Question : भारत के भूजल-संसाधनों के भौगोलिक वितरण का कारण प्रस्तुत करते हुए विवरण दीजिए। हाल के दशकों में इनका कम होना कितना गंभीर रहा है?
(2015)
Answer : भारत में जल-संसाधन का मूल स्रोत मॉनसूनी वर्षा है। भारत में मॉनसूनी वर्षा का वितरण बहुत विषम है। भारत में कुल जल उपलब्धता 4000 अरब घन मीटर है किंतु इसमें से 1869 अरब घन मीटर का ही औसत उपयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त 300 मीटर की गहराई तक जल उपलब्धता 432 अरब घन मीटर है।
भारत के भूजल संसाधनों के वितरण में भारी असमानता है। गंगा के जलोढ़ मैदान में इसकी उपलब्धता अधिक है। ....
Question : दुर्लभ स्पीशीज के विलोपन का उल्लेख करते हुए वन्य-प्राणी संरक्षण के उपाय सुझाइए।
(2014)
Answer : जीव-जन्तुओं, फसलों, पेड़ पौधों की संख्या निरन्तर कम होती जा रही है। ये क्षेत्र विशेष में सिमट कर रह गयी है। जैसे बासमती चावल का उत्पादन केरल, उत्तर भारत तथा पाकिस्तान में, चन्दन, पडाक तथा देवदार के वृक्ष सिर्फ कर्नाटक, अण्डमान तथा हिमालयी क्षेत्र में पाये जाते हैं।
कमोडो-ड्रेगन नामक छिपकली वर्तमान में सिर्फ इण्डोनेशिया के एक द्वीप में पायी जाती है। वर्तमान में वन्य तथा प्राणी संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अनेक ....
Question : भारत की नदियों के अंतर्प्रवाह (आपस में जोड़ने) की व्यवहारिता और इससे संभावित जल-समस्या के समाधान में योगदान पर टिप्पणी करें।
(2013)
Answer : जल एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जो भारत में काफी मात्र में पाया जाता है। हिमालय से निकलने वाली तथा प्रायद्वीपीय भारत की अनेक नदियों में वर्ष भर भारी मात्र में जल का प्रवाह होता है। यद्यपि प्रथमदृष्टया यहां की नदियों में बहने वाले जल की मात्र के कारण भारत में जल संसाधन की कोई कमी नजर नहीं आती तथापि जल संसाधन की मात्र सभी जगह समान नहीं है। हिमालयी नदियां, जहां अपनी विशाल अपवाह क्षेत्र ....
Question : भारत के समुद्री संसाधनों के विकास की संभाविता एवं संभावना का एक ब्यौरा दीजिए।
(2011)
Answer : महासागरीय जल एवं नितल से सम्बन्धित जैविक एवं अजैविक संसाधनों को सागरीय संसाधन कहते हैं। यह सागरीय संसाधन, सागरी जल, उसमें निहित ऊर्जा, उसके जीव-जंतुओं, पौधों, सागरीय निक्षेप तथा अजैविक पदार्थ आदि किसी रूपों में हो सकता है। हिंद महासागर में स्थित भारत की कुल तट रेखा 6100 किमी. है तथा इसका विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र लगभग 20 लाख वर्ग किलोमीटर है। स्पष्ट है कि भारत में समुद्री संसाधनों के विकास की व्यापक संभावना है। भारत ....
Question : आकलन कीजिए कि किस प्रकार भू-पृष्ठ जल उपयोग किस प्रकार से देश में खाद्य उत्पादन व खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है?
(2010)
Answer : सिंचाई कृषि उत्पादकता का अपरिहार्य अंग है और जैसे-जैसे सिंचाई की प्रणाली का विस्तार होता है। वैसे-वैसे खाद्य उत्पादकता भी बढ़ती है। हरित क्रांति के बाद सिंचाई की तीव्रता बढ़ी, क्योंकि अधिक उत्पादन वाली फसलें अधिक सिंचाई की मांग करती थीं और उन्नत बीजों और उर्वरक कीटनाशक के साथ सिंचाई की तिकड़ी ने हमें खाद्य आत्मनिर्भर बनाया। दूसरे चरण में कमाण्ड क्षेत्र कार्यक्रम के द्वारा कावेरी, इंदिरा गांधी नहर आदि परियोजनाओं द्वारा हरित क्रांति का ....
Question : भारत में भू-पृष्ठ जल उपयोग के उभरते प्रतिरूप पर चर्चा कीजिए।
(2010)
Answer : भू-पृष्ठ जल का उपयोग को मुख्यतया चार भागों में बांट सकते हैं। प्रथम, पेय जल के रूप में दूसरा, सिंचाई में, तीसरा, उद्योगों में और चौथा जल-विद्युत के उत्पादन में। ‘वाटर कमीशन आफ इंडिया’ के अनुसार भारत की छोटी बड़ी 10000 से ज्यादा नदियों में 1869 अरब घन लीटर/वर्ष जल उपलब्ध है, जिसका मात्र 32 प्रतिशत ही उपयोग हेतु उपलब्ध है और उसमें से मात्र 8 प्रतिशत के भंडारण की क्षमता है।
बढ़ते शहरीकरण के कारण ....
Question : भारत में ऊर्जा संकट के न्यूनतमीकरण के लिए उपयुक्त ऊर्जा नीति सुझाइए।
(2008)
Answer : देश में ऊर्जा की घोर कमी है। एक प्रकार से संकट की स्थिति है। इसमें बिजली गुल होना तथा कम वोल्टेज होना प्रमुख कारण हैं। इसके लिए एक उपयुक्त ऊर्जा नीति की आवश्यकता है जो उर्जा के उपयुक्त उपयोग को सुनिश्चित करते हुए संकट की स्थिति से बाहर निकाल सके। इसका उद्देश्य केवल ऊर्जा संसाधन को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना ही नहीं होना चाहिए अपितु उर्जा संकट के स्थायी समाधान का हल भी प्रस्तुत ....
Question : भारत में जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर चर्चा कीजिए।
(2007)
Answer : मानव सहित जैव संसार के अस्तित्व के लिए जल अनिवार्य है। इसकी मांग में असाधारण वृद्धि हो रही है, लेकिन उपयोग के योग्य जल की आपूर्ति सीमित है। अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण अथवा प्रबंधन में लापरवाही के कारण जल उपयोग के अयोग्य हो सकता है। जल सर्वत्र समान मात्रा में उपलब्ध नहीं है। एक स्थान पर जल की अधिकता है, तो दूसरे स्थान पर उसका अभाव। इन परिस्थितियों में जल की मांग और आपूर्ति के साथ-साथ ....
Question : "गैर पारंपरिक ऊर्जा ही भारत में भविष्य की ऊर्जा है"। इस कथन के पक्ष में तर्क दीजिए।
(2005)
Answer : मानव सृष्टि के आरंभ से ही किसी न किसी रूप में ऊर्जा का उपयोग करता आ रहा है। पहले केवल लकड़ी ईंधन के रूप में प्रयुक्त होती थी, परन्तु कालान्तर में औद्योगिक क्रांति के दौरान कोयला तेल और गैस की खपत दिनों दिन बढ़ती गई। भारत के ऊर्जा से संबंधित इतिहास को देखने से स्पष्ट होता है कि प्रारंभ से लेकर पिछली कुछ शताब्दियों तक मानव मुख्यतः ऊर्जा के पारंपरिक श्रोतों पर ही निर्भर था। ....
Question : भारत के महत्वपूर्ण जीवीय संसाधन प्रदेशों की पहचान कीजिए। भारत में जीवीय संसाधन संरक्षण की समस्याओं एवं उपचारी उपायों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
(2004)
Answer : जीवीय संसाधन से तात्पर्य है वनस्पति एवं जीव-जन्तु। भारत के पास जीवीय संसाधनों की कोई कमी नहीं है। भारत में लगभग वनस्पति की 46 हजार प्रजातियां पायी जाती हैं तथा विश्व में वन्य जीवों की 15 लाख प्रजातियों में से 6.7 प्रतिशत भारत में पायी जाती हैं। इसके अतिरिक्त भारत में विश्व के 12 मेगा डाइवर्सिटी राष्ट्रों में शामिल किया गया है। भौगोलिक दृष्टि से भारत में निम्न वनस्पति क्षेत्र पाये जाते हैंः
Question : हिमालय के वनस्पति क्षेत्रों के अनुक्रम को स्पष्ट कीजिए।
(2001)
Answer : हिमालय क्षेत्र में वनस्पति के वितरण पर ऊंचाई का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। इसका कारण यह है कि ऊंचाई में वृद्धि के साथ तापमान में कमी आती है, अतः हिमालय क्षेत्र में ऊष्ण कटिबंधीय वनस्पति से लेकर टुंड्रा वनस्पति की पेटियों का एक क्रम पाया जाता है। हिमालय का पूर्वी भाग कर्क रेखा एवं समुद्र के अधिक निकट है। साथ ही यहां वर्षा भी अधिक होती है। पश्चिमी भाग न केवल कर्क रेखा से अधिक ....
Question : भारत की राष्ट्रीय वन नीति का परीक्षण कीजिए।
(2000)
Answer : भारत उन गिने चुने राष्ट्रों में है, जिसने 1894 में ही वन नीति अपना ली थी, जिसका उद्देश्य राजस्व प्राप्ति एवं वनों का सरंक्षण था। स्वतंत्रता के बाद मई 1952 को नवीन वन नीति घोषित की गई। इस नीति के अनुसार भूमि के 33 प्रतिशत भाग में वन होने चाहिए। वन संबंधी नीति के उद्देश्य हैं-
Question : भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में पशुपालन तथा घरेलू उद्योगों की भूमिका पर एक निबंध लिखिए।
(1999)
Answer : भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि पर आश्रित है। भूमि पर अत्यधिक दबाव के कारण यहां के लोगों में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी आदि व्याप्त है। यहां की अर्थव्यवस्था अन्य समस्याओं से भी ग्रसित है- मसलन पूंजी का अभाव, तकनीकी अक्षमता, ऊर्जा की कमी, माल बेचने के केन्द्रों का अभाव आदि। ये सभी समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए पशुपालन एवं घरेलू उद्योगों का विकास अपरिहार्य है। कृषि का पशुपालन एवं ....
Question : भारत में जीवीय संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए।
(1999)
Answer : जैव विविधता के अन्तर्गत पौधे, पशुओं एवं सूक्ष्म जीवों की विभिन्न प्रजातियां शामिल होती हैं, जो पारिस्थितिकी एवं तत्सम्बन्धी अनेक प्रक्रियाओं से जुड़ी रहती हैं। इनका सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं जलवायवीय महत्त्व काफी अधिक है। वानस्पतिक प्रजातियों का कृषि, उद्योग एवं चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान होता है। साथ ही, अनेक प्रजातियां ऐसी हैं जो जलवायु को स्थायित्व प्रदान करती हैं और जल विभाजकों एवं भूमि को संरक्षण प्रदान करती हैं। पौधे गैसों के ....
Question : भारत में बॉक्साइट के वितरण प्रारूप और समुपयोजन विधि का परीक्षण कीजिये?
(1998)
Answer : बॉक्साइट, अल्युमिनियम का आक्साइड है। बॉक्साइड के भण्डारों का निर्माण टर्शियरी युग में हुआ था। ये लैटेराइट शैल के बीच पाये जाते हैं, अर्थात् इनका वितरण लैटेराइट शैलयुक्त पठारी या पहाड़ी इलाके, मुख्यतः प्रायद्वीपीय पठार में पाया जाता है। आंतरिक या तटीय क्षेत्रों में अपक्षालन क्रिया के फलस्वरूप बॉक्साइट के भण्डार पाये जाते हैं। इस प्रकार, बॉक्साइट के क्षेत्रीय वितरण लैटेराइट शैल के वितरण से प्रभावित होते हैं। बॉक्साइट- मुख्यतः बिहार व मध्य प्रदेश के ....
Question : भारत में नाभिकीय खनिजों के समुपयोजन और प्रक्रमण की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालिये
(1998)
Answer : भारत में नाभिकीय खनिजों के भण्डार का पता लगाने का कार्य हैदराबाद स्थित ‘आणविक खनिज विभाग’ करता है। भारत में नाभिकीय ऊर्जा की संभावनाओं को देखते हुए इस विभाग ने कई नये स्रोतों का पता लगाया है। भारत में पाये जाने वाले नाभिकीय खनिजों में यूरेनियम, थोरियम और बेरीलियम प्रमुख हैं। भारत में यूरेनियम अयस्क मुख्यतः पेग्मेटाइट, मोनाजाइट व सिलिमेनाइट के रूप में पाये जाते हैं। भारत में 30,480 टन यूरेनियम के भण्डार मौजूद हैं। ....
Question : अंडमान व निकोबार द्वीपों के संसाधनों का परीक्षण कीजिये।
(1998)
Answer : अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यह द्वीप, पांच द्वीपों का समूह है, जिसमें लगभग 204 छोटे-छोटे द्वीप हैं। ये द्वीप ज्वालामुखी उद्गार से बने हैं। ज्वालामुखी के शांत हो जाने पर यहां तटीय प्रवाल भित्ति का निर्माण हुआ और लगातार अवतलन के कारण यह भाग ऊपर उठ गया। अन्ततः प्रवालद्वीप का निर्माण हुआ। इस रेतीली भूमि को पक्षियों के बीट ने उपजाऊ बना दिया। अंडमान द्वीप समूह की मुख्य ....