भारत का अनुसंधान विरोधाभास: मात्रा से वास्तविक दुनिया के प्रभाव तक

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भारत हाल के वर्षों में अकादमिक ज्ञान के एक प्रमुख वैश्विक उत्पादक के रूप में उभरा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, यह वृद्धि एक गंभीर 'अनुसंधान विरोधाभास' को जन्म दे रही है, जहां प्रकाशनों और पेटेंट की भारी संख्या वास्तविक दुनिया के प्रभाव, व्यावसायीकरण और गुणवत्ता में परिवर्तित नहीं हो पा रही है।

भारत के अनुसंधान इकोसिस्टम की वर्तमान स्थिति और वृद्धि

वर्ष 2020 और 2025 के बीच भारतीय शोधकर्ताओं ने 'स्कोपस-इंडेक्स्ड' (Scopus-indexed) पत्रिकाओं में लगभग 1.6 मिलियन (16 लाख) रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं। यह संख्या अमेरिका, ब्रिटेन ....

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