Question : समझाइए कि बजट का एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
(2015)
Answer : बजट विततीय प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अंग है। प्रशासन तथा वित्त में उतना ही घनिष्ठ संबंध है जितना शरीर और रक्त में। वस्तुतः प्रशासनिक इंजन का ईंधन वित्त है। लोक प्रशासन में भी वित्त का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। शासन का कोई भी कार्य वित्त के अभाव में पूरा नहीं किया जा सकता है।
प्रशासन की नीतियां तथा योजनाएं तब तक निरर्थक है जब तक कि उनको क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक वित्त न हो। अतः ....
Question : “लिंग अनुक्रिया बजटन ने महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों के प्रति योजनाकरण विभागों को अपेक्षाकृत जवाबदेही से अनुप्राणित कर दिया है।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।
(2014)
Answer : महिलायें भारत की कुल आबादी का 48% हैं लेकिन वे पुरुषों से कई सामाजिक पैमानों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक अवसर आदि मामलों में बहुत पीछे हैं। 2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत में लिंगानुपात 943 है जबकि वैश्विक स्तर पर यह 984 है। नौवीं पंचवर्षीय योजना में महिला सशक्तिकरण को एक विशेष उद्देश्य के रूप में रखा गया। 2007 में एन.आई.पी.एफ.पी., नई दिल्ली द्वारा किये गये अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि यदि ....
Question : एक निजी सेवा प्रदाता से संबधित मामले में, उच्चतम न्यायालय के हाल के निर्णय के उपरांत भारत के नियंत्रक एवं महालेखा-परीक्षक (सीएजी) की शक्तियों में आए परिवर्तन पर चर्चा कीजिए।
(2014)
Answer : उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ ने कहा कि वोडाफोन और एयरटेल अपने समस्त लेखा-जोखा का ब्योरा कैग को सौंपें।
उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि प्राकृतिक संसाधन जैसे कि स्पेक्ट्रम आदि का संबध जनता से है और जब भी केन्द्र, राज्य स्थानीय संसार या कोई निजी उद्योग इन संसाधनों का उपयोग करता है तो वह संसद के माध्यम से जनता के प्रति उत्तरदायी होगा। उच्चतम ....
Question : संसदीय समितियां सरकारी व्यय में जवाबदेही उत्पन्न करती हैं। चर्चा कीजिए।
(2014)
Answer : मोटे तौर पर संसदीय समितियां दो प्रकार की होती हैं- 1. स्थायी 2. तदर्थ।
स्थायी समितियां 6 प्रकार की होती हैं। इनमें सर्वप्रमुख है वित्तीय समितियां जो तीन हैं-
कैग की जांच रिपोर्ट को राष्ट्रपति द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है। कैग राष्ट्रपति को तीन रिपोर्ट सौपता है-
समिति सार्वजनिक व्यय में तकनीकी अनियमितता की ....
Question : 13वें वित्त आयोग ने ग्रामीण और शहरी स्तर के निकायों के आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने की अपरिहार्य आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला था। क्या यह बात स्थानीय निकायों को अपने प्रकार्यों को करने में अधिक जवाबदेह बनाती है?
(2014)
Answer : 13वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि पंचायती राज संस्थाओं की संघ की कर से प्राप्त भाग में स्थनीय स्वशासी निकायों का सीधा हिस्सा होना चाहिए। बिना राज्य को इसे दिए हुए और इस भाग को शहरी एवं ग्रामीण जनसंख्या के अनुपात में शहरी एवं ग्रामीण स्वशासी संस्थाओं को दिया जाए। वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि इसके लिए विभाज्य योग्य कर आय को 30.5% से बढ़ाकर 32% कर दिया जाए और इसमें ....
Question : ‘‘केन्द्रीय सचिवालय, केन्द्रीय विषयों के प्रशासन और सरकार के विभिन्न क्रियाकलापों में समन्वय स्थापना के लिए, केन्द्रक अभिकरण है।’’ विवेचना करें।
(2013)
Answer : भारत सरकार के मंत्रलयों तथा विभागों के सचिवालयों का एक मुख्यालय संगठन है जिसे केंद्रीय सचिवालय कहते है। केंद्रीय सचिवालय मुख्य रूप से नीति निर्माण, कार्य पद्धति की रीति, नियमों का निर्धारण, वित्त नियंत्रण, विधि निर्माण से संबंधित एवं कार्यपालिका विभागों को उसके कार्यों का मूल्यांकन आदि कार्य करता है।
सचिवालय का कार्य नीति विषयक परामर्श देना होता है। इस परामर्श के पश्चात् अनुमोदित नीति तथा कार्यक्रम का अधीनस्थ कार्यालयों एवं अन्य संबद्ध संगठनों द्वारा निष्पादन ....
Question : ‘‘निष्पत्ति बजट के विफल होने का कारण है कि उसे ऐसे क्षेत्रें व कार्यक्रमों में लागू किया गया जहां मात्रत्मक मूल्यांकन संभव नहीं था।’’ निष्पत्ति बजट बनाने में निहित सिद्धान्तों की समीक्षा करें।
(2013)
Answer : कार्य निष्पादन बजट सरकार की गतिविधि के कार्यों, प्रोग्रामों, क्रियाओं की प्रविधि है। कार्य निष्पादन बजट इस प्रक्रिया को प्रकट करता है जिसके द्वारा बजट के माध्यम से सरकार के प्रोग्रामों और कार्यों को निष्पादित किया जाता है। सरकार के लेन-देन का वर्गीकरण कार्यगत है। कार्य निष्पादन बजट कार्यगत वर्गों में तैयार किया गया है अर्थात् इसमें मुख्य तत्व शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि होता है। कार्य निष्पादन बजट की अवधारणा का आरंभ संयुक्त राज्य अमेरिका ....
Question : ‘‘सामाजिक अंकेक्षण की अवधारणा परम्परागत अंकेक्षण से अधिक व्यापक है।’’ टिप्पणी करें।
(2013)
Answer : जनसाधारण के द्वारा प्रशासनिक कृत्यों के मूल्यांकन एवं समीक्षा की सामाजिक अंकेक्षण प्रणाली तुलनात्मक रूप से एक ऐसी नई अवधारणा तथा प्रक्रिया है, जो भारत में सुशासन के संदर्भ में लोकप्रिय हुई है। प्रारंभ में सामाजिक अंकेक्षण की अवधारणा निजी उपक्रमों या उद्योग धंधे की सामाजिक जवाबदेयता तथा उनके कृत्यों से समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन से संबंधित थी। इस प्रकार यह अवधारणा निगमित सरकार का ही एक अंग थी। विगत दशकों में ....
Question : ‘‘प्रबंधन के आधार के लिए आवश्यक आर्थिक स्थिति और परिचालन से संबंधित तथ्यों की तत्परता और स्पष्टता से प्रस्तुतीकरण का सार लेखांकन है।’’ शासन में लेखांकन प्रणालियों व तकनीकियों के संदर्भ में इस कथन की पुष्टि करें।
(2013)
Answer : लोक लेखा के विभिन्न रूपों की अलग-अलग संदर्भो में विशेष महत्ता होती है। लेकिन लोकप्रिय सरकारों द्वारा ऐसे लेख तैयार कराये जाते हैं, जो देखने में स्पष्ट तथा समझने में सरल हों। स्पष्टता तथा सरलता में इन मापदंडों के अनुरूप सरकारी लेख प्रायः अग्रलिखित रूप में रखे जाते हैं:
1. नियंत्रण लेखे - यह उन अधिकारियों की वफादारी की जांच के लिए रखे जाते हैं, जो सार्वजनिक राजस्व के एकीकरण, सुरक्षित भण्डारण का कार्य करते हैं। ....
Question : किसी व्यय को भारत की समेकित निधि के अंतर्गत मान लेने के संवैधानिक प्रावधान का औचित्य स्थापित करें।
(2013)
Answer : भारत का संविधान केंद्र सरकार के लिए तीन प्रकार के निधियों की व्यवस्था करता है -
भारतीय संचित निधि में सारी प्राप्तियों को जमा और सारे भुगतान को व्यय में डाला जाता है। भारत सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, जारी किए गए राजकोषीय बिलों, ऋणों अथवा अग्रिम राशियों के उपायों या माध्यम से सरकार द्वारा लिए गए तमाम कर्जे और ऋणों की अदायगी के रूप में सरकार द्वारा प्राप्त किए ....
Question : “भारत का CAG एक ऐसी विधि के साथ एक अभियोजक है, जो उसके प्रकार्यण को लड़खड़ाती है, दंडादेश की शक्ति के बिना एक न्यायाधीश है और अपील करने के अधिकार के बिना एक मुकदमेबाज है।” टिप्पणी कीजिए।
(2011)
Answer : सार्वजनिक धन का लेखा परीक्षण करने वाले अधिकारी के रूप में सी.ए.जी. काफी महत्वपूर्ण पद है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 तक इसका वर्णन किया गया है। इसका महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि डॉ. अम्बेडकर ने इसे भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया था, परंतु इसके कार्यों के संदर्भ में इसे प्राप्त शक्ति का कम होना इसकी कमजोरियों को भी इंगित करती है।
प्रथम तो सी.ए.जी. अपने लेखा परीक्षण ....
Question : कुछ राज्यों के प्रवक्ताओं द्वारा दलील दी जाती है कि उत्तम शासन के रिकार्ड वाले राज्य वित्त आयोग के पंचाट के द्वारा अपने पहले के अंश से वंचित हो गए हैं।
(2010)
Answer : भारतीय संघ में वित्तीय शक्तियों का आवंटन इस प्रकार से हुआ है कि सकल कराधान का दो तिहाई केन्द्र सरकार द्वारा एकत्रित किया जाता है, जबकि शेष एक तिहाई राज्यों द्वारा। इसलिए संविधान में केन्द्र राज्य वित्तीय असंतुलन को दूर करने के लिए वित्त आयोग जैसी संवैधानिक संस्था का प्रावधान रखा गया है, जिसे केन्द्र व राज्यों के मध्य राजस्व आवंटन का दायित्व सौंपा गया है। केन्द्र से राज्यों को वित्तीय हस्तांतरण हेतु दिशा-निर्देश सुझाने ....
Question : राजकोषीय अनुशासन को सुनिश्चित करने में, वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के प्रस्तावकों द्वारा व्यक्त आशावाद अनुचित प्रतीत होता है।
(2010)
Answer : केन्द्र व राज्य सरकारों में वित्तीय अनुशासन लाने के उदेश्य से राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम को लोक सभा ने मई 2003 को पारित कर दिया तथा इसको जुलाई 2004 में अधिसूचित किया गया। यह अधिनियम मूलतः न्यूजीलैण्ड के राजकोषीय प्रबंधन कानून के अनुभवों पर आधारित है। इस विधेयक को मूलतः सन् 2000 में संसद में प्रस्तुत किया गया था। जहां इसे स्थायी संसदीय समिति को सन्दर्भित किया गया था। मूल विधेयक में यह ....
Question : मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों का रूप तैयार करने और क्रियान्वित करने में संघ सरकार के वित मंत्रलय की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
(2009)
Answer : प्रशासनिक संगठन के बारे में विचार व्यक्त करते हुए कभी कौटिल्य ने कहा था कि राजा को सर्वाधिक ध्यान राजकोष पर देना चाहिए, क्योंकि वित्त ही सभी क्रियाओं का आधार है। कालान्तर में प्रशासन की वित्तीय स्थिति पर ऐसे ही प्रयास के लिए वित्त मंत्रलय द्वारा अनुक्रिया किया जाने लगा है।
किसी भी देश का वित्त मंत्रलय ही वित्तीय स्थिति के लिए प्रयासरत रहता है। वित्त मंत्रलय राजकोष पर नियंत्रण, प्रभावी संचालन हेतु समय-समय पर मौद्रिक ....
Question : ‘बजट राष्ट्र की आर्थिक जन्मकुण्डली से कुछ अधिक होता है।’ टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : बजट का राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसका राष्ट्र की आर्थिक नीति के संचालन व नियंत्रण में बहुत अधिक महत्व है। सरकार बजट की सहायता से अपना कार्य संचालित करती है तथा सार्वजनिक आय के विभिन्न स्रोतों का अधिकतम सदुपयोग करने की योजना बनाती है।
एक समय बजट सेल प्रशासन के लिए धन प्राप्त करने के साधन मात्र थे, किंतु अब यह सिर्फ आय-व्यय का हिसाब रखने का साधन ही नहीं ....