था है। इस मौद्रिक ....
Question : भारत की ‘आसियान’में रूची
(2005)
Answer : भारत की ‘आसियान’में रूचीः दक्षिण-पूर्व ‘एशियाई’राष्ट्रों के संगठन ‘आसियान’ की स्थापना 1967 में की गयी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को तेज करने के लिए की गयी है। भारत की भौगोलिक एवं राजनीतिक परिदृश्य ने उसे इस संगठन के प्रति सकारात्मक खिंचाव लाया है। सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत ने इस पड़ोसी संगठन के साथ मित्रता का हाथ बढ़ाया। सन् 1991 के अंत ....
Question : भारतीय विदेश नीति के स्वतंत्र्य पूर्व उदगम।
(2004)
Answer : भारतीय विदेश नीति के स्वतंत्र्य पूर्व उद्गमः भारत की विदेश नीति का प्रारम्भ स्वतंत्र रूप से सन् 1946 तथा अगस्त 1947 में स्वाधीनता प्राप्ति से होता है परन्तु भारत का राष्ट्रीय नेतृत्व स्वतंत्रता के पूर्व ही विदेश नीति के प्रति जागरूक था। भारतीय विदेश नीति की जड़ें अठारहवीं तथा उन्नीसवीं शती के पुनर्जागरण काल के बुद्धिजीवियों एवं नेताओं की विचार शक्ति तथा बीसवीं शती के पहले चार दशकों के दौरान राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन में निहित ....
Question : भारत-नेपाल संबंधों के सुभेदक लक्षण।
(2004)
Answer : भारत-नेपाल संबंधों के सुभेदक लक्षणः भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित नेपाल सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। भारत सरकार इस बात पर बल देती रही है कि नेपाल के भारत से विशिष्ट सम्बन्ध हैं। भारत के सभी राजनीतिक दल की सरकार ने नेपाल से मधुर सम्बन्ध स्थापित करने के लिए पुरजोर प्रयत्न किये। नेपाल के विकास कार्यों में सबसे अधिक धन भारत का ही लगा हुआ है। विभिन्न नेपाली परियोजना के विकास का जिम्मा भारत ....
Question : भारत और विश्व व्यापार संगठन
(2004)
Answer : भारत और विश्व व्यापार संगठनः विश्व व्यापार संगठन गैट का उत्तरवर्ती संगठन है। भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक है। विश्व व्यापार संगठन के आदेश पत्र में वस्तुओं का व्यापार, सेवाओं का व्यापार से संबंधित निवेश उपाय तथा व्यापार से संबंधित बौद्धिक सम्पदा अधिकार शामिल है। यह बहुपक्षीय प्रणाली के लिए संस्थागत तथा कानूनी आधार उपलब्ध कराता है। यह सभी सदस्य देशों की व्यापार व्यवस्थाओं पर लगातार निगाहें रखता है। भारत की चिंताएं विश्व ....
Question : भारत की गुटनिरपेक्षता की विदेश नीति के प्रमुख निर्धारक क्या थे? 1990 के दशक से भारत की विदेश नीति में आए परिर्वतन के बारे में बताइये।
(2004)
Answer : गुटनिरपेक्षता की अवधारणा का विकास नवोदित देशों के विदेश नीति निर्धारकों ने किया था। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत इस नीति को अपनाने वाला प्रथम देश था। भारत ने ये स्पष्ट कर दिया था कि उसका किसी शक्ति गुट से स्थायी संबंध नहीं है। यही भारत की गुटनिरपेक्षता की विदेश नीति का आरम्भ था। भारत की गुटनिरपेक्षता का मुख्य लक्ष्य था- विदेश नीति की स्वतंत्रता। भारत नैतिक तथा समाजवादी विश्व व्यवस्था से संबंधित आदर्शवादी ....
Question : भारत-बांग्लादेश संबंधों में प्रमुख प्रतिरोधी मुद्दों का एक विवरण प्रस्तुत कीजिए। दोनों के बीच अपेक्षाकृत अधिक सहयोग की संभावानाओं का आकलन कीजिए।
(2004)
Answer : भारत के सहयोग से बांगलादेश का उद्भव हुआ। परन्तु समय के साथ-साथ दोनों के सम्बन्धों में उतार-चढ़ाव आता रहा है। दोनों के पास एक दूसरे के लिए ढ़ेर सारी शिकायते हैं। दोनों देशों के प्रतिरोधी मुद्दों में प्रमुख है- जल बंटवारे की समस्या, शरणार्थियों की समस्या, सीमा विवाद, अवैध धुसपैठ तथा अवैध आब्रजन, आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन, सीमा सुरक्षा बलों से मुठभेड़, न्यूमूरे द्वीप विवाद, समस्याओं का अंतर्राष्ट्रीयकरण।
जल बंटवारे की समस्या दोनों देशों के बीच ....
Question : लैटिन अमेरिका के साथ भारत के संबंधों का वर्णन कीजिए उनको स्पष्ट कीजिए और स्थिति में सुधार के सुझाव दीजीए।
(2004)
Answer : लैटिन अमेरिका शब्द व्यापक रूप से अमेरिका के दक्षिण की ओर सारे पश्चिमी गोलार्द्ध में स्थित उस भू-भाग का प्रयोग किया जाता है जो मध्य तथा दक्षिण अमेरिका तथा केरीबियन क्षेत्र में आता है। लैटिन अमेरिका में 24 गणराज्य हैं। इस सभी देशों में भौगोलिक एवं राजनीतिक असमानताएं हैं। लैटिन अमेरिकन देशों ने उदारवादी, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष राज्य पद्धति को अपनाकर विकास की पूंजीवादी व्यवस्था को अपनाया था- परन्तु कुछ देशों को छोड़कर राजनीतिक अस्थिरता का ....
Question : इस दृष्टिकोण का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि शीत-युद्धोत्तर काल में गुटनिरपेक्षता की भारत की नीति विसंगत हो गयी है।
(2003)
Answer : गुटनिरपेक्ष आंदोलन शीतयुद्ध एवं द्विध्रुवीय विश्व प्रणाली के विरुद्ध नवोदित देशों का एक ऐसा अभियान था, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय शान्ति, सद्भावना एवं आर्थिक विकास के साथ उनके राष्ट्रीय हितों एवं महत्वाकांक्षाओं का अद्भुत सामंजस्य विद्यमान था।
गुटनिरपेक्षता द्वितीय विश्व युद्ध के अवसान के साथ नई अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के रूप में विश्व पटल पर उभरा। इस आन्दोलन की सैद्धान्तिक व्याख्या पंचशील को माना गया, जिसमें गुटों से अलग रहते हुए विश्व शान्ति के लिए सक्रिय कार्य करना एवं ....
Question : व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर करने के विरूद्ध भारत के पक्षवाद के गुणागुण का आकलन कीजिए।
(2003)
Answer : निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया की गुणात्मक कटौती के तहत परमाणु शस्त्रों से संबंधित व्यापक आणविक परीक्षण प्रतिबन्ध संधि (Comprehensive Test Ban Treaty) विश्व भर में किये जाने वाले परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लायी गयी संधि या समझौता है, जिसका 1993 में भारत, अन्य देशों के अलावा अमेरिका के साथ सह-प्रस्तावक था लेकिन 1995 में उसने यह कहते हुए कि यह संधि सार्वभौमिक परमाणु निरस्त्रीकरण के समयबद्ध कार्यक्रम के साथ जुड़ी हुई नहीं ....
Question : अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और भारत
(2003)
Answer : अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना 1944 में ब्रैटनवुड्स नामक वित्तीयअधिवेशन में हुई। इसमें संपन्न समझौते के अनुसार 1945 को ये संस्था संगठित हुई। 1947 में यह संयुक्त राष्ट्र का विशेष अभिकरण बना। अन्तर्राष्ट्रीय धन कोष की प्रतिज्ञा के अनुच्छेद 1 के अनुसार इसके मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहन देना, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विदेशी विनियम प्रतिबंधों को हटाना, सदस्यों को धन उपलब्ध कराकर इसमें विश्वास उत्पन्न करना तथा सदस्यों के मध्य भुगतान से अंतर्राष्ट्रीय ....
Question : बांग्लादेश की स्वतंत्रता में भारत की भूमिका
(2003)
Answer : 1971 में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक दूरगामी परिवर्तन हुआ, यह परिवर्तन था बांग्लादेश का उदय। इस उदय से पहले भारत को विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ा, जब लगभग एक करोड़ लोग यातना-पीडि़त बांग्लादेशी शरणार्थी भारत आ गये और वापस जाने से इंकार कर दिया, तब भारत सरकार को पाकिस्तान से बात करनी पड़ी। पाकिस्तान ने यह आरोप लगाया कि भारत उसके आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रहा है। शेख मुजीबुरर्हमान को आजाद कराने तथा ....
Question : 1962 के भारत-चीन द्वंद्व का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव
(2003)
Answer : 1962 के भारत-चीन द्वंद्व का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभावः हिंदी चीनी भाई-भाई के नारा के बाद हुआ, 1962 का विश्वासघात और लड़ाई। अतीत के इस कड़वे कारनामें ने चीन के प्रति भारतीयों को संशय और सवालों ने घेर लिया। 1962 के चीनी आक्रमण के पश्चात चीन ने हर संभव प्रयास किया कि भारत को घेरा जाय और उसे उप महाद्वीप में ही उलझाये रखा जाय। इस आक्रमण ने विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया।
इस ....
Question : भारत-रूस के बीच सहयोग
(2003)
Answer : अपने पराभव तथा विघटन के बावजूद रूस अब भी हमारे लिए उतना ही विश्वसनीय और महत्वपूर्ण देश है जितना पहले था, क्योंकि उसके (रूस) और हमारे रिश्ते समय की कसौटी पर परखे हुए और स्थायी हैं। रूस की नाभिकीय क्षमता, वैज्ञानिक सम्भावनाएं, प्राकृतिक संसाधन और भू-सामरिक स्थिति अब भी यूरेशिया के स्थायित्व के आधार स्तम्भ हैं। चीन, रूस और भारत यूरेशिया के स्थायित्व के आधार स्तम्भ हैं, इसलिए आवश्यक है कि रूस के साथ जो ....
Question : भारत की ‘पूर्व की ओर देखो’नीति
(2002)
Answer : ‘पूर्व की ओर देखो’नीति के अंतर्गत भारत के विभिन्न आयामों में काफी परिवर्तन हुआ। वास्तव में भारत के संबंध दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ रहे हैं, किंतु आसियान के प्रारंभिक वर्षों में भारत ने इसमें सम्मिलित होने का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया था। परिवर्तित अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत ने इस नीति के तहत पुनः दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ अपने संबंध को मजबूत करने का किया है। ....
Question : श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (आई.जी.के.एफ.) की भूमिका तथा परिणाम
(2002)
Answer : श्रीलंका में भारतीय शांति सेना की भूमिका एवं परिणाम: श्रीलंका में भारतीय शांति सेना भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी एवं श्रीलंका के राष्ट्रपति जयवर्द्धने के बीच कोलंबो में 29 जुलाई, 1987 को एक 18 सूत्री समझौते के अंतर्गत व्यवस्था की गयी। इसके अंतर्गत भारतीय शांति सेना श्रीलंका भेजी गयी। भारतीय सेना के चौथे और 54वें डिवीजन के 20 हजार जवान जाफना में फैल गये। इस शांति सेना का उद्देश्य तमिल मुक्ति चीतों के गढ़, जाफना ....
Question : भारत तथा यूरोपीय संघ
(2002)
Answer : भारत तथा यूरोपीय संघ: भारत का संबंध यूरोपीय संघ के साथ बहुत पुराना रहा है। यूरोपीय संघ पहले यूरोपीय आर्थिक समुदाय के नाम से जाना जाता था। 1962 में भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक कूटनीतिक प्रयास के अंतर्गत अपनी वस्तुओं के निर्यात के लिए एक समझौता किया था। परंतु जब 1 जनवरी, 1973 में यूरोपीय आर्थिक संघ में प्रवेश किया तो भारत को बहुत बढ़ा झटका लगा। पर इसके तुरंत बाद भारत के ....
Question : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का भारत का दावा।
(2002)
Answer : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का दावाः संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना की गतिविधियों में भारत की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका को देखते हुए हम इसकी सदस्यता का दावेदारी से इंकार नहीं किया जा सकता है। वास्तव में पिछले पांच दशकों में हुए ज्यादातर महत्वपूर्ण शांति स्थापना के कार्यक्रमों में भारत की भागीदारी मिलती है। भारत ने पिछले 1950 के दशक में कोरिया, कंबोडिया, वियतनाम, सिवाई व लेबनान आदि देशों में हुई कार्यवाही ....
Question : सी.टी.बी.टी. तथा एन.पी.टी. पर भारत की आपत्तियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2002)
Answer : भारत की परमाणु नीति का अंतर्राष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संबंधित संस्थाओं से गहन संबंध रहा है। परमाणु शस्त्रों पर निषेध का भारत हमेशा पक्षधर रहा है, इसीलिए अन्तर्राष्ट्रीय संदर्भ पर परमाणु प्रसार को रोकने के लिए किये प्रत्येक प्रयासों में भारत ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। नेहरू के 2 अप्रैल 1954 के ‘स्टैंडस्टील एग्रीमैंट’से लेकर 18 देशों के निरस्त्रीकरण समिति, निरस्त्रीकरण समिति सम्मेलन (1978 तक), तथा बाद में निरस्त्रीकरण सम्मेलन के माध्यम से भारत ने ....
Question : चीन भारत संबंधों में हाल में हुए विकासों का परीक्षण कीजिए।
(2002)
Answer : भारत-चीन के संबंधों के हाल के विकासों के अंतर्गत हम मुख्यतः 1988-1999 तथा उसके बाद वर्षों का परीक्षण कर सकते हैं। वास्तव में यह युग सहयोगात्मक संबंधों का वर्ष कहा जाता है। इसकी विवेचना हम इस प्रकार कर सकते हैं-
Question : निर्गुट आंदोलन के उदय तथा विकास में भारत के योगदान की विवेचना कीजिए।
(2002)
Answer : गुटनिरपेक्षता की नीति भारत की विदेश नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू व केन्द्र बिन्दु है। भारत द्वारा इस सिद्धान्त को अपनाने के दो प्रमुख स्रोत हैं- भौतिक और गैर भौतिक। भौतिक तत्वों में भारत की भू-राजनैतिक स्थिति तथा आर्थिक स्थिति महत्वपूर्ण रहे हैं। गैर-भौतिक तत्वों में प्रमुख हैं- भारत की ऐतिहासिक विरासत एवं भारतीय दर्शन तथा परंपराओं का प्रभाव। अप्पादोराय व राजन के अनुसार भारत ने इस सिद्धांत को निम्न तीन प्रमुख कारणों से अपनाया- ....
Question : भारत एवं बाडुंग सम्मेलन: आशा एवं यर्थाथता
(2001)
Answer : भारत मानव मात्र की समानता में विश्वास करता है तथा रंग, जाति आदि पर आधारित किसी तरह के भेदभाव का विरोध करता है। भारत पहला देश था जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दक्षिण अफ्रीका द्वारा अपनायी जा रही भेदभाव की नीति का विरोध किया तथा 1952 में इस प्रश्न को संयुक्त राष्ट्र संघ में भी उठाया। अपनी इस नीति के अनुरूप भारत ने दक्षिण अफ्रीका की गोरी सरकार से 1949 में अपनी कूटनीतिक संबंध तोड़ लिये ....
Question : शीत युद्ध के दौरान पाकिस्तान एक कारक के रूप में भारत-अमेरिका के संबंधों का परीक्षण करें।
(2001)
Answer : द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के तुरंत बाद संसार में दो महाशक्तियों ने शीतयुद्ध को जन्म दिया और विश्व को दो शक्ति गुटों में विभाजित कर दिया। ये महाशक्तियां थीं- संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ।
भारत और अमेरिका संबंधों में अमेरिका सरकार ने भारत को कभी भी उच्च प्राथमिकता नहीं दी। चीन द्वारा भारत पर 1962 में किये गये आक्रमण ने अमेरिका की नीतियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया। अमेरिका ने भारत की गुटनिरपेक्षता ....
Question : क्या गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने वर्तमान दौर में अपनी प्रासंगिता खो दी है? बदलते अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में भारत ने अपनी विदेश नीति के लक्ष्य को किस प्रकार विकसित किया है?
(2001)
Answer : एक तरफ गुटनिरपेक्ष आंदोलन 1961 से लगातार विस्तृत तथा सशक्त होता रहा है तथा अनेक क्षेत्रों में उसके योगदान तथा उपलब्धियों को सराहा गया है तो दूसरी तरफ अनेक आधारों पर उसकी आलोचना की गयी है।
सर्वमान्य परिभाषा का अभाव: इस आंदोलन की सबसे बड़ी कमी है कि 1961 से लेकर आज तक इसकी कोई सुस्पष्ट तथा सर्वमान्य परिभाषा नहीं हो पायी है। अतः हर व्यक्ति तथा देश अपने दृष्टिकोण तथा विचारधारा के अनुरूप इसका अलग ....
Question : सार्क - समस्या एवं सभावन
(2001)
Answer : सार्क की स्थापना 1985 में ढाका में हुई। उसमें कुल सात देश- भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका तथा मालदीव हैं। सार्क के पास एशिया के तीन फीसदी भूभाग हैं। सार्क प्रदेश की चालीस प्रतिशत गरीबी की रेखा के नीचे रहती है। सार्क की 75 प्रतिशत गांवों में निवास करती है। सार्क देशों के पास पर्याप्त संसाधन हैं। सार्क कृषि योग्य भूमि, जल संसाधन, वन संपदा, सागर संपदा और खनिज की दृष्टि से एक समृद्ध ....
Question : अप्रसार संधि के विरुद्ध भारत एक यर्थाथ प्रतिमान
(2001)
Answer : भारत ने 1970 में भी इस संधि का विरोध किया था और आज भी उसे आगे जारी रखने के विरुद्ध है। भारत की बहुदलीय प्रणाली में संभवतः यही एक मुद्दा है जिस पर कभी विवाद नहीं उठा और केंद्र सरकारें बदलने के बावजूद उस मुद्दे पर सदा मतैक्य बना रहा। न केवल संधि की अपनी विसंगतियों के कारण बल्कि अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी भारत उस संधि की अवधारणा का समर्थन नहीं ....
Question : भारत एवं संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के बल
(2001)
Answer : भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना के प्रयासों में सदैव की भांति अपना योगदान दिया तथा कंबोडिया, सोमालिया और मोजांबिक में संयुक्त राष्ट्र की कार्यक्रमों में भारत ने अपने सैनिक भेजकर योगदान किया।
भारत ने इस अवधि में संयुक्त राष्ट्र के अधिक लोकतंत्रीकरण की मांग तथा सुरक्षा परिषद की सदस्य संख्या में वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा, जिससे यह संस्था विश्व जनमत की अधिक प्रतिनिधि संस्था बन सके। इसके लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा ....
Question : भारत-पाक संबंध कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समझौते के ईर्द-गिर्द घूमते हैं। इसके हल के लिए विभिन्न विकल्पों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
(2000)
Answer : 15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतंत्रता के साथ धर्म के आधार पर भारत का विभाजन हुआ तथा पाकिस्तान नाम के नये राज्य का जन्म हुआ। तब से लेकर आज तक भारत और पाक के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति का मूल कारण कश्मीर समस्या है। जो आजादी से लेकर आज तक का विवाद बना हुआ है। बहुत सारे समझौते हुए उसमें सब का परिणाम निराशापूर्ण रहा है। आज तक कश्मीर समस्या संयुक्त ....
Question : शांतिपूर्ण नाभिकीय विस्फोट (पी.एन.ई.)
(2000)
Answer : 11 और 13 मई, 1998 को क्रमशः 3 और 2 परमाणु परीक्षण करके भारत ने विश्व जनमत को अपनी शक्ति का परिचय दिया। इन परीक्षणों के बारे में विश्व की बड़ी शक्तियां पड़ने से कोई अनुमान नहीं लगा पायी और यह पहली बार भारत ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि यह परमाणु परीक्षण मात्र शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नहीं किये गये थे। इस तरह 1974 के 24 वर्षों बाद पहली बार भारत की अणु ....
Question : संयुक्त राष्ट्र के सुधारों में सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता भारत का दावा प्राकृतिक और समान रूप से न्यायोचित है। सविस्तार चर्चा कीजिए।
(2000)
Answer : संयुक्त राष्ट्र संघ को 50 वर्ष हो गए हैं, जैसे भी उसका काम चला है। शीतयुद्ध के बाद में संयुक्त राष्ट्र का महत्व बहुत बढ़ गया है। पूर्व और पश्चिम की दूरी भी कम हुई है। परन्तु उत्तर व दक्षिण का संघर्ष कम नहीं हुआ। संयुक्त राष्ट्र संघ के दो बड़े अवयव हैंः (1) महासभा (2) सुरक्षा परिषद्।
महासभा 51 देशों की सदस्यता से शुरू हुई जबकि अब उसकी सदस्य संख्या 191 है। जिसमें छोटे और ....
Question : इजराइल-अरब का संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हित संघर्ष के रूप में परीक्षण कीजिए।
(2000)
Answer : पश्चिम एशिया में अरब-इजराइल संघर्ष इस संपूर्ण शताब्दी की एक बहुत बड़ी समस्या रही है। यह समस्या पश्चिम एशिया की महत्वपूर्ण स्थिति के कारण अधिक उग्र रही है। क्योंकि इसकी अनोखी भोगौलिक स्थिति के कारण महाशक्तियों को भी इस क्षेत्र में अत्यधिक रुचि रही है। वर्तमान में समुद्रों के बढ़ते हुए आर्थिक तथा सामरिक महत्व देखते हुए इस क्षेत्र का महत्व और अधिक बढ़ने की संभावना है। यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय संचार के केन्द्र का भी ....
Question : गैर-पारंपरिक ऊर्जा की संभावना।
(2000)
Answer : विश्व की बढ़ती हुई आबादी और उसकी बढ़ती हुई मांगों को देखते हुए ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ गयी है। इसलिए वैज्ञानिक गैर-पारंपरिक ऊर्जा की संभावना को साकार करना चाहते हैं, क्योंकि पारंपरिक ऊर्जा का स्रोत सीमित हैं। अगर कोयला ले तो उसे बनने में हजारों साल लग जाते हैं। लेकिन हमारी मांग कम नहींहोती हैं। इसलिए गैर-पारंपरिक ऊर्जा की संभावना को साकार रूप देना अत्यंत जरूरी सा हो गया है। आज सूर्य की रोशनी से ....
Question : नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था
(2000)
Answer : अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का आर्थिक आयाम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उद्घाटित हुआ, जब अमेरिका ने मार्शल योजना के तहत युद्ध से ध्वस्त यूरोपीय देशों के पुर्ननिर्माण के लिए सहायता कार्यक्रम आरंभ किया। 1960 के दशक के आरंभ में यह बात भलीभांति स्पष्ट हो चुकी थी कि यहां एक और गुटनिरपेक्ष राजनीति और पंचशील वाले समाधान ने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को प्राेत्साहित किया। वहीं अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में विषमता निरंतर बढ़ती जा रही थी। अधिकतर विकासशील देश ....
Question : शिखर राजनय
(2000)
Answer : पर्यावरण को मानव जाति की विरासत समझा जाये, खासकर आदिम जंगलों को ताकि उनमें उपलब्ध जातियों-प्रजातियों के बारे में वैज्ञानिक शोध में कोई रुकावट न आये। दो बातें बिल्कुल साफ है। एक तो यह कि किसी भी प्राणरक्षक औषधि के आविष्कार के बाद या उपजाऊ पौधे के आविष्कार के बाद उसकी मनमानी कीमत व्यावसायिक ढंग से वसूली जा सकती है और दूसरे यह कि पर्यावरण की रक्षा के बहाने विदेशी कंपनियों और राष्ट्र, मानव जाति ....
Question : परमाण्विक अप्रसार संधि
(1999)
Answer : परमाणु नीति के मुद्दे पर भारत का परमाणु शक्ति संपन्न देशों के साथ जो भारी मतभेद बना हुआ है, उसके मूल में परमाणु अप्रसार संधि है। भारत इस संधि को भेदभावमूलक मानते हुए उसे स्वीकारने से इंकार करता रहा है। जबकि अमेरिका आदि देश उस पर उसमें शामिल होने के लिए लगातार दबाव बनाए जा रहे हैं। लेकिन अगर हम इसके अविर्भाव तथा क्रियान्वयनों के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो यह स्पष्ट होते देर नहीं ....
Question : वर्तमान समय में चीन की विदेश नीति पाकिस्तान की ओर
(1999)
Answer : चीन और पाकिस्तान के संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। पाकिस्तान के कोरिया युद्ध में समर्थन ने भी चीनी नेताओं को निराश किया लेकिन पाकिस्तानी नेताओं ने हमेशा साम्यवादी चीन को उस बात का खुलासा करते रहे कि वे चीन के विरुद्ध नहीं है। बांडुंग सम्मेलन में बढ़ाने वाली नीति का खुलकर आलोचना किया। इससे चीनी नेताओं का पाकिस्तान के संबंध में मधुरता बन आयी लेकिन भारत और पाक संबंधों में अधिक शत्रुता ....
Question : खाड़ी संकट 1991-92
(1999)
Answer : 16 जनवरी, 1991 को खाड़ी युद्ध प्रारंभ हुआ। अमेरिका ने घोषणा की कि उसका उद्देश्य इराक को जीतना नहीं बल्कि कुवैत को आजाद कराना है। इराक के विरुद्ध अमेरिका के अभियान को ऑपरेशन डेजर्ट स्टोर्म का नाम दिया गया तथा 17 जनवरी, 1991 को बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने बगदाद पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध में पी.एन.ओ. ने इराक का साथ दिया तथा अन्य देशों ने बहुराष्ट्रीय सेना का साथ दिया। तुर्की ने यद्यपि युद्ध में ....
Question : अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में तृतीय विश्व की भूमिका पर एक आलोचनात्मक निबंध लिखें। प्रमुख रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ में।
(1999)
Answer : संयुक्त राष्ट्र संघ का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय शांति, आर्थिक विकास, सामाजिक एवं मानव अधिकारों की रक्षा तथा राष्ट्रों में पारस्परिक आर्थिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया गया था। उसके प्रारंभिक सदस्य राष्ट्रों की संख्या 51 थी। उत्तरोत्तर समय में एशिया, अफ्रीका और लातिनी अमेरिका के अनेक देश औपनिवेशिक दासता से मुक्त हो गये और इन्होंने उसकी सदस्यता ग्रहण की। आज इसके सदस्य राष्ट्रों की संख्या 191 है। जिनमें से ....
Question : अमेरिका की विदेश नीति दक्षिण एशिया के प्रति वर्तमान समय में परिवर्तित परिप्रेक्ष्य में एवं इस क्षेत्र में शांति के लिए किये गये कार्यों का परीक्षण कीजिए।
(1999)
Answer : द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात अमेरिका ने दक्षिण एशिया में भी अपनी रुचि दर्शायी। दक्षिण एशिया में उसे पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश मिला जिसने उसके साथ सैनिक संधि संगठनों में सम्मिलित होना स्वीकार किया। भारत ने प्रारंभ से ही गुटों तथा गठबंधनों से दूर रहने की अपनी नीति की घोषणा करते हुए गुट निरपेक्षता की नीति अपनाने का इरादा व्यक्त किया।
पाकिस्तान 1954 में सीटो तथा 1955 में सैन्टो का सदस्य बना और ....
Question : भारत-नेपाल एवं भूटान के बीच संघर्ष एवं सहयोग से संबंधित कुछ प्रमुख मुद्दों की विवेचना कीजिए।
(1999)
Answer : विश्व का एकमात्र हिंदू राज्य नेपाल चारों तरफ भूमि से घिरा हुआ है। उसके उत्तर में तिब्बत तथा दक्षिण भारत स्थित है। भारत के लिए नेपाल की सामरिक स्थिति का महत्व 17 मार्च, 1950 को जवाहर लाल नेहरू द्वारा कहे गये इन शब्दों से स्पष्ट हो जाता है। जहां तक एशियाई गतिविधियों का संबंध है, भारत तथा नेपाल के मध्य किसी तरह का कोई सामरिक समझौता नहीं है, किंतु भारत, नेपाल पर किये गये किसी ....
Question : आज के परिप्रेक्ष्य में भारत की विदेश नीति का पाकिस्तान तथा चीन के विशेष संदर्भ में मूल्यांकन कीजिये।
(1998)
Answer : गुटनिरपेक्षता, साम्राज्यवाद का विरोध, अनाक्रमण, पंचशील आधारित विदेशी नीति, रंगभेद का विरोध आदि ऐसे तथ्य हैं, जो भारतीय विदेश नीति हमेशा ही मजबूत आधार रहे हैं और अभी भी हैं। लेकिन समय और परिस्थितियों की मांग के अनुसार भारतीय विदेश नीति में भी बदलाव आता रहा है और यह बदलाव आज के परिप्रेक्ष्य में तो और भी स्पष्ट रूप ग्रहण कर चुका है। सर्वप्रथम, यह जानना होगा कि आज ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं, जो भारत ....
Question : भारत तथा बांग्लादेश के बीच विवादग्रस्त विषय
(1998)
Answer : भारत और बांग्लादेश के बीच बांग्लादेश के अस्तित्व में आने के बाद से बराबर अच्छे संबंध रहे हैं, क्योंकि बांग्लादेश के एक राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आने के पीछे भारत की बहुत बड़ी भूमिका थी। दोनों के बीच आर्थिक, सांस्कश्तिक, सामाजिक एवं वैज्ञानिक क्षेत्र में काफी प्रगाढ़ सम्बन्ध रहे हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि कुछ मामलों पर उत्पन्न हुए विवाद के कारण दोनों राष्ट्रों के सम्बन्धों में खटास भी बने रहे ....
Question : सार्क (SAARC) की रचना के प्रेरक तत्वों को बताइए। क्या वह क्षेत्रीय एकीकरण हेतु प्रभावशाली भूमिका सम्पन्न करने में समर्थ है? अपने उत्तर की पुष्टि सार्क द्वारा अब तक की गयी पहल के संदर्भ में कीजिये।
(1998)
Answer : अनेक बातों ने दक्षिण एशिया के देशों को सहकारिता की वांछनीयता के संदर्भ में आश्वस्त किया है। पहली बात तो यह है कि दक्षिण एशिया के देशों के बीच बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा ने विदेशी शक्तियों को दक्षिण एशिया के मामलों में हस्तक्षेप करने को प्रोत्साहित किया है। उदाहरण के लिए अमेरिका का मामला लें, जो कि भारत और अफगानिस्तान के साथ अपनी शत्रुता के कारण, पाकिस्तान में हस्तक्षेप कर सका है। इसी प्रकार सोवियत संघ ....
Question : आज के संदर्भ में फिलीस्तीन-इजरायली संघर्ष
(1998)
Answer : 23 अक्टूबर, 1998 को संयुक्त राज्य अमेरिका में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, फिलीस्तीनी नेता यासर अराफत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते ने पश्चिमी एशिया में शान्ति की प्रक्रिया को नष्ट होने से बचा लिया तथा उसमें नवजीवन का संचार किया। समझौते तक पहुंचने के लिए जो वार्ता चली, उसमें अनेक उतार-चढ़ाव आये।
शान्ति के बदले जमीन (land for peace) के नाम से जाना जाने ....
Question : शीत युद्धकाल के उपरान्त हिंद महासागर को शांति क्षेत्र बनाने में हिंद महासागर के तटवर्ती देशों की भूमिका का आकलन कीजिये।
(1998)
Answer : विश्व का तीसरा सबसे विशाल महासागर के रूप में जाना जाने वाला हिन्द महासागर और इसका तटीय क्षेत्र अथाह खनिज सम्पदा, विश्व की कुल जनसंख्या का दो-तिहाई हिस्सा रखने, अकूत प्राकृतिक सम्पदा और विश्व के सामुद्रिक व्यापार में 50 प्रतिशत हिस्सा रखने के कारण विश्व महाशक्तियों की नजर में हमेशा महत्त्वपूर्ण रहा है। साम्राज्यवादी युग में यूरोप के साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच परतन्त्र राष्ट्र के रूप में बंटा यह क्षेत्र शीतयुद्ध में महाशक्तियों की जोर ....
Question : एन.आई.ई.ओ. के संवर्धन में तीसरी दुनिया के देशों की भूमिका को स्पष्ट कीजिये।
(1997)
Answer : 1970 के आरंभ से अंतर्राष्ट्रीय संबधों में आर्थिक विषयों ने प्रमुख स्थान ग्रहण करना आरंभ किया। इसी समय अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक नयी सोच और व्यवस्था की भी शुरुआत हुई। इसने शीतयुद्ध के वैचारिक मतभेदों को पीछे हटाकर अंतर्राष्ट्रीय पटल पर विकास और अविकास के आर्थिक विषयों को प्रमुख बना दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि जहां एक तरफ सम्पूर्ण विश्व में आर्थिक चेतना की वृद्धि हुई, वहीं विकसित और अविकसित देशों के बीच उत्तर-दक्षिण ....
Question : प्रभावी सरकार: राष्ट्र शक्ति का एक स्रोत
(1997)
Answer : सिर्फ खनिज एवं मानव संसाधनों की उपस्थिति से राष्ट्र शक्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती, जब तक कि ऐसी कोई सत्ता या संस्था न हो, जो मानव प्रयत्नों को सही दिशा में संचालित एवं समन्वय करे। ऐसी संस्था किसी देश की सरकार होती है। अगर सरकार उचित प्रकार से संगठित, कार्यकुशल और प्रभावी न हो, तो राष्ट्र शक्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है। यह सरकार का कार्य होता है कि वह व्यक्तियों और खनिज ....
Question : भारत की अफ्रीका नीति का विश्लेषण प्रस्तुत कीजिये।
(1997)
Answer : भारत और अफ्रीका, दो ऐसे पड़ोसी हैं, जिन्हें मात्र सागर की लहरों ने दूर कर दिया है। यह भौगोलिक समीपता का ही परिणाम है कि भारत और अफ्रीका के लोग शताब्दियों से एक-दूसरे के बारे में जानते हैं और इसके प्रमाण उपलब्ध हैं कि 2000 वर्षों से दोनों पक्ष के लोग आपस में व्यापार की प्रक्रिया द्वारा काफी निकटता से जुड़े रहे हैं। प्रमाण इस बात के भी उपलब्ध हैं कि लगभग 7वीं शताब्दी में ....
Question : 1991 का मैड्रिड में संपन्न पश्चिम एशिया शांति सम्मेलन
(1997)
Answer : विश्व भर के कई लोग 1991 के मैड्रिड सम्मेलन को अलाभकारी और यहां तक कि समय की बर्बादी की संज्ञा देते हैं। लेकिन इस सम्मेलन की इसके कुछ कार्यों के कारण प्रशंसा की जानी चाहिए। अमेरिकी सचिव श्री जेम्स बेकर जिस धीरज और कूटनीति से कार्य किये वे बेकार नहीं गये। उन्होंने दोनों विरोधी पक्षों, इजरायल और अरब देशों के समूह को इस बात के लिए राजी कर लिया था कि पश्चिम एशिया में शांति ....
Question : ‘रूसी-चीनी संबंधों के विच्छेद का मूल कारण उनका राष्ट्रीय हित-साधन था, वैचारिक मतभेद नहीं।’इस वक्तव्य की मीमांसा करते हुए भारत पर उसके प्रभाव को दिग्दर्शित कीजिये।
(1997)
Answer : आरंभिक वर्षों के दौरान साम्यवादी चीन का सोवियत संघ के साथ बहुत ही मधुर सम्बन्ध था। फरवरी 1950 में दोनों देशों ने ‘सहयोग एवं पारस्परिक अनुदान’से संबंधित संधि पर हस्ताक्षर किया था। इस संधि के अनुसार दोनों देश, जापान या जापान द्वारा सहायताप्राप्त किसी देश के आक्रमण के समय, एक दूसरे की सहायता करने को राजी हुए थे। इस संधि ने दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक बन्धन की शुरुआत की नींव भी रखी ....
Question : 1990 के दशक में चीन की भारत संबंधी विदेश नीति में हुए परिवर्तनों का वर्णन कीजिये। आप इन परिवर्तनों का श्रेय किसको देंगे परिवर्तित विश्व वातावरण को अथवा घरेलू तत्वों को?
(1996)
Answer : हाल में भारत द्वारा परमाणु विस्फोट और पाकिस्तान द्वारा चीन की मदद से परमाणु विस्फोट करने के बाद भारत-चीन सम्बन्धों में काफी खटास आयी है। इधर भारतीय रक्षामंत्री द्वारा यह घोषित करना कि ‘पाकिस्तान नहीं चीन हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है’ने भारत-चीन के बीच शक की दीवार को काफी ऊंचा कर दिया है। विगत कुछ माहों से भारत-चीन के बीच चले वाक्युद्धों, पाकिस्तान के हथियार निर्माण कार्य में चीन की खुली मदद एवं अमेरिका द्वारा ....
Question : रूस की विदेश नीति को ‘दुर्बल की निरंकुशता’कहा जाता है। रूस ने अपनी दुर्बला का संयुक्त राष्ट्र अमेरिका एवं पश्चिम राज्यों की तुलना में कितनी विवेकपूर्णता से प्रयोग किया है, इसका स्पष्टीकरण कीजिये।
(1996)
Answer : 1989-90 में सोवियत संघ के विघटन के बाद अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में रूस को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी स्वीकार कर लिया गया। अपने आर्थिक बदहालियों एवं राजनीतिक अस्थिरता तथा अलगाववादी प्रवृत्तियों के तेज हो जाने के कारण रूस 1990 के बाद से ही बेहद बदहाल स्थिति में रहा। लेकिन उल्लेखनीय तथ्य यह है कि रूस ने अपनी दुर्बलता को भी अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया और पूर्व सोवियत संघ को प्राप्त महाशक्ति की पदस्थिति को ....
Question : भारत का सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता का दावा।
(1996)
Answer : वर्ष 1999 में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्य-व्यवस्था एवं सरंचना में सुधार किये जाने की संभावना है। इसी क्रम में विश्व के अधिकांश देश संयुक्त राष्ट्र के सर्वाधिक प्रभावी अंग, सुरक्षा परिषद् के सुधार एवं विस्तार की भी मांग कर रहे हैं। सुरक्षा परिषद् के सुधार एवं विस्तार की मांग करने वाले, इस अंग को सही मायने में विश्व के सभी देशों का प्रतिनिधि बनाना चाहते हैं। विश्व के कुछ देश सुरक्षा परिषद् के विस्तार ....
Question : भारत-पाक संबंधों में इस्लामी घटक
(1996)
Answer : भारत-पाक सम्बन्धों में धर्म उस वक्त से एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है जब से भारत उपमहाद्वीप का धर्म के आधार पर विभाजन कर भारत और पाकिस्तान नामक दो राष्ट्रों का निर्माण किया गया था। विभाजन के बाद भारत ने तो धर्मनिरपेक्षता की धारणा को अपना लिया, मगर पाकिस्तान ने अपने आपको एक इस्लामी राष्ट्र बना लिया। एक इस्लामी राष्ट्र होने के कारण पाकिस्तान विश्व भर के मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करना अपना स्वाभाविक कर्तव्य समझता ....
Question : भारत एवं संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के सीटीबीटी प्रश्न पर आपसी मतभेदों का वर्णन कीजिये। भारत ने क्यों सीटीबीटी को अणु अस्त्रों के विलोपन के साथ जोड़ने का निर्णय किया है?
(1996)
Answer : 24 सितम्बर, 1996 को संयुक्त राष्ट्र संघ के सचिव-प्रमुख बुतरस घाली द्वारा व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) को हस्ताक्षर के लिए रखा गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर किया। सितम्बर 1996 के अंत तक लगभग 79 देशों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिया था। इस संधि को ‘प्रयोग में प्रवेश’के लिए परमाणु रिएक्टरों को रखने वाले 44 देशों, जिसमें भारत, पाकिस्तान एवं इजरायल भी शामिल हैं, के हस्ताक्षर ....
Question : हम्मास एवं पश्चिम एशिया में शान्ति
(1996)
Answer : ‘हम्मास’कट्टरवादी मुस्लिम फिलिस्तीनियों का एक उग्रवादी संगठन है। इसके उद्देश्य है- इजरायल से फिलिस्तीनियों की भूमि को वापस प्राप्त करना, इजरायल से होने वाले किसी भी सहयोग संधि का विरोध करना और फिलिस्तीन राज्य को कट्टरवादी विचारधारा के आधार पर स्थापित करना है। हम्मास अपने इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विरोधी पक्षों के लोगों की हत्या करने या लोगों को आंतकित करने से भी नहीं हिचकता हैं। हम्मास वर्ष 1993 में इजरायल और फिलिस्तीनियों ....
Question : ‘एशिया-प्रशान्त में सुरक्षा सहयोग परिषद्’पर लगभग 200 शब्दों में टिप्पणी लिखिये।
(1995)
Answer : एशिया-प्रशान्त में सुरक्षा सहयोग परिषद् की स्थापना की पहल मलेशिया ने की थी, बाद में इस विचार को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड का समर्थन भी प्राप्त हुआ था। एशिया-प्रशान्त क्षेत्र को, अमेरिका के ‘सुरक्षा छाते’के हट जाने के बाद, किसी भी असंभावित खतरों से बचाए रखने के उद्देश्य से ही, इस क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग परिषद् की स्थापना के बारे में सोचा गया था। वर्ष 1993 से 1995 के बीच दक्षिण कोरिया और उत्तरी कोरिया के ....
Question : आपके विचार में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की दक्षिण एशियाई नीति का उद्देश्य क्या है- यथापूर्व स्थिति अथवा शांतिपूर्ण परिवर्तन? वाशिंगटन द्वारा इस सम्बन्ध में अपनायी गयी रणनीतियों की जांच कीजिये।
(1995)
Answer : (प्रस्तुत प्रश्न को वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार वर्ष 1998 की मुख्य परीक्षा में इस तरह के प्रश्नों के आने की संभावना को ध्यान में रखकर हल किया जा रहा है।)
अप्रैल-मार्च 1998 को भारत और पाकिस्तान द्वारा परमाणु विस्फोट कर लेने के बाद वाशिंगटन की दक्षिण एशियाई नीति में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। विस्फोट से पहले तक अमेरिका की दक्षिण एशियाई नीति का आधार भारत-विरुद्ध अन्य दक्षिण एशियाई देश थे, लेकिन विस्फोट के बाद वाशिंगटन ने ....
Question : भारत एवं विश्व व्यापार संगठन
(1995)
Answer : विश्व व्यापार संगठन की स्थापना ‘प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता’ (गैट) के उत्तराधिकारी के रूप में 1 जनवरी, 1995 को हुई। एक संस्थापक सदस्य के रूप में भारत विश्व संगठन से आरम्भ से ही जुड़ा हुआ है। विश्व व्यापार संगठन प्रमुख रूप से प्रशुल्क-विहीन आयात-निर्यात नीति पर बल देता है। इसका अर्थ है कि विश्व के सभी सदस्य देशों को अपने निर्यातों और आयातों पर लगने वाले प्रशुल्कों को कम करना होगा। इस नियम ....
Question : ऐसा कहा जाता है कि हमारे पड़ोसी राज्यों में भारत-प्रहरी-प्रवृत्ति प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उनके आन्तरिक सामाजिक संघर्ष के साथ जुड़ी हुई है। भारत-पाकिस्तान और भारत-श्रीलंका संबंधों में घटनाक्रम की दृष्टि में इस कथन को स्पष्ट कीजिये।
(1995)
Answer : भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, चीन, बर्मा, श्रीलंका और बांग्लादेश आते हैं। इन देशों से भारत के काफी घनिष्ठ ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सम्बन्ध रहे हैं। जहां भारतीय विदेश नीति पर इन देशों की विदेश नीति की दिशा का स्पष्ट प्रभाव रहा है, वहीं भारतीय विदेश नीति भी इन देशों की विदेश नीति को काफी प्रभावित करती रही है। अपनी तरफ से भारत अपने पड़ोसी देशों से बराबर अच्छा और ....
Question : चीन की विदेश नीति के आर्थिक अवधारक
(1995)
Answer : एक समाजवादी विचारधारा को मानने वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित चीन की विदेश नीति में 1940 के दशक के बाद आर्थिक अवधारक की कोई प्रमुख भूमिका नहीं थी। लेकिन वर्ष 1974 के बाद चीन की समाजवादी सरकार ने देश के आर्थिक विकास के लिए ‘बाजार-समाजवाद’ की एक नयी नीति अपनायी, जिसके अनुसार विदेशी निवेशकों को चीन में निवेश करने की छूट दी गयी और चीन के विदेश व्यापार को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। ....
Question : रूस एवं उत्तरी एटलांटिक संधि संगठन
(1995)
Answer : उत्तरी एटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ के नेतृत्व वाली साम्यवादी गुट के देशों के संगठन (वारसा संधि) के विरुद्ध में हुई थी। लेकिन वर्ष 1990 में सोवियत संघ के विघटन के बाद शीतयुद्ध कालीन इन संधियों का कोई महत्त्व नहीं रह गया था और बार्सवा संधि तो खत्म ही हो गयी। लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी यूरोपीय देशों ने अपने कूटनीतिक लाभों के लिए नाटो को जीवित ....