Question : ‘‘भारत का नगरीय शासन बारम्बार की प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों से निपअने में पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है।’’ इस कथन को सुस्पष्ट करते हुए अपने सुझाव भी दीजिए।
(2015)
Answer : आपदा एक ऐसी घटना है जो प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों की वजह से घटती है जिससे जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है तथा जान-माल को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है अर्थात आपदा का अर्थ अचानक होने वाली एक ऐसी विध्वंसकारी घटना से है जिससे व्यापक भौतिक क्षति एवं जान-माल का नुकसान होता है। आपदाएं भी कई प्रकार की होती है जैसे जल एवं वायु से जुड़ी आपदाएं, भूमि से जुड़ी आपदाएं, दुर्घटना से जुड़ी आपदाएं, जैविक ....
Question : क्या आपके विचार में पंचायती राज की भूमिका विकास प्रशासन से आगे तक जानी चाहिए? अपने उत्तर के लिए तर्क प्रस्तुत कीजिए।
(2014)
Answer : हमारे देश में पंचायती राज की शुरुआत को ऐतिहासिक घटना कहा गया। इसकी भूमिका विकास प्रशासन तक ही सीमित न रह कर और आगे जानी चाहिए।
यदि यह कहा जाए कि इसकी भूमिका और बढ़ाने से इसके सफल होने की गारंटी और बढ़ जाएगी तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। विकास प्रशासन के साथ-साथ इसे वित्तीय प्रशासन, प्रशासनिक विकास एवं न्याय प्रशासन की भूमिका प्रदान करनी चाहिए। विकास शून्य में नहीं होता। विकास अनूकूल पर्यावरण की मांग करता ....
Question : ‘‘पंचायती राज संस्थाओं में दूसरी पीढ़ी के सुधारों ने पंचायतों को स्थानीय स्तर पर विकास का माध्यम बनाने के स्थान पर राजनैतिक संस्था बना दिया है।’’ विवेचना करें।
(2013)
Answer : पंचायती व्यवस्था प्राचीन भारत में भी प्रचलित थी एंव किसी न किसी रूप में सदा ही मौजूद रही है। परंतु संविधान के निर्माण के समय संविधान निर्माताओं ने इस व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया और गांवों को अपने क्षेत्र में स्वाबलंबी बनाने के लिए नीति निदेशक सिद्धांतों में इस बात का प्रावधान किया कि राज्य ग्राम पंचायतों का गठन करने के लिए कदम उठाएगा और स्वायत्त शासन प्रदान करेगा। इस दिशा में सन् 1952 ....
Question : ‘‘पंचायत के प्रकार्यों में सूचना व संचार तकनीकी के उपयोग से कार्यदक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है और यह इस तकनीकी की सार्वजनिक संस्कृति प्रेरित करती है।’’ परीक्षण करें।
(2013)
Answer : आधुनिक युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है। समाज के सभी अंग अधिकाधिक मात्र में सूचना प्रौद्योगिकी से प्रभावित हो रहा है। इसी तरह प्रशासन में भी सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक उपयोग हो रहा है। ई-प्रशासन के तहत विभिन्न प्रशासनिक संगठनों में विभिन्न सूचना तकनीकों जैसे इन्टरनेट, फैक्स, ई-मेल, वाइड एरिया नेटवर्क, कम्प्यूटरीकरण आदि का प्रयोग किया जाता है। जिससे प्रशासन में जनता, आर्थिक क्षेत्र एवं सरकार के अन्य अंगों के साथ संबंधों में रूपांतरण की ....
Question : ‘‘भारत में नगरपालिका प्रशासन के सामने संरचनात्मक व परिचालन चुनौतियां होती है।’’ 74वें संशोधन अधिनियम के बाद के संदर्भ में परीक्षण करें।
(2013)
Answer : बढ़ते हुए नगरीकरण ने देश के आर्थिक ढांचे, सामाजिक स्वरूप और सांस्कृतिक खाके को प्रभावित किया है। दुर्भाग्यवश नगरीय संस्थाओं की ओर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है। परिणामस्वरूप नगरीय संस्थाएं दुर्बल, भ्रष्ट और अप्रभावी है। इस दुर्दशा के लिए दोषपूर्ण नगरीय नियम, निम्न स्तर के कार्मिक और सुविधाएं, दयनीय वित्तीय स्थितियां और कठोर केंद्रीय नियंत्रण जैसे कारण उत्तरदायी हैं। कुछ बुनियादी कारण हैं, जो स्वस्थ नगरीय स्थानीय सरकार के विकास में बाधक है।
राजनीतिक दल ....
Question : ‘भारत में स्थानीय स्वशासन अनेक कारकों- ऐतिहासिक, वैचारिक एवं प्रशासनिक-की अन्योन्यक्रिया है।’ समालोचनात्मक रूप से इन कारकों का परीक्षण कीजिए।
(2012)
Answer : भारत में स्थानीय स्वशासन की परम्परा शताब्दियों पुरानी है। सम्भवतया विश्व का पहला गणतंत्र भारत में मिथिलावासियों द्वारा स्थापित किया गया था। मौर्यकाल में ही स्थानीय स्वशासन विकसित होने लगा था। न केवल ग्रामीण स्वशासन, बल्कि जैसा कि मेगस्थनीज अपनी कृति इण्डिका में रेखांकित करते हैं, कि नगर प्रशासन भी पूर्ण विकसित था। यहाँ तक कि जनगणना जैसे आधुनिक कार्य भी स्थानीय संस्थाओं द्वारा सम्पादित होते थे। मुगलकाल के दौरान भी स्थानीय स्वशासन की परम्परा ....
Question : बहुभागीदारियों की उदयमान छाया के बीच में नगरपालिका शासन की संस्थागत सुभेद्यता का परीक्षण कीजिए।
(2011)
Answer : लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा ने संसाधनों एवं सत्ता के विकेन्द्रीकरण को बल प्रदान किया, परिणामस्वरूप केन्द्र स्तर से होकर पंचायत स्तर तक बहुभागीदारी संरचना का उदय हुआ। नगरपालिका शासन भी इस नवीन अवधारणा का एक हिस्सा है। हालांकि भारत में नगरपालिका शासन की महत्ता 1687 में ही सामने आ गई थी, जब मद्रास नगर निगम की स्थापना हुई थी। परंतु स्वतंत्र भारत में 74वें संविधान द्वारा इसे संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। स्वायत शासन ....
Question : “मजबूत नगरपालिका शासन के लिए ऐसे विशेषीकृत नगरपालिका सेवाओं कार्यपालकों के एक संवर्ग की आवश्यकता होती है जो प्रतिष्ठा की दृष्टि से राज्य सेवाओं के समतुल्य हो”।
(2009)
Answer : भारत एक संघीय गणराज्य है जिसमें केंद्र और राज्य नामक ईकाइयों के संवैधानिक उपबंध किये गये हैं। 73 एवं 74वें संविधानसंशोधन द्वारा स्थानीय स्तर नामक एक और स्तर बनाने का संवैधानिक प्रयास किया गया। जिससे विकास का दृष्टिकोण स्थानीय निवासियों की मांग इच्छा के अनुरूप ही बनाया और क्रियान्वित किया जा सके।
74वें संविधान संशोधन में नगरीय स्थानीय स्वशासन के उपबंध है, जिसके तहत तीन तरह की नगरपालिका संस्थाएं अस्तित्व में आईं। नगर के संबंध में ....
Question : शहरी शासन में, एक प्रकार्यात्मक अभिकरण और विकास प्राधिकरण प्रकार्यात्मक जंगल पैदा कर देते हैं। स्पष्ट कीजिए।
(2008)
Answer : शहरी शासन में प्रकार्यात्मक अभिकरणों को शहर के विकास की योजनाओं का संचालन करना होता है। सामान्य अवसंरचना विकास यथा सड़कें, नालियां, प्रकाश, विद्युतीकरण, रखरखाव, पेय जलापूर्ति तथा अनेक प्रकार के विकास कार्य प्रकार्यात्मक अभिकरण द्वारा संचालित होते हैं। इस अभिकरण द्वारा शहरी विकास की योजनाएं संचालित की जाती हैं तथा प्रशासन के अंतर्गत सामान्य निर्देश भी जारी किए जाते हैं। गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का अनुपालन करवाना, संविदा पर कार्य करवाना, पोलियो उन्मूलन अभियान तथा ....
Question : नवस्थानीयवाद को नए स्थानीय-राज्य और स्थानीय सक्रियता के साथ जोड़ कर देखा जाता है। परीक्षण कीजिए कि इसने भारत में नगर प्रबन्धन पर किस प्रकार प्रभाव डाला है।
(2008)
Answer : नवस्थानीयवाद के तहत इस बात को अधिक महत्व प्रदान किया जाता है कि प्रबंधन से लेकर संचालन के कार्यों को स्थानीय स्तर पर किया जाए। अधिकाधिक विकेंद्रीकरण कर नियोजन की प्रक्रिया को जिले तथा ग्रामीण स्तर पर ले जाया जाए, जिससे उसमें स्थानीय आवश्यकताओं की अभिव्यक्ति हो।
भारत में योजनाकरण प्रक्रम में आरंभ में पूर्ण रूप से केंद्रीकृत योजना की पक्षधरता की गई तथा स्थानीयवाद की उपेक्षा हुई। लेकिन 1952 में आरंभ हुए सामुदायिक विकास कार्यक्रम ....