Question : क्या आप सोचते हैं कि पंचायती राज संस्थाओं (पी. आर. आई.) के वास्तविक कामकाज से शक्तियों और संसाधनों का यथार्थ न्यागमन परिलक्षित हो रहा है? अपने उत्तर के पक्ष में कारण दीजिए।
(2015)
Answer : पंचायती राजव्यवस्था प्रजातांत्रिक विकेंद्रीकरण के सिद्धान्तों पर आधारित है। यह स्थानीय शासन की एक ऐसी प्रणाली है जिसमें व्यक्ति स्वयं विकास की जिम्मेदारी लेते हैं। यह स्थानीय स्तर पर प्रशासन में लोगों की पहल और साझेदारी द्वारा ग्राम विकास की संस्थागत व्यवस्था की प्रणाली भी है। भारतीय परिवेश में प्राचीन समय से ही पंचायती राज का मौलिक भाव देखा जा सकता है लेकिन पंचायती राज संस्थानों की विधिवत स्थापना स्वतंत्रता के पश्चात की घटना है। ....
Question : ‘‘यह विचार है कि 73वां संशोधन राज्यों और स्थानीय शासनों के मध्य उसी प्रकार की स्थानान्तरण प्रणाली स्थापित करे जैसी केन्द्र व राज्य सरकारों के मध्य है, जिससे राजकोषीय अनुशासनहीनता को बल मिले।’’ (विश्व बैंक) टिप्पणी करें।
(2013)
Answer : 73वां संविधान संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं के कोष निर्माण और उसमें होने वाली आय के लिए उन संस्थाओं के द्वारा लगाये जाने वाले करों के संबंध में कहा गया है, कि राज्य के विधानमंडल, विधि द्वारा उसमें निर्दिष्ट प्रक्रिया और मर्यादाओं के अंतर्गत पंचायती राज की विभिन्न संस्थाओं को कर आरोपित करने और एकत्र करने के लिए अधिकृत कर सकेंगे। राज्य का विधानमंडल इन संस्थाओं को राज्य की संचित निधि से अनुदान देने के ....
Question : ‘‘स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं के विकास में सांकेतिक सहभागिता से सशक्तिकरण के बदलाव में योगदान किया है।’’ चर्चा करें।
(2013)
Answer : महिला सशक्तिकरण एक व्यापक अर्थों वाला शब्द है, जो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, शोषण से बचाव, उनके सामाजिक, राजनीतिक, एवं आर्थिक विकास सहित महिला कल्याण के समग्र पक्षों को समाहित करता है। वर्तमान में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रें की निर्धन महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है।
स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं में ‘स्व’ के प्रति जागरूकता के साथ-साथ आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। समान रुचि की महिलाएं जब एक ....
Question : ‘पंचायती राज संस्थाएं अभी भी राज्य के नियंत्रण और अधिकारीतंत्र के प्रभुत्व से प्रभावित हैं।’ क्या आप सहमत हैं?
(2012)
Answer : पंचायतों को कितने ही अधिकार या शक्तियां दे दी जाएं, उनका कोई अर्थ नहीं है, यदि उनको पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय साधन उनके पास न हों।
पंचायतों के पास अपने वित्तीय साधन जुटाने के कर व गैर कर के तरीके बहुत कम हैं। अगर कुछ शक्ति साधन जुटाने की है भी, तो वे मात्र ग्राम पंचायत के पास है, जहां पर उनके पास पर्याप्त प्रशासनिक मशीनरी भी नहीं है, जिसकी सहायता से वे वित्तीय ....
Question : "संविधान के 73वें संशोधन ने पी.आर.आई. को एक स्थायी संरचनात्मक ढांचा प्रदान किया है, जिसके परिणामस्वरूप एक तीव्र सामाजिक क्रांति आयी है।य् टिप्पणी कीजिए।
(2007)
Answer : लोकतंत्र में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था को मूलाधार माना गया है। भारत में पंचायती राज व्यवस्था को लोकतंत्र का पर्याय माना जाता है। संविधान में पंचायती राज व्यवस्था को सम्मानित स्थान दिया गया है व इन्हें नीति निर्देशक तत्वों के साथ रखा गया है। संविधान के अनुच्छेद 40 में उल्लिखित है कि- "राज्य ग्राम पंचायतों की स्थापना के आवश्यक कदम उठायेगा एवं उन्हें ऐसी शक्तियां एवं अधिकार प्रदान करेगा जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाई ....
Question : संविधान के 73वें और 74वें संशोधन भारत के सांविधानिक इतिहास और स्थानीय शासन में प्रमुख परिवर्तनकारी घटनाएं हैं।" टिप्पणी कीजिए।
(2006)
Answer : देश के स्थानीय शासन को सुदृढ़ता प्रदान करने हेतु लाए गए 73वें और 74वें संशोधन के पीछे एक लंबा राजनीतिक इतिहास है, ये क्रांतिकारी परिवर्तन एकाएक भारतीय राजनीतिक रंगमंच पर परिलक्षित नहीं होते, अपितु में अत्यधिक प्रतिबद्धता और समय के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की सुदृढ़ता का ही संकेत देते हैं। स्थानीय शासन के नियमित चुनाव, इनका एक समान पूरे देश में संरचनात्मक ढांचा, कमजोर वर्गों मसलन एससी/एसटी तथा महिलाओं की निश्चित भागीदारी, इनके कर्तव्यों, अधिकारों ....