निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर संवैधानिक बहस
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग में नियुक्तियों से संबंधित कानून बनाने में संसद की लंबी देरी पर टिप्पणी करते हुए इसे “निर्वाचितों की तानाशाही” बताया। अदालत मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस कानून में चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को शामिल किया गया है।
मुख्य बिंदु
- अनुच्छेद 324(2) चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति हेतु संसद द्वारा कानून बनाने का प्रावधान करता है।
- 2023 के कानून ने चयन समिति में CJI की जगह ....
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नियमित स्तंभ
- 1 राज्यसभा दलबदल और कानूनी अस्पष्टताएँ
- 2 इलाहाबाद उच्च न्यायालय और FRA, 2006 : जनजातीय अधिकारों की न्यायिक पुनर्पुष्टि
- 3 चुनावी पराजय के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का प्रश्न
- 4 सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया : तमिलनाडु प्रकरण और न्यायिक दृष्टिकोण
- 5 सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या वृद्धि
- 6 UAPA, जमानत और अनुच्छेद 21
- 7 अनुच्छेद 19(1) (a) की नई संवैधानिक व्याख्या

