Question : क्या कारण है कि फार्मास्यूटिकल उद्योग अधिकांशतः देश के पश्चिमी प्रदेश में केन्द्रित हैं?
(2015)
Answer : फार्मास्यूटिकल उद्योग एक ऐसा उद्योग है, जिसमें निरंतर अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता होती है। इसके लिए, वर्तमान समय में प्रशिक्षित लोगों, सूचना-प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषिता का उपयोग किया जा रहा है।
भारत के पश्चिमी क्षेत्रें खासकर गुजरात एवं महाराष्ट्र में इस उद्योग की संकेन्द्रता ज्यादा है। इस क्षेत्र में मुम्बई-पूणे-नासिक, अहमदाबाद- बड़ोदरा-सूरत, दिल्ली-एनसीआर जैसे औद्योगिक प्रदेश विद्यमान है। यह क्षेत्र अवसंरचना के मामले में भी भारत के अन्य क्षेत्रें से आगे है। इसके अलावा इस उद्योग में ....
Question : भारत में पारंपरिक दस्तकारी (क्राफ्ट) उद्योग क्यों ह्यसोन्मुख है?
(2015)
Answer : भारत में दस्ताकारी उद्योग एक परिपक्व एवं विकसित उद्योग के रूप में रहा है। यह क्षेत्र विशेष के हिसाब से फला-फूला है। इसमें इनके स्थानिक वातावरण, संस्कृति, पूजा-उपासना, परंपरा का समावेश आवश्यक तत्व के रूप में शामिल रहा है। परंतु अंग्रेजों के काल से इस उद्योग का पतन आरंभ हुआ और वर्तमान भूमंडलीकृत युग में इसकी चुनौतियाँ व्यापक हो गई हैं, जिसके अनेक कारण गिनाए जा सकते हैं-
यह उद्योग वस्तुतः कुटीर उद्योग की श्रेणी में ....
Question : समझाइए कि किस प्रकार पारिस्थितिक-पर्यटन कार्यकलाप देश के हिमालयी और उत्तर-पूर्वी प्रदेशों में एक महत्वपूर्ण जीविका-विकल्प हो सकते हैं।
(2014)
Answer : भारत भौगोलिक विविधता से परिपूर्ण देश है। उत्तर में स्थित हिमालयी और पूर्वोत्तर भाग स्वतंत्रता से पूर्व अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी व सैन्य अकादमी के रूप में विख्यात रहा है।
हिमालय तथा पूर्वोत्तर के क्षेत्र दुर्गम होने के कारण पिछड़े हैं। इनके प्राकृतिक एवं पारिस्थितिकीय महत्व को देखते हुए इस क्षेत्र को प्राकृतिक धरोहर के रूप में विकसित करके पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, हिमालय क्षेत्र में नदी राफ्टिंग, माउण्टेन ट्रेनिंग, स्कीइंग ....
Question : भारत में ताप विद्युत संयंत्रें और कोयला क्षेत्रें की अवस्थिति एक दूसरे की साधक नहीं है। विश्लेषण कीजिए।
(2014)
Answer : ताप बिजली का उत्पादन कोयला, डीजल तथा प्राकृतिक गैस से किया जाता है। ताप विद्युत उत्पादन इन ईंधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
भारत में ताप विद्युत उत्पादन में कोयला सर्वाधिक कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। बड़े पैमाने पर ताप विद्युत सयंत्रें में कोयले की आवश्यकता है। इसी कारण यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ताप विद्युत संयत्रें की अवस्थिति कोयला खनन क्षेत्रें के समीप हो, जिससे परिवहन लागत के ....
Question : भारत में कृषि-आधारित उद्योगों की समस्याओं का सामान्य रूप से और कपास वस्त्र उद्योग की समस्याओं का विशेष रूप से वर्णन कीजिए।
(2014)
Answer : भारत के प्रमुख कृषि आधारित उद्योगों में चीनी उद्योग, वस्त्र उद्योग, जूट उद्योग, सिल्क, रेशम, खाद्य संस्करण उद्योग, एल्कोहल, दियासलाई, वनस्पति घी उद्योग आदि को सम्मिलित किया जाता है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करते हैं।
भारत में कृषि आधारित औद्योगिक इकाइयां कुल औद्योगिक इकाई का 35-3% योगदान करती हैं। कृषि आधारित उद्योग का कुल रोजगार में लगभग 40% योगदान है। साथ ही साथ औद्योगिक निर्गत के कुल मूल्य का 21% में इसका योगदान है।
कृषि ....
Question : कुटीर उद्योग के विकास की प्रोन्नति करने के लिए हमारी व्यापार नीति में कौन-से वांछित संभव परिवर्तन हैं?
(2014)
Answer : कुटीर उद्योग लघु उद्योगों का एक ऐसा संघटित रूप होता है, जहां वस्तुओं का उत्पादन कार्मिकों के घरों में होता है तथा परिवार के सदस्य कार्यबल के रूप में कार्य करते हैं। इन उत्पादन इकाईयों में प्रयुक्त उपकरण उच्च प्रौद्योगिकी युक्त नहीं होते हैं। यह असंगठित प्रकृति का होता है जिसमें उत्पादन की पारम्परिक विधियां अपनायी जाती हैं। ऐसे उद्योग ग्रामीण क्षेत्रें में होते हैं जहां बेरोजगारी का स्तर व्यापक है, इस तरह कुटीर उद्योग ....
Question : भारत के औद्योगिक क्षेत्र में भूमंडलीकरण और उदारीकरण से हो सकने वाले लाभों की प्राप्ति में आने वाली समस्याओं की विवेचना करें।
(2013)
Answer : भारत में 1991 की नई औद्योगिक नीति के द्वारा वैश्वीकरण, उदारीकरण एवं निजीकरण की शुरुआत की गयी। इसी क्रम में भारतीय उद्योगों में भी वैश्वीकरण एवं उदारीकरण का प्रवेश हुआ जिसके कारण भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशक भी अपना पैसा लगाने लगे। इन आर्थिक सुधारों ने अनेक औद्योगिक सुधारों को जन्म दिया जो भारतीय उद्योगों के विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। यद्यपि अनेक ऐसी रुकावटें अभी भी मौजूद हैं जिसके कारण भारतीय उद्योगों ....
Question : भारत में उद्योगों का वितरण पैटर्न, देश को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रें में बांटने का आवश्यक आधार प्रदान नहीं करता। इसको विस्तार से बताएं।
(2013)
Answer : अनेक भूगोलवेत्ताओं एवं विशेषज्ञों ने भारत के औद्योगिक प्रदेशों के वितरण को अपने ढंग से व्याख्यायित करने का प्रयास किया है, जिसके लिए उन्होंने अनेक कसौटियों का प्रयोग किया है, परंतु भारत के उद्योगों के बेतरतीब बिखराव के कारण वे इस कार्य में पूर्णरूपेण सफल नहीं हुए हैं। विभिन्न योजना अवधियों में भारतीय औद्योगिक प्रदेशों के वितरण में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। इसी कारण ट्रिवार्था, बुर्नेट, करण एवं जेनकिन्स आदि भूगोलवेत्ताओं द्वारा भारत को ....
Question : बहुराष्ट्रीय इकाइयों की भारत में औद्योगिक भूमण्डलीकरण संबंधी भूमिका का विवरण दें।
(2013)
Answer : 1991 की नई औद्योगिक नीति के द्वारा भारत में भू-मण्डलीकरण, निजीकरण एवं उदारीकरण की संकल्पना को प्रस्तुत एवं लागू किया गया। 1991 के पूर्व भारत में विकास के लिए मुख्यतः समाजवादी दृष्टिकोण को अपनाया गया था। बहुराष्ट्रीय कंपनियां उदारीकरण की ही देन हैं। इन कंपनियों के मुख्यालय तो किसी एक देश में होता है परंतु इसके व्यवसाय अनेक देशों में फैले होते हैं।
1991 ई. में भारत में उदारीकरण के पश्चात् अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत ....
Question : भारत के कोयला भंडारों को चित्रित करें और उनकी विशिष्ट विशेषताएं भी बताएं।
(2013)
Answer : भू-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भारत के कोयला क्षेत्र को मुख्यतः दो भागों में बांटा जा सकता है-
गोंडवाना कोयला क्षेत्र तथा तृतीय युग के कोयला क्षेत्र।
1. गोंडवाना कोयला क्षेत्रः गोंडवाना कोयला क्षेत्र के अन्तर्गत भारत के कुल कोयला के 98% कोयले का भंडार मिलता है। इस क्षेत्र से भारत के कुल कोयला उत्पादन का 99% कोयला उत्पादित होता है। भारत में पाये जाने वाले 113 प्रमुख कोयला क्षेत्रें में से 80 निम्न गोंडवाना युग के हैं। ....
Question : भारत के प्रमुख औद्योगिक खंडों को चिह्नित करें और उनके विकास का विवरण दें।
(2013)
Answer : भारत के प्रमुख औद्योगिक खंड निम्नलिखित हैं-
Question : भारत के प्रमुख कृषि-औद्यौगीकरण प्रदेशों के स्थानिक प्रतिरुप की पहचान कीजिए। भविष्य के महत्वपूर्ण कृषि ओद्यौगीकरण प्रदेश के रूप में मालवा की सम्भावनाओं का विश्लेषण कीजिए?
(2012)
Answer : उद्योग के आर्थिक विकास में अत्यधिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश अथवा क्षेत्र में उद्योग के स्थानीकरण तथा समुचित वितरण का अधिक महत्व है। समुचित वितरण से तात्पर्यउद्योग के लिए कुछ आवश्यक तत्वों (सामग्रियों-सुविधाओं) की आवश्यकता होती है। कृषि औद्यौगिक प्रदेश में स्थित उद्योगों में आगतके रूप में कृषि उत्पादों का प्रयोग होता है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रें में कृषि सम्बधित क्रियाओं में भिन्नता के कारण कृषि औद्यौगीकरण प्रदेशों का स्थानिक रूप ....
Question : भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास का वर्णन कीजिए?
(2012)
Answer : भारत के औद्योगिक अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का प्रमुख स्थान है। सूती वस्त्र के क्षेत्र में भारत विश्व में एक प्रमुख उत्पादक देश है। सूती धागा 21 प्रतिशत और सूती वस्त्र 28 प्रतिशत के उत्पादन में आज भारत चीन के बाद दूसरा प्रमुख उत्पादक देश बन गया है। भारत न केवल सूती वस्त्र में आत्मनिर्भर है, वरन् इसका निर्यात विदेशों को भी किया जाता है।
देश में आधुनिक ढंग पर सूती वस्त्र उद्योग का प्रथम कारखाना ....
Question : गंगा के मैदान में मत्स्य उद्योग की संभावना एवं स्तर की विवेचना करें?
(2011)
Answer : भारत में गंगा का मैदान मत्स्यन की दृष्टि से एक समृद्ध क्षेत्र हैं। इस मैदान में मुख्य रूप से ताजे पानी की मछलियां पकड़ी जाती हैं। गंगा के मैदान का विस्तार लगभग 3-57 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल राज्य सम्मिलित किए जाते हैं। इनमें पश्चिमी बंगाल देश सबसे प्रमुख ताजे जल के मछलियों का उत्पादक है। पश्चिम बंगाल में लगभग 12 लाख लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष ....
Question : भारत में औषधीय उद्योग के विस्तार एवं विकास का मूल्यांकन कीजिए?
(2011)
Answer : भारत का औषधि एवं दवा उद्योग तकनीकी तथा पूंजी आधारित उद्योग है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् और मुख्यतः उदारीकरण के बाद उद्योगों का तेजी से विकास हुआ है। 1998 में इस उद्योग द्वारा करीब 1500 करोड़ रुपए मूल्य की दवा उत्पन्न की गई, जो देश के कुल विक्रय का 70 प्रतिशत था। इस उद्योग का विकास सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रें में हुआ है। 1986 में भारत में प्रथम दवा नीति की घोषणा की गई थी, ....
Question : अपतट तेल क्षेत्र और तटीय पारिस्थितिकी
(2010)
Answer : अपतटीय क्षेत्रें में तेल उत्पादन के तटीय क्षेत्रें की नाजुक पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसमें समुद्री तली के बेधन से भूगार्भिक तत्वों का समुद्री जल में घुलन होता है, जिससे कभी-कभी भारी धातुएं तक जल में धुलती हैं। तेल उत्पाद का परिवहन तथा तट के निकट स्थापित परिष्करण के दौरान काफी मात्र में तेल समुद्री जल में मिल जाता है। इसके अलावा समुद्री दुर्घटनाएं, जैसे हाल में चित्र नामक जहाज पर लदे कण्टेनर्स ....
Question : भारतीय लौह इस्पात उद्योग की अवस्थिति में कच्चे माल की भूमिका का परीक्षण कीजिए। उपयुक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने उत्तर को सस्पष्ट कीजिए।
(2009)
Answer : लौह इस्पात उद्योग आधुनिक औद्योगिक विकास की कुंजी है। यह मशीनों, कृषि उपकरणों, अनेक उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करता है, जिससे आधुनिक युग के जीवनोपयोगी उपकरणों का निर्माण किया जाता है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में लौह इस्पात उद्योग पर नजर डालें तो भारत में इस्पात का निर्माण 1500 ई.पू. से ही प्रचलित है। दिल्ली के निकट महरौली का प्रसिद्ध लौह स्तंभ 350 ई. का है। आधुनिक स्तर पर लौह इस्पात उत्पादन का असफल प्रयास 1830 ....
Question : भारत में चीनी उद्योग के वितरण के लिए जिम्मेदार कारकों को स्पष्ट कीजिए।
(2009)
Answer : भारत गन्ने का जन्म स्थान है तथा घरेलू उपभोग के लिए प्रचीन काल से ही गुड़ तथा खाण्डसारी बनाता आ रहा है। परिष्कृत चीनी उत्पादन ब्रिटिश काल में उत्तर प्रदेश तथा बिहार में चीनी उद्योगों की स्थापना से हुआ। चीनी उद्योग के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक भौगोलिक दशाएं हैं, जिनमें तापमान, वर्षा, मिट्टी, भूमि इत्यादि ही इसके अतिरिक्त श्रम एवं आर्थिक कारक के रूप में पूंजी महत्वपूर्ण है।
तापमानः गन्ना के वर्धन काल में 20॰-30॰ सेग्रे- ....
Question : उपयुक्त उदाहरण पेश करते हुए भारत में मोटर वाहन उद्योग की द्रुत संवृद्धि और विकास को बढ़ावा देने वाले कारकों को स्पष्ट कीजिए।
(2008)
Answer : मोटर वाहन उद्योग एक बाजारोन्मुख उद्योग है। इसमें इस्पात तथा मशीन टुल्स कारखानों में निर्मित तथा बाहर से आयातित वस्तुओं को जोड़कर गाडि़यां बनायी जाती हैं। अतः ये उद्योग उन नगरों में आसानी से विकसित हो सकते हैं, जहां कलपूर्जों को संकलित करने में सुविधा होती है।
भारत में 1991 से समग्र आर्थिक नीति लागू की गई, जिसमें आयातों को उदार बनाया गया। देश में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अनेक उदार आर्थिक नीतियां ....
Question : भारत में उद्योगों के विकास का अनुरेखन कीजिए तथा इस संदर्भ में बहुराष्ट्रिकों एवं उदारीकरण नीतियों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिएः
(2006)
Answer : भारत के औद्योगिक विकास का इतिहास काफी प्राचीन एवं गौरवपूर्ण है। यूरोप की औद्योगिक क्रान्ति से पूर्व ही भारत औद्योगिक दृष्टि से विकसित था। भारतीय उद्योग कृषि के साथ एकीकृत थे। भारतीय दस्तकार तथा कारीगर कपड़ा बुनने, मिट्टी के बर्तन बनाने, आभूषण, धातु निर्मित सामान, चमड़ा के सामान, काष्ठशिल्प बनाने में दक्ष थे।
भारत जलयान निर्माण के लिए भी प्रसिद्ध था। वाराणसी के सिल्क उत्पाद, ढाका के मलमल तथा आगरा एवं मेरठ के कालीन आदि वस्तुओं ....
Question : भारत के औद्योगिक परिदृश्य पर उदारीकरण की नीति की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
(2002)
Answer : उदारीकरण की नीति को 1991 में अपनाया गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य भारतीयों के रहन-सहन एवं आमदनी में सुधार, उद्योगों को विश्वस्तरीय बनाना, भारतीय उत्पादों को विश्व में और शहरी उत्पादों को भारत के बाजार में होड़ में शामिल करना तथा विदेशी प्रौद्योगिकी को भारत में लाना है।
भारत में 1991 के पहले का औद्योगिक परिदृश्य, सरकार की नीतियां, कच्चे माल की सुविधा, बाजार, यातायात के साधनों की उपलब्धता आदि तथ्यों पर निर्भर करता रहा है, ....
Question : भारत के औद्योगिक क्षेत्रों की वृद्धि, लक्षण एवं वितरण प्रतिरूप का वर्णन कीजिए।
(2001)
Answer : औद्योगिक प्रदेश का तात्पर्य ऐसे प्रदेशों से है जहां विभिन्न श्रृंखलाबद्ध उद्योगों के अनेक कारखाने केंद्रित हों एवं औद्योगिक भू-दृश्य विकसित हो। स्वतंत्रता के पश्चात एक ओर विभिन्न औद्योगिक उत्पादों की मांग में तेजी से वृद्धि हुई तो दूसरी ओर कच्चे माल की उपलब्धता, तकनीकी, परिवहन एवं संचार आदि के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति हुई। इसके फलस्वरूप भारत में भारी उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक उद्योग, उपभोक्ता उद्योग, इंजीनियरिंग, पेट्रो-केमिकल उद्योग आदि का तेजी से विकास ....
Question : भारत में सीमेन्ट अथवा सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण हेतु कारकों की विवेचना कीजिए तथा इसके वितरण के प्रतिरूप का विश्लेषण कीजिए।
(1999)
Answer : सीमेंट उद्योग का स्थानीयकरण मुख्यतः परिवहन लागत द्वारा निर्धारित होता है। इस उद्योग में कच्चे माल का वजन ज्यादा होता है, इसीलिए परिवहन लागत को कम करने के उद्देश्य से ज्यादातर सीमेंट उद्योगों की स्थापना कच्चे माल के निकट होती है। सीमेन्ट में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल निर्माण प्रक्रिया में अपना अधिकांश वजन खो देते हैं। लगभग साढ़े पांच टन वजन के कच्चे माल से एक टन सीमेंट तैयार होता है। 100 टन सीमेंट ....
Question : भारत में उर्वरक उद्योग के विकास के रुखों पर प्रकाश डालिए।
(1998)
Answer : एक ओर जहां अन्य देशों की तुलना में भारतीय कृषि की प्रति हेक्टेयर पैदावार बहुत कम है, वहीं जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि क्षेत्र में वृद्धि के आसार भी कम ही प्रतीत होते हैं। फलतः भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिये सरकार ने रासायनिक उर्वरक उद्योग के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके विकास के रुख को निम्न तालिका द्वारा समझा जा ....
Question : भारत में औद्योगिक संपदाओं (Estates) के महत्त्व का परीक्षण कीजिये।
(1998)
Answer : भारत के औद्योगिक विकास व संतुलित क्षेत्रीय विकास के संदर्भ में औद्योगिक संपदाओं (estates) का विशेष महत्त्व है। वेबर के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में उद्योगों में जमघट की प्रवृत्ति पायी जाती है। इसके द्वारा उद्योग एक दूसरे का लाभ उठाते हैं, जिससे संरचनात्मक खर्च में बचत होता है तथा उद्योगों को मुनाफा होता है। औद्योगिक संपदा के विकास में भौगोलिक कारक के साथ-साथ सरकारी समर्थन का भी बड़ा योगदान होता है। औद्योगिक संपदा में उद्योगों ....