Question : राष्ट्रीय राजनीति के अस्थायित्व का कारण प्रादेशिक राजनीति का उदीयमान प्रभाव है।
(2007)
Answer : भारत जैसे विशाल देश में केन्द्रीयकरण की सफलता की संभावनायें कम हैं। विभिन्न क्षेत्रों की समस्यायें, रहन-सहन के ढंग, सामाजिक मान्यताएं और भौगोलिक यथार्थ इस बात को अनिवार्य बना देते हैं कि उनके साथ अलग-अलग ढंग से विचार किया जाये।
यद्यपि भारतीय संविधान में संघ शासन के रूप को स्वीकारा गया, फिर भी मजबूत केंद्र की कल्पना की गई थी। यह बात मान ली गयी थी कि केंद्र व राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारें बन ....
Question : समाजवाद पर नेहरू के विचार।
(2007)
Answer : नेहरू पर समाजवादी विचारधारा का प्रभाव उनके 1926-27 की रूस यात्रा से ही दृढ़ हो गया था। वे रूस द्वारा प्राप्त आर्थिक विकास से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (1929) के अध्यक्षीय भाषण में समाजवादी दर्शन के विश्वव्यापी सामाजिक प्रभाव को व्यक्त किया। उन्होंने भारत की दरिद्रता तथा आर्थिक विषमता के निवारण के लिए समाजवादी पद्धति को अनुकरणीय माना। उन्होंने Glimpses of world history में ऐतिहासिक प्रक्रियाओं के अध्ययन में मार्क्स ....
Question : सामाजिक न्याय की अम्बेडकर की संकल्पना
(2006)
Answer : सामाजिक न्याय की अम्बेडकर की संकल्पना स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के सिद्धांत पर आधारित है। उनके शब्दों में, ‘मेरे जीवन के आधारभूत तीन तत्व हैं- स्वतंत्रता, समता और बंधुता। इन तत्वों के बीज फ्रेंच राज्य- क्रांति में न होकर बौद्ध धर्म में हैं। यद्यपि संविधान ने इन तत्वों का समावेश राजनीति में किया है, तथापि समाज-जीवन में उन पर अमल करने की बहुत जरूरत है।’ वे सामाजिक न्याय के विकास में सबसे बड़ी बाधा जाति-व्यवस्था ....