मानव तस्करी पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट की नई संरक्षण एवं पुनर्वास योजना
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सुप्रीम कोर्ट ने मानव तस्करी एवं वाणिज्यिक यौन शोषण (Commercial Sexual Exploitation-CSE) के पीड़ितों के लिए एक व्यापक पीड़ित सुरक्षा योजना (Victim Protection Plan) जारी किया है। न्यायालय ने कहा कि पीड़ितों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचे का अभाव उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। संसद द्वारा नया कानून बनने तक यह योजना लागू रहेगी।
पृष्ठभूमि
यह मामला 2004 में गैर-सरकारी संगठन ‘प्रज्वला’ द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें तर्क दिया गया था कि तस्करी के शिकार लोगों को अपराधी की तरह नहीं, बल्कि पीड़ित के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार द्वारा व्यापक कानून ....
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नियमित स्तंभ
- 1 राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया स्पष्टीकरण
- 2 आरक्षित निर्णयों पर सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा-निर्देश
- 3 भारत में मानव तस्करी के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का अहम फ़्रेमवर्क
- 4 अनुसूचित जनजाति ‘डीलिस्टिंग’ विवाद
- 5 पितृत्व विवाद में डीएनए परीक्षण: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
- 6 न्यायपालिका में AI का उपयोग: सुप्रीम कोर्ट के मसौदा नियम
- 7 चेक बाउंस बनाम दिवाला कार्यवाही
- 8 सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के श्रम को दी पहचान
- 9 अनुच्छेद 21 और प्रजनन स्वायत्तता
- 10 राज्यसभा दलबदल और कानूनी अस्पष्टताएँ
- 11 इलाहाबाद उच्च न्यायालय और FRA, 2006 : जनजातीय अधिकारों की न्यायिक पुनर्पुष्टि
- 12 चुनावी पराजय के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का प्रश्न
- 13 सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया : तमिलनाडु प्रकरण और न्यायिक दृष्टिकोण
- 14 निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर संवैधानिक बहस
- 15 सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या वृद्धि
- 16 UAPA, जमानत और अनुच्छेद 21
- 17 अनुच्छेद 19(1) (a) की नई संवैधानिक व्याख्या

