राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया स्पष्टीकरण
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हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की तीन-न्यायाधीशीय पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी को कोई आपत्ति नहीं है, तो निरस्त हो चुकी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (राजद्रोह) से संबंधित लंबित मुकदमों, अपीलों और कार्यवाहियों को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस आदेश ने राजद्रोह कानून को लेकर संवैधानिक बहस को पुनः तेज कर दिया है।
पृष्ठभूमि
मई 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने एस.जी. वोम्बटकेरे बनाम भारत संघ मामले में धारा 124A की संवैधानिक वैधता पर विचार लंबित रहने तक इसके तहत नई एफआईआर और लंबित कार्यवाहियों पर रोक लगा दी थी। यह मामला अभी भी न्यायालय ....
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नियमित स्तंभ
- 1 आरक्षित निर्णयों पर सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा-निर्देश
- 2 भारत में मानव तस्करी के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का अहम फ़्रेमवर्क
- 3 अनुसूचित जनजाति ‘डीलिस्टिंग’ विवाद
- 4 पितृत्व विवाद में डीएनए परीक्षण: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
- 5 न्यायपालिका में AI का उपयोग: सुप्रीम कोर्ट के मसौदा नियम
- 6 चेक बाउंस बनाम दिवाला कार्यवाही
- 7 मानव तस्करी पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट की नई संरक्षण एवं पुनर्वास योजना
- 8 सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के श्रम को दी पहचान
- 9 अनुच्छेद 21 और प्रजनन स्वायत्तता
- 10 राज्यसभा दलबदल और कानूनी अस्पष्टताएँ
- 11 इलाहाबाद उच्च न्यायालय और FRA, 2006 : जनजातीय अधिकारों की न्यायिक पुनर्पुष्टि
- 12 चुनावी पराजय के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का प्रश्न
- 13 सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया : तमिलनाडु प्रकरण और न्यायिक दृष्टिकोण
- 14 निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर संवैधानिक बहस
- 15 सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या वृद्धि
- 16 UAPA, जमानत और अनुच्छेद 21
- 17 अनुच्छेद 19(1) (a) की नई संवैधानिक व्याख्या

