Question : ‘‘भारत में स्वतंत्रता के पश्चात् हुए प्रशासनिक सुधारों का अभिलक्षण उत्कृष्ट विचार किन्तु अपर्याप्त क्रियान्वयन रहा है।’’ संघ व राज्य सरकारों से उदाहरण देते हुए इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2015)
Answer : स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में संघीय शासन व्यवस्था लागू की गयी। इसके तथा विभाजन के परिणामस्वरूप प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता तीव्रता से अनुभव की गयी। अतः केंद्रीय तथा राज्य सरकारें इस समय यह अनुभव कर रही थी कि उन्हें नवीन राजनीतिक सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था को स्थापित करने और जनता की आकांक्षाओं तथा इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपने प्रशासन में अनेक सुधार करने चाहिए। इस पर विचार करने के लिए अनेक समितियों का ....
Question : ‘‘चार्टर ऐक्ट, 1853 से ही भारत में संसदीय व्यवस्था प्रारम्भ हुई।’’ स्पष्ट करें।
(2013)
Answer : भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के समय से ही गवर्नर जनरल की सभा में ही कार्यकारी और विधायी गतिविधि निहित थी। प्रथम बार चार्टर एक्ट 1853 के परिणामस्वरूप गवर्नर जनरल की सभा की विधायी और कार्यकारी गतिविधियों का पृथक्कीकरण हुआ।
इस एक्ट के माध्यम से विधान कार्यों के लिए अन्य सदस्यों का प्रबंध किया गया। विधि सदस्य को गवर्नर-जनरल की कार्यकारी परिषद का पूर्ण सदस्य बना दिया गया और जब यह परिषद कानून ....
Question : ‘मुगल प्रशासनिक प्रणाली स्वरूप में सैनिक शासन और केंद्रीकृत स्वैच्छाचारिता का एक प्रकार थी।” विश्लेषण कीजिए।
(2012)
Answer : मुगल शासन प्रणाली का विश्लेषण करने से स्पष्ट होता है कि यह एक सुव्यवस्थित व्यवस्था पर आधारित था। इस व्यवस्था की एक आधार शक्ति थी, जिसमें एक सुव्यवस्थित सेना अपरिहार्य थी। मुगल प्रशासनिक प्रणाली में राष्ट्रीय राज्य के लगभग सभी तत्व विद्यमान थे।
मुगल शासन प्रणाली के केन्द्र में शहंशाह होता था, जो सत्ता एवं न्याय का अंतिम स्त्रोत होता था। कुछ अपवादों को छोड़कर मुगल साम्राज्य में उत्तराधिकार के सुपरिभाषित नियमों का अभाव दिखता है ....
Question : ‘अर्थशास्त्र’ राजनीतिक यथार्थवाद की पुस्तक है। सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2012)
Answer : अर्थशास्त्र प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है, जिसकी खोज 1769 ईस्वी में प्रो.आर. शाएस शास्त्री ने की तथा इसमें कुल 15 अध्याय हैं।
इस ग्रन्थ को मौर्य प्रशासन पर जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इसके लेखक कौटिल्य, एक राजनीतिक विचारक माने जाते हैं तथा कौटिल्य का अर्थशास्त्र शासन व्यवस्था के लगभग सभी अंगों का विश्लेषण करता है। अर्थशास्त्र राज्य के अग्रलिखित उद्देश्यों को विश्लेषित करता हैं-
Question : वैश्विक-स्थानिक वाद विवाद के एक भाग के रूप में नव स्थानीयता के आधारिक सिद्धांतों पर चर्चा कीजिए।
(2012)
Answer : विश्वव्यापी स्थानीय वाद-विवाद की शुरूआत 1992 में हुए पृथ्वी सम्मेलन से मानी जाती है, जब एजेंडा 21 को सामने लाया गया।
इसमें इस बात पर बल दिया गया कि विकास की योजनाएं केन्द्रीय स्तर पर बने, उनका वित्तीयन भी केन्द्रीय स्तर पर हो, लेकिन संसाधनों के निर्माण, उनके उपयोग तथा लाभार्थी वर्ग के संदर्भ में निर्णय करने का अधिकार स्थानीय जनता का हो। वैश्विक वाद-विवाद के एक भाग के रूप में नव स्थानिकतावाद का जन्म हुआ।
नव ....
Question : ‘नरेशों का शासन मुख्यतःलिखित आदेशों पर निर्भर करता है- - - - - - -’ क्या कारण था कि कौटिल्य कानूनों के संहिताकरण के पक्ष में था?
(2010)
Answer : मौर्यकाल के चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री ‘कौटिल्य’ का नाम विश्व महानतम अर्थशास्त्रियों, राजनीतिज्ञों व कूटनीतिज्ञों में शामिल किया जाता है। इसका कारण है, मौर्य काल के अंतर्गत ही पहली बार राजनीतिक एकता का सूत्रपात हुआ, गणराज्यों का पतन हुआ एवं एक मजबूत राजवंश की नींव पड़ी एवं इन सबका कारण था- ‘कौटिल्य’ की नीतियां।
कौटिल्य ने शासन-प्रशासन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान नरेशों, अर्थात् राजाओं को दिया है। उनके अनुसार राजा शासन-प्रशासन के केन्द्र में ....
Question : “अंग्रेजों द्वारा विकसित अधिकारी तंत्र ने ग्राम्य स्वशासन को विस्थापित कर दिया था” टिप्पणी कीजिए।
(2009)
Answer : ग्राम्य स्वशासन ब्रिटिश कालिन भारत में जब केन्द्र या राज्य कहीं भी स्वशासन नहीं था, तब गांव स्तर पर स्थानीय लोगों द्वारा किये गये शासन के लिए प्रयुक्त शब्द है, जिसकी जगह स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् स्थानीय प्रशासन ने ले लिया है। स्थानीय प्रशासन भारत के गांवों में पंचायत स्तर पर वैदिक काल से ही देखने को मिलता है, जो क्रमशः मौर्यकाल, मुगलकाल और ब्रिटिश काल के दौरान परिवर्तित एवम् संवर्धित होकर वर्तमान दौर में ....
Question : इस दृष्टिकोण पर टिप्पणी कीजिए कि भिन्न संदर्भों के होने के बावजूद कौटिल्य के अर्थशास्त्र की प्रशासनिक तत्वोक्तियों की वेबर के आदर्श अधिकारी तंत्रीय मॉडल का अभिलक्षणों के साथ पर्याप्त समानता है।
(2009)
Answer : मैक्स वेबर और कौटिल्य दोनों ही विचारकों ने राज्य नौकरशाही के संदर्भ में अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किये हैं। अर्थशास्त्र का सप्तांग सिद्धांन्त राज्य के सभी संभव तत्वों की व्याख्या करता है, किन्तु राज्य की स्पष्ट परिभाषा नहीं बताता, वही मैक्सवेबर केवल स्पष्ट परिभाषा ही नहीं बताता, वरन् नौकरशाही के संबंध में अपना दृष्टिकोण भी देता है।
मैक्सवेबर ने राज्य को ऐसी संस्था बताया है, जो वैधानिकता के आधार पर सामान्य जनता के ऊपर भौतिक बल के ....
Question : ‘मुगल शासन के कुछ अभिलक्षण, सार रूप में अभी भी भारत के प्रशासन में विद्यमान हैं।’ समझाइए।
(2008)
Answer : मुगलकालीन प्रशासन एक कल्याणकारी निरंकुश प्रशासन था, जिसमें सम्राट ही सर्वेसर्वा था। शासन कार्य की समस्त शक्तियां सम्राट में केंद्रीभूत थीं। साम्राज्य का प्रधान होने के साथ-साथ वह सेना का प्रधान सेनापति, न्याय का मुख्य न्यायाधीश तथा धार्मिक क्षेत्र का प्रधान था। मुगल सम्राटों ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था का गठन इस प्रकार किया था, जिससे उस काल में साधन विहीनता की स्थिति में साम्राज्य के हर क्षेत्र को पर्याप्त अंकुश में रखा जा सके। मुगल ....