प्रारंभिक मध्यकालीन सामंती प्रशासन
भारत में प्रारंभिक मध्यकाल (लगभग 600–1200 ई.) की प्रशासनिक व्यवस्था मूलतः राजनीतिक विकेंद्रीकरण और सामंत प्रणाली के संस्थानीकरण द्वारा परिभाषित होती है, जिसके परिणामस्वरूप इतिहासकार इसे प्रायः ‘भारतीय सामंतवाद’ की संज्ञा देते हैं। सामंत (जागीरदार या अधीनस्थ सरदार) इस विकेंद्रीकृत प्रशासन के स्तंभ और राजनीतिक संरचना के प्रमुख सैन्य घटक थे।
प्रमुख विशेषताएँ
- स्वायत्त शासन
- सामंतों को प्रायः नकद वेतन के बजाय या विजय/निष्ठा के पुरस्कारस्वरूप भू-भाग प्रदान किया जाता था।
- इन्हें अपने क्षेत्र का लगभग पूर्ण प्रशासन करने का अधिकार प्राप्त था।
- कर संग्रह
- उनके प्रशासन का मुख्य कार्य अपने क्षेत्र से राजस्व एकत्र करना था।
- वे इसका एक हिस्सा अपने क्षेत्र की ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

