Question : ‘‘विकास की प्रक्रिया में जिला कलेक्टर की भूमिका पर आवश्यकता से अधिक बल दिया गया है।’’ इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : भारत में कलेक्टर का पद ब्रिटिश राज की देन है। इस पद की स्थापना ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में वारेन हेस्टिंग्स के द्वारा हुई। तब से लेकर अब तक जिला कलेक्टर जिला प्रशासन की धुरी रहा है। सामान्यतः कलेक्टर भारतीय प्रशासनिक सेना का अध्यक्ष होता है। वह या तो भारतीय प्रशासनिक सेवा में सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त या राज्य सिविल सेवा से पदोन्नत अधिकारी होता है।
जिलाधीश अत्यधिक व्यस्त अधिकारी होता है तथा उसको सौंपे ....
Question : क्या कारण है कि जिला नियोजन को अनेक राज्यों में हाशिए (पृष्ठभूमि) में डाल दिया गया है और वह केवल कुछ ही राज्यों में विशिष्ट स्थिति में रह गया है? समझाइए।
(2015)
Answer : भारत में आर्थिक नियोजन की प्रक्रिया अब केंद्र तथा राज्य सरकार तक सीमित न होकर जिला एवं खण्ड स्तर तक विकेंद्रित की गयी है जिसके माध्यम से विकास कार्यक्रमों में आसानी से जनसहयोग जुटाया जा सकता है और स्थानीय साधनों सुविधाओं के संदर्भ में वास्तविक नीति का निर्माण किया जा सकता है।
यदि केंद्र और राज्य स्तर पर योजनाएं बनाकर उन्हें क्रियान्वित करने का प्रयास किया जाता है तो वह हमारी मात्र सरकारी प्रशासन तंत्र का ....
Question : “जिला कलेक्टर ब्रितानी (ब्रिटिश) राज की विरासत है और वह समसामयिक संव्यावसायिकता (प्रोफेशनलिज्म) की मांगों से अधिकांशतः अछूता रहा है।” चर्चा कीजिए।
(2015)
Answer : भारत में कलेक्टर का पद ब्रिटिश शासन की देन है। इस पद की स्थापना सन् 1772 में भारत में ईस्ट इण्डिया कंपनी के शासन काल में हुई थी। तब से लेकर आज तक कलेक्टर जिला प्रशासन की धुरी रहा है। कलेक्टर का पद सत्ता, सम्मान, गौरव व भय का पद रहा है। कार्यकुशलता, योग्यता, अनुशासन, प्रतिबद्धता, निष्ठा, तटस्थता, नेतृत्व ये सब गुण उन्होंने परम्पराओं से विरासत में पाये हैं किंतु जन साधारण से अलगाव, अभिजनवादिता, ....
Question : भारत में विनियामक और विकास प्रशासन में, ईमानदार और सच्चे सिविल सेवकों की भूमिका का आकलन कीजिए। अपने तर्कों को पुष्ट करने के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
(2014)
Answer : भारत को अपनी सिविल सेवा की परम्परा ब्रिटिशों से विरासत में मिली है जो मुख्य रूप से विनियामक कार्य ही करती थी लेकिन कल्याणकारी राज्य में विनियामक भूमिका का उतना महत्व नहीं है जितना कि विकास कार्यों का। किंतु विनियामक कार्यों के बिना विकास कार्य संभव नहीं हो सकता। विनियामक एवं विकास प्रशासन दोनों में ईमानदार एवं सच्चे सिविल सेवक की भूमिका महत्वपूर्ण है। एक में जहां दूसरे के कार्यों एवं नैतिकता पर रोक लगानी ....
Question : विकास प्रशासन में सिविल सेवा तटस्थता की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। व्यवहार में इसको प्राप्त करने और सबल बनाने के कुछ उपायों का सुझाव दीजिए।
(2014)
Answer : तटस्थता का अर्थ है राजनीतिक निष्पक्षता अथवा लोक सेवा की गैर-राजनीतिक प्रकृति। अर्थात लोक सेवकों को गैर-राजनीतिक रहकर और विभिन्न सत्ताधारी सरकारों का कार्य निष्पक्ष भाव से करना चाहिए और राजनीतिक कार्यपालकों को किसी भी राजनीतिक सरोकार के बिना स्वतंत्र और स्पष्ट सलाह देनी चाहिए। विकास प्रशासन में सिविल सेवा में तटस्थता आवश्यक है क्योंकि बहुदलीय प्रणाली वाले उदारवादी जनतंत्रें में सरकार की विचारधारा समय-समय पर होने वाले चुनावों के कारण बदलती रहती है। इस ....
Question : ‘‘जनपद के भौगोलिक क्षेत्रफल कम करने से अतिभाराक्रांत और अत्यधिक कार्य के दवाब से जिलाधिकारी को राहत मिलेगी।’’ टिप्पणी करें।
(2013)
Answer : जिलाधिकारी का पद बहुत अधिक गरिमा वाला एवं जिम्मेदारियों से भरा हुआ होता है। जिलाधिकारी को अनेक कर्त्तव्यों एवं उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। स्वतंत्रता पश्चात् कलेक्टर का पद कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट के परंपरागत दायरे से बाहर आकर मुख्यतः विकास अधिकारी के रूप में व्यापकता प्राप्त कर रहा है। जिलाधीश को नियामक एवं विकासोन्मुख कर्त्तव्यों और उत्तरदायित्वों के अतिरिक्त उसे अब बहुत सारे कार्य करने पड़ते है। इस प्रकार जिलाधीश अतिभारित अधिकारी है। अपरिहार्यवश ....
Question : “प्रशासनिक सुधार, साकल्यवादी रूपांतरण के बजाए उपान्त पर निरंतर कामचलाऊ मरम्मत करते रहने के कारण तनु हो जाते हैं।” भारत में जिला प्रशासन को सुधारने के संदर्भ में इस कथन पर चर्चा कीजिए।
(2011)
Answer : परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार प्रशासनिक संरचना, प्रकार, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार में सुधार की प्रक्रिया को प्रशासनिक सुधार की संज्ञा दी जाती है। भारत में प्रशासनिक सुधार बड़ा मुद्दा रहा है, लेकिन विभिन्न अवरोधों के चलते प्रशासनिक सुधार आरंभ तो हुए पर उन्हें अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।
जिला प्रशासन में सुधार को लेकर हलचल उस समय ही शुरू हो गई थी, जब सामुदायिक विकास कार्यक्रम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में असफल ....
Question : जिलों की एक बड़ी संख्या में जिला-नियोजन योजनाकरण समितियों की अनुपस्थिति ने जिला स्तर पर योजनाकरण के अभिसरण में रुकावट पैदा की है।
(2011)
Answer : भारत में आर्थिक नियोजन की प्रक्रिया अब केन्द्र तथा राज्य स्तर तक सीमित न होकर जिला एवं खंड स्तर तक विकेन्द्रीकृत की गई है और इस कार्य को 74वें संविधान संशोधन द्वारा किया गया। इस संविधान संशोधन में जिला स्तर पर एक योजना समिति का प्रावधान किया गया जो जिले के विकास के सम्बन्ध में योजना का निर्माण करेगी। इस बड़े परिवर्तन का ध्येय था कि स्थानीय आवश्यकताओं एवं समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान ....
Question : जिला प्रशासन एक ऐसे छोटे कछुए की भांति होता है, जिस पर हाथी का बोझ लदा हुआ हो।’ चर्चा कीजिए।
(2008)
Answer : भारत में वर्तमान जिला प्रशासन का ढांचा अंग्रेजों ने आरंभ किया था तथा स्वंत्रता के बाद भी जिला ही क्षेत्रीय प्रशासन की मुख्य ईकाई बना रहा है।
आजादी के बाद जिला प्रशासन के लक्ष्यों, कार्यों तथा दायित्वों में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। जिससे उसका कार्यक्षेत्र अधिक बढ़ गया तथा स्थिति और मजबूत हो गई। भारत में जिला प्रशासन का संपूर्ण ढांचा एक पदसोपानिक व्यवस्था पर आधारित है। सामन्यतः इसके तीन तथा कभी-कभी दो या चार स्तर ....
Question : जिला आयोजना समिति की सांविधानिक प्रस्थिति होने के बावजूद आर्थिक आयोजना की केन्द्रीकृत प्रकृति होने के कारण, वह विकेन्द्रीकृत आयोजन को कार्यान्वित नहीं कर पाती है। टिप्पणी कीजिए।
(2007)
Answer : स्वतन्त्रता प्राप्ति के पूर्व देश का विकास नियोजित ढंग से करने का विचार किया गया था। अतः 15 मार्च 1950 को योजना आयोग का गठन किया गया। योजना आयोग पूरे देश के लिए योजना को बनाने वाला केन्द्रीय अधिकरण है। नियोजन का अर्थ है योजनाबद्ध कार्य, अतः कहा जा सकता है कि उचित रीति से सोच-विचार कर कदम उठाना ही नियोजन है। नियोजन साधनों के संगठन की एक विधि है जिसके माध्यम से साधनों का ....
Question : "जिला कलेक्टर, अतिरिक्त उप-आयुक्त और उपमंडल अधिकारी, आभासी रूप से ‘हाजरी देने वाले अधिकारी’ बन गये हैं और पहल और निर्णय की स्वतंत्रता गवां बैठे हैं।" टिप्प्णी कीजिए।
(2006)
Answer : जिला कलेक्टर के कर्तव्यों की प्राथमिकताओं में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में काफी परिवर्तन आ गया है, पहले कानून और व्यवस्था की स्थापना करना उसका प्रमुख कार्य था, किंतु अब अन्य कार्यों में उसका उत्तरदायित्व निर्धारित हुआ है। वस्तुतः जिला प्रशासन के समस्त प्रशासनिक कार्य जिला कलेक्टर के पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण में संपन्न होते हैं। इस प्रकार जिला कलेक्टर वह कार्यों के प्रति जिम्मेदार है जो जिला प्रशासन से अपेक्षित है। अतः वर्तमान में जिला कलेक्टर मानवीय ....
Question : भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई. ए. एस.) का सामान्यवादी गुण ही उसका प्रमुख अभिलक्षण है और साथ ही साथ उसकी मुख्य आलोचना भी। टिप्प्णी कीजिए।
(2006)
Answer : भारतीय प्रशासनिक सेवायें राज्यों के संकीर्ण दृष्टिकोण के स्थान पर देश में एकता और अखंडता की स्थापना करती हैं। इन सेवाओं के अधिकारी प्रायः अपने राज्यों से बाहर नियुक्त किये जाते हैं तथा वे स्थानीय अधिकारियों की अपेक्षा स्थानीय और प्रादेशिक प्रभावों से कम प्रभावित होते हैं।
इन सेवाओं के अधिकारी केंद्र और राज्य सेवाओं के मध्य अदलते-बदलते रहते हैं, जिसके कारण दोनों में समन्वय स्थापित होता है। इन सेवाओं के सदस्यों की भर्ती एक विस्तृत ....