Question : "अपनी प्रजा की सुख-शांति में ही राजा की सुख-शांति का वास है; उनके कल्याण में ही उसका अपना कल्याण है।" (कौटिल्य)
(2007)
Answer : राज्य के सात अंगों में कौटिल्य ने राजा को ही राज्य का सर्वोच्च एवं प्रधान अंग माना है। राजा शासन तंत्र की धुरी है, और वह शासन के संचालन में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा शासन को गति प्रदान करने का कार्य करता है। राजा के कर्तव्यों का वर्णन करते हुये कौटिल्य ने लिखा है कि राजा और प्रजा में पिता और पुत्र का संबंध होना चाहिये, उसे पिता के जैसे प्रजा का ध्यान ....