अनुच्छेद 19(1) (a) की नई संवैधानिक व्याख्या
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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (देशद्रोह कानून) के अंतर्गत लंबित मुकदमे और अपीलें आगे बढ़ सकती हैं, यदि आरोपी को इस पर कोई आपत्ति न हो। यह निर्णय 2022 में दिए गए उस अंतरिम आदेश में आंशिक ढील है, जिसमें देशद्रोह से जुड़े मामलों पर रोक लगा दी गई थी।
मुख्य बिंदु
- धारा 124A IPC औपनिवेशिक काल का देशद्रोह कानून था।
- 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने इसके तहत नए FIR और लंबित कार्यवाहियों पर रोक लगाई थी।
- अब अदालत ने कहा कि आरोपी की सहमति होने पर मुकदमे ....
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नियमित स्तंभ
- 1 राज्यसभा दलबदल और कानूनी अस्पष्टताएँ
- 2 इलाहाबाद उच्च न्यायालय और FRA, 2006 : जनजातीय अधिकारों की न्यायिक पुनर्पुष्टि
- 3 चुनावी पराजय के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का प्रश्न
- 4 सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया : तमिलनाडु प्रकरण और न्यायिक दृष्टिकोण
- 5 निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर संवैधानिक बहस
- 6 सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या वृद्धि
- 7 UAPA, जमानत और अनुच्छेद 21

