बाह्य वाणिज्यिक उधारी
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में कहा कि कॉरपोरेट इंडिया द्वारा हस्ताक्षरित बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) के समझौते 2023 की अप्रैल-जून तिमाहीं में 12 अरब डॉलर तक पहुंच गए, जो कि एक साल पहले की अवधि के स्तर से तीन गुना अधिक है।
- ईसीबी का तात्पर्य भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी स्रोतों से ऋण, बांड या अन्य वित्तीय साधनों के रूप में धन उधार लेना है।
- इसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है, जिसमें व्यवसाय का विस्तार, संपत्ति का अधिग्रहण और मौजूदा ऋण का पुनर्भुगतान शामिल है।
- ईसीबी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है, जिनमें विदेशी ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

