राष्ट्रीय सुरक्षा एवं लोक-व्यवस्था बनाम कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

भारत का संवैधानिक लोकतंत्र राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मध्य संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। हाल के समय में ऑनलाइन सामग्री को अवरुद्ध करने से संबंधित निर्णयों ने यह बहस पुनः तीव्र कर दी है कि क्या व्यंग्य और कलात्मक अभिव्यक्ति वास्तव में राज्य के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं, या अत्यधिक सेंसरशिप लोकतांत्रिक व्यवस्था की दृढ़ता को कमजोर करती है।

  • डिजिटल युग में यह तनाव और अधिक गहरा हो गया है। इसलिए यह आवश्यक है कि अभिव्यक्ति पर लगाए जाने वाले कोई भी प्रतिबंधयुक्तिसंगत, आनुपातिक और कानूनी रूप से उचित हों।

संवैधानिक और विधिक ढांचा

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