Question : "चूंकि समाज परिसंघीय होता है, प्राधिकार का भी परिसंघीय होना आवश्यक है।" (लास्की)
(2007)
Answer : बीसवीं सदी में लास्की के लेखन में बहुलवादी मान्यताओं को विशेष समर्थन मिला। बहुलवाद वह मत व सिद्धांत है, जिसके अंतर्गत समाज में शक्ति तथा प्रभुत्त्वसंपन्न राज्य के समकक्ष अन्य समूहों व उनकी स्वायत्तता का समर्थन किया जाता है। बहुलवादी सिद्धांत की यह मान्यता है कि विधि व संस्था व्यक्तियों के विकास के साधन हैं। इसलिये उन्हें व्यक्तियों से उच्चतर नहीं समझा जा सकता। बहुलवाद मनुष्य की सामाजिक प्रवृत्ति का समर्थक है तथा उसका यह ....
Question : "राज्य वर्ग-प्रतिद्वंदिता की असमाधानीयता का परिणाम है।" (लेनिन)
(2007)
Answer : मार्क्स के अनुसार ‘विचारधारा’ उन विचारों का समुच्चय है, जिन्हें प्रभुत्वशाली वर्ग अपने शासन की वैधता स्थापित करने के उद्देश्य से सारे समाज के लिये मान्य बना देता है। अतः इतिहास के प्रत्येक दौर में जब धनीवर्ग सत्तारूढ़ होता है, तब वह कानून, धर्म और नैतिक शिक्षा इत्यादि के माध्यम से ऐसे विचारों को स्थापित कर देता है, जिनके सहारे निजी संपत्ति की रक्षा की जा सके।
ये विचार तर्क या विवेक पर आधारित नहीं ....
Question : "प्लेटो का साम्यवाद उस मनोवृति को अमल में लाने और प्रबलित करने की एक अनुपूरक यंत्रवली है, जिस मनोवृति को शिक्षा को उत्पन्न करना होता है।" (नैटलशिप)
(2007)
Answer : प्लेटो पर तत्कालीन व्यवस्था का प्रभाव अर्थात् प्लेटो तत्कालीन एथेंस के हस्तक्षेपवादी व स्वार्थपरक व्यवस्था से दुखी था। इस कुव्यवस्था के कारण ही सुकरात को विषपान करना पड़ा था, व स्पार्टा के हाथों पराजित हुआ था। एथेंस के गौरवशालीअतीत की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से प्लेटो ने ‘रिपब्लिक’ नामक ग्रंथ की रचना की। प्लेटो के अनुसार अज्ञानता व स्वार्थ को ज्ञान की प्राप्ति से ही दूर किया जा सकता है। इसी विश्वास से प्लेटो ने एक ....
Question : ‘‘ --------- कि इस सिविल समाज की रचना को फिर भी इसकी राजनीतिक अर्थव्यवस्था में ही ढूंढना पड़ेगा।’ (मार्क्स)
(2006)
Answer : मार्क्स का कहना है कि किसी भी युग में सामाजिक संबंध उस युग में प्रचलित अर्थव्यवस्था के आधार पर निर्धारित होते हैं। इन आर्थिक संबंधों के आधार पर ही इतिहास एक अवस्था से दूसरी अवस्था में प्रवेश करता है। इस प्रकार समाज के, आर्थिक संबंध समाज की प्रगति का रास्ता तैयार करते हैं और वे राजनीतिक, कानूनी, सामाजिक, बौद्धिक और नैतिक संबंधों का स्वरूप निर्धारित करने में सबसे बढ़कर प्रभाव डालते हैं। समाज के आर्थिक ....
Question : राज्य व्यक्ति का ही वृहत् रूप है। (प्लेटो)
(2006)
Answer : प्लेटो के समकालीन यूनानी विचारधारा में राज्य और व्यक्ति में सामंजस्य स्थापित किया जाता था। व्यक्ति को राज्य का अभिन्न अंग माना जाता था। यह धारणा सर्वमान्य थी कि मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है, अतः उसे उत्तम जीवन व्यतीत करना चाहिए। उत्तम जीवन की प्राप्ति का साधन सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन है। इस दृष्टि में मानव को राजनीतिक प्राणी मानने तथा राजनीतिक जीवन की अपरिहार्यता को मानना यूनानी चिंतन की विशेषता थी। राज्य तथा मनुष्य ....
Question : दासता के विषय पर अरस्तू के विचारों पर एक समालोचनात्मक निबंध लिखिए।
(2006)
Answer : दास प्रथा यूनानी सभ्यता की बुनियाद थी। उसके विकास की विभिन्न अवस्थाओं में दासों के श्रम का महत्वपूर्ण भाग था। नगर राज्यों की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उत्पादन का सारा कार्य दासों के द्वारा किया जाता था। अरस्तू अपनी रूढि़वादिता के कारण इसका समर्थन करता है।
उसकी यह मान्यता थी कि प्राकृतिक दृष्टि से कुछ लोगों के लिए दासत्व अच्छी व न्यायपूर्ण स्थिति है। अतः वह दास प्रथा का समर्थन करते हुए उसके पक्ष ....