Question : “गठबंधन सरकार से एक-दलीय प्रमुखता एक ऐसा बड़ा परिवर्तन है जिसका सरकारी तंत्र पर प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है।” समझाइए कि क्यों और किस प्रकार।
(2014)
Answer : 1947 में देश की आजादी के बाद भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर कांग्रेस का एकक्षत्र राज्य था जो लगभग दो दशक तक कायम रहा। तत्पश्चात गठबंधन की राजनीति का दौर आया। अब पुनः गठबंधन सरकार से एक दलीय प्रमुखता का समय आ गया है।
केन्द्र से लेकर राज्य तक यह दिखाई दे रहा है चाहे वह यू.पी. हो, एम.पी. हो, छत्तीसगढ़, राजस्थान या हरियाणा हर जगह एकदलीय शासन।
सरकारी तंत्र जिसे अब तक इन चार-पाँच दशकों तक गठबंधन ....
Question : ‘‘स्थापित तरीकों, विशेषज्ञता, नेतृत्व, स्पष्ट लक्ष्य से बंधी नौकरशाही अभिकरण आपदा प्रबंधन से जूझने के लिए आदर्श नहीं है।’’ इस कथन का आपदा प्रबंधन में प्रशासनिक लचीलेपन की आवश्यकता के संदर्भ में परीक्षण करें।
(2013)
Answer : भारत में आपदाओं की बढ़ती समस्या को देखते हुए प्रभावी आपदा प्रबंधन नीति के विकास पर बल दिया जा रहा है। इसमें आपदा प्रबंधन के नियोजन, समन्वय व क्रियान्वयन की ऐसी सतत् प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके द्वारा आपदा की किसी भी संभावना को रोका जा सके तथा किसी भी आपदा के जोखिम को अथवा उसके दुष्परिणामों को कम किया जा सके। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में ....
Question : ‘भ्रष्टाचार प्रशासनिक समस्या से अधिक परिवेशीय समस्या है।’ चर्चा कीजिए।
(2012)
Answer : चूँकि प्रशासन किसी परिवेश में ही कार्य करता है, इसलिये प्रशासन व परिवेश एक-दूसरे के साथ अन्तर्क्रिया करते हैं। भ्रष्टाचार यदि प्रशासन में कार्य कर रहा है, तो वह अवश्य ही परिवेश में होगा और यदि प्रशासन भ्रष्ट है, तो परिवेश भी भ्रष्ट बनेगा। भ्रष्टाचार कई रूपों में समाज में विद्यमान होता है। समाज कई वर्गों में बंटा होता है। प्रत्येक वर्ग अपने हितों में योजनाओं को मोड़ना चाहते हैं, जिससे कि उसके वर्ग का ....
Question : “भारत में सामाजिक एवं आर्थिक विकास लाने हेतु अधिकारी-वर्ग पर अत्यधिक निर्भरता दुष्प्रभावात्मक सिद्ध है।” टिप्पणी कीजिए।
(2011)
Answer : सामाजिक-आर्थिक विकास का संकेतांक बिंदु किसी भी सभ्य समाज की प्रगति का परिचायक होता है। स्वतंत्रता के उपरांत से ही भारत में सामाजिक-आर्थिक विकास के विभिन्न कार्यक्रमों को आरंभ किया गया और इसकी शुरूआत सामुदायिक विकास कार्यक्रम से की गई। इसके बाद से ही यह प्रक्रिया सतत् जारी है। परंतु सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन पक्ष आलोचना का पात्र बन चुका है।
दरअसल सभी योजनाओं की सफलता की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपा गया। परंतु ....
Question : आपदाओं की विभिन्न संकल्पनात्मक श्रेणियों की पहचान कीजिए।
(2011)
Answer : आपदा प्रायः एक अनपेक्षित घटना होती है, जो मानव नियंत्रण में नहीं है या बहुत कम नियंत्रण में है। यह बिना किसी चेतावनी के घटित होती है, परंतु इसके कारण मानव जीवन के सभी क्रियाकलाप रूक जाते हैं तथा बड़े स्तर पर जान-माल की हानि होती है। आपदाओं के प्रकार निम्नलिखित हैं:
Question : आपदा प्रबंधन की नई संस्कृति पर एक टिप्पणी लिखिए।
(2011)
Answer : आपदा प्रबंधन मानव जाति या प्राकृतिक कारणों से आने वाली विपत्तियों एवं समस्याओं से निपटने के लिए वृहतस्तरीय योजना है। इसके द्वारा आपदा के खतरे अथवा संभावना को रोकना, आपदा के जोखिम अथवा उसके परिणामों को दूर करना या कम करना, इसके क्षेत्र में अनुसंधान करना एवं ज्ञान प्रबंधन के साथ क्षमता निर्माण करना, किसी आपदा से निपटने की तैयारी करना आदि को शामिल करना। आपदा से निपटने के लिए हाल के कुछ समय में ....
Question : “आपदा बीमा वांछनीय है परंतु क्रियान्वित करने में कोई आसान प्रस्थापना नहीं है।” उपयुक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट कीजिए।
(2011)
Answer : बीमा वह वस्तु है, जो व्यक्ति को भविष्य में आने वाले जोखिम या आपदा का आर्थिक मूल्य प्रदान करती है ताकि वह व्यक्ति विपदा के समय कुछ राहत पा सके। आपदा बीमा भी कुछ इसी तरह की संकल्पना है। इसके तहत उन व्यक्तियों को राहत पहुंचाने का कार्य किया जाता है, जो प्राकृतिक या मानवजनित आपदा का शिकार हुए हैं। परंतु इस प्रकार की व्यवस्था का क्रिर्यान्वयन करना सबसे दुष्कर कार्य होता है।
आपदा बीमा के ....
Question : सूखा प्रबंधन के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति को तैयार करने में भारत असफल रहा है।
(2009)
Answer : सूखा, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदायें भारत का एक स्थायी चरित्र बन गई हैं, जिनसे बड़े स्तर पर जान-माल की हानि तो होती है, बेहतर प्रबंध के अभाव में प्रशासन की भी काफी आलोचना का शिकार होना पड़ता है। सूखा जैसी आपदाओं के प्रबंधन के परम्परागत मान्यता प्यास होने पर कुंआ खोदने की रही है और उस समय सरकार बड़े स्तर पर धनों का व्यय भी करती है, जिससे धन का तो अपव्यय होता ही है, ....
Question : ‘भारत में आपदा प्रबंधन की अपेक्षा प्रबंधन की आपदा ज्यादा प्रतीत होती है।’ टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : भारत में विभिन्न प्रकार की आपदाएं समय-समय पर आती रहती हैं। कुछ आपदाएं मानवीय तथा कुछ देवीय या प्राकृतिक होती हैं। यथा- भूकंप, बादल का फटना, सूखा, बाढ़, सुनामी, ओला तथा पाला, जैविक महामारियां, कीड़ों का प्रकोप जैसी आपदाएं प्राकृतिक हैं, जबकि आतकंवाद, युद्ध, जातीय व धार्मिक हिंसा आदि मानव निर्मित आपदाएं हैं। इन विनाशकारी आपदाओं के कारण प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जान जाती है तथा करोड़ों की संपत्ति नष्ट हो जाती है। बाढ़ वाले ....