Question : क्या आप सहमत हैं कि भारत में विकास प्रशासन में एक गंभीर शासन-कमी रही है? अपने उत्तर के पक्ष में कारण देते हुए सुझाव दीजिए।
(2015)
Answer : विकास प्रशासन से अभिप्राय है विकास कार्यक्रमों का प्रशासन। रिग्स के अनुसार विकास प्रशासन के दो महत्वपूर्ण आयाम हैं। प्रथम- यह उस प्रक्रिया से जुड़ा है जिसके द्वारा लोक प्रशासन प्रणाली समाज में सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक परिवर्तनों का संचालन करती है तथा दूसरा- यह कि प्रशासनिक प्रणाली के भीतरी परिवर्तन की गति का अध्ययन करता है अर्थात इसमें प्रशासनिक क्षमताओं को मजबूत करने का भाव शामिल रहता है। वस्तुतः प्रशासनिक विकास, विकास प्रशासन का ....
Question : राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 के पक्ष व विपक्ष के तर्कों की विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : उच्चतर न्यायिक पदों पर नियुक्ति हेतु 1993 से लागू कॉलेजियम पद्धति के स्थान पर केंद्र सरकार द्वारा सर्वसम्मति से न्यायिक नियुक्ति आयोग 121वें संविधान विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त कर 99वां संविधान संशोधन अधिनियम का रूप ग्रहण किया। न्यायिक नियुक्ति आयोग में अध्यक्ष सहित 6 सदस्य होंगे। जिसका अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश होगा। इसके अतिरिक्त आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश सदस्य के रूप में होंगे। एक सदस्य के रूप में ....
Question : ‘‘अधिकारीतंत्र के भीतर लोकतंत्र होने से उसकी प्रभावशीलता के कम हो जाने की संभावना रहती है।’’ क्या आप इस मत से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
(2015)
Answer : नौकरशाही शब्द अंग्रेजी के Bureaucracy (ब्यूरोक्रेसी) का हिन्दी रूपांतरण है। अंग्रेजी शब्द Bureaucracy फ्रांसीसी भाषा के शब्द Bureaucracy (ब्यूरो) और ग्रीक भाषा के शब्द Cracy (क्रेसी) से मिलकर बना है। Bureseu का अर्थ होता है- डेस्क या मेज और Cracy का अर्थ होता है तंत्र या शासन। अतः ब्यूरोक्रेसी का अर्थ हुआ डेस्कतंत्र या मेज का शासन। नौकरशाही और आदर्श एक दूसरे के विपरीत शब्द हैं। नौकरशाही में कुछ आदर्श नहीं होता है।
यदि नौकरशाही के ....
Question : ‘‘ न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ केवल एक नारा नहीं है, अपितु अपार संभावनाओं से युक्त प्रशासन का एक दर्शन है।’’ क्या आप सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में कारण दीजिए।
(2015)
Answer : लोकतंत्र से आशय होता है- जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन। भारत में संघीय व्यवस्था को अपनाया गया है, इसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्यों का समूह होता है। लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना हेतु केंद्र एवं राज्य मिलकर काम करते हैं। केंद्र एवं राज्य सरकारों का प्रमुख ध्येय न्यूनतम सरकार एवं अधिकतम शासन को प्राप्त करना है। यह सिर्फ एक नारा के रूप में नहीं वरन अपार संभावनाओं से युक्त प्रशासन है।
यहां न्यूनतम सरकार ....
Question : भारतीय परिसंघीय तंत्र के रूपान्तरण के लिए केंद्र-राज्य संबंधों पर पुंछी आयोग (2010) की मुख्य सिफारिशों की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : पुंछी आयोग का गठन 27 अप्रैल, 2007 को किया गया। इसके अंतर्गत केंद्र राज्य संबंधों पर अध्यापन हेतु चार सदस्यों का एक आयोग बनाया गया है-
अनुशंसाएं इस प्रकार हैं-
अनुच्छेद- 355 और 356 में संशोधन होना चाहिए ताकि केंद्र राज्यों में विवादग्रस्त क्षेत्रें को कुछ समय के लिए अपने शासन के अधीन लाने लायक बनाया जा सके।
आयोग ने अनुच्छेद- 355 और 356 के अधीन ‘‘स्थानीय आपातकाल प्रावधानों’’ को स्थानीय क्षेत्रें की समस्या का सामना करने का ....
Question : ‘नीति’ आयोग के निर्णय-निर्माण के लिए उद्देश्यों, उपागमों और संगठनात्मक व्यवस्थाओं का लक्ष्य भारतीय राजनीति के परिसंघीय चरित्र को पुनःप्रतिहित करना है। स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : 1 जनवरी, 2015 को योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग नामक एक नए संस्थान का उद्भव हुआ। इसका गठन मंत्रिमंडलीय प्रस्ताव के द्वारा किया गया। यह परामर्शदात्री एवं संविधानेत्तर संस्था है। यह संस्थान सरकार के थिंक टैंक के रूप में सेवाएं प्रदान करेगा एवं उसे निदेशालक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान करेगा।
नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्य हैं-
Question : “अंतरा-सरकारी संबंधों का प्रबंधन उतना ही महत्वपूर्ण है कि जितना अंतः सरकारी संबंधों का प्रबंधन है।” सरकार के निष्पादन पर इसके प्रभाव का परीक्षण कीजिए।
(2014)
Answer : अंतरा-सरकारी संबंधों का अर्थ है एक देश का अपनी सीमा के अंदर विभिन्न राज्यों, मंत्रलयों, विभागों, सरकारों से संबंध का प्रबंध जबकि अंतः सरकारी संबंधों का अर्थ है एक देश का दूसरे देश से संबंधों का अध्ययन।
वैश्वीकरण के दौर में अंतः सरकारी संबंधों का प्रबंधन ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि यहां दायरा विस्तृत हो जाने से प्रतिस्पर्द्धा बढ़ जाती है। जो देश अपने अंतः सरकारी संबंधों को जितना अधिक व्यवस्थित एवं प्रबंधित कर पाएगा ....
Question : प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की प्रकार्यात्मक भूमिका प्रधानमंत्री के नीति अभिमुखन (पॉलिसी ओरिएंटेशन), व्यक्तित्व और प्रशासन शैली पर निर्भर करती है। उपर्युक्त उदाहरण पेश करते हुए इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
(2014)
Answer : भारत में प्रधानमंत्री सचिवालय की स्थापना 15 अगस्त, 1947 को गणराज्य बनने पर की गई थी। आज यह असाधारण रूप से शक्तिशाली संगठन है जिससे अनेक विशेषज्ञ संबद्ध हैं।
नेहरू के कार्यकाल में कैबिनेट सचिवालय का विशेष महत्वपूर्ण स्थान था, प्रधानमंत्री सचिवालय वर्तमान की तुलना में बहुत छोटा था तथा इसे निर्णयकारी भूमिका नहीं प्राप्त थी।
लेकिन शास्त्री जी के कार्यकाल में “प्रधानमंत्री सचिवालय” का प्रभाव और महत्व अधिक बढ़ गया।
श्रीमती इन्दिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में ....
Question : ‘‘भारतीय संघवाद में केन्द्रीयकरण की प्रवणता है, परन्तु यह उसके संगठनात्मक ढांचे के कारण न होकर, उसके समाजवादी लक्ष्यों और केन्द्र-निर्मित योजनागत विकास के कारण है।’’ इस कथन की केन्द्र व राज्य सरकारों के बीच संबंधों के संदर्भ में व्याख्या करें।
(2013)
Answer : भारतीय संविधान में एक सशक्त केंद्रीय सरकार की स्थापना की गई है, जो विघटनकारी प्रवृत्तियों पर अंकुश रख सके और सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन ला सके। संविधान निर्माता चाहते थे कि सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का समाधान एक शक्तिशाली केंद्रीय सरकार करे और ऐसा करने में उसे राज्यों का सहयोग भी प्राप्त हो। गरीबी, निरक्षरता और आर्थिक असमानता आदि कुछ समस्याएं थी जिनके समाधान के लिए नियोजन और समन्वय बहुत जरूरी था। अतः इसके लिए संविधान में एक सशक्त ....
Question : ‘संसद एक स्वतंत्र संस्था है, उसको सरकार या किसी दल के विस्तार के रूप में नहीं देखना चाहिए।’ सविस्तार प्रतिपादित कीजिए।
(2012)
Answer : भारतीय संसद राष्ट्रपति और दो सदनों- राज्य सभा और लोक सभा से मिलकर बनती है। संसद सर्वोच्च और स्वतंत्र संस्था हैं संसद एक वृहत निकाय है। संसद स्वयं शासन नहीं करती है। हमारी व्यवस्था में सभी वयस्क लोग 18 वर्ष आयु प्राप्त कर ली हो, मतदाता है, वे अपने राज्यों में लोकसभा और विधानसभा के सदस्य चुनते हैं। राज्यों की विधान सभाएं फिर राज्य सभा के सदस्य चुनती है।
राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा ....
Question : अपने प्रकार्यों के निर्वाह में, भारत का राष्ट्रपति केवल ‘सुविधाजनक कार्यकारी परिकल्पना’ है। क्या आप इस विचार से सहमत हैं? उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपनी तर्कना को सही ठहराइए।
(2012)
Answer : अपने प्रकार्यों के निर्वाह में, भारत का राष्ट्रपति केवल ‘सुविधाजनक कार्यकारी परिकल्पना’ है, जबकि संघ स्तर पर वास्तविक कार्यपालिका प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद है और दोनों ही शासन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में राष्ट्रपति संघ सरकार का मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा राष्ट्र के संवैधानिक प्रधान है। राष्ट्रपति को संविधान में कार्यपालिका, विधायी व कई अन्य शक्तियों में विभूषित किया गया है। भारतीय संविधान राष्ट्रपति को कई शक्तियों से विभूषित करता ....
Question : ‘न्यायाधीशों को देश पर शासन नहीं करना चाहिए। वे किसी कानून का निर्धारण तो कर सकते हैं, शासन में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।’ चर्चा कीजिए।
(2012)
Answer : निश्चित रूप से न्यायपालिका न्याय देने के लिए है, शासन के लिए नहीं, लेकिन शासन के लिए उत्तरदायी लोग जब जन आकांक्षाओं के प्रति असंवेदनशील होकर केवल लूट की राजनीति में व्यस्त हों, तो ऐसे समय में ऐसे समय में न्यायपालिका द्वारा शासन होना आश्चर्य की बात नहीं है। लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू भी है, किसी भी संस्था की महानता उसके गरिमापूर्ण आचरण में निहित होती है।
यह मानना नितान्त भारी व्यावहारिक भूल होगी कि ....
Question : विभिन्न राज्यों में लोक आयुक्तों की निष्पति असमान रही है। उदाहरणों सहित टिप्पणी कीजिए।
(2011)
Answer : केन्द्र में लोकपाल एवं राज्य में लोकायुक्त दोनों, प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग के समय से ही चर्चा में रहे हैं। हालांकि लोकपाल अभी बहस का विषय बना हुआ है, वहीं प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिश पर कई राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो चुकी है। लेकिन यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि राज्यों में लोकायुक्त का कार्य निष्पादन एक समान नहीं रहा है।
हाल ही में चर्चा में रहे कर्नाटक एवं दिल्ली के लोकायुक्त का ....
Question : स्वतंत्रता प्राप्ति से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की भूमिका के विकास पर चर्चा कीजिए।
(2011)
Answer : भारत में संसदीय प्रणाली को अपनाने के कारण व्यवहारिक शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री करता है। प्रधानमंत्री को सहायता देने के लिए अगस्त 1947 में प्रधानमंत्री कार्यालय की स्थापना की गई। तब से लेकर वर्तमान तक इसकी भूमिका एवं कार्यप्रणाली में व्यापक परिवर्तन होते रहे हैं। प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व एवं सरकार के स्वरूप का इस पर व्यापक असर पड़ा। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू संसदीय व्यवस्था में आस्था रखते थे, अतः उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को अधिक ....
Question : “भारतीय संघवाद सम्भाव्य परिपक्वता की अवस्था से गुजर रहा है।” केन्द्र राज्य सम्बन्ध आयोग (एम.एम.पुंछी) के विचारों के संदर्भ में इस कथन की समीक्षा कीजिए।
(2011)
Answer : संघवाद का शब्दिक अर्थ है- संधि या समझौता। जब दो या अधिक राज्य एक नये राज्य का निर्माण करने के लिए आपस में समझौता कर एक संगठन बनाते हैं। भारत में भी संघ शासन का जन्म उन प्रांतों को स्वायतता देने से हुआ, जो अंग्रेजों के समय में एकात्मक राज्य के अधीन थे। इन राज्यों एवं केन्द्र सरकार के सम्बन्धों को लेकर पहले सरकारी आयोग एवं इसके बाद एम.एन. पुंछी आयोग का गठन किया गया। ....
Question : क्या केन्द्रीय स्तर पर मंत्रियों के सशक्तीकृत समूह का उदय मंत्रिमंडलीय उत्तरदायित्व के सिद्धांत को क्षति पहुंचाएगा?
(2010)
Answer : भारतीय संविधान में मत्रिमंण्डल प्रणाली को अपनाया गया है एवं इसमें मंत्रिमंण्डलीय उत्तरदायित्व का नियम प्रतिष्ठित है।
इसका तात्पर्य है कि, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी होगी अर्थात् जो मंत्रिमंण्डल लोक सभा का विश्वास खो देगा तो उसे त्यागपत्र देना अनिवार्य होगा। इसमें वे मंत्री भी होते हैं, जो राज्य सभा के सदस्य होते हैं, अर्थात् मंत्री एक साथ खड़े होते हैं व एक साथ गिरते हैं। मंत्रिमण्डलीय उत्तरदायित्व से तात्पर्य यह ....
Question : ‘त्रिशुंक संसदों के युग में, राष्ट्रपति की शक्ति का विस्तार हो जाता है, ऐसा और भी अधिक जब पदधारी आग्रही होने का निर्णय लेता है।’ पिछले दो दशकों के दौरान भारत में स्थिति के संदर्भ में, इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
(2010)
Answer : भारतीय गणतंत्र का प्रतीक, भारत का राष्ट्रपति राष्ट्र का सर्वोच्च संवैधानिक अधिकारी है। राष्ट्रपति को भारतीय संविधान ने कई शक्तिप्रदान की हैं जैसे कार्यपालिका शक्ति, विधायी शक्ति, वित्तीय शक्ति, आपातकालीन शक्तियां आदि।
किन्तु राष्ट्रपति इन शक्तियों का उपयोग केन्द्रीय मंत्रिमंण्डल की सिफारिश व सलाह से कर सकता है। स्वतंत्रता के बाद के प्रारंम्भिक दशकों में संसद में एक दल का प्रभुत्व रहा तथा इस कारण प्रधानमंत्री की राजनैतिक स्थिति सुदृढ़ रही।
इसके कारण राष्ट्रपति सामान्य रूप से ....
Question : ‘- - - न्यायाधीशों और न्यायालयों ने अपने कानूनी प्राधिकार का सर्जनात्मक रूप से पुनः निर्वचन किया है, अपनी स्वयं की शक्ति का विस्तार किया है और विधानमंडल और कार्यपालिका के मुकाबले में अपनी प्रतिष्ठा में वृद्धि की है।’ इस आकलन का समालोचनापूर्वक परीक्षण कीजिए।
(2010)
Answer : भारतीय परिसंघ का संविधान विभिन्न सरकारों के बीच न्यायकर्ता के रूप में एक न्यायालय की व्यवस्था करता है। अनुच्छेद 131 में यह भूमिका और अधिकारिता उच्चतम न्यायालय को सौंपी गई है। इसे निम्नलिखित विवादों में आरंभिक अधिकारिता है, जो किसी अन्य न्यायालय को नहीं हैः
Question : मंत्री की प्रशासनिक प्रतिभा ही उसकी सफलता का निर्धारक होती है।
(2009)
Answer : भारतीय प्रजातंत्र में हमने मंत्रीमंडलीय उत्तरदायित्व का सिद्धांत अपनाया है अर्थात् सरकार के प्रत्येक कार्य के लिए मंत्री जिम्मेदार होगा। साथ ही नौकरशाही के सिद्धांतों पर दृष्टिपात करें तो वहां अनमता का सिद्धांत उभर कर आता है अर्थात् प्रशासक अपने किसी भी कृत्य के लिए जनता के सामने नहीं आयेगा और उसके प्रत्येक कृत्य हेतु संबंधित मंत्री ही जिम्मेदार होगा। किसी भी विभाग या मंत्रलय की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि प्रशासक तटस्थ ....
Question : भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिव और राज्य के मुख्य सचिव की भूमिका कुछ मामलों में समान है तथा कुछ असमान। विवेचना करें।
(2009)
Answer : भारतीय गणराज्य की दो महत्वपूर्ण ईकाइयों यथा केंद्र एवं राज्य में प्रशासनिक अध्यक्ष के रूप में मंत्रीमंडल सचिव एवं मुख्य सचिव की भूमिका ही महत्वपूर्ण है। यदि इनके भूमिकाओं पर गौर करें तो कुछ बातों में इनमें समानता तथा कुछ बातों में असमानतायें देखने को मिलती है, यथाः कैबिनेट सचिव जहां केंद्रीय प्रशासनिक मशीनरी का मुख्य समन्वयकर्ता है। राज्य में मुख्य सचिव भी इन्हीं भूमिकाओं का निर्वहन करता है। समन्वयकर्ता के रूप में कैबिनेट सचिव ....
Question : ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा किए गए सराहनीय कार्य से संस्थानों में मानवाधिकारों की सुरक्षा के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का विकास हुआ है।’ इस कथन पर टिप्पणी करें।
(2009)
Answer : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने उद्भव अर्थात् 1994 से ही नागरिक अधिकारों को सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया है। मानवाधिकार एक बहुत ही व्यापक अवधारणा है। भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार भी मानवाधिकार के केवल दो-तीन पक्षों से ही संबंधित हैं यथा राजनैतिक मानवाधिकार, जिसमें मत देने का अधिकार, नागरिक मताधिकार, जिसमें स्वतंत्रता का अधिकार तथा साथ ही सांस्कृतिक मानवाधिकार, जिसमें धर्म, भाषा, वेशभूषा को इच्छानुसार बनाये रखने का अधिकार तक ....
Question : ‘सूचना का अधिकार’ अधिनियम ने प्रशासन की पहले से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही ला दी है।’ टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : 12 अक्टूबर, 2005 से भारत में सूचना का अधिकार कानून लागू किया गया। प्रशासन में विलम्ब, भ्रष्टाचार एवं अन्य प्रकार के लापरवाहियों को कम से कम करने के लिए तथा पारदर्शिता एवं कुशलता में वृद्धि करने के लिए इस प्रकार के कानून का सृजन किया गया। सूचना के अधिकार ने कई प्रकार से पारदर्शिता व जबावदेही में वृद्धि की है।
इसके तहत कोई भी व्यक्ति बहुत ही मामूली शुल्क पर किसी भी विभाग/मंत्रलय से अपने आवश्यकतानुसार ....
Question : यदि जानकारी शक्ति है, तो शायद किसी नागरिक को विभिन्न लोक प्राधिकरणों के कब्जे में गुप्त एवं विकासात्मक सूचनाओं के मुकाबले कोई और चीज अधिक सशक्त नहीं बना सकती है। इन कथन पर प्रकाश डालते हुये सूचना अधिनियम 2005 के गुणों-अवगुणों का विश्लेषण कीजिये।
(2007)
Answer : लोकतांत्रिक वातावरण अपने नागरिकों को यह संज्ञान कराने का वास्तविक अधिकार देता है कि शासन जनहित के कार्य किस प्रकार सम्पादित कर रहा है तथा वे प्राधिकारी जो शासन चला रहे हैं। उनका कार्यव्यवहार कितना लोकतांत्रिक भावनाओं के अनुरूप है। मूलतः यह जवाबदेयता लोकतंत्र को सार्थकता प्रदान करती है। एक सामान्य नागरिक जो कि लोकतांत्रिक राष्ट्र का सम्मानित सदस्य है उसे जनसामान्य द्वारा चयनित सरकार के कार्य व्यवहार को जानने का नैतिक अधिकार भी जनतंत्र ....
Question : संविधान के कार्यकरण की समीक्षा करने के लिये राष्ट्रीय आयोग ने प्रशासनिक संस्कृति में क्रांतिकारी परिवर्तनों के सुझाव दिये हैं। सिविल सेवाओं और प्रशासन पर उसकी प्रमुख सिफारिशों का विश्लेषण कीजिये।
(2007)
Answer : संविधान के कार्यकरण की समीक्षा के लिये राष्ट्रीय आयोग का गठन केन्द्रीय सरकार द्वारा किया गया, इस आयोग ने संविधान के कार्यकरण की व्यापक समीक्षा की तथा प्रशासन में श्लाधनीय परिवर्तनों के सुझाव अपनी आख्या में प्रदान किये हैं।
नवीन राज्यों के गठन जन सेवाओं के विस्तार, विभागों तथा अन्य एजेन्सियों में वृद्धि, शासकीय उद्यमों की समस्याओं और विकास के अग्रगण्य साधन के रूप में प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में साधारण रूचि इत्यादि वजहों से केन्द्र ....
Question : "संसदीय विभागीय समितियों ने अनुदानों की मांगों का विश्लेषण करने में अपनी भूमिका प्रभावशाली ढंग से निभाई है।" मूल्यांकन कीजिए।
(2007)
Answer : संसदीय शासन व्यवस्थाओं में व्यवस्थापिका द्वारा देश के वित्तीय प्रशासन तंत्र पर दो तरफा नियन्त्रण रखने की व्यवस्था प्रचलन में है। कार्यपालिका द्वारा प्रस्तुत बजट प्रावधानों की स्वीकृति के समय व्यवस्थापिका के कार्य संचालन की प्रक्रिया लोक वित्त पर व्यवस्थापिका के नियंत्रण की प्रथम अवस्था मानी जाएगी, जबकि सरकारी व्यय से सम्बन्धित नियन्त्रण तथा महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन के सूक्ष्म परीक्षण की प्रक्रिया को वित्तीय नियन्त्रण की दूसरी महत्वपूर्ण अवस्था कहा जाता है।
1947 में स्वतंत्रता ....
Question : "सचिवालय और निदेशालय के बीच विवाद सामान्यज्ञ बनाम विशेषज्ञ विवाद का ही परिणाम है" विश्लेषण कीजिए?
(2007)
Answer : सचिवालय और निदेशालय के मध्य विवाद सामान्यज्ञ बनाम विशेषज्ञ विवाद का ही परिणाम है। वस्तुतः सचिवालय नीति का निर्माण करता है और निदेशालय नीति को लागू करते हैं। सचिवालय में आई. एस. एस. अधिकारियों को नियुक्त किया जाता है जो कि सामान्यज्ञ की श्रेणी में आते हैं जबकि निदेशालय में तकनीकी अधिकारियों को नियुक्त किया जाता है। ये तकनीकी अधिकारी निदेशक बनते हैं, अतः सचिवालय व निदेशालय का सम्बन्ध विवादित रहता है।
लोक प्रशासन की एक ....
Question : "भारत का राष्ट्रपति परिवार में दादा-दादी की भांति कार्य करता है। यदि जवान पीढ़ी उसकी सलाह का अनुसरण नहीं करती हो तो भी वह कुछ कर सकने में नितांत असमर्थ होता है।" टिप्पणी कीजिए।
(2007)
Answer : भारत का राष्ट्रपति परिवार में एक अनुभव प्राप्त व्यक्ति की भांति कार्यरत रहता है। यहां भारत को एक परिवार रूप में दर्शित किया गया है तथा परिवार के अनुभव प्राप्त बुजुर्ग व्यक्तियों से राष्ट्रपति को इंगित किया गया है। यहां पर एक तरह से शासकीय व्यवस्था की कल्पना सामाजिक व्यवस्था को आधार बनाकर की गई है, जिससे यह तथ्य प्रकट होता है कि प्रशासन व समाज एक दूसरे से संगुम्फित हैं। जिस प्रकार परिवार में ....
Question : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा भारत के नागरिकों की गरिमा के अनुरक्षण एवं संरक्षण में निभाई गई भूमिका संतोषजनक और प्रत्याशा के अनुरूप रही है। स्पष्ट कीजिए।
(2006)
Answer : भारत की संसद ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 पारित करके अक्टूबर 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग गठित किया। यह एक वैधानिक संस्था है। मानवाधिकार भंग होने की स्थिति में देश के नागरिक आयोग के समक्ष कार्यवाही की प्रार्थना कर सकते हैं।
आयोग में एक अध्यक्ष व छह सदस्यों का प्रावधान है। उच्चतम् न्यायालयों का मुख्य न्यायाधीश अध्यक्ष के लिये पात्र होता है। वर्तमान में आयोग के चार पूर्ण सदस्य तथा दो समकक्ष सदस्य हैं। राष्ट्रीय महिला ....
Question : ‘कुछ पदों’ को लाभ के पद अधिनियम’ की अधिकारिता से बाहर निकाल कर भारत सरकार ने जनमानस को अपनी कथनी करनी के अंतर का द्विगुणित आश्वासन दे दिया है। टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : लाभ के पद का पदावली की संविधान या लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में कहीं कोई परिभाषा नहीं दी गई है। न्यायिक निर्णयों के आधार पर लाभ का पद पदावली से तात्पर्य ऐसे पद से है, जिससे लाभ मिल सकता है या जिससे व्यक्ति युक्ति-युक्त रूप से लाभ प्राप्त करने की आशा कर सकता है। लाभ के पद संबंधी हालिया घटनाक्रम का मूल भारतीय संविधान का अनु. 102 (1)(A) है।
इसके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति केंद्र या ....
Question : न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधानमंडल की भांति, लेखापरीक्षा भी लोकतंत्र के महत्वपूर्ण संघटकों में से एक है। टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : लेखा परीक्षण न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधानमंडल की भांति जनता के शासन को सुशासन के रूप में सुनिश्चित करने का सात्विक प्रयास निरंतर करता है। लेखा परीक्षण लोकवित्त पर संसदीय नियंत्रण का अपरिहार्य अंग है। लेन-देन के पूर्ण होने के पश्चात् लेखाओं की जांच तथा परीक्षण लेखा परीक्षण कहलाता है। इस जांच का उद्देश्य किसी भी अनधिकृत, अवैध या अनियमित व्ययों, दोषपूर्ण वित्तीय कार्यविधियों की खोज तथा विधानमंडल को तत्संबंधी सूचना देना एवं यह पता लगाना ....
Question : भारत का प्रधानमंत्री भारत की सर्वोच्च संसद के प्रति न केवल जवाबदेह होना चाहिए, बल्कि वह ऐसा है यह दिखाई भी देना चाहिए। संविधान शक्ति के संदर्भ में भारतीय संसद के प्रति प्रधानमंत्री की जवाबदेही पर टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : संसदीय लोकतंत्रत्मक शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका की भूमिका निभाता है। इसी कारण उसकी पद स्थिति सर्वाधिक शक्तिशाली मानी जाती है। भारत में भी प्रधानमंत्री की पद स्थिति अत्यंत सम्मानित, शक्ति संपन्न तथा गरिमायुक्त है।
शासन सत्ता के शिखर पर आसीन प्रधानमंत्री की शक्तियां तथा कृत्य बहुआयामी हैं-
देश के लोकतांत्रिक शासक के रूप में यह भारतीय प्रजातांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाला लोककल्याणकारी राज्य का संचालक होता है, जहां संसदीय लोकतंत्र की शासन प्रणाली प्रवर्तित ....