UAPA, जमानत और अनुच्छेद 21
?>
सुप्रीम कोर्ट ने एक कथित नार्को-टेरर मामले में कश्मीरी आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कठोर प्रावधान भी अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकते। न्यायालय ने 2021 के के.ए. नजीब फैसले का पुनः समर्थन करते हुए कहा कि लंबी अवधि तक बिना मुकदमे के हिरासत संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है।
मुख्य बिंदु
- UAPA, 1967 भारत का प्रमुख आतंकवाद-रोधी कानून है।
- धारा 43(D)(5) के तहत जमानत प्राप्त करना अत्यंत कठिन।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनिश्चितकालीन कारावास “सजा” का रूप नहीं ले सकता।
- Watali (2019) निर्णय ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
वार्षिक सदस्यता लें मात्र 600 में और पाएं...
पत्रिका की मासिक सामग्री, साथ ही पत्रिका में 2018 से अब तक प्रकाशित सामग्री।
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा पर अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट पेपर, हल प्रश्न-पत्र आदि।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों का ई-संस्करण।
पप्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के चुनिंदा विषयों पर वीडियो क्लासेज़।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर अतिरिक्त छूट।
नियमित स्तंभ
- 1 राज्यसभा दलबदल और कानूनी अस्पष्टताएँ
- 2 इलाहाबाद उच्च न्यायालय और FRA, 2006 : जनजातीय अधिकारों की न्यायिक पुनर्पुष्टि
- 3 चुनावी पराजय के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का प्रश्न
- 4 सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया : तमिलनाडु प्रकरण और न्यायिक दृष्टिकोण
- 5 निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर संवैधानिक बहस
- 6 सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या वृद्धि
- 7 अनुच्छेद 19(1) (a) की नई संवैधानिक व्याख्या

