Question : राजनीतिक संस्कृति ने भारत की प्रशासनिक संस्कृति को किस सीमा तक प्रभावित किया है? समझाइए।
(2015)
Answer : राजनीतिक संस्कृति ने भारत की प्रशासनिक संस्कृति को बहुत हद तक प्रभावित किया है। आजकल नीति निर्धारण केवल राजनीतिज्ञों का कार्य होता है एवं उसका क्रियान्वयन प्रशासकों का कार्य होता है, परंतु आजकल नीति निर्धारण राजनीतिज्ञों का ही कार्य नहीं है अपितु प्रशासन का नीति-निर्माण में सक्रिय योगदान रहता है। नीति निर्धारण अवश्य ही मंत्रियों द्वारा किया जाता है परंतु बिना प्रशासनिक अधिकारियों की सहायता से वे यह कार्य संपन्न नहीं कर सकते।
नीति निर्धारित करते ....
Question : जैसा कि डॉ.बी.आर. अम्बेडकर का कथन था कि ‘‘संविधान की विषयवस्तु राज्य को अवयव प्रदान कर सकती है किन्तु शासन प्रक्रिया का अंतिम परिणाम इस पर निर्भर करता है कि राजनीतिक दलों और जनता ने इसे किस तरह संचालित किया है।’’ इस कथन को सुस्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : भारतीय संविधान निर्माताओं की बुद्धिमत्ता और दूरदृष्टि का प्रमाण है कि वे देश को एक ऐसा संविधान दे सके जिसमें जनता द्वारा मान्य आधारभूत मूल्यों और सर्वोच्च आकांक्षाओं को स्थान दिया गया है।
यही वह कारण है जिसकी वजह से इतनी जटिलता से बनाया गया संविधान न केवल अस्तित्व में है, बल्कि एक जीवंत सच्चाई भी है, जबकि दुनिया के अन्य अनेक संविधान कागजी पोथों में दबकर रह गए हैं।
भारतीय संविधान निर्माताओं ने विभिन्न विदेशी संविधानों ....
Question : “लोक सेवाओं में नैतिकता कौटिल्य के अर्थशास्त्र का केन्द्रीय सरोकार रहा है।” इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए!
(2014)
Answer : मौर्य कालीन प्रशासन जिसे कौटिल्य कालीन प्रशासन भी कहा जाता है, में मंत्रि परिषद व राजा के द्वारा मुख्यतः नीति निर्धारण किया जाता था, तत्पश्चात उन नीतियों को कार्यान्वित करने का कार्य नौकरशाही के द्वारा किया जाता था।
कौटिल्य के अनुसार शासन में सम्पूर्ण शक्ति का केन्द्र राजा होता है, अतः राजा को आवश्यक रूप से योग्य होना चाहिए। अर्थशास्त्र में उन्होंने लिखा है “राजा का जो शील होता है वही प्रजा का भी होता है, ....
Question : भारत में संविधान की उन मूल्य-आधारिकाओं (Value Premises) की चर्चा कीजिए जिनका अधिकारी तंत्र उल्लंघन नहीं कर सकता।
(2014)
Answer : भारत का संविधान यहां के नागरिकों को कुछ ऐसे मूल्य प्रदान करता है जिनका अधिकारी तंत्र उल्लंघन नहीं कर सकता अर्थात ये मूल्य अधिकारी-तंत्र की सीमा का निर्धारण करते हैं।
Question : “कहा जाता है कि भारतीय प्रशासन अपने तीन अभिलक्षणों यथा वेबरीय संरचनाओं, कौटिल्यी रीति और गांधीवादी भाषा के द्वारा चरित्र-चित्रित होता है।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।
(2014)
Answer : जिस तरह भारतीय संविधान विभिन्न अनुभवों, विचारों व सिद्धांतों का मिश्रण है उसी अनुरूप भारतीय प्रशासन भी विभिन्न लक्षणों व मिश्रणों से युक्त है जो मुख्यतः वेबरीय संरचना, कौटिल्य रीति और गांधीवादी भाषा के इर्द-गिर्द घूमती है-
भारतीय प्रशासन में वेबरीय लक्षणः मोहित भट्टाचार्य ने वेबरीय सूत्रीकरण से संरचनात्मक गुणों और व्यवहारात्मक गुणों का एक समुच्चय निकाला है, जो निम्नवत हैं-
Question : ‘‘लोक सेवा निष्पक्षता, विधिसम्मत सिद्धान्तों के अनुपालन पर आधारित है।’’ टिप्पणी करें।
(2013)
Answer : लोक सेवा निष्पक्षता का अर्थ है, राजनीतिक निष्पक्षता अथवा लोक सेवा की गैर-निष्पक्षता। लोक सेवकों को गैर-राजनीतिक रहना और विभिन्न सत्ताधारी सरकारों का काम निष्पक्ष भाव से करना चाहिए और राजनीतिक कार्यपालकों को राजनीति का विचार किए बिना स्वतंत्र और स्पष्ट सलाह देनी चाहिए। उनको वस्तुगत, शांत, अराजनीतिक और निष्पक्ष ऐसा व्यवसायिक प्रशासक होना चाहिए, जो अपना काम कुशलता, ईमानदारी, सत्य, निष्ठा, निपुणता और समर्पण से करते हैं। वर्तमान आधुनिक राज्य में वैश्वीकरण, निजीकरण जैसी ....
Question : ‘‘पश्चिम की उदार लोकशाही विचारधारा ने भारतीय संविधान के मूल्य स्तम्भों के स्वरूप को प्रभावित किया है।’’ विवेचना करें।
(2013)
Answer : गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935, भारतीय संविधान का सबसे बड़ा स्त्रोत था, क्योंकि भारतीय संविधान का करीब दो-तिहाई प्रावधान इसी से लिए गये हैं। भारतीय संविधान जो 26 जनवरी 1950 को स्थापित हुआ, देश की संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न, लोकतांत्रिक, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी गणराज्य घोषित करता है, जो नागरिक को समानता, न्याय एवं बंधुत्व की ओर आकर्षित करता है। हमारे देश का संविधान किसी एक राष्ट्र से प्रभावित नहीं है, बल्कि विश्व के विभिन्न देशों के संविधान से ....
Question : ‘‘आज लोक प्रशासन मात्रत्मक दृष्टि से कम जनतांत्रिक वरन् पहले की अपेक्षा जन आवश्यकताओं की पूर्ति में अधिक गुणात्मक दृष्टिवादी प्रतीत होता है।’’ इस कथन का जनकेन्द्रित प्रशासन के संदर्भ में परीक्षण करें।
(2013)
Answer : भारतीय प्रशासनिक तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए जन-सहभागिता आवश्यक होती है। जन सहभागिता का तात्पर्य-नियोजन, क्रियान्वयन, नियंत्रण तथा संसाधन सदुपयोग के क्रम में जनता की सक्रिय भागीदारी से है। सामुदायिक सहभागिता का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर क्रियान्वित होने वाली योजना तथा परियोजनाओं में आम जनता का सहयोग सुनिश्चित करना है।
विकास कार्यक्रमों में जनसहभागिता बढ़ाने के लिए जनसमस्याओं की जानकारी, अपेक्षाओं की पूर्ति, समुचित संचार, समन्वय, अच्छे कार्यों को प्रोत्साहन इत्यादि कारक निर्णायक सिद्ध ....
Question : ‘‘विकेन्द्रीकरण का गांधीवादी स्वरूप प्रशासन में बदलाव की प्रक्रिया जैसा है।’’ सुशासन के संदर्भ में इसका विश्लेषण करें।
(2013)
Answer : अच्छे अभिशासन का अर्थ है, लोगों के लिए शासन के स्थान पर लोगों के साथ शासन, जिससे लोग ऊपर से आरोपित विकास के स्थान पर स्वविकास प्राप्त कर सके व विकास की रणनीति स्वयं निर्धारित कर सके। इस दिशा में 73वां व 74वां संविधान संशोधन अधिनियम एक मील का पत्थर है।
गांधी जी ने भारत में स्वशासन पर बल दिया। उन्होंने इसके लिए विकेंद्रीकृत प्रशासन पर बल दिया। अतः भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान के नीति-निदेशक ....
Question : ‘‘प्रशासक के लिए मूल नैतिक समस्या यह है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप किस प्रकार अपनी विवेकाधीन अधिकारों का प्रयोग करें।’’ प्रशासन में भ्रष्टाचार के संदर्भ में टिप्पणी करें।
(2013)
Answer : यदि लोक प्रशासक अपनी शक्ति, सत्ता एवं स्थिति का प्रयोग जनसामान्य के लाभों की अपेक्षा अपनी व्यक्तिगत लाभों के लिए करने लगे तो यह भ्रष्टाचार कहलाएगा। जो व्यक्ति शासकीय कर्मचारी होते हुए या होने की आशा में अपने या अन्य किसी व्यक्ति के लिए विधिक पारिश्रमिक से अधिक कोई घूस लेता है, या स्वीकार करता है अथवा लेने के लिए तैयार हो जाता है या लेने का प्रयत्न करता है या किसी कार्य को करने ....
Question : 74वें सांविधानिक संशोधन अधिनियम ने किस सीमा तक भारत में ‘परिसंघ के भीतर एक परिसंघ’ का सृजन कर दिया है?
(2012)
Answer : भारत में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण को संवैधानिक आधार 74वें संविधान संशोधन द्वारा दिया गया है। इसके द्वारा भारत के संविधान में नया भाग IX A शामिल किया गया है।
इसे नगरपालिका नाम दिया गया है और अनु- 243 से 243 ZG तक प्रावधान शामिल किए गए हैं। इस अधिनियम ने संविधान में एक नई अनुसूची 12वीं अनुसूची को जोड़ा है और नगरपालिकों को सौंपे गए 18 विषय रखे गए हैं। इस अधिनियम ने नगरपालिकाओं को संवैधानिक आधार ....
Question : आशा की जाती है कि निष्पादन मूल्यांकन प्रणालियां विशेष रूप से निष्पादन प्रबंधन एवं मूल्यांकन प्रणाली (पी.एम.ई.एस.) भारत के प्रशासन में अधिकारी यंत्रीय संस्कृति का रूपांतरण कर देगी क्या आप इस बात से सहमत हैं? कारण बताइए।
(2011)
Answer : निष्पादन मूल्यांकन एक सतत् संगठनात्मक प्रक्रिया है, जो कर्मचारियों की क्षमताओं, कौशल, उपलब्धियों सहित उनकी कमियों को सामने लाने में सहायक सिद्ध होती है।
अतः प्रत्येक लोक सेवक के कार्य का वास्तविक मूल्यांकन करना कर्मचारी एवं संगठन दोनों के लिए फायदा का सौदा होता है। कर्मचारी को जहां अच्छे कार्य का उपहार मिलता है, वहीं संगठन अपने उद्देश्य प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। साथ ही निष्पादन मूल्यांकन प्रणाली का यह उद्देश्य भी होता है कि ....
Question : समकालीन भारत में राजनीतिक संस्कृति और अधिकारीतंत्रीय संस्कृति के बीच के अंतरापृष्ठ को उपयुक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समझाइए।
(2011)
Answer : राजनीति एवं प्रशासन एक दूसरे के पूरक होते हैं। साथ ही ये एक-दूसरे को बड़े स्तर पर प्रभावित भी करते हैं। भारत में मंत्री एवं लोक सेवक सम्बन्धों के माध्यम से इस बात को भली-भांति समझा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम उन बिंदुओं का निर्धारण करें, जो इनके सम्बन्धों को प्रभावित करते हैं।
इनके सम्बन्धों का निर्धारण राजनीतिक दल की स्थिति, मंत्रिमंडल में मंत्री की स्थिति तथा सामाजिक-राजनीतिक संस्कृति से प्रभावित होते ....
Question : भारतीय प्रशासन के मूल्यों की जड़ का भारतीय संविधान की उद्देशिका में होना आवश्यक है। विवेचना करें।
(2009)
Answer : संविधान, किसी भी देश के लिए नियम-कानूनों का एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसमें वहां की जनता अपने मूल्यों, मानकों, इच्छाओं के आधार पर उनकी कैसी राजनैतिक को वैधानिकता प्रदान करती है तथा उस देश में प्रत्येक सरकार का दायित्व होता है कि वह उस संविधान का क्रियान्वयन सुनिश्चित करे, जिसे उस देशों के नागरिकों की वैधानिकता प्राप्त है।
भारतीय संविधान में हमने लोकतंत्र प्रणाली को अपनाया है जिसमें जनता के द्वारा, जनता के लिए सरकार ....
Question : ‘आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय 1992 सांविधानिक संशोधन अधिनियम के प्रमाण-चिन्ह हैं। समझाइए।
(2008)
Answer : भारतीय संविधान के तिहत्तरवें संशोधन अधिनियम 1992 ने भारत में पंचायती राज व्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान की, जिससे यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हुआ। इसके तहत सविधान में नया अध्याय 9 जोड़ा गया तथा इसके द्वारा संविधान में 16 अनुच्छेद और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई। 24 अप्रैल, 1993 से यह संशोधन लागू किया गया। इस कानून में मूल विशेषता यह है कि अन्य बातों के साथ-साथ इसमें सभी स्तरों पर ....
Question : विकास के नेहरुवी मॉडल से उदारीकरण मॉडल तक स्थानांतरण ने सरकार के पुनः आविष्कार को आवश्यक बना दिया है। टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : भारत में स्वतंत्रता पश्चात् विकास का नेहरुवी मॉडल प्रभावी रहा। इस मॉडल के आधार पर मिश्रित अर्थव्यवस्था का शुभारंभ हुआ तथा समाजवादी लक्ष्यों को पाने का संकल्प लिया गया। समाजवादी लक्ष्यों के अंतर्गत स्त्री-पुरूष समता, मानव समता, मजदूरी और श्रम का सही अनुपात, श्रमिकों और गरीब, कमजोर वर्गों तथा महिलाओं, बच्चों के विकास के लिए योजनाएं और कानून बनाना शामिल है।
इसके अतिरिक्त भूमि सुधार, आरक्षण व्यवस्था, उद्योगों का राष्ट्रीयकरण, विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक कार्य सरकार ....
Question : "कौटिल्य न केवल प्राचीन भारत का अग्रणी राजनीतिक- प्रशासनिक विचारक था, बल्कि वह नैतिक मूल्यों का पक्षसमर्थक एवं उपदेशक भी था’’। टिप्पणी कीजिए।
(2007)
Answer : आचार्य कौटिल्य का मनन् क्षेत्र इतना विस्तृत है कि इसमें राजनैतिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक विषय समाहित हैं। ‘अर्थशास्त्र’ के विहंगम अवलोकन के पश्चात कहा जा सकता है कि आचार्य कौटिल्य का ग्रंथ राज्य प्रशासन के साथ ही साथ व्यावहारिक प्रशासन की भी वृहद व्याख्या करने में सक्षम है।
Question : "पोटेमैक नहीं बल्कि टेम्स, यमुना के प्रवाह को उर्वर बनाती है।" इस कथन के प्रकाश में भारत में राष्ट्रपति की प्रतीकात्मक संस्था पर टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : भारत की संसदीय व्यवस्था या कह सकते हैं- संसदात्मक लोकतंत्र की अवधारणा का उद्भव, ब्रिटेन की व्यवस्था से ही है अर्थात् औपनिवेशिक स्वतंत्रता के पश्चात् हमने वहीं की व्यवस्था को अपने संविधान में अंगीकार किया है।
Question : भारत के संविधान के आधारिक मूल्य उस सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक दर्शन को प्रतिस्पापित करते हैं, जो लोगों की संप्रभुता विधि सम्मत शासन और समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य के बुनियादी लक्षणों का प्रतीक है। टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : भारत के संविधान की प्रस्तावना राज्यों के आदर्श को व्यक्त करती है, जो देश को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता उपलब्ध कराने के साथ समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रत्मक गणराज्य के रूप में बनाने के लिए व्यवस्था करता है।
Question : "अपनी प्रजा के सुख में ही राजा का सुख वास करता है। प्रजा के कल्याण में उसका अपना कल्याण है।" कौटिल्य के राज्य प्रशासन पर टिप्पणी कीजिये। किन बातों में आधुनिक लोकतांत्रिक शासकों का व्यवहार कौटिल्यी शासकों से भिन्न है?
(2006)
Answer : प्राचीन भारतीय प्रशासनिक चिंतकों में अग्रणी आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ ‘अर्थशास्त्र’ में लोककल्याणकारी राज्य की बुनियाद रखी थी। उनके अनुसार किसी भी देश में शासन व्यवस्था चाहे राजशाही-तानाशाही तंत्र पर आधारित हो या लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार हो, राज्य और राजा का कर्तव्य जनकल्याण ही होता है। चाणक्य के राज्य में कल्याणकारी स्वरूप पर अत्याधिक महत्व दिया गया है। वैसे तो राजा सर्वसत्ताधिकारी और दैवीय शक्ति का प्रतीक मानकर सर्वोच्च स्थान पर माना ....