Question : एकल प्रकार्यात्मक शहर आर्थिक दृष्टि से असुरक्षित होते हैं विवेचना कीजिए 150 शब्द
(2015)
Answer : भूगोल में कार्य का अर्थ आर्थिक क्रियाकलाप है जिसमें कार्यकारी जनसंख्या मुख्य रूप से जुटी रहती है। कार्यों के अनुसार शहरों का वर्गीकरण, शहरों का कार्यात्मक वर्गीकरण कहलाता हैं। ये एकल-प्रकार्यात्मक, द्वि-प्रकार्यात्मक या बहु-प्रकार्यात्मक हो सकते हैं।
एकल-प्रकार्यात्मक शहर उस शहर को कहा जाता है, जिसमें 40 प्रतिशत अथवा इससे अधिक श्रमबल किसी एक आर्थिक क्षेत्र में संलग्न हो। इसके अंतर्गत विनिर्माण केन्द्र वाले शहर, प्रशासनिक नगर, सांस्कृतिक नगर, शैक्षणिक नगर आदि शामिल हो सकते हैं। ....
Question : अनुपयुक्त नगरीय भूमि उपयोग नीति, किस प्रकार से महानगरों के अंदर और उनके आस-पास अवांछित विकास का कारण बन चुकी है?
(2014)
Answer : नगरीकरण जो कि किसी भी देश के विकास में प्रमुख कारक है, ने शहरों पर कुछ नकारात्मक प्रभाव भी उत्पन्न किये हैं। भारत में मुख्य शहरों की तीव्र तथा अव्यवस्थित वृद्धि ने देश में अनेक समस्याओं को जन्म दिया है। शहरों में विकसित क्षेत्रें की इस प्रकार की वृद्धि असंतुलित भूमि उपयोग प्रतिरूप को बढ़ाती है। ऐसी वृद्धि से शहरों का विकास, उपांतीय क्षेत्रें में होता है जो कि महानगरों के गैर नियोजित विकास का ....
Question : भारत में ‘स्मार्ट नगरों’ के विकास की साध्यता का विश्लेषण कीजिए।
(2014)
Answer : ‘स्मार्ट सिटी’ पारिस्थितिकी अनुकूल प्रौद्योगिकी सम्भावित एवं नियोजित शहर है। ‘भावी स्मार्ट सिटी’ के निम्नलिखित पहलू है-स्मार्ट शासन, ऊर्जा भवन, पर्यावरण, परिवहन एवं स्मार्ट आई. टी. एवं संचार व्यवस्था।
स्मार्ट शहरों के विकास में सफलता के पीछे वहां के स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इसमें बड़े पैमाने पर कुशल एवं अकुशल श्रम की आवश्यकता है। भारत में कुशल श्रम की पर्याप्त पूर्ति है। कुशल श्रम हेतु भारत सरकार ने स्किल इण्डिया, श्रमेव जयते जैसी महत्वाकांक्षी ....
Question : भारत के विभिन्न क्षेत्रें राज्यों में साक्षरता में भिन्नता के भागौलिक कारण बताइए।
(2013)
Answer : भारत में राज्य स्तर पर साक्षरता राष्ट्रीय औसत से भिन्न पाया जाता है। केरल, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा जैसे कुछ राज्यों में साक्षरता 85.93 प्रतिशत तक पायी जाती है, तो वहीं बिहार, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, झारखण्ड में साक्षरता प्रतिशत 60.70 प्रतिशत के बीच ही पायी जाती है।
इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर व्याप्त साक्षरता भिन्नता के समाजिक, आर्थिक, राजनैतिक कारणों के साथ भौगौलिक कारक भी प्रमुख हैं।
साक्षरता विभिन्नता के प्रमुख भागौलिक कारकों में कृषि, औद्यौगीकरण की निम्न ....
Question : भारत में शहरीकरण किस प्रकार वायु व जल प्रदूषण फैलाता है, वर्णन करें।
(2013)
Answer : अनियंत्रित एवं अनियोजित शहरीकरण ने अनेक पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया है। वायु एवं जल प्रदूषण शहरीकरण के नकारात्मक प्रभाव हैं। आमतौर पर शहरों की वायु गांव की वायु से ज्यादा प्रदूषित होती हैं। सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, धूल कण आदि शहरी वायु को प्रदूषित करते हैं। इसके अलावा अनेक जहरीले पदार्थ जैसे कि कार्बन मोनो ऑक्साइड सीसा, बेंजीन, ओजोन तथा पोलिसाइक्लिक ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) भी शहरी वायु में मिले होते हैं।
सल्फर डाईऑक्साइड, तेल ....
Question : गंदी बस्तियों स्लम्स को परिभाषित करें और उनसे जुड़ी समस्याओं का वर्णन करें।
(2013)
Answer : अनियंत्रित शहरीकरण और उनमें बढ़ती हुई जनसंख्या ने झुग्गी-झोपड़ी को जन्म दिया है। शहरों में आवास की कमी, जमीन का अत्यधिक मूल्य, आव्रजन जैसी समस्याओं के कारण झुग्गी-झोपड़ी की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रणव सेन समिति ने झुग्गी-झोपड़ी को परिभाषित करने का प्रयास किया है जिसके अुनसार - ‘झुग्गी-झोपडि़यां ऐसी संकुलित बस्तियां होती है, जिनमें बहुत ही खराब ढंग से बने कम-से-कम 20 घर हों। इनमें से अधिकांशतः अस्थायी होते है। झुग्गी-झोपडि़यों में साफ-सफाई ....
Question : औपनिवेशिक भारत में राष्ट्रीय निबटान प्रणाली के निर्गमन पर एक टिप्पणी लिखें और स्वाधीनता उपरान्त जिन कारकों ने शहरीकरण में योगदान दिया उनकी चर्चा करें।
(2013)
Answer : औपनिवेशिक भारत में ‘नेशनल सेटलमेंट सिस्टम’ के उदय के अनेक कारण रहे हैं। मुगल साम्राज्य के पतन के बाद अंग्रेजों ने धीरे-धीरे पूरे भारत पर कब्जा कर लिया। अंग्रेजों की भूमि नीति, औद्योगिक नीति तथा रेलवे आदि के विकास ने नये-नये शहरों को जन्म दिया। मुम्बई, कोलकाता, मद्रास जैसे बन्दरगाह व्यापार के मुख्य केन्द्र बने और बड़े शहरों के रूप में विकसित हुए। अंग्रेजों की भूमि संबंधी नीति के कारण भारत की फसल प्रणाली में ....
Question : जनसांख्यिकीय लाभ और भारतीय सामाजिक-आर्थिक वातावरण पर उसका प्रभाव
(2013)
Answer : जब जन्म दर में कमी हो और जनसंख्या का अधिकांश प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या का हो तो ऐसी स्थिति को जनसांख्यिकी लाभांश कहा जाता है। इसे जनसांख्यिकी खिड़की अथवा जनसांख्यिकी बोनस भी कहा जाता है। हाल की जनगणना के अनुसार भारत की कार्यशील जनसंख्या (15.64) भारत की कुल जनसंख्या का 63.4% है, इस जनगणना के आंकड़ों के अनुसार यहां की निर्भरता अनुपात भी घट कर 0.55 हो गयी है।
जनसांख्यिकीय लाभांश भारत के लिए न सिर्फ एक ....
Question : भारत की जनसंख्या नीति का मूल्यांकन कीजिए तथा राष्ट्र के जनसंख्या नियंत्रण पर उसकी प्रांसगिकता का परीक्षण कीजिए?
(2012)
Answer : भारत पहला देश जिसने स्वतंत्रता के बाद सन् 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम को औपचारिक रूप में स्वीकार किया, परन्तु जनसंख्या वृद्धि पर गंभीर चिंतन तीसरी योजना में ही प्रारम्भ हो सका। उसके के बाद के विभिन्न योजनाओं में निश्चित अवधि के अन्दर जनसंख्या वृद्धि के दर को कम करने के लक्ष्य निर्धारित किए। चतुर्थ योजना में छोटे परिवार को विकास का प्रमुख अंग मानते हुए 1978-79 तक जन्म दर को 39 प्रति हजार से ....
Question : पहाड़ी प्रदेश में स्थित गावों की अकादिकीय विशेषताएं।
(2012)
Answer : पहाड़ी प्रदेश में गांवों की अकारिकी के अन्तर्गत गांवों के भौतिक विन्यास और उसकी आंतरिक कार्यात्मक संरचना का अध्ययन किया जाता है। अधिवास अकारिकी के दो घटक हैं- क्षेत्र विन्यास व वास क्षेत्र। पहाड़ी प्रदेशों में गांव अकारिकी पर समाजिक संरचना के साथ भागौलिक संरचना का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलते हैं। पहाड़ी प्रदेशों में एकाकी घर (डोक) से लकर ढालों पर क्रमिक आवास देखने को मिलते हैं।
पर्वतीय प्रदेशों में विषम धरातलीय दशाओं, शीत जलवायु, ....
Question : भारत में विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के विकास को प्रभावित करने वाले भागौलिक कारकों का विवरण प्रस्तुत कीजिए?
(2012)
Answer : ग्रामीण अधिवास प्राथमिक व्यवसाय, विस्तृत भूमि उपयोग प्रतिरुप, कम जनसंख्या घनत्व, परंपरावादी जीवन पद्धति, अधिक सामुदायिक सहयोग और कम प्रदूषित पर्यावरण आदि विशेषताओं से सम्पन्न होते हैं। आकार, आकारकी एवं कार्य के आधार पर इन्हें खेतघर, नगला या पुखा और ग्राम के रूप में विभाजित करते हैं।
ग्रामीण बस्तियां बाढ़ निर्मित मैदानों, नदी तटों, प्राकृतिक तट बांधों, पहाड़ी ढ़ालों, घाटी तलहटियों, गिरिपदीय क्षेत्रें, जल, स्कंधों, सपाट पहाड़ी शिखरों पर्वत और सागरतटीय भागों में अवस्थित है। किसी ....
Question : आयु संरचना किस प्रकार निर्भरता अनुपात को प्रभावित करती है? उपयुक्त उदाहरणों के साथ व्याख्या कीजिए।
(2012)
Answer : आयु संरचना की दृष्टि से जनसंख्या को तीन प्रमुख वर्गों किशोर (15 वर्ष से कम) प्रौढ़ (15-59 वर्ष) एवं वृद्ध (60 वर्ष से अधिक) में बांटा जाता है। जनसंख्या के आयु संरचना से श्रम शक्ति, निर्भर जनसंख्या, दीर्घ आयु के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। प्रौढ़ वर्ग (15-59) को कार्यरत या श्रमजीवी वर्ग भी कहते हैं, जबकि किशोर एवं वृद्ध वर्ग की जनसंख्या में वृद्धि निर्भरता अनुपात को बढ़ाती है।
विश्व की आयु संरचना संबंधी ....
Question : सन्न नगर एवं महानगरीय प्रदेश में अंतर स्पष्ट करें। भारत में उभरते हुए सन्नगर का एक सकारण ब्यौरा दीजिए।
(2011)
Answer : नगर एक गत्यात्मक पहलू है और इसमें सततः क्षैतिज फैलाव की प्रवृति होती है। नगर माल महानगरीय प्रदेश एवं सन्ननगर नगरीय फैलाव की प्रवृति को ही दिखाते हैं।
नगरीय भूगोल के ये दोनों ही शब्द अलग-अलग परिस्थितियों में नगरीकरण को परिभाषित करते हैं। इनमें समानता यह है कि ये नगरीय फैलाव और विस्तार के ही परिणाम हैं।
महानगरीय प्रदेश, इस संरचना का विकास सर्वप्रथम 1940 में केलिफोर्निया विश्वविद्यालय के नगरीय अनुसंधान केन्द्र द्वारा हुआ। इस संस्था द्वारा ....
Question : भारत में नगरीय अपशिष्ट द्वारा उत्पादित पर्यावरणीय निम्नीकरण की समस्याओं की परिचर्चा कीजिए?
(2011)
Answer : नगरीय अपशिष्ट से तात्पर्य नगरीय कचरे, अनुपयोगी सामग्री अस्वास्थ्यप्रद कूड़ा-करकट आदि से है। वास्तव में नगर सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक संगठन होता है, जिसका क्षेत्र अत्यंत व्यापक होता है। भारत एक वृहद नगरों वाला देश है। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 6 मेगासिटी तथा 35 महानगर हैं।
इन महानगरों एवं मेगासिटी में वृहद् जनसंख्या अधिवासित है। अब भारत के कई नगर महानगर मेगासिटी तथा से मेगासिटी से नेक्रोपोलिस का रूप लेते जा रहे ....
Question : भारत के नगरीय प्रक्रम में वर्ग II व वर्ग III के नगरों की भूमिका की रूप रेखा प्रस्तुत कीजिए और संतुलित नगरीय विकास की दिशा में उनके योगदान का उल्लेख कीजिए।
(2010)
Answer : भारत की जनगणना में नगरों को छः वर्गों में बांटा गया है। एक लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले नगरों को प्रथम वर्ग के नगर कहते हैं।
50 हजार से ज्यादा व एक लाख से कम वाले नगरों को दूसरा वर्ग के नगर तथा 20 हजार से ज्यादा और 50 हजार से कम जनसंख्या वाले नगरों को तीसरा वर्ग के नगर कहते हैं।
इसके अलावा 10 लाख से 50 लाख की जनसंख्या के बीच वाले नगरों को महानगर ....
Question : स्पष्ट कीजिए कि जनांकिकी संक्रमण ने किस प्रकार समकालीन भारत में जनांकिकीय विभाजक पैदा किया था।
(2010)
Answer : वह विशिष्ट समय, जिसके बाद जनसंख्या वृद्धि के प्रतिरूप में स्पष्ट बदलाव आता है, जनांकिकी विभाजक कहलाता है।
भारत में जनसंख्या 1901 से लेकर 2001 तक अवधि को चार अवस्थाओं में बांटा गया है विजमें से 1921 और 1981 को बड़े जनांकिकीय परिवर्तनों के कारण उन्हें जनांकिकीय विभाजक कहा गया है।

1921 के पूर्व जनसंख्या वृद्धि की दर काफी कम थी जो 1-0 से भी ....
Question : भारत के ग्रामीण घर प्रकारों को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारकों की चर्चा करें।
(2009)
Answer : भारत गांवों का देश है, जहां 6 लाख से अधिक गांव पाये जाते हैं। इन गांव के प्रकारों में व्यापक विविधता पायी जाती है, जिसके अनेक भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक कारक हैं।
भौगोलिक कारकों में जलवायु, उच्चावच, जल संसाधनों की उपलब्धता, कृषि योग्य भूमि की उपलब्धता इत्यादि प्रमुख हैं, जो ग्रामीण घर प्रकारों को प्रमुखता से प्रभावित करते हैं। उत्तर भारत के मैदानी भाग में समतल भूमि, अधिक वर्षा, विभिन्न प्रकार के जल ड्डोतों की सुविधा, ....
Question : ऐसी कोई पैनी विभाजन रेखा नहीं है जहां शहरी आवसन रूक जाता हो और ग्रामीण क्षेत्र शुरू हो जाता हो भारत के शहरों के अव्यवस्थित फैलाव के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
(2009)
Answer : मध्यकालीन भारत में ग्रामीण पश्चप्रदेशों और नगरीय प्रशासनिक केंद्रों के मध्य किले की दीवार अथवा खाई के द्वारा एक स्पष्ट सीमा विभाजन किया जाता था। जहां दीवारें या प्राचीर नहीं थीं, वहां भी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रें के मध्य एक सुपरिभाषित सीमा रेखा मौजूद थी, परंतु आज बड़े नगरों या महानगरों के मामले में यह सीमा विभाजन अस्पष्ट बन जाता है।
आज ग्रामीण एवं नगरीय केंद्रों में द्विविभाजन नहीं पाया जाता बल्कि दोनों के मध्य सामान्यतः ....
Question : अनियोजित शहरी विकास ने बहुसंख्यक समस्याएं पैदा कर दी हैं। टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : भारत विश्व में तीव्र गति से बढ़ने वाले नगरीकरण वाले देशों में से एक है। यह नगरीकरण एक ओर आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक प्रगति का सूचक है तो दूसरी ओर अनेक गंभीर सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का कारण भी है।
शहरों में जनसंख्या का संकेंद्रण, शहरों का अनियोजित विकास एवं शहरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी इन समस्याओं के मूल्य कारण है। अनियोजित नगरीय विकास के कारण उत्पन्न एवं चुनौतियों को हम इस प्रकार देख सकते हैं:
....Question : "गंदी बस्तियां शहरी खतरा है।" भारत के शहरों का उदाहरण पेश करते हुए इस कथन को सुस्पष्ट कीजिए।
(2007)
Answer : गंदी बस्तियों का तात्पर्य उन अधिवासीय बस्तियों से है, जहां अधिवास की परिस्थितियां अस्वास्थ्यकर तथा अपारिस्थैतिक हो चुकी है। गंदी बस्तियां कही जाने वाली अवैध बस्तियों का फैलाव भारतीय नगरों की एक प्रमुख विशेषता है। देश के 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 607 कस्बों और नगरों में गंदी बस्तियां होने की जानकारी दी है। गंदी बस्तियों की कुल जनसंख्या 4 करोड़ 3 लाख है, जो गंदी बस्तियों वाले नगरों की कुल जनसंख्या का ....
Question : प्रचलित आकरिकीय प्रतिमानों की पृष्ठभूमि में भारतीय नगरों की आकरिकी की व्याख्या कीजिए।
(2006)
Answer : प्रत्येक नगर अपने आप में विशिष्ट होता है। परंतु नगरों की आंतरिक संरचना की कुछ निश्चित प्रवृत्तियां होती हैं। अनेक विद्वानों ने नगरों की आंतरिक संरचना को सैद्धांतिक रूप प्रदान करने का प्रयास किया है। इसके लिए विद्वानों द्वारा विभिन्न मॉडलों का विकास किया गया है। इन मॉडलों में निम्नलिखित प्रमुख हैं:
Question : भारत के ग्रामीण बस्तियों के प्रकारों का उल्लेख करें।
(2005)
Answer : भारत ग्रामीण अधिवास का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। ग्रामीण बस्तियां वातावरण और मानव द्वारा अधिकृत दृश्यों के पारस्परिक संबंधों को दर्शाती हैं। बस्तियों के प्रकार, बस्ती में मकानों की संख्या और मकानों के बीच में पारस्परिक दूरी के आधार पर निश्चित होते हैं। इस आधार पर भारत की ग्रामीण बस्तियों को चार भागों में बाटा जा सकता है-
(1)सघन बस्तियां (Compact Settlements): सघन बस्तियां घरातल की एकरूपता मिट्टी की अधिक उत्पादकता, वर्षा की पर्याप्त मात्र ....
Question : गंदी बस्तियां किस प्रकार बन जाया करती हैं? उनके सुधार के लिए ठोस सुझाव दीजिए।
(2004)
Answer : गंदी बस्तियां या स्लम (slums) नगर के निम्न स्तरीय अधिवास के क्षेत्र हैं जहां नागरिक सुविधाओं की घोर कमी होती है, जनाधिक्य एवं अस्वास्थ्यकर वातावरण व्याप्त रहता है तथा सामाजिक-आर्थिक समस्याएं घर किये रहती हैं। भारतीय शहरों में गंदी बस्तियों की समस्या विकट रूप धारण करती जा रहीं हैं, खासकर बड़े नगरों में। उदाहरणार्थ- कोलकाता नगर की 60 प्रतिशत जनसंख्या गंदी बस्तियों में निवास करती है, जबकि मुम्बई 50 प्रतिशत।
भारतीय नगरों में गंदी बस्तियों का ....
Question : भारत के पर्वत-नगरों की भौगोलिक पृष्ठभूमि एवं उनके वितरण के लक्षणों को प्रस्तुत कीजिए।
(2001)
Answer : भारत में अनेक पर्वतीय नगर स्थित हैं। ये पर्वतीय नगर किसी एक क्षेत्र में सीमित न होकर संपूर्ण भारत में बिखरे हुए हैं। भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत पर अनेक पर्वतीय नगर स्थित हैं। इन नगरों की ऊंचाई सामान्यतः समुद्र तल से 1500 से 2000 मीटर है। इन नगरों में शिमला, डलहौजी, कुल्लू-मनाली, चम्बा आदि पर्वतीय नगर हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं। सोनमार्ग, गुलमर्ग, पहलगाम, शेषनाग, अमरनाथ आदि नगर जम्मू-कश्मीर में स्थित हैं। मसूरी, ....
Question : भारतीय शहरों की आकारिकी की प्रमुख विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए।
(2000)
Answer : भारत के पास सिंधु घाटी सभ्यता के समय से ही नगरीय संस्कृति का एक लंबा इतिहास रहा है। भारतीय शहर नगरीकरण के एक लंबे काल में विकसित हुए हैं। इस लंबे इतिहास में भारत सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के विभिन्न चरणों से गुजरा है। विकास के इन चरणों की छाप वर्तमान शताब्दी में भी परिलक्षित होती है।
इस प्रकार भारतीय शहरों की आकारिकी इन विभिन्न प्रभावों का सम्मिश्रण प्रस्तुत करती है जो नियोजन की प्रक्रिया द्वारा और भी ....
Question : भारतीय शहरों में गंदी बस्तियों की वृद्धि के पर्यावरणीय प्रभावों की विवेचना कीजिए।
(2000)
Answer : गंदी बस्ती या स्लम एक ऐसा निवास क्षेत्र होता है, जहां निवास गृह अपनी जीर्ण-शीर्ण अवस्था ढांचे के दोषपूर्ण विन्यास संवातन, प्रकाश और सफाई के अभाव तथा इन सब कारकों के सम्मिलन के कारण स्वास्थ्य, सुरक्षा व नैतिकता के लिए एक खतरा होते हैं। यह गरीबी एवं वंचना की चरम दशा को व्यक्त करता है जो समुदाय के स्वास्थ्य एवं नैतिक विकास के लिए गंभीर संकट है।
स्लम नगरीय क्षेत्रों में ही पाये जाते हैं तथा ....
Question : भारत में ग्रामीण अधिवासों के विभिन्न प्रतिरूपों के वितरण की व्याख्या उपयुक्त उदाहरण एवं रेखाचित्रों की सहायता से कीजिए।
(1999)
Answer : ग्रामीण बस्तियों का प्रतिरूप उन बस्तियों के बसाव के अनुसार होते हैं। इनको मकानों एवं मार्गोर्ं की स्थिति के क्रम और व्यवस्था के आधार पर निश्चित किया जाता है। यह प्रतिरूप भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं ऐतिहासिक प्रवृत्तियों से प्रभावित होते हैं। भारत में ग्रामीण बस्तियों के निम्न प्रतिरूप दिखाई पड़ते हैंः
1. रेखीय प्रतिरूप: किसी सड़क या नदी अथवा नहर के किनारे-किनारे बसे हुए मकानों की बस्तियां रेखीय प्रतिरूप की होती हैं। मकान दोनों किनारों पर ....
Question : नगर प्रदेश की संकल्पना पर चर्चा कीजिये और भारत के नगरों का हवाला देते हुए नगर प्रदेश के परिसीमन के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले प्रकार्यात्मक सूचकों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये?
(1998)
Answer : नगर के इर्द-गिर्द कई छोटे आवासन पाये जाते हैं, जो नगरों के साथ एक प्रकार्यात्मक क्षेत्र का निर्माण करते हैं। आवासन के इन केन्द्रों का नगर से भौतिक, सामाजिक व आर्थिक संबंध होता है। दोनों ही क्षेत्र इस संबंध से लाभान्वित होते हैं। जैसे-जैसे नगर से इन आवासनों की दूरी बढ़ती जाती है, वैसे- वैसे नगरों का इन पर प्रभाव घटता जाता है। नगर प्रदेश की अवधारणा को समझने के लिए कुछ अन्य अवधारणाओं को ....