Question : ‘‘कार्यपालिका की अध्यादेश निकालने की शक्ति को उपयुक्त तरीके से नियंत्रित किए जाने की आवश्यकता है।’’ समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2015)
Answer : संविधान के अनुच्छेद-123 के तहत राष्ट्रपति (कार्यपालिका प्रमुख) को संसद के सत्रवसान की अवधि में अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई है। इन अध्यादेशों का प्रभाव व शक्तियां, संसद द्वारा बनाए गए कानून की तरह ही होती हैं। परंतु वे अल्पकालीन होते हैं। यद्यपि राष्ट्रपति किसी भी समय किसी अध्यादेश को वापस ले सकता है। हलांकि राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति उसकी कार्य स्वतंत्रता का अंग न होकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व ....
Question : ‘‘भारत में अधिकांश सिविल सेवक सक्षम प्रशासक हैं, किन्तु वे निर्णय-निर्माण में जन-सहभागिता के प्रोत्साहन की और बहुत कम ध्यान देते हैं।’’ इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : आधुनिक राज्य की सरकार के कार्यों की प्रकृति संख्या तथा जटिलता में परिवर्तन आ जाने के फलस्वरूप सिविल सेवाओं ने नवीन उत्तरदायित्वों एवं कृत्यों को ग्रहण कर लिया है। भारत में सिविल सेवक सक्षम प्रशासक तो होते हैं किन्तु वे निर्णय निर्माण जन-सहभागिता की ओर बहुत कम ध्यान देते हैं। सिविल सेवक स्थायी लोक सेवक होते हैं एवं उन्हें जनता का स्वामी नहीं अपितु जनता का सेवक होना चाहिए। सिविल सेवकों को जनसहभागिता बढ़ाने का ....
Question : सिविल सेवा सुधारों के विषय में द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग के प्रमुख सरोकार क्या रहे हैं? उनके क्रियान्वयन की ताजा स्थिति बताइए।
(2015)
Answer : भारत की शासन व्यवस्था प्रजातांत्रिक व्यवस्था पर आधारित है जो लोक कल्याण के आदर्शों से प्रेरित है। लोकतंत्र की शक्ति जनता में निहित होती है तथा यह सिद्धान्त अथवा आदर्श ही लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व की धारणा की नींव रखता है। सिविल सेवा एवं अपने ज्ञान, योग्यता, अनुभव एवं लोक मामलों की समझ के आधार पर निर्चाचित जन प्रतिनिधियों को नीतियों के निर्माण एवं क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करते हैं। संसदीय लोकतंत्र की एक अनिवार्य विशेषता बन ....
Question : केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों में समय-समय पर प्रवर्तित सुधारों की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए तथा टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : प्रशासन द्वारा उत्तम रीति से कार्य करना केवल इस बात पर ही अवलंबित नहीं है कि इसके कर्मचारी अति योग्य हों, अपितु इस बात पर भी निर्भर है कि अपने वैयक्तिक आचरण को उच्च स्तर पर बनाए रखें और सरकारी कर्मचारियों के नियमों तथा अनुशासन का पूरा पालन करें। अतः इसके लिए यह आवश्यक है कि सरकारी कर्मचारियों को ठीक ढंग से काम करने के बारे में सुस्पष्ट रीति से प्रतिपादित किए गए नियमों की ....
Question : “लोंकतांत्रिक प्रशासनिक ढांचे के बाहरी नरम कवच के भीतर, भारतीय प्रशासन का फौलादी ढांचा है जो युगों से जीवित है, सही-सलामत है।” इस कथन के प्रकाश में पिछले एक दशक में अधिकारी-तंत्र और विकास के बीच संबंधों का परीक्षण कीजिए।
(2014)
Answer : इस कथन के दो निहितार्थ हैं- प्रथम, लोकतांत्रिक प्रशासनिक ढांचा जो समाज के बदलते स्वरूप के कारण स्वयं को परिवर्तित करता, अनुकूलित करता दिखाई दे रहा है वह इसका सिर्फ बाहरी चरित्र है, अति भ्रम एवं छलावा है, जबकि आन्तरिक रूप से यह उन्हीं ब्रिटिशकालीन विरासतों का समर्थक है और यही आन्तरिक स्वरूप इसकी वास्तविकता है।
यह इतना मजबूत है कि इतने वर्षों में अपना चरित्र नहीं बदल सका। यह इसके प्रति एक नकारात्मक विचारधारा है।
द्वितीय, ....
Question : भारत में सिविल सेवाओं की शिकायत निवारण क्रियाविधि के अभिलक्षणों को सविस्तार बताइए। क्या यह क्रियाविधि इसके सृजन के उद्देश्यों की पूर्ति करती है?
(2014)
Answer : 1954 में पहले वेतन आयोग की सिफारिश पर सभी मंत्रलयों में स्टाफ कमेटियों का गठन किया गया था। 1957 में उनका नाम बदलकर कर्मचारी परिषद कर दिया गया। इन परिषदों के लक्ष्य एवं उद्देश्य थे-
दूसरे वेतन आयोग ने पाया कि अपने लक्ष्यों और उद्देश्यों को पूरा करने में ये परिषदें ....
Question : अधिकारी तंत्र (ब्यूरोक्रेसी) के प्रकार्यण (फंक्शनिंग) के संबध में 31 अक्टूबर, 2013 को उच्चतम न्यायालय का विनिर्णयन सुशासन प्राप्त करने में सहायक होगा। इस विनिर्णय का विश्लेषण कीजिए और उस पर अपनी टिप्पणियां दीजिए?
(2014)
Answer : नौकरशाही को राजनीति के अवांछित हस्तक्षेप से बचाने के लिए तथा निरन्तर होने वाले ट्रांसफर को रोकने के लिए, जो कि राजनेताओं द्वारा मनमाने ढंग से किये जाते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य दोनों को निर्देश दिया कि वे एक सिविल सेवा बोर्ड का गठन करें। यह बोर्ड ट्रांसफर का प्रबंधन, पोस्टिंग, जांच, पदोन्नति की प्रक्रिया, पुरस्कार एवं दण्ड तथा अन्य अनुशासनात्मक मामलों के लिए उत्तरदायी होगा। इससे पूर्व न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और ....
Question : ‘‘प्रशासनिक अधिकरणों के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा इन अधिकरणों की स्थापना के ध्येय को ही विफल करता है।’’ केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण के संदर्भ में टिप्पणी करें|
(2013)
Answer : 1985 में संसद ने प्रशासनिक न्यायाधिकरण कानून पारित किया और केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय सरकारों के अधीन कर्मचारियों की भर्ती और सेवा संबंधी शर्तों से जुड़े झगड़ों और शिकायतों का निपटारा करने के लिए केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना की। 42वां संविधान संशोधन द्वारा 323 (बी) को संविधान में स्थान दिया गया जो विधानमंडलों को अधिकार देता है कि वे करारोपण, विदेशी मुद्रा विनिमय, श्रम विवाद, भूमि सुधार इत्यादि से संबंधी न्यायाधिकरण स्थापित ....
Question : भारतीय व राजकीय प्रशासनिक सेवाओं व जनपदीय प्रशासन की समस्याओं पर वी.टी. कृष्णामचारी कमेटी (1962) की प्रमुख अनुशंसाओं का विवरण दें।
(2013)
Answer : वी.टी कृष्णामाचारी कमिटी ने अग्रलिखित सिफारिशें की हैं-
1. राष्ट्रीय अकादमी में प्रशिक्षण - राष्ट्रीय अकादमी में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के प्रशिक्षण पद्धति का वर्णन किया गया है। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए अग्रलिखित सलाह दी हैं-
Question : ‘अधिकारियों को राजनीति नहीं खेलनी चाहिए, लेकिन उन्हें समझना तो चाहिए कि राजनीति किस प्रकार कार्य करती है।’ टिप्पणी कीजिए।
(2012)
Answer : मैक्स वेबर ने अपने नौकरशाही के सिद्धान्त में अधिकारियों में निर्वैयक्तिक विलग्नता और वस्तुनिष्ठता जैसे गुणों की बात की है, अर्थात् अधिकारी को प्यार, घृणा, द्वेष से मुक्त नियम आधारित निर्णय लेना चाहिये, जो सबके लिये समान होगा और लोकहित में होगा, ना कि व्यक्तिगत हित या सामूहिक हित में। परन्तु वर्तमान राजनीति ने पूरे समाज को कई समूहों में बाँट दिया है। जैसे- हिन्दू-मुस्लिम, अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि इसमें जब कोई व्यक्ति ....
Question : ‘सुशासन प्रभावी लोकतांत्रिक शासन के साथ निकटता से पंक्तिबद्ध है।’ सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2012)
Answer : लोकतंत्र व सुशासन परस्पर पूरक दिखते हैं। वस्तुतः दोनों संकल्पनाओं साधन व साध्य का सम्बन्ध है। लोकतंत्र साधन है तथा सुशासन साध्य है। लोकतंत्र लोगों को शासन की शक्ति करता है और एक जनप्रिय सरकार चुनने का अधिकार देता है, अतः दोनों ही संकल्पनायें नागरिक केन्द्रित हैं व नागरिकों को शासन का अन्तिम उद्देश्य मानती है।
सुशासन की अवधारणा में जिन तत्वों पारदर्शिता, जनोन्मुखता, सहभागिता, संवेदनशीलता इत्यादि पर बल दिया जाता है, जो किसी भी लोकतंत्र ....
Question : “लोकपाल चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, वह भारत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक तंत्र से भ्रष्टाचार नहीं मिटा सकता।” टिप्पणी कीजिए।
(2011)
Answer : बढ़ते भ्रष्टाचार एवं जनता में उनके प्रति रोष को हाल ही में बड़े स्तर पर देखा गया।
इसी संदर्भ में लोकपाल की संस्था एक बार फिर से चर्चा में रही। भारत में लोकपाल की स्थापना की संकल्पना सत्तर के दशक से ही सामने आ गई थी, परंतु राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका।
यह बात कुछ हद तक सही है कि लोकपाल चाहे कितना ही शक्तिशाली हो, वह भ्रष्टाचार को ....
Question : “अभियोग निराकरण प्रणाली भारत के लोक सेवा प्रबंधन की संभवतया सबसे निर्बल कड़ी है।” टिप्पणी कीजिए।
(2011)
Answer : किसी भी राष्ट्र की कार्यकुशलता का स्तर लोक सेवा के सदस्यों के चरित्र तथा सत्यनिष्ठा पर आधारित होता है। जहां संविधान का उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना का है और वहां राजकीय गतिविधियों का क्षेत्र स्वाभाविक रूप से अधिक विस्तृत हो जाता है।
अतः संविधान निर्माताओं ने लोकसेवकों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने हेतु संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया है। इसी का हिस्सा अनुच्छेद 311 है।
इसके तहत सिविल सेवा के किसी भी व्यक्ति को उस ....
Question : ‘विकास प्रशासन का प्रणोद भारत के अधिकारीतंत्र में शक्ति का संचार करने में विफल रहा।’
(2010)
Answer : विकास प्रशासन से तात्पर्य है- आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयुक्त प्रौद्योगिकी का एकीकरण करते हुए विकास को बढ़ावा देना। इसमें विकासात्मक लाभ का समानतापूर्वक वितरण किया जाता है। विकास प्रशासन के अंतर्गत व्यक्तियों, समूहों, समुदायों, जन भागीदारी, ज्ञान का बंटवारा, शक्ति एवं सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता एवं स्वतंत्रता, स्थानीय संसाधनों आदि पर विशेष बल देते हुए स्वविकास के प्रयासों को समर्थन दिया जाता है।
वर्तमान में विकास प्रशासन में कई नई शब्दावलियां जैसे, जन भागीदारी, सभ्य समाज, गैर सरकारी ....
Question : ‘प्रशासनिक तंत्र जितना अधिक विकसित हो जाएगा, उतनी ही बड़ी संभावना होगी कि उसके विकासात्मक प्रभाव होंगे।
(2010)
Answer : प्रशासनिक तंत्र वह प्रणाली है, जिसके माध्यम से सरकार अथवा राजनीतिक कार्यपालिका अपने कार्यों का संपादन कराती है। मंत्रीपदीय उत्तरदायित्व के अंतर्गत शासन तंत्र अनाम रहकर कार्य करता है।
किन्तु यही प्रशासन तंत्र वास्तविक कार्यपालिका होता है जो मंत्रियों के दिशा निर्देशन में कार्य करते हुए अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करता है। प्रशासनिक तंत्र देश के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी सेवाएं देता है, चाहे वह आर्थिक हो, सामाजिक हो या अन्य कोई क्षेत्र। आज के कल्याणकारी ....
Question : कहा जाता है कि भारतीय प्रशासनिक तंत्र के, युक्तिसंगत- वैधिक आधार पर, आधुनिकीकरण की दिशा में अंग्रेजों ने एक महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1830 से 1865 के बीच की अवधि के संदर्भ में, इस आकलन को सही साबित कीजिए।
(2010)
Answer : ‘प्रशासन’ एक ऐसी अवधारणा है, जो प्राचीन काल से ही किसी न किसी रूप में विद्यमान रही है। वास्तव में ‘प्रशासन’ शब्द उतना ही पुराना है, जितना कि ‘मानव सभ्यता’।
चाहे वो हड़प्पाकालीन समाज हो, मुगलकालीन समाज या वर्तमान आधुनिक समाज, प्रशासन हर जगह सदा से विद्यमान रहा है। इसी प्रशासनिक तंत्र के कारण हम आधुनिक युग तक पहुंच पाने में सफल भी हुए हैं।
वैसे तो यह हमेशा से विद्यमान रही अवधारणा है, किन्तु भारत के ....
Question : सिविल सेवा तटस्थता एक कल्पना है। कोई भी विचारशील व्यक्ति तटस्थ कैसे हो सकता है?
(2010)
Answer : सिविल सेवा से तात्पर्य सरकारी असैन्य सेवा से है। भारत में इनके दो प्रकार पाए जाते हैं:-
अखिल भारतीय सेवाएं केन्द्र और राज्य दोनों में समान रूप से संबद्ध होती हैं अर्थात इन सेवाओं में चयन अखिल भारतीय स्तर पर होता है, किन्तु उनका कार्य क्षेत्र राज्य ही होते हैं। वर्तमान में इस स्तर की निम्न तीन सेवाएं हैं:
ये तीनों सेवाएं ‘कलास-I’ श्रेणी की ....
Question : आपके विचार में स्वत्रंता प्राप्ति के पश्चात क्रियान्वित किये गये पांच सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार कौन से हैं। इनका क्या प्रभाव पड़ा है?
(2009)
Answer : किसी भी संगठन के निरन्तर बेहतर निष्पादन के लिए आवश्यक है कि समय की मांग के अनुरूप एवं समय के साथ आई कमजोरियों को यथाशीघ्र दूर किया जाये। प्रशासनिक सुधार की प्रक्रिया में यही कार्य किया जाता है और संगठन की नकारात्मक पहलुओं पर सांगठनिक विरोध के बावजूद जानबूझकर अनुक्रिया करके दूर करने का प्रयास किया जाता है। स्वतंत्रता के बाद से भारतीय प्रशासनिक प्रघटना में भी अनेकानेक सुधार किये गये जिसका संगठन पर बहुत ....
Question : सिविल सेवा सक्रियता के बीच परस्पर विरोध नहीं है।
(2009)
Answer : नौकरशाही, जो कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का एक साधन है, अपने कार्यों को और बेहतर ढंग से करे इसके लिए आज सिविल सेवा तटस्थता सिविल सेवा सक्रियतावाद समय की मांग बन चुकी है। सिविल सेवा तटस्थता से आशय है कि नौकरशाही सभी राजनैतिक दलों के प्रति तटस्थ रहे और जो भी दल सत्ता में है, उसे निष्पक्ष रूप से सलाह, तथ्य, आंकड़े उपलब्ध कराये।
लेकिन यहां यह नहीं माना जाना चाहिए कि वह सत्तारूढ़ दल की नीतियों ....
Question : सिविल सेवा तैनातियों में एक नियत कार्यकाल सरकार में उत्पादकता, जबावदेही सत्यनिष्ठा में वृद्धि कर सकता है।
(2009)
Answer : आजकल मुख्यतया उच्चतर सिविल सेवकों के कार्यकाल में स्थायित्व की मांगें जोर-शोर से उठने लगी हैं, जो समय की मांग के अनुरूप भी है। किसी भी प्रशासनिक ईकाई के संचालन का दायित्व संबंधित राजनैतिक कार्यपालिका के पास संविधान के अनुच्छेद 77 (3) और 166 (3) के तहत, होता है। इसके लिए राजनैतिक कार्यपालिका शासन चलाने हेतु जैसा उपयुक्त समझे वैसा ही लोकसेवकों के पदस्थापन, सस्पेंण्ड, अनिवार्य सेवानिवृति का अधिकार भी होता है और यह सिद्धान्त ....
Question : क्या आप इस बात से सहमत हैं कि भारत में नागरिक अधिकार पत्र ने नागरिक केन्द्रित प्रशासनिक लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सका है। इस संदर्भ में अपना सुझाव देते हुए इसकी विवेचना करें।
(2009)
Answer : किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र में जनहित सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि सरकार में उत्तरदायित्व की भावना के साथ ही प्रशासनिक संगठनों पर जनता का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष निमंत्रण भी इस उत्तरदायित्व में बढ़ोतरी में सहायक होता है। इसी उत्तरदायित्व एवं नियंत्रण की भावना के विकास हेतु लोक प्रशासन में सिटीजन चार्टर जैसी प्रक्रिया का आरंभ देखने को मिलता है। सिटीजन चार्टर प्रशासनिक संगठन एवं नागरिकों के बीच किया गया ऐसा सामाजिक समझौता ....
Question : “भारतीय प्रशासन का दुर्बलतम पक्ष शिकायत निवारण यांत्रिकत्व है” चर्चा कीजिए।
(2009)
Answer : भारतीय परिस्थितियों में बड़े स्तर पर सामाजिक आर्थिक विकास करना प्रशासन का मुख्य लक्ष्य है। यह लक्ष्य प्राप्ति तभी संभव है, जब प्रशासकों का उपयुक्त सहयोग मिले। इसके लिए उनका उच्च मनोबल बनाये रखने हेतु उनके लिए बेहतर सेवाशर्तों, पदोन्नति के अवसरों, छुट्टियों, वेतन का होना अति आवश्यक है। लेकिन ऐसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में सभी की मांगों पर संगठन द्वारा अनुक्रिया कर दी जायेगी ऐसा संभव नहीं हो पाता है।
ऐसी परिस्थितियों में इन लोक सेवकों ....
Question : अधिकारीतंत्रीय मूल्यों और लोकतंत्रीय मूल्यों के बीच अपरिवर्ती और अनवरत द्वंद्ध रहता है, जो विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इस कथन के प्रकाश में, विकास में अधिकारी तंत्र की भूमिका का परीक्षण कीजिए|
(2008)
Answer : आधुनिक राज्य लोक कल्याणकारी तथा लोकतंत्रीय प्रतिमान पर आधारित होते हैं तथा उनमें भी नौकरशाही या अधिकारी तंत्र संरचना पाई जाती है। विभिन्न विचारकों ने अधिकारी तंत्र की विभिन्न आधारों पर विशेषताएं प्रस्तुत किया है, जैसे- अधिकारी तंत्र का कानून व नियमों में अटूट विश्वास होता है, उसको आरम्भ से ही इस बात का प्रशिक्षण दिया जाता है कि जो कार्य किया जाए, कानून व नियम के अनुसार ही किया जाए। ऐसे बहुत से अवसर ....
Question : ‘क्षमता निर्माण के लिए सिविल सेवकों के प्रशिक्षण का, देश की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के साथ और देश के प्रौद्योगिकीय विकास के साथ मेल बैठाना चाहिए।’ सुस्पष्ट कीजिए।
(2008)
Answer : सिविल सेवक या अधिकारी तंत्र किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था के सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग होते हैं। इनके ऊपर उस देश की सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी व वैज्ञानिक विकास की मूलभूत जिम्मेदारी होती है। भारत में नौकरशाही ब्रिटिश शासन की विरासत है।
ब्रिटिश शासन का उद्देश्य देश में प्रभुत्व कायम रखना था। इसके लिए सिविल सेवकों को ऐसे प्रशिक्षण प्रदान किए जाते थे, जिससे वे जनता से दूरी बनाए रखते हुए उस पर शासन कर सकें। स्वतंत्रता ....
Question : स्वतन्त्रता से, भारत में लोक सेवाओं के परिवर्तनशील स्वरूप और नए अभिमुनों का वर्णन कीजिए।
(2008)
Answer : स्वतंत्रता पश्चात् लोक सेवा के स्वरूप और कार्यभार में बहुत परिवर्तन आया है। कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत राज्य द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित की जाती हैं, जिसे निर्धनता उन्मूलन, बेरोजगारी उन्मूलन के साथ सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके, जबकि पुलिस राज्य का उद्देश्य लोक कल्याण का नहीं होता है। पुलिस राज्य में सरकार अपने दृष्टिकोण से ही विकास कार्य करती है तथा उसमें जनता की राय का कोई महत्व नहीं होता है। लोकहितकारी ....
Question : ‘नागरिक समाज’ की परिभाषा दीजिये। प्रशासनिक मशीनरी पर नियंत्रण रखने का क्या यह एक प्रभावी साधन है? टिप्पणी कीजिये।
(2007)
Answer : सामान्यत किसी राष्ट्र की भूमि पर निवास करने वाले व्यक्ति को नागरिक माना जाता है। मूलतः नागरिक समाज उन प्रबुद्ध नागरिक माना जाता है। मूलतः नागरिक समाज उन प्रबुद्ध नागरिकों का एक समूह होता है जो देश की प्रगति में रूचि रखते हैं। ये शिक्षित व्यक्तियों का वह समूह है जो राष्ट्र की राजनैतिक, प्रशासनिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व्यवस्था को भली प्रकार जानते हैं। वे राष्ट्र की सामाजिक आर्थिक प्रगति के प्रति पराकाष्ठा के स्तर ....
Question : सु-शासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका सिविल सेवकों के लिए एक प्रकार से अभिकल्पित माड्यूल आधारित प्रशिक्षण है, विश्लेषण कीजिए।
(2007)
Answer : लोक सेवाएं आधुनिक राज्य की स्थाई कार्यपालिकाएं हैं संसद मंत्रिमण्डल तथा दूसरे उच्चराजनीति कार्य समय समय पर बदलते रहते हैं, किन्तु लोक सेवाएं स्थाई रूप से शासन का संचालन करती हैं। एक राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली समस्त सेवाएं लोक सेवकों के माध्यम से ही जन-साधारण तक पहुंचती है, अतः लोक सेवाएं प्रशासकीय संगठन का एक ऐसा माध्यम है, जिनके द्वारा सरकार अपने लक्ष्यों को प्राप्त करती है। लोक सेवाओं को प्रशासन का सर्वाधिक ....
Question : "लोक आयुक्त पर्याप्त कर्तव्य-शक्ति-विहीन न्यायिक संस्थायें (Judicial Institutions) हैं" टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : लोक प्रशासन के सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार का रूप भिन्न है। इसके प्रमुख उदाहरणों में बोफोर्स, बैंक घोटाला और चीनी घोटाला है, जिन्हें इस महामारी का विकृत चिन्ह्न कहा जा सकता है। 1966 में प्रशासनिक सुधार आयोग की नागरिकों की शिकायतों के निराकरण के लिये दी गई संस्तुति, जिसके द्वारा शासन में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से निपटने के लिये राज्यों में लोकायुक्त नामक संस्था की स्थापना की गई, परंतु वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह संस्था उतनी ....