IBC में ‘डीप हेयरकट’ और ऋणदाताओं की चिंता

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हाल ही में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के एक आदेश ने दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (IBC) के तहत अत्यधिक ‘हेयरकट’ तथा ऋणदाता-मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। ज़ी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्र से जुड़े मामले में NCLT ने लगभग ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल ₹6.25 करोड़ के पुनर्भुगतान प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त प्रक्रिया लागत के लिए ₹25 लाख का प्रावधान किया गया।

IBC की समाधान प्रक्रिया

IBC, 2016 का उद्देश्य वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनियों के लिए समयबद्ध समाधान या परिसमापन की व्यवस्था ....

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