Question : ‘‘किसी क्षेत्र की विविधता का अध्ययन करने के लिए सांस्कृतिक प्रदेश सर्वाधिक उपयुक्त इकाईयां हैं।’’
(2015)
Answer : किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में सांस्कृतिक प्रदेश उस ईकाई क्षेत्र की विशेष सांस्कृतिक दशाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस क्षेत्र में किसी एक सांस्कृतिक स्वाभाव वाले लोगों का बाहुल्य होता है। वस्तुतः यह सांस्कृतिक प्रदेश किसी एक प्रकार की भू-आकृति प्रक्रमों एवं जलवायविक कारकों का उपज होता है। किसी एक सांस्कृतिक प्रदेश में एक ही प्रकार की नृजातीयता, धर्म, भाषा, खान-पान का बाहुल्य होता है। भारत का उत्तर क्षेत्र में हिन्दू धर्म मानने वालों की ....
Question : भौगोलिक विशेषक (ट्रेट) प्रादेशिक असंतुलन को जन्म देते हैं।’’ परीक्षण कीजिए।
(2015)
Answer : प्रादेशिक असंतुलन का अर्थ है दो ईकाई देशों के मध्य आर्थिक विकास के प्रतिरूपों से उत्पन्न असाम्यावस्था। जहां एक ईकाई भाग दूसरे की तुलना में गैर आनुपातिक मात्र में वृद्धि करता है।
प्राकृतिक भू-दृश्य एकसमान नहीं होता। संसाधनों के दृष्टिकोण से कुछ भागों में अधिक संकेन्द्रियता देखी जाती है। उन प्रदेशों को प्राकृतिक लाभ से युक्त प्रदेश कहते हैं, जहां मानव एवं आर्थिक क्रियाविधियाँ अधिक आकर्षित होती हैं तथा तुलनात्मक लाभ उत्पन्न होते हैं, जिससे अधिसंरचना ....
Question : ‘‘विकास नियोजन के लिए जन्म-मरण के आँकड़े आवश्यक संघटक हैं।’’ सविस्तार समझाइए।
(2015)
Answer : किसी देश के समग्र विकास में जन्म-मरण के आँकड़ों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। किसी देश के लिए मानव-पूँजी उसकी सबसे बड़ी पूँजी होती है। जनसंख्या अगर उत्पादक हो तो यह मानव संसाधन का रूप ले लेती है।
प्रादेशिक विकास के लिए आवश्यक-किसी क्षेत्र विशेष के जन्म-मरण आँकड़ों द्वारा वहाँ की चिकित्सकीय व्यवस्था को समझा जा सकता है। इसके कारणों को पहचान कर उसके लिए अलग से योजनाएँ बनाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश, बिहार में ....
Question : “सिंधु-गंगा हृदयप्रदेश (हर्थ) विश्व के सर्वाधिक समृद्ध सांस्कृतिक परिमण्डलों में से एक माना जाता है।” परीक्षण कीजिए।
(2014)
Answer : सिन्धु नदी तथा उनकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदान में विश्व की प्राचीनतम सभ्यता एवं संस्कृति का उदय हुआ जिसे सिन्धु सभ्यता कहा जाता है। चूंकि यह सभ्यता सिन्धुघाटी से लेकर गंगा की घाटी तक विस्तृत थी इसलिए इसे सिन्धु गंगा सांस्कृतिक हृदय प्रदेश भी कहा जाता है।
इस सभ्यता को विश्व के सबसे समृद्ध सांस्कृतिक परिमण्डलों में निम्न तथ्यों के आधार पर माना जाता है-
Question : रोस्टोव द्वारा प्रतिपादित एक राष्ट्र के विकास की उत्प्रस्थान (टेकऑफ) और अनुवर्ती अवस्थाओं की आवश्यक शर्तों की व्याख्या कीजिए।
(2014)
Answer : अमेरिका इतिहासकार रोस्टोव ने 1971 में आर्थिक विकास मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने बताया किसी भी देश का विकास आर्थिक तथा सामाजिक विकास की पांच अवस्थाओं से होकर गुजरात है। यह मॉडल इस अवधारणा पर आधारित है कि विकास कार्य कोई गत्यात्मक प्रक्रिया नहीं है बल्कि जैविक प्रक्रिया के ही समान है। ये पांच अवस्थाएं निम्वत् हैं-
Question : जल विभाजक नियोजन के प्रमुख लक्षण एवं उसके लाभ व हानियां।
(2012)
Answer : जल विभाजक क्षेत्र से तात्पर्य नदी बेसिनों को अलग-अलग करने वाले क्षेत्र विशेष में उपस्थित उच्चावच से है, जहां से वर्षा का जल विभाजित होकर अनेक दिशाओं में नदियों या चैनलों में प्रवाहित होने लगता है। ये जल विभाजक जल प्रवाह की एक निश्चित दिशा, मृदा में जल की स्थिति, भूमिगत जल स्तर एवं जीव मण्डल, जैव विविधताओं का निर्धारण करते हैं। यह सभी कारक मिलकर भौतिक सह जैविक पर्यावरण का निर्माण करते हैं। इन्हीं ....
Question : परिसीमाओं और सीमांत क्षेत्रें के बीच विभेदन कीजिए। विभिन्न प्रकार की परिसीमाओं की पहचान कीजिए?
(2011)
Answer : परिसीमा अर्थात् सीमा तथा सीमांत राजनीतिक भूगोल का महत्वपूर्ण संकल्पनाएं हैं। सामान्य बोलचाल में परिसीमा एवं सीमांत को एक दूसरे का पर्याय माना जाता है। परंतु राजनीतिक भूगोल में इनकी अलग संकल्पनाएं हैं। परिसीमा एवं सीमांत में निम्न अंतर किए जा सकते हैं:
i. सीमांत एक भौगोलिक क्षेत्र है जो किसी सीमा के दोनों तरफ होता है। यह एक क्षेत्रीय अभिव्यक्ति है जबकि सीमा एक रेखीय अभिव्यक्ति है, जो दो या दो से अधिक पड़ोसी ....
Question : पिछड़े प्रदेशों के लिए योजनाकरण की वैकल्पिक रणनीतियों को गिनाइये।
(2011)
Answer : पिछड़े प्रदेशों से तात्पर्य उन प्रदेशों से है, जो अपनी सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने में समर्थ नहीं है। किसी प्रदेश के पिछड़ेपन के लिए बहुत सारे कारक उत्तरदायी रहे हैं। जैसे, प्रतिकूल वातावरणीय परिस्थिति, औपनिवेशिक विरासत, तीव्र जनसंख्या वृद्धि एवं राजनैतिक एवं भूसामरिक स्थिरता आदि।
पिछड़े प्रदेशों के लिए योजनाकरण के लिए वैकल्पिक रणनीतियां निम्नलिखित हैं:
Question : संवृद्धि ध्रुव
(2010)
Answer : संवृद्धि ध्रुव की संकल्पना फ्रांस के विख्यात अर्थशास्त्री फ्रांसिस पेरॉक्स ने 1955 में प्रस्तुत की थी। पेरॉक्स महोदय ने विचार व्यक्त किया कि विकास सर्वव्यापी नहीं होता, बल्कि यह कुछ ध्रुवों, केंन्द्रों एवं बिंदुओं का होता है, जिन्हे क्रमशः संवृद्धि ध्रुव, संवृद्धि केंद्र एवं संवृद्धि बिंदु कहते हैं। इन पर विकास की गति एक दूसरे से भिन्न होती है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास विभिन्न भागों द्वारा विस्तृत होता है और उसका सम्मुच्चय, अर्थव्यवस्था ....
Question : प्रादेशिक योजनाकरण में पर्यावरणीय मुद्दों के महत्व पर प्रकाश डालिए।
(2009)
Answer : प्रादेशिक नियोजन किसी प्रदेश के व्यापक विकास हेतु प्रादेशिक स्पेस के तर्कसंगत रूपांतरण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य स्थानिक पुनर्गठन होता है ताकि क्षेत्र में अधिक -से- अधिक प्रादेशिक समन्वय बनाया जा सके। ऐसा करते समय प्रदेश के जन साधारण की भावनाओं, आकांक्षाओं एवं उद्देश्यों आदि का ध्यान रखा जाता है।
प्रादेशिक नियोजन की वास्तविक चुनौती प्रदेश की सतत् परिवर्तनशील सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसके संपूर्ण विकास का प्रबन्ध इस प्रकार किया जाये ....
Question : प्रदेश की संकल्पना क्या है? प्रदेशों के प्रकारों पर चर्चा कीजिए।
(2006)
Answer : प्रदेश को परिभाषित करना काफी कठिन है। इसका कारण यह है कि इस संकल्पना का प्रयोग विभिन्न लोगों द्वारा विभिन्न अर्थों में किया गया है। भूगोल में प्रदेश की संकल्पना का प्रयोग सर्वप्रथम यूनानी दार्शनिक हेरोडोटस एवं रोमन चिंतक स्ट्रेबो द्वारा किया गया। स्ट्रेबो ने विश्व का वृहत् भूगोल लिखा था, जो राजनीतिक सीमाओं को आधार मानकर प्रादेशिक भूगोल पर लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तक थी। आधुनिक युग में 19वीं शताब्दी में जर्मनी तथा फ्रांस में ....
Question : प्रदेश किसे कहते हैं? प्रादेशीकरण की विधियों की विवेचना कीजिए।
(2005)
Answer : प्रदेश शब्द का विकास मूलतः भूगोल विषय के अन्तर्गत आता है। इसका प्रारंभिक प्रयोग यूनानी दार्शनिक हैरोडोटस तथा रोमन चिन्तक स्ट्रैबो द्वारा किया गया था। आधुनिक भूगोल में इसकी प्रथम व्याख्या रिटर महोदय द्वारा अपनी पुस्तक में किया गया। रिटर ने इस शब्द की व्याख्या भूगोल के एक उपागम के रूप में किया है।
साधारण शब्दों में, प्रदेश स्थल खंड की वह इकाई है, जहां पर पाये जाने वाले भौगोलिक अवयवों में समरूपता होती है। इसकी ....
Question : प्रादेशिक संतुलनों को ठीक करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा कीजिए।
(2004)
Answer : प्रादेशिक असंतुलन से तात्पर्य दो प्रदेशों के बीच पाये जाने वाले आर्थिक-सामाजिक विकास की अवस्था में पाये जाने वाले अंतर से है। विकास संबंधी असमानता का संबंध एक तरफ तो मानव जनित परिस्थितियों का परिणाम है तो दूसरी तरफ यह प्राकृतिक कारकों की क्रियाशीलता का प्रतिफल है।
मानव जनित परिस्थितियों के अंतर्गत पूंजी तकनीक के वितरण की असमानता राजनीति परिस्थितियां, जनसंख्या, संस्थागत एवं संरचनात्मक कारकों को शामिल किया जाता है जबकि प्राकृतिक कारकों में जलवायु, मृदा, ....
Question : संसार में आर्थिक विकास तथा मानवीय विकास के प्रादेशिक प्ररूप किस सीमा तक एक दूसरे के साथ संगत हैं? विशेषकर अंतर की स्थितियों को अवलोकित कीजिए।
(2002)
Answer : मनुष्य ने आदिम काल से ही अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने एवं प्रत्येक सुख-सुविधा को उपलब्ध करने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है। वह अपने प्रौद्योगिक एवं वैज्ञानिक अस्त्र-शस्त्र द्वारा यह विजय प्राप्त करने में सफल भी रहा है। पर दुर्भाग्य से इस विजय से मानव समाज का एक खण्ड अक्षुण्ण भी रहा है। मानव समाज में छाई इन अंतर की स्थितियों ने इस समाज को ही अवंचित और वंचित दो भागों में विभक्त कर दिया ....
Question : प्रादेशिक विकास प्रक्रिया में विकास केन्द्रों एवं विकास ध्रुवों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2001)
Answer : सीमित संसाधनों के प्रयोग द्वारा तीव्र एवं संतुलित आर्थिक विकास हेतु अनेक मॉडल एवं सिद्धांत विकसित किये गये हैं। उन सिद्धातों में विकास केन्द्र एवं विकास ध्रुव सिद्धांत का महत्वपूर्ण स्थान है। हाल के वर्षों में प्रादेशिक विकास हेतु इस सिद्धांत के उपयोग में तेजी से वृद्धि हुई है। यह सिद्धांत पदानुक्रमिक समन्वित प्रादेशिक विकास की अवधारणा पर आधारित है। इस सिद्धांत के प्रतिपादन में अनेक विद्धानों का योगदान है, जिसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान पेरॉक्स ....
Question : विश्व में व्याप्त विकास विषमता के क्षेत्रीय प्रतिरूपों का परीक्षण कीजिए।
(2001)
Answer : विश्व में संसाधन, पूंजी, तकनीक आदि के वितरण की दृष्टि से अत्यधिक विषमता पायी जाती है। इसके कारण विश्व में आर्थिक विकास का प्रतिरूप भी काफी असंतुलित है। एक ओर कुछ विकसित देश हैं जिन्होंने अभूतपूर्व सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति की है, तो दूसरी ओर अनेक विकासशील एवं अल्प विकसित देश हैं जो सामाजिक, आर्थिक दृष्टि से काफी पिछड़े हुए हैं। विकसित देशों में विश्व की मात्र 20 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, जबकि विश्व ....
Question : प्रदेश किसको कहते हैं? प्रदेशों के प्रकारों और प्रादेशीकरण की विधियों पर चर्चा कीजिए।
(2000)
Answer : एक प्रदेश अन्य क्षेत्रों में एक या एक से अधिक परिभाषित लक्षणों के आधार पर भिन्नता रखते हैं। ये परिभाषित लक्षण प्राकृतिक या आर्थिक हो सकते हैं। कुछ विद्वान प्रदेश को सिर्फ एक विचार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं तथा इसके विभाजन में स्थान की प्रासंगिकता पर ध्यान नहीं देते। परंतु भूगोलवेत्ताओं तथा आम जनता के लिए प्रदेश एक तथ्यात्मक वास्तविकता है जो स्थान (space) से जुड़ा हुआ है तथा जो स्थान के संदर्भ ....