Question : ‘‘यह आवश्यक है कि विकेंद्रीकृत शासन सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक न्याय के एक उपकरण के रूप में कार्य करें।’’ इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : किसी भी संगठन में निर्णय के केंद्र जितने कम होते हैं वह संगठन उतना ही अधिक केंद्रित माना जाता है। इसके विपरीत निर्णय के जितने अधिक केंद्र किसी संगठन में होते हैं वह संगठन उतना ही विकेंद्रीकृत माना जाता है। इस प्रक्रिया से शीघ्र निर्णय होता है।
प्रशासन में लचीलापन पाया जाता है। स्थानीय समस्याओं का उचित समाधान इस प्रणाली के अंतर्गत होता है। विकेंद्रीकृत व्यवस्था के अंतर्गत प्रशासन में नए प्रयोग विभिन्न प्रकार के अभिकरणों ....
Question : ‘‘सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आइ.सी.टी.) से लोक सेवा संप्रदान की गुणत्ता में तो सुधार होता है, किन्तु वह घूसखोरी को रोकने में असफल रहती है।’’ टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : प्रशासनिक संगठन के अस्तित्व एवं विकास के लिए Information (सूचना) का विशेष महत्व है। वर्तमान समय की सूचना क्रांति का प्रभाव समाज के विभिन्न क्षेत्रें में देखने को मिलता है।
इस सूचना संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश की सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में प्रशासन की भूमिका को अधिक गतिशील एवं सक्रिय बनाने का प्रयास किया गया है। भारत में भी सूचना प्रौद्योगिकी के विकास से उद्योग, शिक्षा, सरकारी सेवा एवं लोक सेवाओं ....
Question : स्मार्ट एवं अमृत शहरों से संबंधित संघ सरकार की नीतियां नगरीय विकास की प्रबन्धकीय समस्याओं को किस प्रकार संबोधित करती है? समझाइए।
(2015)
Answer : आर्थिक विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ देश के शहरी परिदृश्य में व्यापक बदलाव लाकर शहरी क्षेत्रें को और अधिक रहने योग्य बनाने के उद्देश्य से 29 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्मार्ट सिटी मिशन एवं शहरी रूपांतरण एवं पुनरोद्धार हेतु अटल मिशन यानि अमृत मिशन को मंजूरी प्रदान की गयी। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बुनियादी ढ़ांचागत सुविधाओं जैसे पर्याप्त स्वच्छ जलापूर्ति, साफ-सफाई एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरों में आवागमन ....
Question : राष्ट्रीय (एन. आइ. ए.) के उद्देश्यों और क्षेत्रधिकार के विशिष्ट अभिलक्षणों की समालोचनात्मक विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की स्थापना 16 दिसंबर, 2008 को की गई। यह एक संघीय जांच एजेंसी है तथा इसे राज्यों की अनुमति के बिना आतंकवाद तथा उससे संबंधित अपराधों की जांच करने का पूरा अधिकार दिया गया है।
केंद्र सरकार को अगर यह समझती है कि किसी अपराध का प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध आतंकवाद से है तो वह ऐसे मामलों की जांच का काम एन.आई.ए. को सौंप सकती है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी अर्थात एन.आई.ए. के प्रमुख ....
Question : विकेन्द्रित योजनाकरण (डीसेंट्रलाइज्ड प्लैनिंग) को अपनाने के बावजूद, अनेक प्रदेशों में सहभागी पहलें उपांतिक और विभाजक बनी हुई है। चर्चा कीजिए।
(2014)
Answer : विकेन्द्रित आयोजना का अर्थ है शासन के प्रत्येक निर्णय स्तर पर अपने क्षेत्रनुसार, उसकी जरूरतों एवं आवश्यकताओं के अनुसार योजना का निर्माण करना।
विकेंद्रित योजना को वर्तमान में सहभागी योजना भी कहा जाता है जो कि इसके कोऑपरेटिव एवं लोकतांत्रिक चरित्र को दर्शाता है। केरल में ऐसी एक योजना की शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी। नौवीं पंचवर्षीय योजना में इस बात पर सहमति हुई थी कि प्रत्येक राज्य राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत जनता के सहयोग ....
Question : “हाल के समय में, केन्द्र और राज्यों में अनेक राजनीतिक दलों के सत्तारूढ़ होने के कारण केन्द्र-राज्य संबंधों ने नए आयाम प्राप्त कर लिए हैं।” (द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग)। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपने तर्कों को पुष्ट करने के लिए कारण प्रस्तुत कीजिए।
(2014)
Answer : चतुर्थ आम चुनाव (1967) से पूर्व, “नेहरू युग” में केन्द्र और राज्यों के संबंध मधुर कहे जा सकते हैं। इस कालावधि में देश के राजनीतिक क्षितिज पर कांग्रेस दल का एकाधिकार था और केन्द्र और राज्यों के बीच संघर्षपूर्ण स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी। चतुर्थ आम चुनाव के बाद और खास तौर पर 8वीं लोकसभा एवं उसके बाद राज्य विधानसभाओं के चुनावों के बाद भारतीय राजनीति में नया मोड़ आया। अब संघ प्रणाली का क्रियान्वयन ....
Question : “इस मत से आप कहां तक सहमत हैं कि राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) राज्य सरकारों की मांगों को तभी तक अनुनादित कर सकती है जब तक योजना आयोग उसकी आज्ञाकारिता में बनाए रखा जाता है- आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2014)
Answer : योजना आयोग की संरचना ऐसी है कि उसमें राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं होता। वह राज्यों से योजना के संबंध में परामर्श अवश्य ले लेता है। वह स्वयं का अध्ययन दल विभिन्न स्तरों पर गठित करता है और प्रस्ताव पेपर तैयार कर मंत्रलयों व विभागों से उस पर विस्तृत योजना बनाने को कहता है। फिर यह योजना राष्ट्रीय विकास परिषद को भेजी जाती है। राष्ट्रीय विकास परिषद में राज्यों का प्रतिनिधित्व होता है, क्योंकि सभी राज्यों ....
Question : ‘‘केन्द्रीय सरकार के अग्रणी क्रार्यक्रमों का सामाजिक लेखापरीक्षण करना नियंत्रक एवं महालेखा-परीक्षक के कार्य-निष्पादन को सुगम बना देता है।’’ उपयुक्त उदाहरणों के साथ इस कथन को सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : सामाजिक अंकेक्षण एक प्रक्रिया है, कार्यालय के दस्तावेजों को देखने की और इस बात को निश्चित करने की कि जो खर्च फाइलों में दिखाये गये हैं वे वास्तव में हुए हैं-
नियंत्रक एवं महालेखक परीक्षक भी यही करता है उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक रूप से किए गये खर्चों की जानकारी लेना। और सामाजिक अंकेक्षण इस प्रक्रिया में प्रथम चरण है जो कैग के कार्य को सुगम बनाता है।
उदाहरणः 1. मनरेगा के सदर्भ में कैग ....
Question : एक सौ ‘‘स्मार्ट नगरों’’ की धारणा को और भारत के नगरीकरण पर उसके संभावित प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : केन्द्र सरकार ने 100 स्मार्ट शहरों के विकास का लक्ष्य रखा है जिसके लिए 2014-15 के बजट में 7,060 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
स्मार्ट सिटी का तात्पर्य है ऐसी नगरीय बसावट जिसमें प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के द्वारा वहां रहने वालों को अधिक संरचनात्मक सुविधा प्रदान की जाए।
आई.सी.टी. ऐसे स्मार्ट शहरों का ‘बैक-बोन’ होती है और ऊर्जा के व्यर्थ खपत को रोकती है। ऐसे शहरों में नियंत्रण की केन्द्रीकृत प्रणाली होती है जहां से ....
Question : ‘‘भारत में आर्थिक आयोग सांख्यिकी के संकलन का काम करता है।’’ टिप्पणी करें।
(2013)
Answer : केंद्र व राज्यों के मध्य विभाजनीय करों के राजस्व के लिए विभाजन व केंद्रीय अनुदानों की राशि के निर्धारण व इस राशि के अंतराज्यीय विवरण के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने हेतु भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 में वित्त आयोग के गठन का प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत यह प्रावधान है कि इस प्रावधान के प्रारंभ होने की तिथि से 2 वर्ष के भीतर और तत्पश्चात प्रत्येक 5 वर्ष की अवधि की समाप्ति ....
Question : ‘‘नियोजन से समस्याओं को विस्तृत व वैज्ञानिक रूप से समझने में सहायता मिलती है।’’ इस कथन का योजनाकरण की विधि के संदर्भ में परीक्षण करें।
(2013)
Answer : वर्तमान युग नियोजन का युग है और विश्व में लगभग सभी देश अपने विकास व उन्नति के लिए आर्थिक नियोजन मे जुटे हैं। यह निश्चित है कि सभी संगठनों को, यदि वे अपने उद्देश्यों में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, योजना का निर्माण करना चाहिए।
भारत जैसे अर्द्धविकसित देशों में गरीबी, बेरोजगारी, सामाजिक और आर्थिक विषमताएं, औद्योगीकरण आवश्यकता, जनसंख्या की समस्या, अशिक्षा जैसे कारणों से नियोजन की आवश्यकता महसूस की गई। ये सब समस्याएं एक दूसरे ....
Question : केंद्र-राज्य योजनाकरण संबंधों को सुधारने के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद के संबंध में सरकारिया आयोग की सिफारिशों पर चर्चा कीजिए।
(2012)
Answer : 1983 में केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश आर.एस. सरकारिया की अध्यक्षता में केन्द्र-राज्य संबंधों पर एक आयोग का गठन किया। आयोग को केन्द्र राज्य संबंधों का मूल्यांकन करने को कहा गया तथा आयोग को इस संबंध में उपयुक्त बदलावों एवं उपायों की सिफारिशें करनी थी।
आयोग ने संरचनात्मक बदलावों का समर्थन नहीं किया था और संस्थाओं से जुडे़ मौजूदा संवैधानिक प्रबंधनों एवं सिद्धांतों को आधारभूत रुप से सुदृढ़ माना था, किन्तु आयोग ने ....
Question : उ.नि.वै. (एल.पी.जी.) के संदर्भ में, ‘सांकेतिक’ योजनाकरण को सही ठहराइए।
(2012)
Answer : सांकेतिक नियोजन का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था में सुधार लाना है। इस योजना का लाभ यह है कि इसमें चयन तथा कार्य करने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, स्वतंत्र बाजार, लोचशील नियोजन तथा विकेन्द्रीकरण का समावेश होता है। एल.पी.जी. की प्रक्रिया को अपनाते हुये भारत ने भी सरकार की भूमिका सुविधा प्रदायक के रुप में निर्धारित करते हुए बाजार को कार्य करने की छूट दी। सांकेतिक नियोजन एल.पी.जी. के संदर्भ में सबसे उपयुक्त योजनाकरण है, क्योंकि सांकेतिक नियोजन ....
Question : ‘संसदीय विभागीय समितियों ने अनुदानों की मांगों का विश्लेषण करने में अपनी भूमिका को प्रभावशाली रूप से निभाया है।’ मूल्यांकन कीजिए।
(2012)
Answer : राष्ट्रीय वित्त पर संसदीय नियन्त्रण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 1993 से विभागीय समितियों की स्थापना की गयी है। प्रारंभ में इनकी कुल संख्या 17 थी तथा प्रत्येक समिति में 45 सदस्य थे, लेकिन जुलाई 2004 से इनकी संख्या बढ़कर 24 कर दी गयी तथा इनकी सदस्य संख्या घटाकर कर प्रत्येक में 31 कर दी गयी है।
इन समितियों का मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों की वार्षिक रिपोर्ट का परीक्षण करना विभिन्न परियोजनाओं का मूल्यांकन करना ....
Question : मंत्रिमंडल समितियों के गठन एवं प्रकार्यण में चरों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2012)
Answer : मंत्रिमण्डल द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों की संख्या काफी अधिक होती है व मंत्रिमण्डल के पास समयाभाव होता है। इसी समस्या का समाधान करने हेतु ब्रिटिश सरकार द्वारा बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में कैबिनेट समितियों की व्यवस्था को अपनाया गया, ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर निर्णय लेने से पूर्व उनका गहन विश्लेषण हो सके और विश्लेषण के लिए एसे मुद्दे मंत्रिमण्डल समितियों को सौपें जा सके। मंत्रिमण्डल समितियों में मंत्रियों को सदस्यता दी जाती ....
Question : निम्नलिखित कथनों के संदर्भों एवं संदर्षों को स्पष्ट कीजिएः
(2010)
Answer : (i): योजना आयोग की स्थापना 1950 में सरकार के एक प्रस्ताव द्वारा की गई है। इसकी अनुशंसा 1946 में गठित एडवाइजरी प्लानिंग बोर्ड ने की थी, जिसके अध्यक्ष के सी नियोगी थे। भारत में योजना आयोग सामाजिक एवं आर्थिक नियोजन का सर्वोच्च निकाय है।
योजना आयोग की संरचना इस प्रकार की होती है- प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष होता है, एक उपाध्यक्ष, कुछ केन्द्रीय मंत्री अंशकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किये जाते हैं।
वित्त मंत्री व योजना मंत्री ....
Question : भारत के संदर्भ में इस दृढ़कथन पर चर्चा कीजिए कि प्रशासनिक सुधार बहु-आयामी होते हैं और राज्य कार्य के अन्य संबंधित क्षेत्रें में सुधारों के द्वारा उनको पुष्ट करने की आवश्यकता होती है।
(2010)
Answer : प्रशासनिक सुधार से तात्पर्य है, प्रशासन में इस प्रकार के सुनियोजित परिवर्तन लाना, जिससे वह अपनी क्षमताएं बढ़ा सके एवं सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर हो सके। प्रशासनिक विकास की यह ऐसी प्रक्रिया है, जो सुनियोजित एवं संगठित होने के साथ-साथ निरन्तरता एवं सृजनशीलता की भी अपेक्षा करती है।
इस प्रक्रिया में सामजिक एवं आर्थिक लक्ष्य नवीन आवश्यकताओं के अनुसार तीव्र गति से परिवर्तित होते हैं। इन प्रगतिशील लक्ष्यों को प्राप्त करने के ....
Question : लोकहित मुकदमेबाजी (पीआईएल) में 1980 के दशक में उसके प्रारंभ से अनेक परिवर्तन हो चुके हैं।
(2010)
Answer : भारत में मुकदमेबाजी का प्रारम्भ 1980 के प्रारम्भिक वर्षां में हुआ। 1981 के एस.पी. गुप्ता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 1981 एससीसी 87 वाद में न्यायमूर्ति पी-एन- भगवती ने लोकहित मुकदमेबाजी (पी.आई.एल) की शुरूआत की थी। पी.एन. भगवती को भारत में पीआईएल का जनक कहा जाता है। इसके बाद में लोक हित मुकदमेबाजी को स्पष्ट करते हुए पीएन भगवती ने कहा थाः
‘जहां पर एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के साथ संवैधानिक या कानूनी रूप से ....
Question : द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने अपनी 10वीं रिपोर्ट में टिप्पणी की है कि सामान्य बोध है कि सरकार में प्रोत्साहन संरचना इतनी अधिक कमजोर और अपर्याप्त है कि वह बेहतर निष्पादन के लिए अभिप्रेरित नहीं कर सकती’ इसको सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2010)
Answer : द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में हुआ है। आयोग ने अपनी 10वीं रिपोर्ट कार्मिक प्रशासन पर दी है। वो भारत में कार्मिक सत्र के प्रत्येक क्षेत्र में सुधार लाने की सिफारिश करते हैं। चाहे वह भर्ती प्रक्रिया हो, प्रोन्नति हो, कैडर आवंटन हो आदि। आयोग अपनी रिपोर्ट में राजनीतिक कार्यपालिका तथा लोक सेवकों के मध्य सम्बन्धों पर भी सुझाव दिये।
दसवीं रिपोर्ट में लोक सेवकों द्वारा कार्य निष्पादन के प्रति समर्पण ....
Question : निम्नलिखित कथनों पर टिप्पणी लिखिए।
(2009)
Answer : उत्तर (i): भारत को प्रशासनिक सुधारों पर विचार करने एवं भारतीय प्रशासन का निष्पक्ष अध्ययन करने के लिए सितंबर, 1952 में अमेरिकी विशेषज्ञ पॉल एपलबी की नियुक्ति की गई। पॉल एपलबीने भारतीय प्रशासन को पर्याप्त रूप से संगठित एवं विकसित माना तथा अपने प्रतिवेदन में 12 प्रमुख सिफारिशें कीं, जिनमें से महत्वपूर्ण सिफारिशें इस प्रकार हैं:
Question : राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन को बुनियादी बाधाएं और खड्डे कौन-कौन से हैं?
(2008)
Answer : वर्ष 2006 से लागू तथा वर्तमान में पूरे देश में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम देश के ग्रामीण क्षेत्र में प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य को वर्ष में 100 दिनों का सुनिश्चित रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से आरंभ हुआ। इस योजना के तहत चयनित जिलों के ग्रामीण क्षेत्रें में प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को कुशल श्रम वाले रोजगार की गारंटी दी गई है। प्रत्येक परिवार एक वित्तीय वर्ष में ....
Question : भारत में सामाजिक (कल्याण) प्रशासन में प्रशासनिक अभिकरणों का विशेषीकरण और उसका तेजी के साथ विस्तार दिखाई पड़ रहा है। मूल्यांकन कीजिये।
(2007)
Answer : कल्याण प्रशासन की संरचना काफी उलझी हुई है। भारत में सामाजिक (कल्याण) प्रशासन में प्रशासनिक अभिकरणों का विशेषीकरण और उसका द्रुतगति के साथ विस्तार हुआ है। समाज में आर्थिक विकास की तो परम आवश्यकता होती ही है, लेकिन आर्थिक विकास के साथ ही साथ सामाजिक एवं मानवीय विकास की भी अपनी विशिष्ट महत्ता है। स्वास्थ्य, पोषाहार, और शिक्षा मानवीय जीवन, कार्य निष्पादन एवं राष्ट्र की मौलिक भावनाओं के द्योतक हैं।
मूलभूत आवश्यकताएं एवं सेवाएं एकाकार ....
Question : भारत की महिलाओं और बच्चों के कल्याण के संबंध में संघ सरकार की नीतियों का, अधिक से अधिक 200 शब्दों में, समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये।
(2006)
Answer : महिलाओं और बच्चों का सर्वांगीण विकास और उन्हें महत्व देने के लिये पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत एक अलग महिला एवं बाल विकास विभाग 1985 से काम कर रहा था। लेकिन विभाग का महत्व देखते हुये 30 जनवरी 2006 को महिला एवं बाल विकास मंत्रलय अस्तित्व में आया।
महिला एवं बाल विकास विभाग पर निम्नलिखित पांच अधिनियमों को लागू करने की जिम्मेदारी है। साथ ही विभाग महिला और बाल विकास विभाग के क्षेत्र में ....
Question : ‘प्रश्न, व्यय पर संसदीय नियंत्रण के एक शक्तिशाली तकनीक का निरूपण करते हैं।’ स्पष्ट कीजिए।
Answer : संसदीय प्रश्न एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा संसद प्रशासन पर निगरानी रखती है। संसद सदस्यों को लोक महत्व के मामलों पर सरकार के मंत्रियों से जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रश्न पूछने का अधिकार होता है।
जानकारी प्राप्त करना प्रत्येक गैर-सरकारी सदस्य का अंतर्निहित एवं निर्बाध संसदीय अधिकार है। संसद सदस्य के लिए लोगों के प्रतिनिधि के रूप में यह आवश्यक होता है कि उसे मूल उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए सरकार के क्रियाकलापों के ....