Question : विदेश नीति विश्लेषण के एक साधन के रूप में निणर्यन सिद्धान्त की भूमिका का विश्लेषण एवं मूल्यांकन कीजिए।
(2006)
Answer : द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् रिचर्ड स्नाइडर, एच. डब्ल्यू ब्रक और बर्तन सापिन ने विदेश नीति के अध्ययन में निर्णयपरक विश्लेषण अपनाने का प्रयत्न किया।
यह सिद्धान्त उन अंतर्राष्ट्रीय कर्ताओं के अधिमान्य व्यवहार के अध्ययन पर बल देता है, जो अन्तर्राष्ट्रीय घटना चक्र को निर्धारित एवं प्रभावित करते हैं। निर्णयपरक सिद्धान्त विदेश नीति निर्माण की लंबी प्रक्रिया में लिए जाने वाले निर्णयों के अध्ययन पर जोर देता है। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन से पूर्व निर्णयपरक सिद्धान्त ....
Question : अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, सभी राजनीति के समान, शक्ति के लिए एक संघर्ष है। टिप्पणी कीजिए।
(2006)
Answer : अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में ‘राजनीतिक यथार्थवाद’ के मुख्य समर्थक हंस जे. मार्गेन्थो रहे हैं। अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के एक यथार्थवादी प्रतिमान का निर्माण करने का श्रेय उन्ही को प्राप्त है। यह सिद्धान्त राष्ट्रों के मध्य शक्ति के लिए संघर्ष के सभी पहलुओं का वर्णन करता है। मार्गेन्थो अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों का आदर्शवादी विचारधारा का शांति की ओर संचालन’ के रूप में खण्डन करता है तथा इसका वर्णन ‘राष्ट्रों के मध्य संघर्ष के रूप में करता है। मार्गेन्थो कहता ....