Question : विभिन्न प्रकार के पेलैजिक निक्षेपों की विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए।
(2015)
Answer : पेलैजिक निक्षेप गहन सागरीय क्षेत्रें में प्राप्त होते हैं जो ऊज कहलाते हैं एवं पंक के रूप में पाए जाते हैं। इनकी उत्पत्ति जैव रासायनिक प्रक्रियाओं, विघटन, अवशोषण तथा उत्सर्जन द्वारा होता है।
पेलैजिक मुख्यतः चूनायुक्त एवं सिलिकायुक्त होते हैं। चूनायुक्त पेलैजिक ग्लोविजेरिना एवं टेरोपोडा प्रकार का होता है। ग्लोबिजेरिना एक अति सूक्ष्म जीव हैं जो कि जोरोमिनीफेरा वर्ग का प्राणली है। इसमें 60 प्रतिशत तक कैल्शियम प्राप्त होता है। इसके अंतर्गत ग्लाकोनाइट नामक खनिज प्राप्त ....
Question : सारगैसो सागर और लैगून की उत्पत्ति तथा प्रकृति को सुस्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : उत्तरी आन्ध्र महासागर में उत्तरी विषुवत रेखीय, गल्फस्ट्रीम तथा कनारी धारा एक चक्रीय प्रवाह मार्ग बताया जाता है जिस कारण से इसके अंदर का जल शांत तथा स्थिर हो जाता है।
तथा सारगैसो सागर का क्षेत्र पछुवा तथा व्यापारिक पवनों के संक्रमण क्षेत्र में स्थित है जहां प्रतिचक्रवातीय वायु संचरण के कारण कमजोर हवाएं मन्द गति से चलती हैं जिसके कारण अंदर के जल का बाहरी सागर के साथ मिश्रण नहीं हो पाता।
इसमें उच्च तापमान, अत्यधिक ....
Question : समुद्री प्रदूषण के कारणों और परिणामों का एक समालोचनात्मक विवरण दीजिए।
(2014)
Answer : समुद्री तथा महासागरीय जल पृथ्वी पर पाये जाने वाले जल का सबसे बड़ा भाग होता है। कुछ दशकों से ये देखा गया है, कि मानव के अत्यधिक क्रियाकलापों ने सागरीय जीवन या सागरीय पारिस्थितिकी तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसके निम्नवत कारण हैं-
Question : क्लाइव विल्किन्सन रिपोर्ट के संदर्भ में प्रवाल विरंजन (कोरल ब्लीचिंग) पर हाल के प्रेक्षणों का एक विवरण दीजिए।
(2014)
Answer : समुद्र में पाए जाने वाले हरे रंग के शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा वृद्धि करते हैं। जब सागरीय जल के तापमान में 1% से अधिक वृद्धि हो जाती है तो इन शैवालों का रंग सफेद हो जाता है तथा ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते परिणामस्वरूप इन शैवालों के अभाव में प्रवालों (Coral Reafs) को भोजन नहीं मिल पाता तथा वे मरने लगते हैं। इसे ही प्रवाल विरंजन कहते हैं।
क्लाइव विल्किंसन की प्रवाल भित्ति की दशा ....
Question : निम्नतम तल से क्या तात्पर्य है। निम्नतम तल के प्रकारों को स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : नदियां जिस स्तर तक अधिकतम निम्नीकरण कर सकती हैं। उसे बेस लेवल या निम्नतम तल कहा जाता है। इसकी संकल्पना सर्वप्रथम जे.के. पॉवेल ने प्रस्तुत की थी। जे.डब्लू.पॉवेल के अनुसार समुद्र ग्रान्ड (सर्वोच्च) बेस लेवल है जिससे अधिक कोई भी नदी निम्नीकरण नहीं कर सकती।
सर्वोच्च बेस लेवल के अलावा स्थानिक एवं अस्थाई बेस लेवल भी होते हैं।
Question : अपतट ध्वनिक अध्ययन ने समुद्र अधस्तल विस्तारण की संकल्पना के विकास में सहायता प्रदान की थी। स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : अपतल ध्वनिक अध्ययन के द्वारा समुद्र की अंतः गहराइयों के अध्ययन में काफी सुविधाएं मिली हैं। इसने नई खोजों की संभावनाओं के नये आयाम खोले हैं, ऊष्ण कटिबंधीय समुद्रों के तापमान के कारण इनमें एक स्थाई स्तर बन जाता है, जिसके कारण ध्वनि ऊर्जा बिना नष्ट हुए काफी दूर तक गमन कर सकती है। इस स्तर में अन्तः जलीय श्रवणीय तकनीक (हाइड्रोफोन) की मदद से ऐसी ध्वनियों को भी सुना जा सकता है जो सैकड़ों-हजारों ....
Question : प्रवाल भित्तियों के विरचन पर अवतलन और हिमानी नियंत्रण सिद्धांतों की तुलना कीजिए।
(2013)
Answer : प्रवाल भित्तियों का निर्माण सागरीय जीव मूंगे या कोरल पालिप के अस्थि पंजरों के समेकन तथा संयोजन द्वारा होता है। प्रवाल भित्तियों के निर्माण के अनेक सिद्धांत प्रस्तुत किये गये हैं जिनमें से डार्विन का अवतलन सिद्धांत तथा डेली का हिमानी नियंत्रण सिद्धांत प्रमुख है।

1. डार्विन का अवतलन सिद्धांत
डार्विन के अनुसार, सर्वप्रथम आदर्श चबूतरे के साथ प्रवाल का आविर्भाव होता है ....
Question : प्रवाल भित्ति के विकास में प्रवाल द्वीप वलय एक चुनौतीपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत करता है? विवेचना कीजिए।
(2012)
Answer : अन्तः सागरीय रूपों में प्रवाल भित्तियां तथा प्रवाल द्वीप वलय अलग महत्व रखते हैं। इनका निर्माण सागरीय जीव मूंगे या कोरल पालिप के अस्थिपंजरों के समेकन तथा संयोजन द्वारा होता है। प्रवाल भित्ति का निर्माण 25° उत्तर से 25° दक्षिण अक्षांशों के मध्य किसी द्वीप या तट के सहारे या यथोचित गहराई पर स्थित अन्तः सागरीय चबूतरों पर होता है। प्रवाल जल के बाहर जीवित नहीं रह सकता है, अतः प्रवाल भित्ति सदैव या तो ....
Question : वितलीय मैदान के ऊपर समुद्री जल की भिन्न परत।
(2012)
Answer : महासागरों के तली में विस्तृत फैले हुए मैदानों से ऊपरी सतह तक समुद्री जल के कई परत पाए जाते हैं। समुद्रीजल के भिन्न परत समुद्री जल के तापमान, घनत्व, लवणता इत्यादि में भिन्नता के कारण उत्पन्न होते हैं।
लम्बवत् रूप से ऊपर या नीचे जाने पर तापमान व घनत्व के मान में परिवर्तन होता है। सागरीय जल में घनत्व की दृष्टि से ऊपरी सतह से तली तक तीन परतें या स्तर होती हैः
Question : महासागर जल के तापमान लवणता और घनत्व के अंतर महासागर जल के परिसंचरण के प्रधान कारण हैं। विस्तार से स्पष्ट करें?
(2011)
Answer : महासागरीय जल के निश्चित दिशा में क्षैतिज प्रवाह को महासागरीय धारा कहते हैं। धाराएं धरातलीय भाग पर प्रवाहित होने वाली नदियों के समान ही होती हैं। सागरीय गतियों में धाराएं सर्वाधिक शक्तिशाली होती हैं।
महासागरीय जल का परिसंचरण कई कारकों के सम्मिलित प्रभाव से होता है। इनमें से कुछ कारक महासागरीय जल की विभिन्न विशेषताओं से सम्बन्धित होते हैं, जबकि कुछ कारक पृथ्वी को परिभ्रमण क्रिया एवं उसके गुरुत्वाकर्षण बल आदि से।
इन सभी कारकों का सम्मिलित ....
Question : हिंद महासागर में लवणता प्रतिरूप
(2011)
Answer : लवणता सागरीय संसाधन का एक प्रमुख घटक है। सागरीय जल के भार एवं उसमें घुले हुए पदार्थों के भार के अनुपात को सागरीय लवणता कहते हैं। महासागरों की औसत सागरीय लवणता 35%॰ है। अन्य महासागरों के संदर्भ में अटलांटिक महासागर में सामान्य लवणता 37.8%॰ तथा प्रशांत महासागर में 36.3%॰ एवं हिंद महासागर में 34.8%॰ है।
हिंद महासागर में लवणता प्रतिरूप का अध्ययन क्षैतिज एवं लंबवत् दो प्रकार से की जा सकती है। क्षैतिज प्रतिरूप में अक्षांश ....
Question : अनुगभीर संख्यिकी की वैज्ञानिकतः ठोस विधियों को स्पष्ट कीजिए और अटलांटिक महासागर की तली स्थलाकृति का एक विवरण प्रस्तुत कीजिये।
(2010)
Answer : बैयोमैट्री किसी सागरीय, झील या नदी तली की संरचना का इकोसाउंडर तकनीकी की सहायता से अध्ययन करता है। इसके द्वारा सागर तक की गहराई, परतों के घनत्व का अन्तर, तापान्तर आदि का अध्ययन करके कंप्यूटर की मदद से सागर तट का एक चार्ट तैयार किया जाता है और फिर उसका मैप बनाया जाता है।
इकोसाउंडर तकनीकी 1940 के बाद काफी प्रचलित हुई। इसके अन्तर्गत एक बोट पर लगे उपकरणों की मदद से साउण्ड वेब को 90 ....
Question : महासागरीय निक्षेप
(2010)
Answer : वे सभी असंगठित पदार्थ, जो महासागरीय नित्तल पर एकत्रित रहते हैं, महासागरीय निक्षेप कहलाते हैं। यदि यह जमाव किसी कारण संगठित होकर कठोर हो जाये तो महासागरीय निक्षेप नहीं कहलाता है। इस प्रकार इसमें असंगठित शैल, कंकड़, पत्थर, मिट्टी पंक, जीव जंतुओं के अस्थि पंजर, तथा वनस्पति के निक्षेप सम्मिलित किये जाते हैं।
इनका विकास निम्नलिखित चार स्त्रोतों से होता है। पहला स्थलजनित पदार्थ- स्थालीय भागों में अनाच्छादन के कारक जैसे- नदियां, हिमनदियां, पवन, भूमिगत जल ....
Question : (क) हिंद महासागर के महाद्वीपीय शेल्फ के संसाधनों के आर्थिक महत्व का परीक्षण कीजिए।
(ख) समुद्री ऊष्मा बजट और महासागरीय परिसंचरण तंत्र पर टिप्पणी कीजिए।
(2009)
Answer : (क): हिन्द महासागर क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का तीसरा बड़ा महासागर है। महासागरों के कुछ क्षेत्रफल का लगभग 20 प्रतिशत भाग इसके अंतर्गत सम्मिलित किया जाता है। उत्तर में भारत, पाकिस्तान, ईरान, पूरब में आस्ट्रेलिया, इण्डोनेशिया का सुण्डा द्वीप तथा मलाया प्रायद्वीप, पश्चिम में अरब प्रायद्वीप इसकी सीमा निर्धारित करते हैं।
हिन्द महासागर के मग्न तटों की चौड़ाई में ....
Question : समुद्र-अधस्तल विस्तारण सिद्वान्त (थियोरी)
(2008)
Answer : समुद्र अधःस्थल विस्तारण सिद्धांत की संकल्पना का प्रतिपादन सर्वप्रथम प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हेरी हेस ने 1960 में किया। हेस की संकल्पना सागर भू-वैज्ञानिकों तथा भू-भौतिकीविदों के प्रारंभिक कार्यों पर आधारित थी। इसके अनुसार मध्य महासागरीय कटक मैंटिल से उठने वाली संवहन तरंगों के उपर स्थित है। इस कटक के सहारे नये पदार्थों (लावा) का निर्माण होता है तथा इस तरह से नवनिर्मित कटक के दोनों ओर सरकती जाती है। इस प्रकार सागर नित्तल में ....
Question : प्रवाल भित्ति विरचना के लिए आदर्श दशाओं का वर्णन कीजिए और प्रवाल भित्ति विरचना के हिमनदीय नियंत्रण सिद्धांत (थियोरी) पर चर्चा किजिए।
(2008)
Answer : प्रवाल भित्तियों का निर्माण प्रवालों या पॉलिपों के अस्थि-पंजरों के समेकन एवं संयोजन द्वारा होता है। ये प्रवाल सामान्यतः उष्ण कटिबंधीय सागरों में अधिकतम 200 से 300 फीट की गहराई तक पाये जाते हैं। जब प्रवाल भित्तियों का निर्माण सागर तट से सट कर होता है तो ‘तटीय प्रवाल भित्ति’ का निर्माण होता है। तट से दूर हटकर विकसित प्रवाल भित्ति ‘अवरोधक प्रवाल भित्ति’ कहलाती है। किसी द्वीप या अंतः सागरीय चबूतरों के चारों ओर ....
Question : समुद्र तल के यूस्टैटिक परिवर्तन
(2007)
Answer : समुद्र तल में परिवर्तन से तात्पर्य औसत सागर तल के उच्चावच में परिवर्तन से है। सागर सतह का औसत तल तथा आंकड़े, जो एक लम्बी समय अवधि में ज्वारीय दोलन के निरंतर रिकार्ड श्रृंखला के द्वारा सागर में परिवर्तन मापा जाता है। वस्तुतः समुद्रतल में परिवर्तन सागर तल में सापेक्षिक परिवर्तन के रूप में जाना जाता है। समुद्र तल में सापेक्षिक उठाव के दौरान या तो भूमि या सागर सतह उठाव या निमज्जन के अंतर्गत ....
Question : महासागरीय निक्षेपों के वर्गीकरण के लिए विभिन्न आधारों पर चर्चा कीजिए और महासागरों के अंबुधी निक्षेपों का एक विस्तृत विवरण प्रस्तुत कीजिए।
(2007)
Answer : महासागरीय तल पर अवसादों के जमाव को ‘महासागरीय निक्षेप’ कहते हैं। ये अवसाद मुख्यतः असंगठित होते हैं, ये अवसाद कई प्रकार के होते हैं तथा ये कई स्रोतों से प्राप्त होते हैं। महासागरीय निक्षेपों का वर्गीकरण निम्न आधारों पर किया गया हैः
(अ) अवसाद के स्रोतों के आधार पर वर्गीकरणः महासागर में पाये जाने वाले अवसादों के आधार पर महासागरीय निक्षेपों को मुख्यतः चार वर्गों में विभाजित किया गया हैः
1. स्थलीय निक्षेपः सागर तल में निक्षेपित ....
Question : उत्तरी अटलांटिक महासागर की जलधाराएं
(2006)
Answer : उत्तरी अटलांटिक महासागर की जलधाराओं को निम्न रूपों में विभाजित किया जा सकता है।
उत्तरी अटलांटिक महासागर की जलधाराएं
प्रचलित व्यापरिक पवन के प्रभाव से विषुवत रेखा के उत्तर एवं दक्षिण का जल पश्चिम की ओर प्रवाहित होता है, जिसके फलस्वरूप क्रमशः उत्तरी विषुवतीय तथा दक्षिणी विषुवतीय जलधारा की उत्पत्ति होती है। इस प्रकार से असंतुलित जलस्तर का संतुलन वापस लाने हेतु इन दोनों जलधाराओं ....
Question : अंबुधी निक्षेप
(2004)
Answer : इसके अंतर्गत उन पदार्थों को रखा गया है जो जैविक तो है किंतु तरल और कीचड़ की अवस्था में हैं। इसे ऊज (Ooze) भी कहा गया है। यह सूखने पर पाउडर जैसा होता है, इसे भी दो वर्गों में बांटा जाता हैः
(अ) चूना प्रधान ऊजः जानवरों के अवशेषों के निक्षेप से जो कीचड़ बनता है, उसे चूना प्रधान ऊज कहते हैं।
(ब) सिलिका प्रधान ऊजः वनस्पतियों के अवशेषों के निक्षेप से बनने वाले कीचड़ को सिलिका ....
Question : मध्य-अटलांटिक कटक पर उसकी उत्पति, विस्तार और उच्चावच की दृष्टि से चर्चा कीजिए।
(2004)
Answer : अटलांटिक महासागर जो पश्चिम में उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका तथा पूर्व में यूरोप और अफ्रीका के मध्य स्थित है, पर सभी महासागरों की अपेक्षा सबसे ज्यादा अध्ययन हुआ है, जिसका श्रेय अटलांटिक महासागर में स्थित मध्य महासागरीय कटक तंत्र पर जाता है। मध्य अटलांटिक कटक की खोज सबसे पहले की गयी थी तथा यह सभी कटकों में सबसे ज्यादा विस्तृत एवं महत्वपूर्ण है। मध्य अटलांटिक कटक की उत्पति एवं उच्चावच के अध्ययन ने प्लेट टेक्टानिकस ....
Question : हिंद महासागर के तलीय उच्चावच का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
(2003)
Answer : हिंद महासागर क्षेत्रफल में प्रशांत महासागर तथा आंध्र महासागर से छोटा है। परंतु यह चारों ओर से महाद्वीपीय भाग से घिरा हुआ है। द. में अंटार्कटिका के पास इसका संबंध प्रशांत महासागर तथा आंध्र महासागर से हो जाता है। महासागर की औसत गहराई 4000 मीटर के आस-पास है। हिंद महासागर के तट का अधिकांश भाग गोंडवाना लैंड के ब्लॉक पर्वतों से निर्मित होने के कारण ठोस तथा सघन हो गया है। पूर्वी द्वीप समूह के ....
Question : प्रवाल भित्तियों की रचना।
(2001)
Answer : प्रवाल भित्तियों का निर्माण प्रवालों या पॉलिपों के अस्थि-पंजरों के समेकन एवं संयोजन द्वारा होता है। ये प्रवाल सामान्यतः उष्ण कटिबंधीय सागरों में अधिकतम 200 से 300 फीट की गहराई तक पाये जाते हैं। जब प्रवाल भित्तियों का निर्माण सागर तट से सट कर होता है तो ‘तटीय प्रवाल भित्ति’ का निर्माण होता है। तट से दूर हटकर विकसित प्रवाल भित्ति ‘अवरोधक प्रवाल भित्ति’ कहलाती है। किसी द्वीप या अंतः सागरीय चबूतरों के चारों ओर ....
Question : अंतःसमुद्री कैनियन
(1999)
Answer : स्थल की ही भांति महाद्वीपीय मग्न तट तथा मग्न ढाल पर भी खड़ी दीवार युक्त गहरी एवं संकरी घाटियाँ पायी जाती हैं, जिन्हें ‘कैनियन’ कहते हैं। ये कैनियन स्थलीय गंभीर खड्डों से अधिक हरी होती हैं। इनके अनुदैर्ध्य परिच्छेदिकाओं में पर्याप्त अन्तर होता है तथा इनका मार्ग विसर्प युक्त टेढ़ा-मेढ़ा होता है। इनकी औसत ढाल 1.7% होती है। नदियों के मुहाने पर स्थित कैनियन अधिक लम्बी परन्तु कम गहरी होती है। इन कैनियनों में रेत, ....
Question : अटलांटिक महासागर के अंतःसमुद्री उच्चावच को स्पष्ट कीजिए और उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समझाइए।
(1998)
Answer : पश्चिम में उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका व पूर्व में यूरोप व अफ्रीका के मध्य ‘S’ अक्षर के आकार वाले अटलांटिक महासागर में महासागरीय तली का रूप महाद्वीपीय किनारे से लेकर अधिक गहराई तक काफी भिन्न है। इसके ‘S’ आकार से प्रमाणित होता है कि इसकी रचना में प्लेट विवर्तन का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। अटलांटिक महासागर के नितल में निम्न चार प्रमुख रूप देखने को मिलते हैंः