पितृत्व विवाद में डीएनए परीक्षण: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

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हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण मामले में डीएनए परीक्षण (DNA Test) कराने के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि पितृत्व (Paternity) से जुड़े विवादों में न्याय के हित में वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया जा सकता है। मामले में एक व्यक्ति ने स्वयं को प्रतिवादी का जैविक पुत्र बताते हुए पितृत्व की घोषणा तथा संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की थी।

कानूनी पृष्ठभूमि

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 116 के अनुसार, वैध विवाह के दौरान या विवाह समाप्त होने के 280 दिनों के भीतर जन्मे बच्चे को पति की वैध संतान माना जाता है। इस ....

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