Question : ‘‘प्रशासन में अकार्यान्वित सुधार प्रशासनिक सुधार प्रक्रम को सर्वाधिक कमजोर बना देते हैं।’’ क्या आप सहमत हैं? उदाहरणों के रूप में विशिष्ट मामलों का उल्लेख करते हुए अपना उत्तर दीजिए।
(2014)
Answer : प्रशासनिक सुधार का संबंध अनिवार्य रूप से प्रशासनिक परिवर्तन से है, प्रशासनिक सुधार का लक्ष्य है जो कुछ पूर्ण रूप में वर्तमान है उसमें परिवर्तन लाना।
प्रशासनिक सुधार आयोगों के अलावा प्रशासन में सुधार हेतु अलग-अलग मुद्दों पर कई समितियां गठित हो चुकी हैं जैसे- सरकारिया आयोग, वेतन आयोगों द्वारा सिफारिश, वित्त आयोग द्वारा सिफारिश तथा कई विशेषज्ञ समितियां। ये समितियां साल-दो साल में विभिन्न मुद्दों पर गहराई से विचार-विमर्श कर अपनी सिफरिशें देती हैं, फिर ....
Question : 73वें सांविधानिक संशोधन अधिनियम के परिणामस्वरूप जिला कलक्टर की विकासपरक भूमिका के संबंध में प्रकट होती हुई संदिग्धता को स्पष्ट कीजिए।
(2012)
Answer : 73वें संविधान संशोधन के द्वारा भारत में त्रिस्तरीय संघवाद की स्थापना प्रयास किया गया है। इसके लिए संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गयी है, जिसमें पंचायतों के कार्यों का निर्धारण किया गया है और इन विषयों पर नीतियां व कार्यक्रम बनाने के दायित्व पंचायती राज संस्थाओं को सौंपा गया है। उल्लेखनीय है कि पंचायती राज संस्थाओं में जिला अधिकारी को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, ताकि जिला अधिकारी विकास कार्यक्रमों के निर्धारण व कार्यान्वयन में ....
Question : ‘समुदायों को अपनी स्वयं की प्राथमिकताओं को पारिभाषित करने में सक्षम बनाने में गैर-सरकारी संगठन एक उत्प्रेरकी भूमिका का निर्वहन करते हैं- - - - - - -।
(2010)
Answer : समुदाय से तात्पर्य लोगों के समूह से होता है। एक ऐसा विशिष्ट समूह जिसकी अपनी भाषा, शैली, धर्म या जीवन पद्धति अथवा परंपराएं होती हैं, जैसे सिख समुदाय, जनजाति समुदाय आदि की अपनी-अपनी विशिष्ट परंपराएं होती हैं इन समुदायों की प्राथमिकताएं भिन्न-भिन्न होती हैं, जो इनकी समाज में स्थिति, जीवन पद्धति, बदलते समय के अनुरूप इनकी प्रगति आदि पर निर्भर करती है। विभिन्न समुदायों की प्राथमिकताओं को इस प्रकार समझा जा सकता है, जैसेः
Question : ‘जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय नगरीय नवीकरण मिशन (जे.एन.यू.आर.एम.) सरकार द्वारा हाथ में लिए गए बृहत्तम सुधार-संयोजित विकास कायक्रमों में से एक है।’
(2010)
Answer : जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय नगरीय नवीकरण मिशन (जे.एन.यू.आर.एम.) भारत सरकार के आठ फ्रलैगशिप कार्यक्रमों में से एक है। वास्तव में यह कार्यक्रम भविष्य के भारत की तस्वीर को सुधारने के लिए बनाया गया मिशन है। जे.एन.ए.यू.आर.एम. की शुरूआत 2005-06 से सात वर्ष की अवधि के लिए की गई थी। इस कार्य की वृहत्ता इस तथ्य में निहित है कि सरकार की अधिकांश एजेन्सियों का किसी न किसी रूप से इस कार्यक्रम से संबध है। इस ....
Question : “सिविल सेवा को सुधारने पर द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशें आमूल परिवर्तनवादी हैं, लेकिन फिर भी क्रियान्वयनीय हैं” क्या आप सहमत हैं?
(2009)
Answer : भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में समय के साथ आये नकारात्मक बदलाओं एवं उनमें सुधार के लिए 31 अगस्त, 2005 को वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में एक द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग गठित किया गया है। आयोग ने अपना प्रतिवेदन कार्मिक मंत्रलय, जो कि प्रधानमंत्री के प्रत्यक्ष नियंत्रण में है, को दे दी है। अपने इन प्रतिवेदनों में वीरप्पा मोइली ने सूचना के अधिकार, मानवीय संसाधन, राहत प्रबंधन, लोक सेवा में मूल्य, स्थानीय प्रशासन कर्मचारियों में दक्षता निर्माण, ....
Question : ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा किए गए सराहनीय कार्य से संस्थानों में मानवाधिकारों की सुरक्षा के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का विकास हुआ है।’ इस कथन पर टिप्पणी करें।
(2009)
Answer : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने उद्भव अर्थात् 1994 से ही नागरिक अधिकारों को सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया है। मानवाधिकार एक बहुत ही व्यापक अवधारणा है।
भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार भी मानवाधिकार के केवल दो-तीन पक्षों से ही संबंधित हैं यथा राजनैतिक मानवाधिकार, जिसमें मत देने का अधिकार, नागरिक मताधिकार, जिसमें स्वतंत्रता का अधिकार तथा साथ ही सांस्कृतिक मानवाधिकार, जिसमें धर्म, भाषा, वेशभूषा को इच्छानुसार बनाये रखने का अधिकार तक ही ....
Question : आपके विचार में स्वत्रंता प्राप्ति के पश्चात क्रियान्वित किये गये पांच सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार कौन से हैं। इनका क्या प्रभाव पड़ा है?
(2009)
Answer : किसी भी संगठन के निरन्तर बेहतर निष्पादन के लिए आवश्यक है कि समय की मांग के अनुरूप एवं समय के साथ आई कमजोरियों को यथाशीघ्र दूर किया जाये। प्रशासनिक सुधार की प्रक्रिया में यही कार्य किया जाता है और संगठन की नकारात्मक पहलुओं पर सांगठनिक विरोध के बावजूद जानबूझकर अनुक्रिया करके दूर करने का प्रयास किया जाता है। स्वतंत्रता के बाद से भारतीय प्रशासनिक प्रघटना में भी अनेकानेक सुधार किये गये जिसका संगठन पर बहुत ....
Question : लोक प्रशासन में सुधारों के क्षेत्र में राजनीतिक कार्यकारी के द्वारा सभी प्रयासों का परिणाम कोई महत्वपूर्ण आउटपुट नहीं रहा है। टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : भारत में प्रशासनिक सुधारों के लिये अनेक आयोग तथा कमेटियां समय-समय पर गठित की गईं तथा उनकी अनुशंसाओं के आधार पर सुधार भी किये गये हैं।
किंतु प्रशासनिक तंत्र में किसी प्रकार का उल्लेखनीय परिवर्तन दिखाई नहीं देता है। इससे संबंधित कई प्रकार की समस्यायें बाधायें तथा कारण हैं: