Question : वायुमंडल के उत्तर-दक्षिणी परिसंचरण को और विश्व की जलवायु में उसके महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : हवाओं का देशांतरीय संचार उत्तर-दक्षिणी परिसंचरण कहलाता है। यह संचार एक कोशिका के रूप में होता है। इसमें धरातलीय संचार उच्चदाब से निम्नदाब की ओर होता है।
इस प्रक्रिया में तीन कोशिकाओं का निर्माण होता है। जिसके कारण हैं:- विषुवतीय रेखीय प्रदेश से ध्रुवों की ओर कोणीय संवेग का स्थानांतरण एवं अक्षांशीय उष्मा एवं आर्द्रता के संतुलन को कायम करने का प्रयास। सर्वप्रथम हेडली ने कोशिकीय संचरण को चिन्हित किया। प्रत्येक देशांतर पर हवाओं की तीन ....
Question : कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के आधार की विवेचना कीजिए। ‘CS’ प्रकार की जलवायु के प्रमुख अभिलक्षणों को स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : कोपेन का जलवायु वर्गीकरण मात्रत्मक एवं आनुभाविक हैं। यह वर्गीकरण प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित है। सर्वप्रथम 1900 ई. में वनस्पति-प्रदेशों को आधार मानकर इन्होंने जलवायु का वर्गीकरण किया। कोपेन के अनुसार किसी प्रदेश की वनस्पति वहां की जलवायंत्रिक दशा का प्रतिरूप होती है। तापमान, सापेक्षिक आर्द्रता, वर्षण आदि वनस्पति के प्रकार में अभिव्यक्त होता है। किसी भी प्रदेश के जलवायु का प्रतिनिधित्व वहां की वनस्पति करती है। अतः वनस्पति सीमा के आधार पर जलवायु प्रदेशों ....
Question : संभाव्य वाष्पत-वाष्पोत्सर्जन क्या है? स्पष्ट कीजिए कि किसी क्षेत्र के जल-संतुलन का आकलन करने में इसका किस प्रकार उपयोग किया जाता है?
(2015)
Answer : किसी आदर्श दशा में संभावित जल के वाष्पत को संभाव्य वाष्पत-वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है। पहले प्रकार में यह उन स्थानों पर हो सकता है जहां वनस्पतियों का पूर्ण आवरण विद्यमान हो एवं खुले स्थान का अभाव हो। दूसरे प्रकार में, जहां पर्याप्त जल आपूर्ति होती है एवं मिट्टी में हमेशा नमी बनी रहती है। संभाव्य वाष्पत-वाष्पोत्सर्जन से पता चलता है कि किसी स्थान विशेष पर कितनी जल की आवश्यकता है।
जल-संतुलन से तात्पर्य है, किसी समय ....
Question : विवेचना कीजिए कि वाताग्रजनन किस प्रकार मौसम अस्थिरता में योगदान करता है।
(2015)
Answer : क्षोभमंडल में ऊष्मा एवं आर्द्रता का लम्बवत् एवं क्षैतिज वितरण असमान है अतः वायु-राशियां उत्पन्न होती हैं। ये वायु गतियां ऊष्मा एवं आर्द्रता का परिवहन अधिशेष क्षेत्र से कमी वाले क्षेत्र में करती है। वायु के घनत्व, दाब एवं ताप में अंतर होता है। वायु की स्थिति ताप स्थैतिक संतुलन को कायम करने की होती है और इसी क्रम में उत्पन्न अस्थिरता को वायुमंडली अस्थिरता कहते हैं। अस्थिरता के समय वायु राशि ऊपर की ओर ....
Question : तडित्-झंझा (थन्डरस्टॉर्म) की उत्पत्ति तथा विकास का सोदाहरण वर्णन कीजिए।
(2014)
Answer : तडि़त-झंझा ऐेसे तूफान या झंझावात होते हैं, जिनमें ऊपर की ओर हवाएं चलती हैं तथा चमक-गरज के साथ मूसलाधार बारिश होती है। इस प्रकार की वर्षा को बादल का फटना (Cloud Burst) कहते हैं। तडि़त-झंझा की उत्पत्ति तथा विकास 3 अवस्थाओं से होकर गुजरता है-
Question : ‘सिरोको’ और ‘मिस्ट्रल’ के प्रमुख लक्षणों की विवेचना कीजिए।
(2014)
Answer : सिरोको सहारा रेगिस्तान से चलकर भू-मध्य सागर होते हुए उत्तरी दिशा में इटली स्पेन तक पहुंचने वाली एक स्थानीय पवन है। यह पवन गर्म, शुष्क तथा विशाल मात्र में सहारा मरुस्थल के लाल रेतकणों से भरी हुयी होती है। यह पवन भू-मध्य सागर से होते हुए जाती है जिससे इसमें कुछ नमी की मात्र आ जाती है। दक्षिणी इटली के कुछ भागों में बारिश करती है।
लाल धूलकणों से भरी होने के कारण ये बारिश अपने ....
Question : ओसांक एवं संघनन के विभिन्न रूपों पर चर्चा कीजिए।
(2013)
Answer : जब जल वाष्प, द्रव अथवा ठोस रूपों में परिवर्तित होता है तो इस प्रक्रिया को संघनन कहते हैं। जब जल वाष्प अपने ओसांक बिन्दु अथवा संतृप्त बिन्दु से कम तापमान तक ठण्डा हो जाता है तो वह द्रव अथवा ठोस रूप में परिवर्तित हो जाती हैं। संघनन के अनेक रूप हैं जैसे- ओसांक, बादल, कोहरा, हिम, पाला, धुंध आदि।
ओसांकः वह तापमान जिस पर असंतृप्त वायु ठण्डी होकर संतृप्त हो जाये उसे ओसांक कहा जाता है।
बादलः ....
Question : झंझा महोर्मियों और सरतल दोलनों के बीच विभेदन कीजिए।
(2013)
Answer : झंझा महोर्मियों (Storm Surges) : जल के खुले सतहों पर हवाओं (तूफानों) के प्रभाव के फलस्वरूप जल के स्तर में होने वाले अल्पकालिक वृद्धि को स्टॉर्म सर्ज कहा जाता है। आंधी अथवा प्रचण्ड हवाओं के कारण बंद जल तंत्रें के तटवर्ती इलाकों के जल स्तर में वृद्धि हो जाती है।
वास्तव में तीव्र हवाओं के प्रभाव के कारण सतही जल के हवा की दिशा की ओर वाले तट में जमा होने के कारण झंझामहोर्मी (स्टॉर्म सर्ज) ....
Question : उपयुक्त उदाहरणों सहित, किसी क्षेत्र की जलवायु पर स्थानीय पवनों के प्रभाव को उजागर कीजिए।
(2013)
Answer : स्थानिक कारकों के फलस्वरूप एक सीमित क्षेत्र में चलने वाली तृतीय श्रेणी के प्रचलित पवनों को स्थानिक पवन कहते हैं।
स्थानिक पवनों की उत्पत्ति का मूल कारण वायु मण्डल में होने वाले वायुदाब विसंगतियां हैं, तापक्रम विभिन्नता के फलस्वरूप वायुदाब में परिवर्तन होता है, जिसके फलस्वरूप स्थानिक पवनें उत्पन्न होती हैं।
समुद्री एवं स्थलीय समीर, पर्वत एवं घाटी समीर को स्थानिक पवनों की श्रेणी में रखा जा सकता है। ये पवनें स्थानीय जलवायु को प्रभावित करती हैं। ....
Question : वायु राशि को विभक्त कीजिए और भू- मण्डलीय जलवायु पर CP वायुराशि के प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
(2012)
Answer : वायुमण्डल के उस विस्तृत तथा घने भाग को वायु राशि कहते हैं, जिसमें विभिन्न ऊंचाई पर क्षैतिज रूप में तापमान तथा आर्द्रता संबंधी समानताएं होती हैं, अर्थात् वायुराशि वायु का ऐसा विस्तृत पुंज है, जिसके भौतिक लक्षण विशेष रूप से तापमान व आर्द्रता, क्षैतिज तल में न्यूनाधिक मात्र में समान होता है। वायुराशि का आविर्भाव उस समय होता है जब विस्तृत समतल धरातल पर वायुमण्डल संबंधी दशाएं अपेक्षित समय तक स्थिर रहती हैं ताकि वायु ....
Question : उष्णकटिबंधीय चक्रवात और शीतोष्ण चक्रवात की तुलना कीजिए एवं विपरीतता दर्शाइये।
(2012)
Answer : उष्ण कटिबंधीय चक्रवात और शीतोष्ण कटिबंध चक्रवातों की उत्पत्ति की दशाएं, आकार, संरचना एवं संबंधित मौसम प्रणाली में समानता के साथ-साथ पर्याप्त अंतर भी पाया जाता है। शीतोष्ण एवं उष्ण कटिबंध चक्रवात की संरचना एवं संबंधित मौसम में पाए जाने वाले समानता एवं असमानता को निम्न बिन्दुओं के तहत तुलना कर देखा जा सकता है।
Question : भू-मंडलीय जलवायु पर तुषार मण्डल (क्रायोस्फीयर) का प्रभाव
(2012)
Answer : तुषार मण्डल (क्रायोस्फीयर) से तात्पर्य भूमण्डल पर विस्तृत हिम खण्डों से है। अंटार्कटिका सहित ठण्डे प्रदेशों के हिम क्षेत्र भू-मंडलीय जलवायु पर अपना महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। तुषार मण्डल का भू-मण्डलीय जलवायु पर मिथेन गैस निकलने, सौर विकिरण के अधिक अवशोषण के रूप में होता है, जो वैश्विक तापन या ग्लोबल वार्मिग जैसे समस्या को उत्पन्न करते हैं।
Question : गुजरात कृषि जलवायु प्रदेश में विफल मानसून का प्रभाव
(2012)
Answer : गुजरात कृषि जलवायु प्रदेश के अर्न्तगत गुजरात मैदान एवं पहाड़ी क्षेत्र सम्मिलित हैं। इसमें काठियावाड़ तथा साबरमती और माही नदियों की उपजाऊ घाटियां सम्मिलित हैं। यह एक शुष्क और अर्द्धशुष्क प्रदेश है, जहां वार्षिक वर्षा 50-100 से.मी. जुलाई का तापमान 26-42°Cपाया जाता है। गुजरात कृषि जलवायु प्रदेश के पठारी भागों में रेगड़, तटीय भाग में जलोढ़ और जामनगर के पास लाल और पीली मिट्टीयां पायी जाती हैं। गुजरात कृषि जलवायु प्रदेश में उगायी जाने वाली ....
Question : रौसबी तरंग और जेट प्रवाह
(2011)
Answer : जेट प्रवाह उच्च वायुमंडलीय प्रवाह है जो क्षोभमंडल में पश्चिम से पूर्व की ओर तेज रफ्तार से बहती है। जबकि जेट प्रवाह का विसर्पित या लहरनुमा प्रवाह रौसबी तरंग कहलाता है।
जेट प्रवाह धरातल से 6000-12000 मीटर तक की ऊंचाई के बीच दोनों गोलाद्धों के चारों ओर 20◦ उत्तरार्द्ध एवं दक्षिणी अक्षांशों से ध्रुवों के समीप सालों भर लगातार बहती है। इनमें लंबवत् एवं क्षैतिज पवन अपरुपण होता है तथा इसमें एक से अधिकतम वायु वेग ....
Question : वर्षण के वैश्विक वितरण का एक विवरण प्रस्तुत कीजिए?
(2011)
Answer : वायुमंडल से धरातल पर तरलावस्था अथवा ठोस रूप में जल के गिरने की क्रिया को वषर्ण कहते हैं। जब वायुमंडलीय आर्द्र हवा संघनित होकर सूक्ष्म जलकणों में परिवर्तित हो जाती है तो उसे बादल कहते हैं। कालांतर में ये सूक्ष्म जल कण या हिम कण धरातल पर जल बूंद के रूप में गिरते हैं, तो उसे वर्षण कहते हैं।
वर्षण के कुल पांच प्रकार हैं- वर्षा, बूंदाबूंदी, हिमपात, स्लीट एवं ओला। यह वर्षण की क्रिया तीन ....
Question : समकालीन वैश्विक जलवायु परिवर्तन एक मानवोद्भवी परिघटना है। चर्चा करें।
(2011)
Answer : जलवायु के घटकों तथा ताप, दाब एल्बीडो का दर, पवन की दिशा, पवन की गति, वर्षण प्रक्रिया में परिवर्तन आदि के औसत में सम्मिलित रूप से परिवर्त्तन हो, तो इसे जलवायु परितर्वन कहते हैं। वस्तुतः पृथ्वी तंत्र के अंतगर्त आंतरिक तथा बाह्य प्रक्रियाओं एवं मानवजनित परिवर्तनों के परिणामस्वरूप लंबे समय में होने वाले जलवायु के औसत अवस्था में हुए परिवर्तन को ही जलवायु परिवर्तन कहा जाता है।
अद्यतनः पर्यावरणीय शोध एवं अनुसंधान के अनुसार विशेषतः “United ....
Question : ताप व्युत्क्रमण
(2011)
Answer : सामान्य परिस्थितियों में ऊंचाई के साथ तापमान घटता है। साधारण परिस्थितियों में 165 मीटर की ऊंचाई पर 1°C तापमान कम होता है। जिसे सामान्य ह्रास दर कहते हैं। परंतु कुछ परिस्थितियों में ऊंचाई के साथ तापमान घटने के स्थान पर बढ़ता है। ऊंचाई के साथ तापमान के बढ़ने को तापमान व्युत्क्रमण कहते हैं। स्पष्ट है कि तापमान व्युत्क्रमण की स्थिति में धरातल के समीप ठण्डी वायु तथा ऊपर की और गर्म वायु होती है।
इसके लिये ....
Question : ध्रुवीय वाताग्र किसे कहते हैं? इस वाताग्र के साथ-साथ चक्रवात किस प्रकार पैदा हो जाता है? इससे संबद्ध मौसम दशाओं का वर्णन कीजियें।
(2010)
Answer : ध्रुवीय वाताग्र का संबंध शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात से है। शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति जे. बर्कनीज के ध्रुवीय सीमाग्र सिद्धांत के आधार पर समझी जा सकती है। इस सिद्धांत के अनुसार शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पति दो विभिन्न ताप व आर्द्रता वाली वायुराशियों के विपरीत दिशा से आकार मिलने से होती है।
कम तापमान व आर्द्रता वाली वायुराशि ध्रुवीय क्षेत्र से आती हैं तथा अधिक तापमान व आर्द्रता वाली वायुराशि उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र से आती हैं। ....
Question : वायुमंडलीय आर्द्रता के विभिन्न प्रकारों और उनके संबद्ध रूपों का परीक्षण कीजिये।
(2010)
Answer : वायुमंडल में विद्यमान जलवाष्प की मात्र को आर्द्रताकहते हैं। यद्यपि वायुमंडल में इसकी मात्र मात्र 4 प्रतिशत तक हीहोती है। फिर भी मौसम व जलवायु के निर्धारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
जलवाष्प की यह मात्र स्थान व समय के अनुसार परिवर्तनशील भी रहती है। स्थल की अपेक्षा सागरों पर वाष्पीकरण अधिक होता है। दोनों गोलार्द्धों में 10° अक्षांशों में महाद्वीपों पर सर्वाधिक वाष्पीकरण होता है, जबकि महासागरों पर सर्वाधिक वाष्पीकरण दोनों गोलार्द्वों में 10°-20° अक्षांशों ....
Question : उष्णकटिबंधीय वायुमंडलीय अस्थिरता
(2009)
Answer : वायुमण्डल की उस अवस्था को, जिसमें उर्ध्वाधर गतियोंके लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं विद्यमान रहतीं, स्थायित्व की संज्ञा प्रदान की जाती है तथा इसके विपरीत स्थिति को अस्थायित्व की दशा कहते हैं। बायर्स के अनुसार, अस्थायित्व उस दशा को कहते हैं, जिसमें उर्ध्वाधर गतियां विद्यमान रहती हैं। उष्णकटिबंधीय वायुमण्डलीय अस्थिरता की दशा में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जबकि पृथक वायु पुंजों एवं वायु तरंगों के स्थान पर वायुमण्डल की सैंकड़ों मीटर मोटी अथवा हजारों ....
Question : मानसून पवनों के यांत्रिकत्व और उद्गम पर चर्चा कीजिए, और मानसून संचरण पर एन नीनो की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
(2008)
Answer : मानसून शब्द मूल रूप से अरबी भाषा के मौसिम शब्द से बना है, जिसका तात्पर्य मौसम से होता है। जिन हवाओं की दिशा ऋतु के अनुसार बदल जाती है, उनको मानसून या मौसमी वायु कहते हैं। मानसून हवाओं की उत्पत्ति केवल उन्हीं क्षेत्रें में संभव है, जहां अयन रेखाओं के पास एक ओर स्थल का विस्तृत भाग हो और दूसरी ओर समुद्र का विस्तृत भाग हो।
अयन रेखाओं के पास ही इन हवाओं की उत्पत्ति का ....
Question : स्थानीय पवनों के विकास पर और स्थानीय मौसम पर उनके प्रभाव पर चर्चा कीजिए और संसार के प्रसिद्ध स्थानीय पवनों के तीन उदाहरण दीजिए?
(2007)
Answer : धरातल पर स्थायी पवनों के अलावा ऐसे भी पवन प्रवाह पाये जाते हैं, जिनकी उत्पत्ति केवल स्थानीय कारणों से होती है तथा जिनके प्रभाव क्षेत्र सीमित होते हैं। ऐसे पवनों को स्थानीय पवन प्रवाह कहा जाता है। कुछ मौसम वैज्ञानिक इन्हें वायुमंडल के तृतीयक परिसंचरण के अंतर्गत मानते हैं। इनकी उत्पत्ति के विभिन्न कारणों में स्थानीय तापान्तर ही सर्वप्रमुख है। इन पवनों की ऊंचाई अधिक नहीं होती है। ऐसे प्रत्येक स्थानीय पवन की निजी विशेषताएं ....
Question : उष्णकटिबंधीय चक्रवात की संरचना एवं संबंधित मौसमी दशाओं का शीतोष्ण चक्रवात की संरचना एवं मौसमी दशाओं के साथ तुलना कीजिए।
(2006)
Answer : चक्रवात चलते-फिरते निम्न वायुदाब के केन्द्र होते हैं जो क्रमशः उच्च दाब की समदाब रेखाओं द्वारा घिरे होते हैं। शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात दोनों गोलार्द्धो में 30° से 65° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के बीच स्थित भू-भाग में उत्पन्न होते हैं। इन क्षेत्रों में अयनवर्ती क्षेत्र की उष्ण एवं आर्द्र वायु राशियां तथा उच्च अक्षांशों की शीत एवं शुष्क वायु राशियां एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं। इसके फलस्वरूप वाताग्र का निर्माण होता है एवं इन ....
Question : कोपेन द्वारा विकसित जलवायु वर्गीकरण प्रणाली के प्रमुख घटकों की विवेचना कीजिए। इसकी विसंगतियों को भी इंगित कीजिए।
(2005)
Answer : ब्लादीमीर कोपेन एक जर्मन जीव वैज्ञानिक था, लेकिन उसने अपने जीवन का अधिकांश भाग जलवायु के अध्ययन में बिताया तथा जलवायु और वनस्पति के अंतर्संबंधों के आधार पर जलवायु वर्गीकरण की योजना प्रस्तुत की। उसकी यह योजना डी. कंडोल (De Condolle) के विश्व वनस्पति मानचित्र पर आधारित थी। यह विभाजन पूर्णतः वनस्पति प्रदेशों के अनुसार ही था, क्योंकि कोपेन का विचार था कि वनस्पति की सीमाएं जलवायु की सीमाओं का निर्धारण करती हैं।
यह जलवायु वर्गीकरण ....
Question : संभाव्य वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन।
(2004)
Answer : संभाव्य वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन दो प्रक्रियाओं वाष्पीकरण और उत्सर्जन का समागम है। संभाव्य वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन का मतलब है वैसी आदर्श स्थिति जिसमें पर्याप्त वर्षा हो ताकि किसी क्षेत्र में संभावित वाष्पीकरण और उत्सर्जन के लिए पर्याप्त आर्द्रता उपलब्ध हो सके।
किसी स्थान या क्षेत्र की संभाव्य वाष्पोत्सर्जन के निर्धारण करने के लिए तापमान, अक्षांश, वनस्पति तथा मृदा की जल ग्रहण क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। अगर तापमान ज्यादा हो तो संभाव्य-वाष्पोत्सर्जन भी ज्यादा होगा। तापमान तथा वायु ....
Question : वायुमंडल के त्रिकोशिकीय देशांतरीय परिसंचरण की क्रिया विधि तथा महत्व की विवेचना कीजिए
(2003)
Answer : आवर्तनशील पृथ्वी के तल पर विशुद्ध तापीय कारण से उत्पन्न एक कोशीय पवन संचरण व्यवस्था का लोप हो जाता है। इसके स्थान पर प्रत्येक गोलार्द्ध में त्रिकोशीय रेखांशिक परिसंचरण की स्थापना हो जाती है। वायुमंडल की गैसीय संरचना द्वारा वायु दाब की क्षेत्रीय विषमता वायु प्रवाह को विकसित करता है। यह वायु प्रवाह न सिर्फ सतह पर होता है वरन् क्षोभमंडल के ऊपरी वायु परिस्थितियों से भी जुड़ा होता है। अतः जब ऊपरी और निचली ....
Question : उन कसौटियों पर चर्चा कीजिए जिनको थार्न्थवेट ने संसार की जलवायुओं के अपने 1948 के वर्गीकरण में अपनाया था।
(2002)
Answer : थार्न्थवेट ने जलवायु पर अपना वर्गीकरण सर्वप्रथम 1931 में प्रस्तुत किया, तत्पश्चात् उसमें कुछ और संशोधन करके 1933 में प्रस्तुत किया। कोपेन की भांति थार्न्थवेट ने भी यह स्वीकार किया कि वनस्पति, जलवायु का सूचक होती है तथा वनस्पति पर वर्षा की मात्र व तापक्रम का पर्याप्त प्रभाव होता है, परन्तु वाष्पीकरण को भी ध्यान में रखना होगा। इसी आधार पर उन्होंने वर्षण प्रभाविता (percipitation effectiveness) तथा तापक्रम प्रभाविता को जलवायु प्रदेशों के सीमा-निर्धारण में ....
Question : वायुराशियों की संकल्पना की विवेचना कीजिए तथा उनका वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
(2001)
Answer : जलवायु विज्ञान के क्षेत्र में वायुराशि की संकल्पना का पर्याप्त महत्व है। इसके द्वारा मौसम में होने वाले व्यापक परिवर्तनों को समझने एवं मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में काफी सहायता मिलती है। विश्व के विभिन्न भागों में मौसम परिवर्तन मुख्यतः विभिन्न वायुराशियों की क्रिया- प्रतिक्रिया एवं स्वयं उनके भीतर पायी जाने वाली प्रक्रियाओं के कारण होते हैं। वायुराशियों के द्वारा ही महासागरों से आर्द्रता भारी मात्र में महाद्वीपों के ऊपर लायी जाती है, जिसके फलस्वरूप ....
Question : पृथ्वी की सतह से वर्षण के प्रकारों और वितरण का ब्यौरा दीजिए।
(2000)
Answer : द्रव या ठोस रूप में पृथ्वी पर गिरने वाले जल को वषर्ण के रूप में पारिभाषित किया जाता है। फोस्टर के अनुसार वायुमंडलीय आर्द्रता का गिरना ही वर्षण है और यह जलीय चक्र की शायद सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है।
वषर्ण का पहला चरण संघनन है। संघनन की प्रक्रिया जलवाष्प से द्रवीभूत होने की प्रक्रिया को सम्मिलित करती है जबकि वर्षण के अंतर्गत जल वर्षा, हिमपात, ओला तथा अन्य दूसरे रूप आते हैं।
वर्षण के प्रकार: वर्षा के ....
Question : उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवातों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत कीजिये?
(1999)
Answer : चक्रवात निम्न दाब के केन्द्र होते हैं, जिनके चारों तरफ सकेन्द्रीय सम वायुदाब रेखाएं विस्तृत होती हैं तथा केन्द्र से बाहर की ओर वायुदाब बढ़ता जाता है, परिणामस्वरूप परिधि से केन्द्र की ओर हवाएं चलने लगती हैं, जिनकी दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सुइयों के विपरीत तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अनुकूल होती है। स्थिति के दृष्टिकोण से चक्रवातों को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है- (i) शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात, तथा (ii) उष्ण कटिबंधीय ....
Question : कोपेन के वर्गीकरण के मुताबिक Cs प्रकार की जलवायु
(1999)
Answer : ब्लादीमीर कोपेन ने तापक्रम एवं वर्षा के आधार पर जलवायु का वर्गीकरण किया है। इनका वर्गीकरण परिमाणात्मक है, क्योंकि इन्होंने जलवायु प्रदेशों की सीमाओं के निर्धारण में तापक्रम तथा वर्षा के संख्यात्मक मूल्यों का प्रयोग किया है। कोपेन ने वनस्पति वर्गों के आधार पर विश्व में पांच जलवायु वर्ग बताये तथा उनका नामकरण A, B, C, D तथा E वर्णों द्वारा किया। इनमें से C वर्ण सामान्य शीतयुक्त मध्य अक्षांशीय आर्द्र जलवायु (उष्णार्द्र समशीतोष्ण जलवायु) ....
Question : पृथ्वी के वायुमंडल की प्रकृति और संघटन पर चर्चा कीजिए।
(1998)
Answer : पृथ्वी के चारों तरफ कई सौ किलोमीटर की मोटाई में व्याप्त गैसीय आवरण को ‘वायुमंडल’ कहा जाता है। वायुमंडल की विभिन्न गैसें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी के ऊपर टिकी रहती हैं। वायुमंडल की गैसें सामान्य भौतिक गैस नियमों का पालन करती हैं। यद्यपि समय या स्थान के अनुसार पृथ्वी के वायुमण्डल में तापमान व दाब- परिवर्तित होता है लेकिन उसके संघटन में गैसों का प्रतिशत लगभग स्थिर रहता है। वायुमंडल के संघटन को ....