Question : भारत में शीतकालीन वर्षा के प्रतिरूप की व्याख्या कीजिए।
(2015)
Answer : भारत में शीतकालीन वर्षा मुख्यतः पश्चिमी प्रदेशों एवं दक्षिण तटीय प्रदेशों में होती है। भारत का पश्चिमी प्रदेश (यथा- पंजाब, हरियाणा) समुद्र के समकारी प्रभाव से दूर स्थित होने के कारण महाद्वीपीय जलवायु का अनुभव करते हैं। शीत काल में भूमध्य सागर के गर्म एवं आर्द्र वायुराशि एवं यूरोपीय वायुराशि के मध्य मिश्रण होने से समशीतोष्ण चक्रवात बनते हैं। इनमें पर्याप्त आर्द्रता होती है। ये चक्रवात रास्ते में कई क्षेत्रें को पार कर भारत पहुँचते ....
Question : रायलसीमा प्रदेश के प्रमुख जलवायवी अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए।
(2014)
Answer : रायलसीमा प्रदेश के अन्तर्गत आन्ध्र प्रदेश के राज्य के दक्षिण-पश्चिमी भाग के चार जिले-चित्तौर, कड़प्पा, अनन्तपुर तथा कुरुनुल सम्मिलित है। इस प्रदेश का विस्तार 6400 वर्ग किमी. क्षेत्र पर है। समुद्रतल से ऊंचाई 300-600 मीटर तथा जलवायु उष्णकटिबन्धीय आर्द्र-शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क प्रकार की है।
चित्तौर तथा कड़प्पा ये दो जिले उष्णकटिबन्धीय आर्द्र तथा शुष्क जलवायु के अन्तर्गत आतें है जबकि अनन्तपुर तथा कुरुनुल अर्द्ध शुष्क जलवायु के अन्तर्गत आते हैं। इस प्रकार रायलसीमा का भाग ....
Question : कावेरी नदी के अपने नदीय क्षेत्र में, उसकी सामाजिक-आर्थिक और पारिस्थितिक भूमिकाओं को उजागर कीजिए।
(2014)
Answer : कावेरी नदी का उदगम स्थल कर्नाटक के कोडगू जिले में स्थित ब्रहमगिरि पहाड़ी में 1341 किमी की ऊंचाई पर स्थित है। इस नदी का अपवाह क्षेत्र 805 किमी. लम्बा है जो 87,900 किमी. वर्ग क्षेत्र में प्रवाहित होती है। इस नदी घाटी का कुल अपवाह क्षेत्र का 3% केरल, 41% कर्नाटक तथा 56% तमिलनाडु राज्य में पड़ता है।
प्रायद्वीप नदियों में कावेरी ही एकमात्र ऐसी नदी है जो सदानीरा है क्योंकि इसके ऊपरी क्षेत्र में दक्षिण ....
Question : अपवाह प्रतिरूप किस प्रकार जल-विभाजक (वाटर डिवाइड) के द्वारा निर्धारित होता है?
(2014)
Answer : जल विभाजक या अपवाह विभाजक एक ऐसी रेखा है जो दो अपवाह बेसिनों को पृथक करती है। यह भू-वैज्ञानिक संरचना, चट्टानों की प्रकृति, स्थलाकृति स्वरूप, जलवायु असमानता के द्वारा निर्धारित एवं नियंत्रित होती है।
किसी पर्वतीय क्षेत्र में जल विभाजक स्थलाकृतिक चोटी के सापेक्ष होती है जबकि समप्राय क्षेत्र में जहां दलदली भूमि है, वहां पर जल विभाजक स्पष्ट नहीं होती है।
जल विभाजक तीन प्रकार के होते हैं-
Question : शिवालिक श्रेणी की स्थलाकृतिक व संरचनात्मक विशेषताओं का विवरण दें।
(2013)
Answer : यह हिमालय की दक्षिणतम एवं सर्वाधिक नवीन श्रेणी है। इसकी औसत ऊंचाई 600-1500 मी. है। इसकी दक्षिणी ढाल अपेक्षाकृत तीव्र है।
मध्य हिमालय के समान्तर चलने वाली यह श्रेणी पश्चिम की ओर चौड़ी किंतु पूर्व की ओर पतली होती जाती है। यह श्रेणी अविरल नहीं है। किंतु हिमालय के उत्तरी श्रेणियों से निकलने वाली नदियां यहां गहरे खड्ड एवं घाटियों का निर्माण करती हैं। तीस्ता और रैदास नदियों के द्वारा बनायी गयी तंग घाटियों (gorge) के ....
Question : भारत के मानसून तंत्र की विवेचना करें।
(2013)
Answer : वायु में मौसमी परिवर्तन को मानसून कहते हैं। भारत में मानसून मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है।
भारतीय उपमहाद्वीप उत्तरी गोलार्द्ध के मुख्यतः उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में अवस्थित हैं। यहां जून से सितम्बर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रवाह होता है जो हिंद महासागर से भारतीय उपमहाद्वीप की ओर प्रवाहित होता हैं। समुद्र से चलने के कारण इन हवाओं में जल वाष्प की मात्र अत्यधिक होती है, जिसके कारण ये ....
Question : पश्चिमी व मध्य हिमालय में बागवानी की संभावनाओं और वर्तमान स्थिति की विवेचना करें।
(2013)
Answer : भारत के एक बड़े भू-भाग में हिमालय पर्वतमाला फैली है, जिसका विस्तार पश्चिम में जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक है। इन पहाड़ी प्रदेशों के विकास को अगम्यता एवं भौगोलिक दुरुहता ने निषेधात्मक तरीके से प्रभावित किया है। लेकिन यहां बागवानी कृषि का अच्छा विकास हुआ है और भविष्य में और अधिक विकास की संभावनाएं हैं।
उत्तर-पूर्वी भारत तथा हिमालयी राज्यों में बागवानी के सर्वांगीण विकास के लिए कृषि मंत्रलय के कृषि एवं सहकारी ....
Question : भारत की खनिज पेटियों को सीमांकित कीजिए। तथा उनकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।
(2012)
Answer : खनिज से अभिप्राय प्राकृतिक तौर पर खनन द्वारा प्राप्त ऐसे पदार्थ से है, जिनका आर्थिक महत्व होता है। भारत में खनिजों का वितरण एक समान नहीं है।
अधिकांश खनिज देश के केवल प्रायद्वीपीय भाग में पाए जाते हैं। झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक एवं तमिलनाडु खनिज की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य हैं।
विशेष तौर पर लौह अयस्क के जमाव उड़ीसा, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक एवं तमिलनाडु की आर्कियन शैलों में, मैंगनीज मध्य प्रदेश उड़ीसा, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र ....
Question : दक्कन के पठार की संरचनात्मक विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
(2012)
Answer : प्रायद्वीपीय पठार के एक भाग के रूप में दक्कन का पठार क्रिशियस तथा पूर्व टर्शियरी काल में ज्वालामुखी उद्भेदन से निर्मित हुआ है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में 5 लाख वर्ग किमी पर विस्तृत है। पूर्व में अमरकंटक, सरगुजा से पश्चिम में कच्छ तक, उत्तर में ताप्ती नदी से दक्षिण में बेलगाम तथा दक्षिण पूर्व में राजमहेन्द्री तक फैला हुआ हैं। ज्वालामुखी उद्भेदन से प्राप्त लावा की गहराई (2000 मीटर तक) ....
Question : स्टाप्म के जलवायु प्रादेशीकरण के विशेष संदर्भ में भारत के जलवायु प्रदेशों के सीमांकन में वर्षा तथा तापक्रम के स्थानिक प्रतिरूप की भूमिका की विवेचना कीजिए।
(2012)
Answer : भारत की विशालता के कारण भारत की जलवायु में पर्याप्त विविधता एवं विभिन्नताएं पायी जाती हैं। ये प्रादेशिक विविधताएं वायु, तापमान, वर्षा, शुष्कता एवं आर्द्रता के रूप में पायी जाती हैं। तापमान एवं वर्षा को जलवायु के महत्वपूर्ण त्तवों की जलवायु प्रादेशीकरण का महत्वपूर्ण आधार माना गया है।
स्टैम्प एवं कैन्ड्रयू ने जनवरी माह के तापमान व वर्षा के आधार पर भारतीय जलवायु का विभाजन प्रस्तुत किया है। सर्वप्रथम जनवरी माह के 18◦C समताप रेखा के ....
Question : भारत की हिमालय एवं प्रायद्वीपीय नदीयों की प्रवृति का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए तथा देश की सिंचाई की तन्त्र में उनके निहितार्थ का परीक्षण करें।
(2011)
Answer : भारत में अपवाहित होने वाली नदियों को उनके स्त्रोत क्षेत्र के आधार पर दो प्रमुख वर्गों में विभाजित करते हैं:
हिमालय पर्वत एवं प्रायद्वीपीय भारत के उच्च भूमि से निकलने वाली नदियों की अपनी अलग-अलग भौगोलिक विशेषताएं होती हैं। जो उनके अपवाह प्रतिरूप, उनकी प्रवृत्ति में अंतर करती है। हिमालय एवं प्रायद्वीपीय भारत की नदियों में निम्नांकित अंतर किए जा सकते हैं।
Question : हिमालयी पर्वतन को स्पष्ट कीजिए और उदाहरण के साथ समझाइए कि इस प्रथम ने हिमालय के वृहत विभाजनों के भू-आकृतिक अभिलक्षणों को किस प्रकार प्रभावित किया हैं?
(2010)
Answer : हिमालय पर्वत की उत्पत्ति के संबंध में कमोवेश सभी विद्वान इस तथ्य पर सहमत हैं कि हिमालय पर्वत की उत्पत्ति टेथीस के मलबे पर, प्लेट विवर्तन की क्रिया के परिणामस्वरूप पड़ने वाले मोड़ का परिणाम है।
विद्वानों के अनुसार करोड़ों वर्ष पूर्व हिंदुकुश से लेकर आल्पस व कार्पेथियम तक टेथीस नाम की भूसन्नति (लंबा, पतला, वह छिछला सागर) थी, उसके उत्तरी भाग को अंगारा लैण्ड कहते थे। दक्षिणी भाग को गोंडवाना लैण्ड कहते थे, जिसमें आज ....
Question : रेखाचित्रित मानचित्र की सहायता से भारत में प्राकृतिक वनस्पति के स्थानिक वितरण पर चर्चा कीजिए।
(2010)
Answer : भारत में प्राकृतिक वनस्पति की अनोखी विविधता है, जिसका मुख्य कारण भारतीय भू-भाग का व्यापक विस्तार तथा जलवायवीय विविधता है। भारत में 30,000 से ज्यादा वनस्पतियां पायी जाती हैं, उसमें 40 प्रतिशत साइनो-तिब्बत है जिसे बोरियल बनस्पति कहते है। (हिमालय और असम क्षेत्र की वनस्पतियां) तथा थार प्रदेश की वनस्पतियां उत्तरी अफ्रीकी महाद्वीप से व उत्तर-पूर्व के मणिपुर, त्रिपुरा की वनस्पतियां, इंडोनेशिया मूल की हैं।
भारत के हिमालयी क्षेत्र में शीतोष्ण वनस्पतियां व अल्पाईन वन पाया ....
Question : भारत में मृदा अपरदन का स्थानिक प्रतिरूप
(2010)
Answer : विभिन्न प्रक्रमों द्वारा मृदा की उपजाऊ परत का बहना मृदा अपरदन है। भारत के विभिन्न क्षेत्रें से विभिन्न प्रक्रमों द्वारा 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का अपरदन हो चुका है तथा प्रतिवर्ष 1800 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का अपरदन हो रहा है। भारत में सर्वाधिक भूमि अपरदन राजस्थान में होता है। वहां अपरदन सर्वाधिक वायु द्वारा होता है। खासकर अरावली के पश्चिमी भाग में तथा कुछ वर्षों से वर्षा के पैटर्न बदलने और पश्चिम ....
Question : नेशनल पार्क का निर्माण पारिस्थितिकी पुनरुत्थान एवं संरक्षण में किस प्रकार सहायक होता है? उपयुक्त उदाहरण सहित इस बात को समझाईये।
(2010)
Answer : किसी भू-भाग को राष्ट्रीय सरकार, उसमें रहने वाले जीवों व प्राकृतिक वनस्पतियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय पार्क घोषित करती है। राष्ट्रीय पार्क मानवीय गतिविधियों से सुरक्षित क्षेत्र होता है, जिसमें मात्र शैक्षणिक, अनुसंधान या सांस्कृतिक उद्देश्य से ही प्रवेश किया जा सकता है।
राष्ट्रीय पार्क स्थापना का सुझाव सर्वप्रथम आई सी यू एन(International Union for conservation of nature) ने दिया था। भारत में, 1972 में ‘वाईल्ड लाईफ एक्ट’ पारित करके राष्ट्रीय पार्कों की स्थापना की ....
Question : भारत के प्रमुख मृदा प्रकारों के विरचन एवं उनके वितरण पर चर्चा कीजिए।
(2009)
Answer : भारत एक विशाल देश है, जहां विविध प्रकार की मिट्टियां पायी जाती हैं तथा इनका वर्गीकरण विभिन्न आधारों जैसे रासायनिक संगठन, उपजाऊपन इत्यादि के अनुसार किया जाता है। सामान्यतः भारतीय मृदाओं को निम्नलिखित वर्गों में बांटा जा सकता हैः
जलोढ़ मृदा को कांप मृदा भी कहते हैं। इनका निर्माण नदियों द्वारा निक्षेपित विभिन्न आकार के बालू तथा चीका के मिश्रण से हुआ है। इन मृदाओं में साधारणतः नाइट्रोजन, फास्फोरस ....
Question : कारण बताइए कि वर्षा परिवर्तनशीलता भारत के मानसून का एक विशिष्ट अभिलक्षण क्यों है?
(2009)
Answer : मानसून भारतीय जलवायु की प्रमुख विशेषता है, जो भारत में वर्षा का कारक है। भारत में वर्षा मुख्यतः दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से प्राप्त होता है, जो कुल वर्षा का लगभग 90 प्रतिशत होता है। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत वर्षा उत्तर-पूर्वी मानसून से प्राप्त होती है। भारत में वर्षा लाने वाले दो तंत्र हैं- पहला तंत्र उष्ण कटिबंधीय अवदाब है, जो बंगाल की खाड़ी या उससे भी आगे पूर्व में दक्षिणी चीन सागर में पैदा होता है ....
Question : भारत के पश्चिमी और पूर्वी समुद्र तटों के मध्य, उनके विकास, वर्तमान स्थलाकृति और अपवाह प्रतिरुप की दृष्टि से विभेदन कीजिए।
(2009)
Answer : भारत के प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी भाग को पूर्वी समुद्र तट तथा पश्चिमी भाग को पश्चिमी समुद्र तट के रूप में जाना जाता है। इन दोनों तटों में अनेक विभेद पाये जाते हैं। पश्चिमी तट संरचना की दृष्टि से एक संपूर्ण इकाई है। यह ताप्ती के मुहाने से लेकर कन्याकुमारी अंतरीप तक 1600 किमी. लम्बे क्षेत्र में विस्तृत है। पूर्वी तट महानदी के दक्षिण से लेकर दक्षिणतम तक 1300 किमी. लंबे क्षेत्र में विस्तारित है।
पश्चिमी ....
Question : हिमालयी और प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्रें के बीच विभेदन किजिए।
(2008)
Answer : भारत विविध स्थलाकृतियों का विशाल देश है। अतः भारत के विविध क्षेत्रें में अलग-अलग तरह के अपवाह तंत्र विकसित हुए हैं। भौगोलिक विशेषताओं व ड्डोतों की विशेषताओं के आधार पर भारत के अपवाह तंत्र को दो भागों में बांटा जा सकता हैः
हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों का अपवाह तंत्र तथा प्रायद्वीपीय पठारों से निकलने वाली नदियों का अपवाह तंत्र।
इन दो अपवाह तंत्रें के विकास पर भूगर्भिक संरचना, धरातलीय उच्चावच, वर्षण तथा अन्य जलवायविक विशेषताओं ....
Question : हिमालय की उत्पत्ति के संबंध में प्रस्तुत किए गए विभिन्न विचारों को स्पष्ट कीजिए और हिमालय को उर्ध्वाधर विभाजनों में विभक्त कीजिए।
(2007)
Answer : हिमालय विश्व की सबसे बड़ी वलित पर्वतमाला है। यह अपने उत्पत्ति संबंधी मान्यताओं में पर्याप्त विभेद रखता है। हिमालय के उत्पत्ति संबंधित विभिन्न विचार मुख्यतः कोबर, होम्स और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत पर आधारित है।
कोबर के भूसन्नति सिद्धांत के आधार परः तृतीय कल्प के प्रारंभ होने के पूर्व (7 करोड़ वर्ष) हिमालय के स्थान पर एक लंबा संकरा जलमग्न क्षेत्र था, जो टिथिस सागर के नाम से विख्यात है। इस टिथिस सागर के उत्तर एवं दक्षिण ....
Question : जेट प्रवाह सिद्धांत के विशेष संदर्भ में भारतीय मानसून की उत्पत्ति के आधुनिक सिद्धांतों का एक आलोचनात्मक विवरण दीजिए।
(2006)
Answer : मानसूनी जलवायु का तात्पर्य उस जलवायु से है, जिसमें मौसम के अनुसार पवनों की दिशा उलट जाती है। भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति की प्रक्रिया अत्यन्त जटिल है, यही कारण है कि सैकड़ों वर्षों के गहन प्रेक्षण एवं अनुसंधान के बावजूद इसे पूरी तरह नहीं समझा जा सका है।
भारतीय मानसून के संबंध में सर्वप्रथम हेली ने यह विचार दिया कि इसकी उत्पत्ति का कारण स्थल एवं सागर के गर्म होने की प्रक्रिया में भिन्नता है। ....
Question : भारत के बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के वितरण और देश में बाढ़ों के प्रभाव का नियंत्रण करने के कार्यक्रमों एवं नीति का एक विवरण प्रस्तुत कीजिए।
(2005)
Answer : भारत की विशालता और भौतिक विभिन्नता के कारण यहां बाढ़ आती है। विश्व का शायद ही कोई और देश बाढ़ से इतना प्रभावित रहता हो जितना कि भारत। देश के किसी न किसी भाग में विभिन्न भीषणता वाली बाढ़ का आना एक प्राकृतिक संयोग है। देश के उपजाऊ विशाल मैदान तथा तटीय क्षेत्रों में अक्सर बाढ़ आती रहती है। असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा में बाढ़ आना एक वार्षिक क्रिया है, जिसके परिणाम मानव एवं ....
Question : मध्य एवं निम्नतर गंगा मैदान में बाढ़ खतरों के कारणों, परिणामों और उपचारी उपायों को स्पष्ट कीजिए।
(2004)
Answer : भारत विश्व में बांग्लादेश के बाद सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित देश माना जाता है जबकि भारत में मध्य एवं निम्न गंगा मैदान बाढ़ की विभीषिका के लिए कुख्यात रहे हैं। प्रत्येक वर्ष गंगा एवं उसकी सहायक नदियां तबाही लाती हैं जिनसे जान-माल का काफी नुकसान होता है।
बाढ़ पृथ्वी के प्राकृतिक जल चक्र का ही एक अंग है परन्तु विकास एवं बढ़ती जनसंख्या के फलस्वरूप जैसे-जैसे प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ बढ़ी है, बाढ़ का प्रकोप भी ....
Question : भारत के जलवायु प्रदेशों के परिसीमन में वर्षा एवं ताप के स्थानिक प्रतिरूप की भूमिका पर, विशेषकर स्टैम्प के जलवायवी प्रादेशीकरण का हवाला देते हुए चर्चा कीजिए।
(2004)
Answer : भारत की विशालता तथा इसकी भूआकृतिक विभिन्नता यहां की जलवायविक दशाओं में पर्याप्त विविधता को जन्म देती है। तापमान व वर्षा के असमान वितरण की मात्र भारत को जलवायु प्रदेशों में बांटने का आधार प्रदान करती है।
देश में जलवायु तत्वों को स्थानीय विभिन्नताओं व विशेषताओं की स्पष्ट रूप में अंकित किया जा सकता है, जो कि प्रादेशिक विभिन्नताओं के रूप में परिलक्षित होते हैं। इनमें वर्षा की मात्र की भिन्नता प्रमुख रूप से विभाजन का ....
Question : भारत के सूखा प्रवण क्षेत्रों की पहचान कीजिए तथा उनके विकास के उपायों पर चर्चा कीजिए
(2003)
Answer : भारत में 75 सेमी. से कम वार्षिक वर्षा का क्षेत्र सूखा प्रवण क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। इन क्षेत्रों में पं- राजस्थान, कच्छ का रण, दक्षिण भारत का वृष्टि छाया प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, लद्दाख का पठार, हिमाचल का उत्तर-पूर्व भाग तथा आंध्र प्रदेश का पठारी भाग प्रमुख है।
इन क्षेत्रों में विकास हेतु दो तरह के कार्यक्रम अपनाये गये हैं: अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन कार्यक्रम। प्रथम प्रकार के कार्यक्रम के तहत पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था, ....
Question : हिमालयी एवं प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्रों के बीच के प्रमुख अंतरों पर प्रकाश डालिए।
(2003)
Answer : भारत विविध स्थलाकृतियों का विशाल देश है। अतः भारत के विविध क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के अपवाह तंत्र विकसित हुए हैं। भौगोलिक विशेषताओं व स्रोतों की विशेषताओं के आधार पर भारत के अपवाह तंत्र को दो भागों में बांटा जा सकता हैः
(i) हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों का अपवाह तंत्र तथा
(ii) प्रायद्वीपीय पठारों से निकलने वाली नदियों का अपवाह तंत्र।
इन दो अपवाह तंत्रों के विकास पर भूगर्भिक संरचना, धरातलीय उच्चावच, ....
Question : भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून की उत्पत्ति, क्रियाविधि एवं विशेषताओं की व्याख्या करें।
(2002)
Answer : मानसून शब्द मूल रूप से अरबी भाषा के मौसिम शब्द से बना है, जिसका तात्पर्य मौसम से होता है। जिन हवाओं की दिशा ऋतु के अनुसार बदल जाती है, उनको मानसून या मौसमी वायु कहते हैं। मानसून हवाओं की उत्पत्ति केवल उन्हीं क्षेत्रों में संभव है, जहां अयन रेखाओं के पास एक ओर स्थल का विस्तृत भाग हो और दूसरी ओर समुद्र का विस्तृत भाग हो। अयन रेखाओं के पास ही इन हवाओं की उत्पत्ति ....
Question : भारत में भूकंपों के क्षेत्रीय वितरण के भौगोलिक लक्षणों को स्पष्ट कीजिये।
(2001)
Answer : भारत के प्राकृतिक विभागों एवं भूकंप क्षेत्रों में काफी गहरा संबंध पाया जाता है। प्राकृतिक विभागों के अनुरूप ही भूकंप के क्षेत्रीय वितरण की दृष्टि से भारत को प्राकृतिक विभागों के अनुरूप ही तीन मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता हैः
1. हिमालय क्षेत्र: यह उत्तरी भूकंप क्षेत्र है, जिसमें हिमालय पर्वत एवं उसका समीपवर्ती क्षेत्र सम्मिलित है। यह क्षेत्र भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। टर्शियरी काल में भारतीय प्लेट एवं यूरेशियाई ....
Question : भारत के प्रायद्वीपीय पठार के द्वितीय कोटि के क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण दीजिये।
(2001)
Answer : भारत का प्रायद्वीपीय पठार विश्व का प्राचीनतम पठार है। यह पठार अनेक धरातलीय विविधताओं से परिपूर्ण है। विभिन्न पर्वतों एवं नदियों की उपस्थिति के कारण यह पठार अनेक छोटे-छोटे पठारों में विभक्त हो चुका है। पठार के पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम पार्श्व पर अरावली की अवशिष्ट पर्वत श्रेणियां स्थित हैं, जो अत्यधिक अनाच्छादित एवं विच्छिन्न श्रृंखला ओं के रूप में पायी जाती हैं। पठार के उत्तर में विंध्यन की पहाड़ी है जो प्राचीन मोड़दार पर्वत है। ....
Question : भारतीय उत्तरी मैदानों के उच्चावच लक्षणों का विवेचन कीजिये।
(2001)
Answer : भारत का उत्तर का मैदान उत्तर में हिमाचल एवं दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार के मध्य विस्तृत है। इस मैदान का निर्माण सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा लाये गये अवसादों से हुआ है, अतः इस मैदान को सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान भी कहा जाता है। यह मैदान पश्चिम में पंजाब की सीमा से लेकर पूर्व में नागालैंड तक लगभग 2500 किमी की लंबाई में फैला हुआ है। इस मैदान की चौड़ाई 100 से 500 ....
Question : भारत में घटित होने वाले बाढ़ प्रकोप अथवा सूखा प्रकोप का तर्कसंगत विवरण दीजिए तथा उनके नियंत्रण के उपाय भी सुझाइए।
(2000)
Answer : देश के किसी न किसी भाग में वर्षा काल में विभिन्न भींषणता वाली बाढ़ों का आना एक प्राकृतिक संयोग है। उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम तथा गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मैदानों में बाढ़ों का आना एक वार्षिक क्रिया है, जिसके परिणाम मानव एवं पशु सभी को भुगतने पड़ते हैं। दक्षिण भारत के डेल्टाई क्षेत्रों तथा समुद्रतरीय भागों में भी बाढ़ें अभिशाप का रूप लेते हैं। 1990 से 2000 के मध्य आए ....
Question : प्रायद्वीपीय भारत की संरचना एवं उच्चावच के लक्षणों का वर्णन कीजिए।
(2000)
Answer : स्थलाकृति संरचना प्रक्रम तथा अवस्था (समय) का फलन होती है। जो उच्चावच और स्थलाकृति आज हम देखते हैं वह अपक्षयण, अपरदन, अवसादीकरण, जमाव, दबाव, रुपांतरण, मैग्मा-उदभेदन, उत्थान-पतन और अन्य कई प्रक्रियाओं के संयोजन के लंबे प्रक्रम का प्रतिफल है। भारत का सबसे विस्तृत भौतिक विभाग प्रायद्वीपीय पठार है, जिसके उच्चावच लक्षण उसके भूगर्भिक इतिहास एवं संरचना की अभिव्यक्ति हैं।
आरंभ में भारत गोंडवानालैंड, जो एक वृहत दक्षिणी महाद्वीप था, का ही एक भाग था। गोंडवानालैंड के ....
Question : भारतीय मानसून की क्रियाविधि को स्पष्ट कीजिए।
(1999)
Answer : सम्प्रति मानसून की उत्पत्ति की व्याख्या तापीय संकल्पना की बजाय गतिक संकल्पना के आधार पर की जा रही है। इसकी उत्पत्ति में हिमालय, तिब्बत के पठार, जेट स्ट्रीम एवं जल एवं स्थल में तापीय अंतर की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। गर्मियों के मौसम में तीन गतिविधियां घटित होती हैंः
Question : हिमालय की श्रेणियों के उत्थान की व्याख्या कीजिए।
(1999)
Answer : हिमालय पर्वत के निर्माण की व्याख्या प्लेट-विवर्तनिकी सिद्धांत के आधार पर की जाती है, जिसने पहले की ‘भू-अभिनति’ के सिद्धांत को विस्थापित कर दिया है। प्लेटों के आपसी टकराव के कारण उनमें तथा ऊपर की महाद्वीपीय चट्टानों में प्रतिबलों का एकत्रण होता है, जिनके फलस्वरूप वलन, भ्रंशन तथा आग्नेय क्रियाएं होती हैं। भारतीय एवं यूरेशियन प्लेट के टकराने से टेथिस सागर सिकुड़ कर क्षेपकोरों में विभंगित होने लगा और हिमालय की उत्पत्ति हुई। ये पर्वत ....