Question : “भूगोल का कल्याणकारी चेहरा इसको एक अंतरशास्त्रीय विषय बना देता है।” विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : भूगोल का कल्याणकारी रूप, मानववाद से जुड़ा हुआ है। मानववाद के विचारों से ही भूगोल की कल्याणकारी प्रकृति प्रकट हुई। भूगोल की इस शाखा का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समूहों का उनके पर्यावरण के साथ संबंधों से उत्पन्न विभिन्न समस्याओं का विश्लेषण करता है। 1960 के दशक के बाद विद्वानों ने इस विषय को अपनाना प्रारंभ किया। भूगोल के इस कल्याणकारी उपागम का विकास, प्रत्यक्षवादी, परिमाणात्मक क्रांति और मॉडल निर्माण जिन्हें मानव समाज की समकालीन समस्याओं ....
Question : ‘‘प्रादेशिक संश्लेषण भौगोलिक अध्ययनों का कार्य है’’ विस्तार कीजिए।
(2015)
Answer : प्रादेशिक संश्लेषण में प्रदेश के निर्माण एवं उसके प्रतिरूप, विशेषताओं एवं स्वरूप की उत्पत्ति की क्रियाविधि शामिल है। संश्लेषण का अर्थ है, विभिन्न भौगोलिक चरों का एकीकरण एवं उनके सम्मिश्रण से निर्मित एक विशेष प्रारूप, जो कि प्रदेश का निर्माण करती है। जैसे- सवाना प्रदेश तापमान, आर्द्रता, वर्षा, सूर्यताप, मृदा, वनस्पति जैसे विभिन्न चरों के संश्लेषण से निर्मित होता हैं एवं वह एक प्राकृतिक प्रदेश के रूप में प्राप्त होता है। प्रादेशिक भूगोल में पृथ्वी ....
Question : ‘‘व्यवहारपरक भूगोल के अध्ययन के उपागमों की विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : व्यवहारवाद मात्रत्मक क्रांति का विरोधी चिंतन है, परंतु मॉडल एवं विधि निर्माण का समर्थक है। व्यवहारवादी भूगोल मानव को केन्द्र में रखता है तथा प्रतिव्यक्ति विश्लेषण के आधार पर विधियों के निर्माण का प्रयास करता है अर्थात यह व्यक्ति प्रेरित है।
मात्रत्मक क्रांति में मनुष्य को आर्थिक एवं विवेकशील माना गया है तथा उसके भावनात्मक एंव बौद्धिक सांस्कृतिक पक्ष की उपेक्षा की गई है। व्यवहारवाद में सांस्कृतिक पक्ष की उपेक्षा की गई है। व्यवहारवाद में मानववाद ....
Question : ‘‘भौगोलिक अध्ययनों में एक प्रतिमान के रूप में पर्यावरणवाद का पुर्ननवीकरण हुआ है।’’ टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : पर्यावरणवाद वह प्रतिमान है, जिसमें प्रकृति को सर्वोपरी एवं मनुष्य को प्रकृति का सरणार्थी माना गया है। प्रकृति मानव के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं मानवात्मक, नैतिक तथा बौद्धिक क्रियाकलापों को निर्धारित करती है। अर्थात् प्रकृति की सत्ता असीम है तथा मानव प्रकृति की गोद में पलने वाला अनुयायी।
हाल में पर्यावरणवाद का पुर्ननवीकरण हुआ है लेकिन इससे पूर्व टेलर ने 1926 मे नव-पर्यावरणवाद की संकल्पना प्रस्तुत की थी। टेलर ने पर्यावरणवाद में एक मध्यम मार्ग को ....
Question : मानसिक मानचित्र (मेंटल मैप) की संकल्पना को विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : मानसिक मानचित्रें की संकल्पना की नींव पीटर गोल्ड के एक लेख के माध्यम से पड़ी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी स्थान विशेष पर निर्णयकर्ता जो निर्णय लेता है वह इससे निर्धारित होता है कि उसने वस्तुस्थिति को किस स्वरूप में अवबोधित किया। यह अवबोधित स्वरूप वास्तविक वस्तुनिष्ठ स्थिति से अलग हो सकता है। अतः अध्ययन करते वक्त निर्णयकर्ता के मानसिक मानचित्र का अध्ययन परिप्रेक्ष्य आवश्यक है।
‘गोल्ड तथा व्हाइट’ ने 1974 में मानसिक मानचित्र ....
Question : रैडिकल भूगोल के विकास में भूगोलवेत्ताओं के योगदान की विवेचना कीजिए।
(2014)
Answer : 1960 के दशक में मात्रत्मक भूगोल सामाजिक मुद्दों से जुड़ने पर मौन थी तथा तत्कालीन भूगोलवेत्ताओं की भी सामाजिक मुद्दों के प्रति उदासीनता के प्रतिक्रिया स्वरूप उग्रवादी/रेडिकल या मार्क्सवादी चिन्तन का भूगोल में समावेश हुआ। उस समय के सबसे महत्वपूर्ण मार्क्सवादी भूगोलवेत्ता डेविड हार्वे 60 के दशक के अन्त तक मात्रत्मक भूगोल तथा प्रमाणवादी विचारधारा के बड़े समर्थक थे परन्तु 1972-73 तक इस विषय पर उनके विचार पूरी तक बदल गए तथा उन्होंने ‘सोशल जस्टिस ....
Question : उपयुक्त उदाहरण देते हुए भौगोलिक अध्ययनों में तंत्र विश्लेषण (सिस्टम अनैलिसिस) के महत्व का वर्णन कीजिए।
(2014)
Answer : सर्वप्रथम लुडविग फान बर्टनलाफी ने सामान्य तंत्र सिद्धांत का प्रतिपादन किया; 1972 में पी. ई. जेम्स ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘‘तंत्र को एक समग्र व्यक्ति, एक राज्य, एक संस्कृति, एक व्यावसायिक फर्म के रूप में परिभाषित किया जा सकता है क्योंकि इसके अवयवों के मध्य अंतर्सम्बन्ध पाया जाता है।’’ इसी संदर्भ में पी. हैगेट ने कहा कि ‘‘एक तंत्र वस्तुओं का एक समूह है जोसंबंधों के निश्चित समुच्चय के माध्यम से साथ-साथ ....
Question : “संसार वैश्विक संसाधन दुविधा के दौर से गुजर रहा है।” समीक्षा कीजिए।
(2014)
Answer : संसाधनों के उपयोग से संबंधित भूगोल में दो प्रकार की मान्यताएं रही हैं, संसाधन पर्याप्तता की संकल्पना (Concept of Resource Adequate) तथा संसाधन संकट की संकल्पना (Concept of Resource Scarciti)। जहां पहली संकल्पना की ये मान्यता रही है कि विश्व में संसाधनों की कमी नहीं है, जैसे-जैसे मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ती हैं, तकनीकी बढ़ती है वैसे-वैसे संसाधनों के भण्डार भी अधिक मिलते जाते हैं।
इस मान्यता को मानने वालों ने अपनी संकल्पना की पुष्टि हेतु भविष्य ....
Question : “ऐलन चर्चिल सेंपल निर्धारणवाद का एक प्रचण्ड पोषक है।” स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : कुमारी ऐलन चर्चिल सेंपल एक अमेरिकन विदुषी और रेंटजल की शिष्या थीं। उन्होंने निर्धारणवाद के सिद्धांत का समर्थन किया है। सेंपुल ने वातावरण के प्रभावों पर बल देते हुए रेंटजल के एन्थ्रोपोज्योग्राफी ग्रन्थ में प्रस्तुत की गई रेंटजल की विचारधारा को ध्यान में रखते हुए अपने ग्रन्थ लिखे थे।
सेंपल ने ‘अमेरिकन इतिहास और इसकी भौगोलिक दशायें’, ‘भौगोलिक वातावरण के प्रभाव’ तथा ‘भू-मध्यसागरीय प्रदेश का भूगोल’ जैसे ग्रन्थों में वातावरण निश्चयवाद के सिद्धांत का समर्थन किया ....
Question : संसार में मानव विकास सूचकांक के आकलन और स्थानिक प्रारूप के लिए प्राचलों को स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : जीवन प्रत्याशा, शिक्षा तथा आय के सूचकांकों पर आधारित मानव विकास सूचकांक पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक तथा भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने 1990 में तैयार किया था।
इस सूचकांक की मदद से विश्व के विभिन्न देशों में मानव विकास की स्थिति का जायजा लिया जा सकता है।
मानव विकास सूचकांक के मापदंड- वर्ष 2010 के पहले मानव विकास सूचकांक की गणना तीन मानकों पर आधारित थी।
Question : भू आकृति विश्लेषण में तंत्र उपागम।
(2012)
Answer : भू आकृति विश्लेषण में ग्लोब के स्थलमण्डल के उच्चावचों, उनके निर्माणक प्रक्रमों तथा उनके एवं मानव के बीच सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। भू-पटल एवं सागर नितल के विभिन्न रूपों, उनकी उत्पत्ति तथा विकास के व्याख्यात्मक विश्लेषण हेतु तंत्र उपागम का प्रयोग कर भागौलिक सिद्धांतों एवं परिणामों को और अधिक वैज्ञानिक, तार्किक एवं उपयोगी बनाया जा सकता है।
भूगोल में तंत्र उपागम ने अपना आधार लुडबिग वान वर्टालफी के समान्य तंत्र सिद्धांत से प्राप्त किया ....
Question : मानव भूगोल में कल्याण उपागम
(2011)
Answer : द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विकसित मात्रत्मक क्रांति के प्रतिक्रिया के रूप में विकसित उपागमों में कल्याणकारी भूगोल का महत्वपूर्ण स्थान है। कल्याणकारी भूगोल का सम्बन्ध विकास और नियोजन के कार्यों से है। इस विषयवस्तु की शुरूआत का श्रेय ब्रिटिश भूगोलवेता स्मिथ को जाता है।
स्मिथ महोदय ने एक पुस्तक की रचना की जिसका शीर्षक था ज्योग्राफी ऑफ सोशल वेल विंग। इस पुस्तक मेंजीवन की गुणवत्ता को विषय वस्तु का आधार माना गया। स्मिथ के अनुसार ....
Question : भूगोल में रूपावली प्रतिस्थापन में प्रत्यक्षवाद के प्रभाव पर चर्चा कीजिए?
(2011)
Answer : प्रत्यक्षवाद के अनुसार विज्ञान का लक्ष्य तथ्यों की वास्तविकता को समझना है। तथ्य जैसा है, वैसा उन्हें समझना है। तथ्य कैसे होना चाहिए यह बात घटना क्रिया विज्ञान के क्षेत्र में है, अर्थात् प्रत्यक्षवाद नीतिगत प्रश्नों का उत्तर नहीं देता। प्रत्यक्षवाद की यह मान्यता है कि हम नीतिपरक तथ्यों को नहीं देख सकते, अतः हमें इनसे दूर रहना चाहिए। विज्ञान तथ्यों का वास्तविक रूप प्रायोगात्मक ढंग से या माप-जोखकर प्रकट कर सकता है।
प्रत्यक्षवाद की संकल्पना ....
Question : तंत्र उपागम और भूगोल में उसकी अनुप्रयोज्यता की चर्चा करे।
(2011)
Answer : द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् भूगोल में कई नवीन विधि तंत्र का आगमन हुआ, जिनमें तंत्र उपागम एक है। इस विधि तंत्र का विकास जीव वैज्ञानिक लुडविग एवं वार्न बर्टालैन्की द्वारा किया गया था। इनके द्वारा विकसित विधि तंत्र को “सामान्य तंत्र सिद्धांत” कहा गया। इस सामान्य तंत्र सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य विज्ञान के विभिन्न शाखाओं को एकीकृत करना था।
भूगोल में तंत्र उपागम के अध्ययन का श्रेय आर. मिन्शुल, प्रिंसटन, जेम्स, चोर्ले तथा केनेडी जैसे ....
Question : पाश्चात्य संस्कृति परिमंडल
(2010)
Answer : इसके अंतर्गत दो संस्कृति परिमंडल आते हैं-
(i) पहला पश्चिमी योरोपीय परिमंडलः सन् 1600 ई. से उत्तर पश्चिमी यूरोप, पाश्चात्य संस्कृति का केंद्र बिंदु बना। यहां के निवासियों ने अन्वेषण, व्यापार व वाणिज्य का महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ किया। इन लोगों ने उपनिवेशों की स्थापना भी शुरू किया। यूरोपीयों ने वैज्ञानिक विकास किया। फलस्वरूप आधुनिक पूंजीवाद व लोकतांत्रिक संस्थाओं का भी विकास हुआ।
सन् 1600 ई. में उत्तर-पश्चिमी यूरोपीय क्षेत्र से संस्कृतियों का प्रसार व्यापक स्तर पर हुआ ....
Question : मानव विकास सूचकांक को व्युत्पन्न करने की विधि का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये।
(2010)
Answer : आर्थिक विकास के पारंपरिक मापकों सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या प्रति व्यक्ति आय (PCI) द्वारा मानवीय विकास को उचित रूप से न व्यक्त कर पाने के कारण संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा, 1990 से मानव विकास के मूलभूत संकेतकों स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आय के सूचकांकों को औसत के रूप में मानव विकास सूचकांक जारी किया जाता है, जिसे ‘मानव विकास रिपोर्ट’ (HDR) शीर्षक के तहत प्रकाशित किया जाता है।
मानव विकास सूचकांक की आवधारणा का ....
Question : क्षेत्रीय विभेदन की संकल्पना पर बदलते हुये संदर्शों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2010)
Answer : भूगोल की मूल विषय वस्तु भूतल के विभिन्न क्षेत्रें का अध्ययन करना है। भूतल के एक स्थान का पर्यायवरण दूसरे स्थानों के पर्यायवरण से कई प्रकार से भिन्न होता है। अतः विभिन्न स्थानों या क्षेत्रें के सांस्कृतिक भू-दृश्य भी प्रायः एक समान नहीं होते हैं, इसलिये मानव भूगोल के तथ्यों के विश्लेषण में क्षेत्रीय विभेदीकरण के सिद्धांत का मौलिक महत्व है।
पृथ्वी के तल पर विभिन्न क्षेत्रें के प्रकृति और सांस्कृतिक दोनों प्रकार के तथ्यों में ....
Question : भार त्रिकोण
(2009)
Answer : भार त्रिकोण की संकल्पना का प्रयोग अल्फ्रेड वेबर द्वारा 1909 में जर्मन भाषा में लिखित अपनी पुस्तक Uberden Standortder Industries में उद्योगों के स्थानीयकरण पर अपने सिद्धांत के प्रतिपादन में किया। वेबर ने औद्योगिक स्थानीयकरण में तीन कारकों को प्रभावी मानाः
उपर्युक्त कारकों में परिवहन लागत की भूमिका को वेबर महोदय ने सर्वाधिक प्रभावी माना तथा इसी के परिप्रेक्ष्य में न्यूनतम स्थानीयकरण लागत बिन्दु ज्ञात करने के लिए अपना मॉडल दिया।
वेबर के ....
Question : ‘संवृद्धि की सीमाएं’ मॉडल
(2009)
Answer : ‘संवृद्धि की सीमायें’ माडल का सम्बन्ध कलब आफ रोम (1960 ई.) नामक संस्था से है। उस संस्था ने सम्पूर्ण विश्व को एक तन्त्र के रूप में देखते हुए आर्थिक संवृद्धि के उद्देश्यों, संभावनाओं एवं सीमाओं पर एक नवीन दृष्टि डालने की आवश्यकता पर जोर दिया।
1970 ई. में इस संस्था ने प्रोफेसर डेनिज मिडोण के नेतृत्व में एक अन्वेषण टीम का गठन किया। उस टीम ने पांच मूलभूत घटकों का विश्लेषण करते हुए यह सुनिश्चित करने ....
Question : “मात्रत्मक क्रांति और माडल निर्माण ने भौगोलिक अनुसंधान के लिए एक आनुभाविक आधार प्रदान किया।” विस्तारपूर्वक सुस्पष्ट कीजिए।
(2009)
Answer : भूगोल के विषय सामग्री एवं सिद्धांतों को सटीक एवंयथार्थपरक बनाने हेतु सांख्यिकीय तकनीकों के व्यापक प्रयोग को मात्रत्मक क्रांति के रूप में जाना जाता है। मात्रत्मक तकनीकों का आरंभिक प्रयोग जलवायविक अध्ययनों में किया गया, जैसे-दी एनालिसिस ऑफ रेनफाल प्राबेबिलिटी, दि ज्योग्राफिकल डिस्ट्रीब्यूशन एण्ड क्राप प्रोडक्टिविटी इत्यादि।
विभिन्न भूगोलवेत्ताओं ने इस तकनीक का प्रयोग किया, जैसे- क्रिस्टालर ने अपने अध्ययन सेन्ट्रल प्लेसेस इन सदर्न जर्मनी में मात्रत्मक तकनीकों का व्यापक उपयोग करते हुए अवस्थिति सिद्धांत में ....
Question : अंतर्राष्ट्रीय परिसीमाओं और सीमांतकों (फ्रंटियरों) के नियमों का वर्णन कीजिए।
(2008)
Answer : अंतर्राष्ट्रीय सीमा और सीमांत आधुनिक अवधारणा है, प्रकृति ने तो पर्वत, पठार और मैदान बनाये थे, लेकिन मानव ने तकनीकी विकास के माध्यम से राज्य निर्माण कर लिया। जब जनसंख्या वृद्धि हुई और संसाधनों के प्रति चेतना बढ़ी तो राज्य विस्तार को प्रेरणा मिली और विभिन्न राज्यों के बीच सीमा और सीमांतों का जन्म हुआ।
आरंभ में सामान्यतः भू आकृतिक विशेषताओं को सीमाओं का आधार माना गया जो वर्तमान में भी विभिन्न राज्यों के बीच सीमा ....
Question : व्यावहारात्मक भूगोल
(2008)
Answer : द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भूगोल के अध्ययन हेतु कई नए उपागमों का विकास हुआ है। इनमें एक व्यवहारात्मक उपागम है, जिसमें मानवीय बोध एवं व्यवहार, वातावरण संबंधी निर्णय, क्षेत्रीय अन्तर्सबंधता अथवा क्षेत्रीय संगठन पर बल दिया जाता है।
इसमें माना गया है कि भौगोलिक तथ्यों की क्षेत्रीय तथा सामयिक विशेषताओं का अध्ययन न केवल वातावरणीय कारकों से पूर्ण हो सकता है, वरन् इसके विश्लेषण के लिए व्यवहारिक वातावरण का भी विश्लेषण आवश्यक है।
इस अध्ययन विधि द्वारा ....
Question : विशेष रूप से ह्नीटल्सी का हवाला देते हुए प्रमुख कृषि प्रकारों उनसे संबंधित अभिलक्षणों के संबंध में लिखिए। दिए गए संसार के मानचित्र में इन प्रदेशों को दर्शाइएः
(2006)
Answer : कृषि के स्वरूप को निर्धारित करने में जलवायु, मिट्टी, उच्चावच जैसे भौगोलिक कारकों के अलावा सामाजिक आर्थिक, जनांकिकीय, तकनीक संस्थागत तथा राजनीतिक कारकों की भूमिका होती है। इस दृष्टि से विश्व के विभिन्न प्रदेशों में काफी विविधता पाई जाती है, अतः विश्व के विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न प्रकार की कृषि देखने को मिलती है। ह्नीटल्सी के अनुसार विश्व के विभिन्न प्रदेशों में निम्नलिखित प्रकार की कृषि की जाती है-