भारत में निःशुल्क विधिक सहायता
भारत के संविधान का अनुच्छेद 39 ए समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा देने के लिए समाज के गरीबों और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 22(1) भी राज्य के लिए कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना अनिवार्य बनाते हैं।
कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार
भारतीय संविधान कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त करने का हकदार है। भारतीय नागरिक, उम्र, लिंग या जातीयता के बावजूद, कानूनी सहायता के लिए पात्र हैं, यदि वे निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैं:
- अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति
- महिला हो या ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

