ब्रह्मांडीय दूरियों को मापने की नई विधि का विकास

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अप्रैल 2026 में भारतीय खगोलविदों, जिनमें IIT-कानपुर के शोधकर्ता भी शामिल थे, ने पल्सर (Pulsars) के माध्यम से ब्रह्मांडीय दूरियों को मापने की एक नई तकनीक विकसित की।

  • यह विधि रेडियो संकेतों के डिस्पर्शन (dispersion) एवं स्कैटरिंग (scattering) प्रभावों को एक साथ जोड़कर दूरी का अधिक सटीक अनुमान प्रदान करती है।

क्या हुआ?

  • भारतीय वैज्ञानिकों ने पल्सरों के आधार पर दूरी मापने की नई तकनीक प्रस्तुत की।
  • इस विधि में डिस्पर्शन मेजर (DM) और स्कैटर ब्रॉडनिंग का संयोजन किया गया है।
  • यह विशेष रूप से नेब्युला जैसे जटिल क्षेत्रों में दूरी मापन की सटीकता को बढ़ाती है।

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