Question : जनता और पुलिस के संबंधों में सुधार के लिए, एक उपकरण के रूप में सामुदायिक पुलिसन की अवधारणा का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2015)
Answer : जनता और पुलिस संबंधों में सुधार के लिए जनता का पुलिस के ऊपर विश्वास एक महत्वपूर्ण पहलू है। अभी पुलिस के विषय में जनमानस में अविश्वास की स्थिति पायी जाती है। इसी अविश्वास को दूर करने के उपकरण के रूप में सामुदायिक पुलिस की अवधारणा का विकास किया गया है। पुलिस की कार्यशैली, संगठन और प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जांच कार्य विज्ञान और तकनीकि पर आधारित होनी चाहिए। न्याय प्रशासन में सुधार किया ....
Question : कानून और व्यवस्था को बनाए रखने तथा आन्तरिक विद्रोह और आतंकवाद का प्रतिकार करने में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के महत्व और भूमिका की विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : कानून का अभिप्राय किसी समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त रीति रिवाजों या नियमों से है जिन्हें मानने के लिए वह समुदाय बाध्य है। व्यवस्था का अभिप्राय एक निर्मित सत्ता का अस्तित्व तथा कानून सम्मत राज्य से है जिसमें उपद्रव दंगा-हिंसा तथा अपराध एवं आतंकवाद न हो।
केंद्रीय गृह मंत्रलय के अनेक ऐसे संगठन या अभिकरण हैं जो कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाते हैं। अर्द्ध सैनिक बल न सिर्फ देश की सुरक्षा के मामले ....
Question : इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि ‘थाना’ (पुलिस स्टेशन) भारत में क्षीण होती ब्रितानी (ब्रिटिश) प्रशासनिक विरासत का अंतिम गढ़ है।
(2014)
Answer : भले ही भारतीय प्रशासन ने लोक-कल्याणकारी राज्य की संकल्पना को स्वीकार कर लिया हो और उस दिशा में कार्य भी कर रहा हो किंतु जब बात पुलिस प्रशासन की आती है और उसमें भी ‘थाना’ की तो बहुत हद तक ब्रिटिश विरासत की झलक आज भी मिल जाती है।
स्थानीय स्तर पर लोग आज भी दरोगा को ही सरकार समझते हैं। वह खौफ एवं दहशत का नाम है। थाने आज भी “पीपुल्स फ्रेंडली” नहीं हो पाए ....
Question : “पुलिस-जनता संबंध दोनों ओर से किए गए अवास्तविक प्रयासों की एक कहानी है।” सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए होती है ऐसा हम सब जानते हैं परन्तु आज पुलिस को ‘भक्षक’ ‘स्वामी’, ‘दैत्य’ और न जाने किन-किन नामों से सूचित किया जाता है। जनता पुलिस में अपना विश्वास खो रही है।
वह थाने में रिपोर्ट लिखाने से डरती है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के बावजूद लोग घायलों की मदद करने से डरते हैं कि कौन पुलिस के चक्कर में पड़े। आज बलात्कार पीडि़त थाने जाकर रिपोर्ट नहीं लिखा पाती ....
Question : क्या आपके विचार में केन्द्रीय पैरा-मिलिटरी पुलिस बल राज्य पुलिस सेवाओं की अपेक्षा अधिक प्रभावी सिद्ध हुए हैं? अपना उत्तर वस्तुनिष्ठ रूप से, संभालोचनात्मक दृष्टि से दीजिए?
(2014)
Answer : केन्द्रीय पैरा-मिलिटरी पुलिस बल और राज्य पुलिस सेवा में कौन अधिक प्रभावी सिद्ध हुआ है, सीधे एवं सपाट शब्दों में इसका उत्तर नहीं दिया जा सकता क्योंकि दोनों सेवाओं का गठन अलग-अलग समय पर अलग-अलग उद्देश्य से किया गया है। दोनों को दिया जाने वाले प्रशिक्षण भी अलग-अलग है। वह परिवेश भी अलग होता है जिनमें ये दोनो सेवाएं कार्य करती हैं।
यदि यह बात की जाए कि दोनो में से कौन अपने क्षेत्र में अधिक ....
Question : ‘‘बिना पुलिस की राय जाने कानून बना दिए जाते हैं और फलस्वरूप उनके अनुपालन के समय बहुत-सी कमियां नज़र आती हैं।’’ बच्चों की सुरक्षा के संदर्भ में पुलिस की भूमिका का परीक्षण करें।
(2013)
Answer : किसी भी लोकतंत्र में हरेक बच्चा अनमोल माना जाता है और बच्चों के विकास की संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होती है। देश की कुल जनसंख्या का लगभग 34 प्रतिशत बच्चे हैं। समाज का यह तबका न केवल देश का बहुमूल्य मानव संसाधन है वरन् उनके सामाजिक-आर्थिक विकास से समूचे देश की प्रगति को गति मिलती है।
भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए वैधानिक प्रावधानों की पर्याप्त मात्र है। अनुच्छेद 24 के द्वारा भारतीय संविधान यह ....
Question : ‘‘भारतीय पुलिस की सरंचना, भारतीय नागरिकों को 1857 के बाद उसके अधीन करने के लिए हुई थी।’’ इस कथन का भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 के संदर्भ में विश्लेषण करें।
(2013)
Answer : वर्ष 1860 में पुलिस आयोग की सिफारिशों से भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 बना। इस अधिनियम में नागरिक पुलिस वाहिनी की व्यवस्था की गई। यह वाहिनी गांवों की चौकसी व्यवस्था को संचालित करता था तथा इसका अन्य पुलिस वाहनियों से प्रत्यक्ष संबंध होता था। प्रांतों में पुलिस महानिदेशक को पूरे प्रांत का पुलिस विभाग का प्रमुख बनाया गया और उप-महानिदेशक को रेंज के एवं पुलिस अधीक्षक को जिले का प्रमुख बनाया गया।
पुलिस विभाग को सुसंगठित करने ....
Question : ‘‘भारत में राजनीति का अपराधीकरण तथा अपराधियों का राजनीतिकरण दोनों हुए हैं।’’ परीक्षण करें और इससे उत्पन्न शांति व्यवस्था बनाए रखने वाले प्रशासन की चुनौतियों को चिन्हित करें।
(2013)
Answer : वर्तमान समय में राजनीति का अपराधीकरण व अपराधी का राजनीतिकरण हो गया है। राजनेताओं ने अपने स्वार्थ के कारण अपराधियों का सहारा लेना प्रारंभ कर दिया है। इसी प्रकार अपराधियों ने राजनीतिज्ञों को अपना सुरक्षा कवच बना लिया है। वर्तमान समय में देश की यह स्थिति है, कि प्रत्येक स्थान पर आपराधिक छवि रखने वाले लोगों का प्रतिनिधित्व बढ़ गया है। वर्तमान में राजनीति में अपराध इस कदर हावी हो गया है, कि इसके कारण ....
Question : “पुलिस सुधारों के विषय का संसद के समक्ष बार-बार आ खड़े होना जारी है।” इस कथन के प्रकाश में भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली प्रशासन की स्थिति पर चर्चा कीजिए।
(2011)
Answer : कानून और व्यवस्था प्रशासन में पुलिस एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, परंतु वक्त के साथ पुलिस बल में सुधार नहीं होने से आज पुलिस उतनी सक्षम नहीं है, जितना उसे होना चाहिए। अतः पुलिस सुधार आज एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उभरा है, परंतु इस पर कार्य बहुत कम हुआ है। पुलिस का बदलते परिदृश्य के साथ आधुनिकीकरण तो दूर की बात है, वह परंपरागत अपराधों से भी ठीक से निपट नहीं पा रही है। ....
Question : “सामुदायिक पुलिसिंग संभ्रात बंदीकरण की शिकार बन चुकी है।य् सामुदायिक पुलिसिंग की संकल्पना पर चर्चा कीजिए और उपरोक्त कथन के निहितार्थों को उजागर कीजिए।
(2011)
Answer : सामुदायिक पुलिसिंग तुलनात्मक रूप से नई एवं आधुनिक पुलिस रणनीति एवं दर्शन है, जो इस मान्यता पर आधारित है कि पुलिस की स्थानीय समुदाय के साथ अंतर्क्रिया और सहयोग ही अपराधों पर नियंत्रण का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। इस प्रकार की पुलिस प्रणाली में पुलिसकर्मी स्वयं को उस समुदाय का ही भाग मानते हैं, न कि सरकारी तंत्र के पुलिसकर्मी सा व्यवहार करते हैं। इसमें गाडि़यों में बैठकर गश्त लगाने की बजाय गली-मौहल्ले में पैदल चलकर ....