Question : ‘‘प्रकृति-प्रेरित अकालों की अपेक्षा मानव-प्रेरित अकाल अधिक सामान्य होते जा रहे हैं।’’ स्पष्ट करें।
(2015)
Answer : अकाल भोजन का एक व्यापक प्रभाव है जो किसी भी प्राणि जगत पर लागू हो सकता है। इसमें सूखा, भूखमरी, कुपोषण की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अकाल प्रकृति-प्रेरित एंव मानव-प्रेरित हो सकती है। किसी क्षेत्र विशेष में लम्बे समय तक वर्षा की कमी से सूखा पड़ता है।
एवं कृषि उपज अल्प हो जाते हैं जो अंततः अकाल पैदा करते हैं। अकाल पैदा करने में मानव भी एक कारक रहा है। प्रकृति से अनावश्यक छेड़-छाड़, अनियोजित ....
Question : “विकास नियोजन में पर्यावरणीय लागत भी एक घटक है।” विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : आधुनिक विश्व में, विकास प्रक्रिया में प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम प्रयोग हो रहा है। स्टील बनाने के लिए लौह-अयस्क एवं कोयले का प्रयोग। अवसंरचना निर्माण से यातायात साधनों में वृद्धि आदि। इन सभी प्रक्रिया में पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है एवं जो खर्च विकास प्रक्रिया में दिए गए ये उसी अनुपात में पर्यावरण के लिए भी करना पड़ सकता है।
इसके अंतर्गत किसी भी विकास कार्य का परियोजना के बाद पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल ....
Question : “ऊर्जा मिश्रण सम्पोषणीयता की तरफ एक कदम है।” विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : सम्पोषणीयता से तात्पर्य सतत् विकास से है। इसके अंतर्गत संसाधनों का उचित प्रबंधन शामिल है ताकि भावी पीढि़यों के लिए भी यह पर्याप्त मात्र में उपलब्ध रहे। वर्तमान आधुनिक विकास प्रक्रिया में ऊर्जा की अत्यधिक मांग रही है। विकसित देशों के साथ-साथ विकासशील देशों में भी ऊर्जा की मांग में लगातार वृद्धि हो रही हैं वर्तमान समय में ऊर्जा के लिए कोयला एवं तेल पर अत्यधिक निर्भरता है। ये दोनों ही संसाधन अनवीकरणीय हैं एवं ....
Question : मानव के पारिस्थितिक अनुकूलन की विभिन्न अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए तथा मानव एवं पर्यावरण के बीच के परिवर्तनशील संतुलन पर प्रकाश डालिए।
(2015)
Answer : मानव अपने वातावरण के प्रति प्रतिक्रियाशील एवं संवेदनशील होते हैं। हर प्राणी के तरह मानव की उत्तरजीविता भी इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने वातावरण के कितने अनुकूल अपने को रूपांतरित कर पाए। अपने वातावरण के अनुकूल अपने को ढाल लेना ही अनुकूलन कहलाता है। मानव अन्य प्राणियों से कुछ बातों में अलग है। यह पृथ्वी के लगभग हर क्षेत्र में बसे हुए हैं। अति विषम परिस्थिति वाले क्षेत्रें में इनकी आबादी ....
Question : सम्पोषित विकास के लिए जैव-विविधता के संरक्षण की विधियों की विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : किसी भी विस्तृत क्षेत्र की पर्यावरणीय दशाओं में पौधों एवं जंतुओं के समुदायों के जीवों की प्रजातियों की विविधता को जैवविविधता कहा जाता है। यह किसी भी प्रदेश में जीव, प्रजातियों तथा पारिस्थितिक तंत्रें का समग्र रूप है।
वर्तमान समय में, आर्थिक विकास के लिए संसाधनों का अनियंत्रित दोहन हो रहा है। अधिक उपज के लिए कृषि में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जा रहा है। तीव्र शहरीकरण, औद्योगीकीकरण, खनन आदि क्रियाओं ने जैव-विविधता के ....
Question : जीवन की गुणता पर पर्यावरणीय शिक्षा के प्रभाव पर टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : जीवन की गुणवत्ता से तात्पर्य, उत्तम चिकित्सा सेवा, रोजगार, बेहतर जीवनशैली, स्वच्छ परिवेश आदि से है। वहीं पर्यावरणीय शिक्षा अपने पर्यावरण को बेहतर ढंग से समझने का एक संगठित प्रयास है। इसके अंतर्गत, मनुष्य कैसे वातावरण को लेकर सजग हो सकता है, कैसे सतत् विकास के तरीकों को अपना सकता है, आदि को शामिल किया जाता है। इसके अंतर्गत नागरिकों के लिए विज्ञान की विधि अपनाई जा रही है। इसमें नागरिकों को साथ लेकर वैज्ञानिक ....
Question : पारिस्थितिक अनुक्रमण के अभिलक्षणों की व्याख्या कीजिए।
(2015)
Answer : पारिस्थितिक अनुक्रमण सैकड़ों या हजारों वर्षों में वानस्पतिक समुदायों की रचना और आकार में आने वाली विभिन्नताओं को व्यक्त करता है। इस क्रिया में समुदाय और पर्यावरण में पारस्परिक क्रिया से जो परिवर्तन उत्पन्न हैं, उसके फलस्वरूप क्रमशः एक समुदाय दूसरे के द्वारा प्रतिस्थापित होते रहते हैं। यह एकलपथ गामी समय में होने वाला वानस्पतिक परितर्वन है। अनुक्रमण की गति लम्बी अवधि के बाद मंद पड़ने लगती है और अंत में एक ऐसे समुदाय का ....
Question : “खाद्य उत्पादकता के साथ पारिस्थितिक तंत्र की शुद्धता आज की आवश्यकता है।” विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : खाद्य सुरक्षा का मुद्दा भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व की प्राथमिक आवश्यकता से जुड़ा मुद्दा है। खासकर तृतीय विश्व में खाद्य सुरक्षा एक चुनौती बनकर उभरी है। इसलिए विश्व के सभी अल्पविकसित-विकासशील देश अधिक से अधिक खाद्य उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं। 1965-66 में जब भारत में हरित क्रांति की शुरुआत हुयी थी तो इससे हमारे देश की खाद्य उत्पादकता में व्यापक इजाफा हुआ था। जिसने भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर ....
Question : पारिस्थितिक तंत्र के रूप में जीवमंडल की प्रकृति का एक विवरण दीजिए।
(2014)
Answer : पारिस्थितिक तंत्र के अंतर्गत जैविक संघटक, अजैविक संघटक तथा ऊर्जा संघटक आते हैं और यह एक आधारभूत कार्यशील क्षेत्रीय इकाई होती है।
जीवमण्डल जो कि वृहद पारिस्थितिकी तंत्र है, में पारिस्थितिकी तंत्र की समस्त विशेषताएं निहित होती हैं। इसके अंतर्गत जैविक संघटक में पादप, मानव, जन्तु तथा सूक्ष्म जीव तथा अजैविक संघटक में स्थल, जल, वायु, मौसम, जलवायु, तापमान आते हैं। इसके अंतर्गत एक अन्यसंघटक ऊर्जा संघटक भी आता है जिसमें सौर ऊर्जा को शामिल करते ....
Question : पहाडि़यों में और पहाड़ी ढालों पर बढ़ते पर्यावरण निम्नीकरण के प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए और निम्नवर्ती घाटी में इसके प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : पर्यावरण तंत्र में एक स्वतः नियामक क्रियाविधि होती है जिसके कारण यदि पर्यावरण में कोई परिवर्तन होता है तो इस स्वतः नियामक क्रियाविधि द्वारा इस परिवर्तन की क्षतिपूर्ति कर ली जाती है। इसे समस्थैतिक क्रियाविधि (Homeostatic Mechanism) कहते हैं। परन्तु जब पर्यावरण में किया गया परिवर्तन क्षतिपूर्ति सीमा से बाहर चला जाता है तो इसे पर्यावरणीय अवनयन कहते हैं।
पहाड़ी तथा पहाड़ी ढालों पर पर्यावरण अवनयन के कुछ विशिष्ट कारण हो सकते हैं-
Question : वे कौन से अभिलक्षण हैं जो सी.एच.सी. (CHC) को पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा बना देते हैं। उदाहरण दीजिए।
(2013)
Answer : ऑरगेनोक्लोराइड, आर्गेनोक्लोरीन, क्लोरोकार्बन, क्लोरिनेटेड हाइड्रोकार्बन या क्लोरो अल्केन ऐसे कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जिनमें क्लोरीन का कम से कम एक परमाणु सहसंयोजी बंधन से जुड़ा हो।
यद्यपि CHC का अनेक प्रकार से प्रयोग (जैसे-विनायल क्लोराइड, क्लोरोमिथेन (क्लोरोफॉर्म), कीटनाशी (DDT इन्डोसल्फान) होता है।
परंतु अनेक प्रकार के CHC न सिर्फ पौधों एवं जानवरों के लिए तथापि मनुष्यों के लिए भी अत्यंत हानिकारक होते हैं। DDT और डाईऑक्सीन जैसे कुछ CHC ऐसे प्रदूषक हैं, जो वायुमंडल में कई-कई सालों ....
Question : रव प्रदूषण (Noise Pollution) के स्तरों और उसका नियंत्रण करने के विधायी अध्युपायों को स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : उच्च दाब वाली उच्च तीव्रता वाली ध्वनि को अवांछित आवाज या शोर कहते हैं। ऐसी अवांछनीय आवाजों को ही ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है।
ध्वनि प्रदूषण के लिए अनेक कारक जिम्मेवार हैं जैसे कि कल-कारखानों से उत्पन्न ध्वनि, स्वचालित वाहनों से उत्पन्न ध्वनि, बम विस्फोट एवं डायनामाइट से उत्पन्न ध्वनि आदि।
अनवरत तथा समयान्तराल पर होने वाला ध्वनि प्रदूषण अत्यंत खतरनाक होता है।
इसके कारण चिड़चिड़ापन, श्रवण संबंधी समस्याएं, मनोवैज्ञानिक प्रभाव एवं तनाव तथा अनेक प्रकार की शारीरिक ....
Question : शहरी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन महानगरीय योजनाकरण में सबसे बड़ी चुनौती प्रस्तुत करता है। सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : बढ़ते हुए शहरीकरण के साथ बढ़ता हुआ ठोस शहरी अपशिष्ट भी एक विकराल समस्या बनता जा रहा है। महानगरों की अत्यधिक जनसंख्या के कारण वहां ठोस कचरा भी बड़ी मात्र में उत्पादित हो रहा है।
ठोस शहरी अपशिष्ट निम्न प्रकार के होते हैं-
Question : विभिन्न प्रकार के खनन कैसे विभिन्न पर्यावरणीय समस्याओं को निर्देश करते हैं, विवेचना कीजिए?
(2012)
Answer : गहराई में स्थित खनिज पदार्थों के उत्खनन स्थल को खान कहते हैं तथा इन खानों से खनिज तत्वों का उत्पादन ही खनन कहलाता है। खनन क्रिया खनिजों के प्रकार, खनिज सम्पन्नता, संचित मात्र व मूल्य पर निर्भर करता है।
विभिन्न प्रकार के खनिज पर्वतीय क्षेत्र, पठारी, मैदानी तथा समुद्र में पाये जाते हैं, जिनके खनन से विभिन्न पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होती हैं। पर्वतीय क्षेत्रें में स्थित खनिजों कोयला, बॉक्साइट, मैंग्नीज इत्यादि के खनन ने पर्वतीय क्षेत्रें ....
Question : भू-तंत्र अध्ययन पर अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद द्वारा प्रस्तावित प्रोग्राम।
(2012)
Answer : 1931 में पृथ्वी के सतत् एवं संतुलित विकास हेतु अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद का गठन किया गया था, जिसका प्रमुख उद्देश्य सामाजिक, प्राकृतिक, स्वास्थ्य प्रौद्यौगिकी एवं मानवता से संबंधित शोध व विकास कार्यों को बढ़ावा देना है। प्राकृतिक एवं मानवीय कारकों से भूतंत्र पर होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन एवं विश्लेषण करने में अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद के समक्ष निम्न चुनौतियां हैं:
Question : समुद्री पारिस्थितिक तंत्र
(2011)
Answer : समुद्री पारिस्थितिक तंत्र एक कार्यशील जलीय इकाई होता है, जो क्षेत्र विशेष के सभी जलधारियों एवं उनके भौतिक पर्यावरण के सकल योग का प्रतिनिधित्व करता है।
समुद्री पारिस्थितिक तंत्र जलीय पारिस्थितिक तंत्र का एक भाग है। जलीय पारिस्थितिक तंत्र को दो प्रमुख उपभागों में विभाजित किया जाता है। ताजे जल वाले पारिस्थितिक तंत्र एवं सागरीय पारिस्थितिक तंत्र। पृथ्वी जल का लगभग 70 प्रतिशत भाग महासागरीय है तथा प्रत्येक महासागर का एक वृहत पारिस्थितिक तंत्र होता है। ....
Question : धारणीय विकास के अवयव
(2011)
Answer : धारणीय विकास या सतत विकास की संकल्पना का विकास WCED (World Commission Environment and Development) ने दिया था। इसके अनुसार सतत विकास एक गतिशील प्रक्रिया है, जो वर्तमान पीढ़ी द्वारा भविष्य की पीढि़यों की आवश्यकताओं, आकांक्षाओं प्रतिरक्षाओं की पूर्ति करने का प्रयास करता है और दीर्घकालीन, आर्थिक विकास, सामाजिक और पर्यावरणीय सुविधाएं प्रदान करता है। धारणीय विकास में निम्नलिखित अवयव सम्मिलित हैं:
Question : पारिस्थितिक तंत्र की संरचना का एक विवरण लिखिये और उसके प्रकार्यात्मक पक्षों का वर्णन कीजिये?
(2010)
Answer : मूलतः पारिस्थितिक तंत्र की संरचना दो संघटकों प्रथम, जीवोम (पादप व प्राणी का समष्टि रूप) तथा द्वितीय आवास (भौतिक पर्यावरण) से हुई है। इन्हें क्रमशः जैविक एवं अजैविक संघटक भी कहते हैं। इसमें समस्त जीवित जीवन अजीवित तत्वों (अजैविक तथा मृत जैविक तत्व) से पारस्परिक क्रिया करते हैं, जिससे पदार्थों का आदान-प्रदान होता है। प्रकार्यात्मक संदर्भ में पारिस्थितिक तंत्र के जैविक संघटकों को दो वर्गों में विभक्त करते हैं:
Question : (क) वैश्विक जलवायु परिवर्तन में योगदान देने वाले कारकों को स्पष्ट कीजिए।
(ख) जलवायु परिवर्तन के कृषि, खाद्य सुरक्षा और संसार के तटीय क्षेत्रें पर पड़ने वाले परिणामों पर चर्चा कीजिए।
(ग) जलवायु परिवर्तन नगरीय क्षेत्रें की किस प्रकार प्रभावित करता है?
(2009)
Answer : (क): जलवायु में औसत तापमान, औसत वर्षा एवं दृष्टिगत अहितकारी दीर्घावधिक परिवर्तनों को जलवायु परिवर्तन कहते हैं। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक कारकों जैसे कि सूर्य की तीव्रता में परिवर्तन, जलवायु व्यवस्था के भीतर प्राकृतिक प्रक्रियाओं जैसे कि सागर चक्र में परिवर्तन के परिणामस्वरूप हो सकते हैं। इसके साथ ही विविध मानव गतिविधियों जैसे जीवाश्म ईंधन, वन कटाव, शहरीकरण इत्यादि से भी जलवायु में परिवर्तन आते हैं।
वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक अथवा मानव जनित दोनों कारण से हो ....
Question : पर्यावरणीय संकट के रूप में मरुस्थलीकरण
(2008)
Answer : (क): मरूस्थलकरण से तात्पर्य है- भूमि का मरूस्थल, अर्द्ध-मरूस्थल तथा शुष्क उप-आर्द्र भूमि के रूप में रूपांतरण यह मुख्यतः मानवीय क्रियाकलापों तथा जलवायविक परिवर्तनों का परिणाम है। मरूस्थलीकरण भूमि का उपजाऊपन नष्ट कर देता है यह इस क्षेत्र के कृषि उत्पादन, वन्य प्राणियों पालतू जानवर एवं जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। भूमि पर से वनस्पति आवरण हटने से पवन एवं जल काफी तीव्र गति से मृदा अपरदन करते हैं। इस क्षेत्र में वनस्पति ....
Question : भारत जैसे विकासशील देशों में जनांकिकीय संक्रमणों का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्राचलों पर एक टिप्पणी लिखिए।
(2007)
Answer : वर्तमान समय में जनसंख्या भूगोल की विशिष्ट शाखा है। इसके अंतर्गत जनसंख्या से संबंधित विभिन्न पहलुओं की विशद् चर्चा की गई है। जिसके अंतर्गत जनसंख्या के विभिन्न पहलुओं को दो विशिष्ट भेदों में वर्गीकृत किया गया है। विकसित देशों की जनसंख्या व विकासशील देशों की जनसंख्या। दोनों वर्ग के जनांकिकीय संक्रमणों में पर्याप्त विभेद है। वस्तुतः यह विभेद गत्यात्मक है तथा समय के साथ परिवर्तित होते आ रहे हैं। यह विभेद आधुनिक काल की देन ....
Question : केन्द्रीय स्थान सोपान के प्रकार्यात्मक आधारों का एक विवरण प्रस्तुत कीजिए।
(2007)
Answer : केन्द्रीय स्थान वह बस्ती है, जो चारों ओर फैले पृष्ठ प्रदेश के लिए सामाजिक-आर्थिक प्रकार के विभिन्न कार्यों का आवश्यक रूप से एक संग्रह केन्द्र है। केन्द्रीय स्थान केवल जनसंख्या का समूह ही नहीं है, बल्कि यह दुकानों, व्यापारों व सेवाओं का संग्रह। है।
केन्द्रीय स्थान वह बस्ती है जो अपने कार्यों द्वारा यह बस्ती अपने समीपवर्ती क्षेत्र की सेवा करती है। जिन कार्यो द्वारा अपने समीपवर्ती क्षेत्र की सेवा करती है, उन्हें केन्द्रीय कार्य कहा ....
Question : धारणीय विकास की संकल्पना को स्पष्ट कीजिए और कृषि विकास के लिए एक मॉडल को प्रस्तावित कीजिए।
(2007)
Answer : धरातलीय विकास के अंतगर्त उन कार्यक्रमों को सम्मलित किया जाता है, जो पर्यावरण के आधारभूत गुणों को बिना विचलित किए हुए विकास कार्यक्रमों द्वारा अधिवासीय जनसंख्या को अनुकूलतम संतुष्टि प्रदान करे। अनुकूलतम संतुष्टि का तात्पर्य संतुष्टीकरण के उस स्तर से है जिसके आगे अधिकतम संतुष्टीकरण की अवधारणा विकसित होती है और अधिकतम संतुष्टीकरण के एवज में पर्यावरण का अवनयन प्रारंभ होने लगता है। अतः धारणीय विकास वह संदर्भ बिन्दु है जिसके आगे तकनीकी, पूंजी, कुशल ....
Question : संधृत विकास
(2006)
Answer : विगत शताब्दी में जनसंख्या विस्फोट तथा उपभोक्ता वादी संस्कृति के कारण संसाधनों पर दबाव में काफी वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप एक ओर संसाधनों के विलोपन की आशंका उत्पन्न हुई है तो दूसरी ओर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हुई है। उदाहरण के लिए ऐसी आशंका है कि खनिज तेल का भंडार 40-50 वर्षों में तथा कोयला 150-200 वर्षों में समाप्त हो जाएगा। उद्योगों तथा वाहनों से निकालने वाले धुओं के कारण वायु प्रदूषण हो ....
Question : वैश्विक पारिस्थितिक असंतुलनों एवं उनके प्रबंधन पर चर्चा कीजिए।
(2006)
Answer : आदिम मानव पारिस्थितक तंत्र के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन व्यतीत करता था। सांस्कृतिक विकास के साथ-साथ पारिस्थितिक तंत्र में मानव का हस्तक्षेप बढ़ता गया, जिसके फलस्वरूप पारिस्थितिक असंतुलन की समस्या उत्पन्न हुई है। पारिस्थितिक असंतुलन के लिए मुख्यतः निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं।
उपर्युक्त कारकों के फलस्वरूप स्थलमंडल, जलमंडल एवं वायुमंडल का प्रदूषण हुआ है। अवैज्ञानिक कृषि के कारण मृदा अपरदन की ....
Question : विश्व स्तरीय पर्यावरणीय प्रदूषण की प्रमुख समस्याओं का निरुपण कीजिए तथा उन पर नियंत्रण के उपाय भी सुझाइए।
(2005)
Answer : पर्यावरण प्रदूषण की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है, फिर भी अमेरिकी राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (1966) के अनुसार ‘प्रदूषण जलवायु या भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में होने वाला कोई भी अवांछनीय परिवर्तन है, जिससे मानव, अन्य जीवों, औद्योगिक प्रक्रियाओं या सांस्कृतिक तत्व तथा प्राकृतिक संसाधनों को कोई हानि हो या हानि होने की संभावना हो।’
संयुक्त राष्ट्र के मानव पर्यावरण सम्मेलन में प्रदूषण की परिभाषा निम्नवत दी गई है- ‘प्रदूषक वे सभी पदार्थ और ....
Question : भूमंडलीय तापन के प्रभाव पृथ्वी के एक भाग से दूसरे भाग के बीच किस प्रकार से भिन्न होंगे? एक तर्कयुक्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
(2004)
Answer : वायुमंडल में मानव-जनित कार्बन डाइऑक्साइड के आवरण प्रभाव (blanketting effect) के कारण पृथ्वी की सतह के प्रगामी तापन को भूमंडलीय तापन कहते हैं। जिस प्रक्रिया द्वारा भूमंडलीय तापन होता है उसे हरितगृह प्रभाव (Greenhouse Effect) कहा जाता है।
पृथ्वी के संदर्भ में जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड तथा कुछ अन्य गैसें हरितगृह की तरह व्यवहार करती हैं क्योंकि ये सौर्यिक विकिरण को धरातल तक पहुंचने में कोई बाधा उपस्थित नहीं करती हैं परंतु पृथ्वी से होने वाले बर्हिगामी ....
Question : पर्यावरण प्रदूषण।
(2003)
Answer : पर्यावरण दो शब्दों ‘परि’ तथा ‘आवरण’ के संयोग से बना है, जिसका अर्थ है चारों ओर का आवरण। यह पृथ्वी पर पाये जाने वाले जीवधारियों के परितः वह आवरण है जिसका जीवधारियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है तथा साथ ही स्वयं जीवधारियों की गतिविधियों के कारण प्रभावित होता रहता है।
सामान्यतः पर्यावरण के विभिन्न घटक एक निश्चित मात्र तथा अनुपात में होते हैं तथा विभिन्न घटकों के मध्य साम्य बना रहता है। विशिष्ट परिस्थितियों में पर्यावरण ....
Question : एक पारिस्थितिक तंत्र के रूप में जीवमंडल की संकल्पना पर विस्तार से लिखिए।
(2002)
Answer : वस्तुओं के सम्मुच्चय को तंत्र कहा जाता है, जिसके अन्तर्गत एक वस्तु का दूसरे वस्तु से सम्बन्ध तथा उनके वैयक्तिक गुणों का अध्ययन किया जाता है। तंत्र वस्तुओं या विचारों का एक गठित समुच्चय होता है। ये (तंत्र) ऐसे संघटकों अथवा विचारों से मिलकर बनते हैं जिनमें आपस में दृश्य संबंध होते हैं तथा ये एक साथ निश्चित प्रणाली के तहत कार्यशील होते हैं। पारिस्थितिक तंत्र नामावली का सर्वप्रथम प्रयोग ए.जी. टान्सली द्वारा 1935 में ....
Question : पास्थितिकी तंत्र की संकल्पना, घटकों तथा कार्य प्रणाली की विवेचना कीजिए।
(2001)
Answer : पारिस्थितिकी वह विज्ञान है, जो किसी क्षेत्र में रहने वाले विभिन्न जीवों के परस्पर संबंधों एवं भौतिक पर्यावरण से उनके संबंधों का अध्ययन करता है। पौधे, जंतु एवं अन्य जीव तथा भौतिक पर्यावरण एक साथ मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं। अतः यह कहा जा सकता है कि पारिस्थितिक तंत्र का तात्पर्य उस भौगोलिक परिस्थिति से है जिसमें जैविक घटक एवं अजैविक घटक अंतर-आकर्षित होकर एक नवीन परिस्थिति का निर्माण करते हैं। ओडम का ....
Question : पर्यावरणीय निम्नीकरण के कारणों और परिणामों पर चर्चा कीजिए और संबंधित संरक्षण उपायों पर प्रकाश डालिए।
(2000)
Answer : पर्यावरण पृथ्वी पर स्थित जीवनदायिनी तंत्र के अजैविक या भौतिक (भूमि, जल, वायु) तथा जैविक (पादप व जन्तु जिसमें मानव भी शामिल है) घटकों को सम्मिलित करता है। पर्यावरण निम्नीकरण से तात्पर्य है, भौतिक घटकों के स्तर में जैविक प्रक्रियाओं, मुख्यतः मानवीय क्रियाकलापों द्वारा गिरावट इस स्तर तक लाया जाना कि वो पर्यावरण के स्वतः नियामक तंत्र द्वारा ठीक न हो सके। दूसरे शब्दों में, पर्यावरणीय निम्नीकरण का मतलब है- मानवीय हस्तक्षेप द्वारा पर्यावरण मूलभूत ....
Question : निर्वहनीय विकास के प्रयोजन के लिए एक पारिस्थितिक तंत्र के रूप में ‘जल विभाजक’ की प्रासंगिकता की चर्चा कीजिये।
(1999)
Answer : विगत वर्षों में जहां एक तरफ मानव ने अभूतपूर्व विकास किया है, वहीं दूसरी ओर इस प्रक्रिया द्वारा उसने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। आजकल निर्वहनीय विकास की अवधारणा पूरी जोर पकड़ती जा रही है। आर्थिक नियोजक, नियोजन के लिए एक ऐसे पारिस्थितिक तंत्र की तलाश में हैं, जो विकास को वांछित दिशा देने के साथ-साथ पर्यावरण विकास एवं संरक्षण में भी सहायक हो। भारत की नौवीं योजना में ‘जल विभाजक’ को ही नियोजन ....