Question : राजनैतिक सहभागिता का अर्थ एवं स्वरूप समझाइये। भारत में लोगों की राजनीतिक सहभागिता में कौन-कौन से कारक बाधक हैं।
(2007)
Answer : राजनैतिक सहभागिता सभी राजनीतिक व्यवस्थाओं के लिए अनिवार्य तत्व है। लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली का तो बुनियादी आधार ही ‘सहभागिता’ है क्योंकि इसका संचालन जनता द्वारा किया जाता है। व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक व्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर भाग लेने को राजनीतिक सहभागिता कहते हैं। सामान्य तौर से, नागरिकों के वह कार्य जो सरकार की निर्णयकारी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, राजनीतिक सहभागिता कहलाती है। मैक्गलोस्की के अनुसार राजनीतिक सहभागिता लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सहमति देने अथवा वापस ....
Question : एक सामाजिक आंदोलन में कौन-कौन से रचनात्मक तत्व होते हैं? एक सामाजिक आंदोलन का अंत किस तरह आता है। अपने उत्तर की सोदाहरण पुष्टि कीजिए।
(2007)
Answer : भारत में सामाजिक आन्दोलन केवल विरोध और असहमति प्रकट करने वाले आन्दोलन ही नहीं रहे हैं, बल्कि सुधारात्मक, प्रतिक्रियात्मक के साथ-साथ सामाजिक-धार्मिक और स्वतंत्रता आन्दोलन भी रहे हैं। ये आन्दोलन जिन्हें ‘परिवर्तन को प्रोत्साहित/विरोध करने के सामूहिक प्रयत्न’ कहा गया है। बौद्धिक विकास, सामाजिक संरचनाओं, वैचारिक वरीयताओं और सत्य के ज्ञान आदि से अस्तित्व में आये। यह सर्वविदित सत्य है कि समाज की विशेषताएं ही आन्दोलनों के प्रारूप तैयार करती है। अतः सामाजिक संरचना के ....
Question : भूमिका संघर्ष एवं इसका समाधान।
(2007)
Answer : जब दो या दो से अधिक भूमिकाओं का एक साथ निभाना इतना कठिन हो जाता कि हम किसी भी भूमिका को ठीक से निभाने में समर्थ नहीं रह पाते हैं, तो भूमिका द्वंद्व की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कामकाजी महिलाओं के लिए कभी-कभी यह समस्या हो जाती है। वह अपने बच्चों या परिवार के लिए कैसे समुचित समय निकाले। पेशे की भूमिका एवं मां या पत्नी के रूप में उनकी भूमिका के बीच अक्सर ....
Question : सामाजिक विकास में सामाजिक नीति का महत्व समझाइये। किन परिस्थितियों में एक सामाजिक नीति की कामगिरी की प्रभावकता असपफ़ल होती है।
(2006)
Answer : राष्ट्र निर्माण का कार्य सामाजिक नीति और विकास से जुड़ा है। पिछड़े देशों में जब से योजनाबद्ध परिवर्तन प्रारम्भ हुये, राष्ट्र निर्माण के कार्य को सरकार ने अपने हाथों में ले लिया। सरकार योजनाओं को हाथ में लेने से पहले उसके पीछे जो नीति होनी चाहिए, उसका निर्धारण करती है। सामाजिक नीति के अनुरूप विकास के लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं। उदाहरण के लिए, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब हमने पहली पंचवर्षीय योजना बनायी, जब ....
Question : एक सामाजिक आंदोलन का ढांचा।
(2006)
Answer : सामाजिक आंदोलन एक सामूहिक प्रयास है, जिसका उद्देश्य समाज एवं संस्कृति में कोई आंशिक अथवा पूर्ण परिवर्तन लाना या परिवर्तन का विरोध करना है। किसी भी समाज में सामाजिक आन्दोलन तब प्रारंभ होता है जब वहां के लोग वर्तमान स्थिति से असंतुष्ट हों और उनमें परिवर्तन लाना चाहते हों। कई बार सामाजिक आंदोलन परिवर्तन का विरोध करने के लिए भी किए जाते हैं। सामाजिक आन्दोलन के पीछे कोई विचारधारा अवश्य होती है। किसी भी आन्दोलन ....
Question : भारत में सामाजिक आंदोलनों के फलस्वरूप वैचारिक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए जिन्होंने आधुनिक समाज को प्रविष्ट किया।
(2005)
Answer : किसी भी समाज में सामाजिक आन्दोलन तब प्रारम्भ होता है जब वहां के लोग वर्तमान स्थिति से असन्तुष्ट हों और उसमें परिवर्तन लाना चाहते हों। कई बार सामाजिक आंदोलन किसी परिवर्तन का विरोध करने के लिए भी किए जाते हैं। सामाजिक आंदोलनों के पीछे कोई विचारधारा अवश्य होती है। किसी भी आन्दोलन का प्रभाव पहले असंगठित रूप में होता है और धीरे-धीरे उसमें व्यवस्था व संगठन पैदा हो जाता है। सामाजिक आन्दोलन एक सामूहिक व्यवहार ....
Question : भारत में राजनीतिक सहभागिता और मतदान व्यवहार के दंगों पर चर्चा कीजिए।
(2005)
Answer : राजनीतिक सहभागिता और मतदान व्यवहार एक दूसरे से संबंधित हैं, परंतु राजनीतिक सहभागिता का क्षेत्र मतदान व्यवहार से बहुत ज्यादा है। राजनीतिक सहभागिता में विविध प्रकार की क्रियाएं सम्मिलित की जाती हैं। मैक्गलोस्की के अनुसार इसमे मतदान, जानकारी प्राप्त करना, वाद-विवाद एवं धर्मान्तरण सभाओं में उपस्थित रहना, चन्दा देना, प्रतिनिधियों के साथ सम्पर्क रखना आदि विशिष्ट क्रियाएं तथा दल की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करना, चुनाव अभियान में भाग लेना, राजनीतिक भाषण देना या लिखना तथा ....
Question : सामाजिक संरचना और राजनैतिक सहभगिता।
(2003)
Answer : सामाजिक संरचना एवं राजनैतिक सहभागिता एक-दूसरे से संबंधित है। सामाजिक संरचना के आधार पर ही किसी सामाज या देश या राज्य की राजनैतिक सहभागिता निर्धारित होती है। सामाजिक संरचना वास्तव में एक अंतःक्रियात्मक अवधारण है, जिसके अंतर्गत समाज के विभिन्न पहलू अंतःसंबंधित होते हैं, जबकि राजनैतिक सहभागिता निश्चित पर से प्रकार्यात्मक प्रक्रिया को स्पष्ट करती है।
अतः सामाजिक में संरचना में समाज के विभिन्न प्रक्रियाओं, जैसे-आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक का समायोजन होता है और यही संरचनात्मक ....
Question : बोगर्डस की सामाजिक दूरी मापनी तथा लिकर्ट मापनी के क्या उपयोग हैं? विवेचना कीजिए।
(2002)
Answer : बोगर्डस ने सामाजिक दूरी के माप के लिए कुछ शर्तों के आधार पर सही एवं स्पष्ट ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश की। इसके लिए बोगर्डस ने एक सौ व्यक्तियों को दिये गये सात वर्गों की श्रेणी की सामाजिक दूरी का पैमाना निर्धारित किया। बोगर्डस ने सात दिये गये वर्गों की श्रेणी के लिए दूरी के आधार पर संबंधों को मापने का प्रयास किया था। इसके लिए बोगर्डस ने मुख्यतः विवाह की स्वीकार्यता, क्लब में मित्रता ....
Question : सामुदायिक शक्ति।
(2002)
Answer : समाजशास्त्र की भाषा में सामुदायिक शक्ति का अर्थ एक समूह के द्वारा पारस्परिक सहयोग द्वारा एक संगठन के रूप में उभरकर एक उद्देश्य के प्रति समर्पण की भावना से कार्य को एक निश्चित समय में पूरा करना है। वास्तव में, सामुदायिक शक्ति में ‘हम की भावना’ एवं कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने का सम्बन्ध होता है। इसमें सभी लोग किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर काम करते हैं। ऐसा देखा गया ....
Question : किन सामाजिक परिस्थितियों में किसी सामाजिक आंदोलन का जन्म होता है? एक सामाजिक आंदोलन की जीवन रेखा को उदाहरण सहित समझाइए।
(2001)
Answer : कोई भी सामाजिक आंदोलन बहुत सारे लोगों द्वारा सामान्य समस्या अथवा समस्याओं को सामूहिक रूप से सुलझाने का एक प्रयास होता है। एम.एस. राव ने सामाजिक आंदोलनपर गहन शोध किया और उन्होंने तीन सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख किया जो सामाजिक आंदोलन को जन्म देता है। ये परिस्थितियां है- सापेक्षिक वंचन, संरचनात्मक तनाव एवं पुनर्जीविकरण।
(1) सापेक्षिक वंचन: सर्वप्रथम कारक सापेक्षिक वंचन है। परंतु सामाजिक आंदोलन प्रायः इसलिए प्रारंभ होता है, क्योंकि लोग कुछ बातों के बारे ....
Question : ‘सामाजिक नीति’ की व्याख्या कीजिए। विकासशील समाजों के आधुनिकीकरण में सामाजिक नीति के कार्यनिष्पादन का मूल्यांकन कीजिए।
(2001)
Answer : सामाजिक नीति सरकार के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसे वह किसी विशेष परिस्थिति के प्रति रखती है तथा उसका किस प्रकार मुकाबला करती है। भारत में शिक्षा, महिला, पर्यावरण, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति नगरीकरण तथा मादक द्रव्य व्यसन से संबंधित सामाजिक नीति है। सामाजिक आंदोलन सामाजिक समस्याओं और सामाजिक नीति का आपस में प्रगाढ़ संबंध होता है।
सामाजिक आंदोलन सरकार पर यह दबाव रखते हैं कि वह सामाजिक समस्याओं के नियंत्रण के लिए सुधारवादी ....
Question : नौकरशाही की अनौपचारिक संरचना।
(2001)
Answer : ‘ब्यूरोक्रेसी’ शब्द का प्रयोग प्रशासकीय अधिकारियों द्वारा सम्पादित किये जाने वाले प्रशासन के कार्य-कलापों तथा कार्य पद्धति दोनों को इंगित करने के लिए एक सामूहिक शब्द के रूप में किया जाता है। बहुधा जब कभी इस शब्द का प्रयोग अधिकारी तंत्र की अक्षमता तथा उनके द्वारा शक्ति के दुरुपयोग के अर्थ में किया जाता है, तब इस शब्द का मूल अर्थ भ्रष्ट हो जाता है।
इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग संभवतः अर्थशास्त्री विंसेट द गौरने द्वारा ....
Question : प्रजातंत्र में दबाव समूह की भूमिका।
(2000)
Answer : किसी एक विशिष्ट वर्ग (सरकार, जनसमूह या हित समूह) के समूह के हितों का प्रतिनिधित्व करने हेतु आपस में मिलकर व्यक्तियों, मालिकों या अन्य संगठनों के समूहों को दबाव गुट कहा जाता है। दबाव गुट, हित समूह, समर्थन समूह, अन्य प्रकार के सामाजिक समूहों और क्लबों से इस बात में भिन्न होते हैं कि इन समूहों का व्यक्त प्रयोजन अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जनमत जुटाना और निर्णय लेने वाली संस्थाओं को अपनी मांगों ....
Question : क्या विचारधारा किसी सामाजिक आंदोलन का एक अत्यावश्यक अवयव होती है? कुछ समकालीन सामाजिक आंदोलन से उपयुक्त उदाहरणों को प्रस्तुत करते हुए, अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
(2000)
Answer : किसी भी सामाजिक आंदोलन की प्रकृति को निर्धारित करने में नेतृत्व एवं विचारधारा की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है। विचारधारा लोगों के समूहों द्वारा माने जाने वालों विश्वासों की एक व्यवस्था है। यह स्थिति को समझने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त यह लोगों के द्वारा अपनाई गई क्रियाओं को वैधता प्रदान करती है। इस प्रकार जैसे किसी आंदोलन के मार्ग दर्शन हेतु नेतृत्व आवश्यक होता है। उसी प्रकार विचारधारा भी आवश्यक होती है, क्योंकि यह ....
Question : सामाजिक नियंत्रण जोर-जबरदस्ती के मुकाबले दृढ़ विश्वास का मामला अधिक है। टिप्पणी कीजिए। सामाजिक नियंत्रण में विचारधारा की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
(1999)
Answer : ‘सामाजिक नियंत्रण’ का संबंध मौटे तौर पर समाज में व्यवस्था और स्थिरता बनाए रखने से है। सीमित तौर पर इसका इस्तेमाल नियमों, अदालतों, पुलिस जैसे व्यवस्था बनाए रखने के विशेष प्रकार के साधनों को निर्दिष्ट करने में किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल सामाजिक संस्थानों और उसके अंतःसंबंधों को श्रेणीबद्ध करने में भी किया जाता है क्योंकि इससे सामाजिक स्थिरता में सहायता मिलती है, उदाहरण् के लिए कानूनी, धार्मिक, राजनीतिक संस्थान आदि। सामाजिक नियंत्रण समाजशास्त्रीय ....
Question : लोकतांत्रिक राजनीतिक तंत्र का पारंपरिक सामाजिक संरचना पर प्रभाव
(1999)
Answer : लोकतांत्रिक राजनीतिक तंत्र में शासन जनता द्वारा सभी वयस्क मताधिकारियों की स्वतंत्र तथा समान सहभागिता पर आधारित होता है। जन-प्रतिनिधियों का चुनाव बहुसंख्यक जनता के मतों द्वारा होता है। लोकतांत्रिक चुनाव पद्धति की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-
लोकतंत्र मे लिंग, आयु, जाति, प्रजाति, धर्म, सम्पदा, ....
Question : सामाजिक आंदोलन और क्रांति के बीच समान बातों को उजागर कीजिए। क्या आप इस विचार से सहमत होंगे कि प्रत्येक क्रांति से पहले सामाजिक आंदोलन हुआ करता है। कारण प्रस्तुत कीजिए।
(1999)
Answer : सामाजिक आंदोलन और क्रांति दोनों ही सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। सामाजिक आंदोलन व्यक्तियों का ऐसा सामूहिक प्रयास है जिसका एक सामान्य उद्देश्य होता है और उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्थागत सामाजिक नियमों का सहारा न लेकर लोग अपने ढंग से व्यवस्थित होकर किसी परम्परागत व्यवस्था को बदलने का प्रयास करते हैं। जबकि क्रांति सामाजिक आंदोलन से भी ज्यादा सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम हैं।
गिडेन्स ने सामाजिक आंदोलन को निम्नांकित शब्दो में परिभाषित ....
Question : शक्ति की संकल्पना को स्पष्ट कीजिए। शक्ति और प्राधिकार के बीच विभेदन कीजिए।
(1998)
Answer : मानव पर प्रभुत्व करने, उन्हें भयभीत करने और नियंत्रित करने, आज्ञा-पालन करने, उनकी स्वतंत्रताओं में हस्तक्षेप करने तथा उनके व्यवहार को एक विशिष्ट दिशा में मोड़ने के लिए बाध्य करने की योग्यता अथवा सत्ता को शक्ति कहते हैं। संक्षेप में यह व्यक्तियों के व्यवहार को नियमित, व्यवस्थित, नियंत्रित अथवा निर्देशित करने की क्षमता को इंगित करती है। शक्ति व्यक्तिगत करिश्मा या पंरपरा या तार्किक स्वीकृति की निष्पति हो सकती है या संपदा अथवा सैनिक शक्ति ....
Question : किन संरचनात्मक दशाओं के अधीन आंदोलन उभरा करते हैं? सामाजिक आंदोलन के अधीन के किसी एक सिद्धांत का हवाला देते हुए इस पर चर्चा कीजिए।
(1998)
Answer : सामाजिक आंदोलन वैसे ही जन्म नहीं लेते। वे वहीं जन्म लेते हैं जहां सामाजिक परिस्थितियां इनके अनूकूल होती है। ये परिस्थितियां ही आंदोलन को प्रेरित करती हैं एवं आंदोलन के लिए लोगों की इच्छा जागृत करती है। हॉर्टन एवं हण्ट ने सामाजिक आंदोलन के लिए संरचनात्मक दशाओं एवं परिस्थितियों का उल्लेख किया है, जो इस प्रकार है-