Question : ‘‘राजनीतिक प्रक्रम पर प्रभाव डाले बिना बजटीय प्रक्रम में कोई भी महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।’’ (विल्डेवस्की) । विश्लेषण कीजिए।
(2015)
Answer : बजट का अभिप्राय आय और व्यय के ऐसे लेख से होता है जिसमें यथासंभव दोनों संतुलित होते हैं। वे आय और शासन संबंधी होते हैं, जिनको शासन लेता-देता है। परंतु बजट का विशिष्ट राजकीय बजट ही है। बजट वार्षिक होता है किन्तु यह आवश्यक नहीं होता है कि वह वार्षिक ही हो। वैसे दीर्घकालीन बजट भी होता है और साप्ताहिक या मासिक भी हो सकता है। लोक प्रशासन के प्रसंग में बजट सरकारी ही होता ....
Question : प्रोग्राम बजटन, आउटपुट बजटन और ‘नव’ निष्पादन बजटन के प्रमुख तत्वों की पहचान कीजिए। उनकी PPBS के साथ किस-किस बात में समानता है?
(2014)
Answer : प्रोग्राम बजटन, आउटपुट बजटन और ‘नव’ निष्पादन बजटनतीनों पारंपरिक लाइन आइटम बजटिंग के कमियों के फलस्वरूप क्रमिक रूप से विकसित हुए हैं।
इन तीनों प्रकार के बजटन मुख्य तत्व हैं- (1) पारदर्शिता (2) उत्तरदायित्व (3) उद्देश्य (4) निर्गत (5) संभावित परिणाम (6) आवश्यक संसाधनों की कीमत (7) लागत मितव्ययिता आदि।
अर्थात इन सभी प्रकार के बजटिंग प्रक्रिया में धन को पूरी तरह से सोच-विचार कर उद्देश्यों के आधार पर खर्च किया जाता है।
अब प्रश्न उठता है कि ....
Question : “बजटीय प्रक्रम में सुधार के बजाय, वाइल्डवस्की राजनीतिक संस्थाओं और नियमों की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने को प्रस्तावित करता है, जिसके द्वारा राजनीति बजट पर सहमति पर आ टिकती है।” स्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : एरॉन वाइल्डवस्की अपनी पुस्तक ‘द पॉलिटिक्स ऑफ द बजटरी प्रोसेस’ में कहते हैं कि बजटीय प्रक्रिया राजनीति का उप अंग है न कि राजनीति बजट का।
इसलिए बजट के आधार पर राजनीति को परिभाषित नहीं करना चाहिए बस अच्छे परिणाम के लिए राजनीतिक संस्थाओं और नियमों में सुधार की जरूरत है। ‘‘किसको क्या मिले (Who gets What)’’ यह आर्थिक प्रश्न न होकर राजनीतिक प्रश्न है। इसको वे एक उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए कहते ....
Question : बजट नियतन में, भिन्न-भिन्न पृष्ठभूमियों, अभिमुखनों एवं हितों वाले कार्यकर्ताओं के बीच, और अल्पकालीन लक्ष्यों और दीर्घकालीन संस्थागत आवश्यकताओं के बीच, तनावों की श्रृंखला शामिल होती है। चर्चा कीजिए।
(2013)
Answer : बजट निर्माण के समय अनेक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है, और उस पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार बजट निर्धारित किया जाता है।
बजट निर्धारित करते समय इस पर अनेक दवाब समूहों, राजनीतिक समूहों, हित समूहों का प्रभाव पडता है, साथ ही उस समय की तत्कालीन परिस्थितियों एवं उस परिस्थिति के अनुसार उठाये जाने वाले कदम की आवश्यकताओं का प्रभाव पड़ता है। बजट में सरकार की विभिन्न प्राथमिकताओं को निर्धारित किया जाती है।
सरकार द्वारा इसमें दीर्घकालीन ....
Question : ‘‘आर्थिक सुधार, राज्य के द्वारा अपनी रासों (Reins) को पूरी तरह से छोड़ देने में अनिच्छुक होने के साथ, आगे बढ़ते हुए कार्य हैं।’’ भारत में आर्थिक सुधारों के कार्यान्वयन के संदर्भ में इस कथन पर चर्चा कीजिए।
(2013)
Answer : राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था के युग में सभी लोक सेवाओं को प्रदान करने का दायित्व सरकार का रहा लेकिन सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता इत्यादि के संतोषजनक न होने की वजह से अस्सी-नब्बे के दशक में सरकार ने आर्थिक सुधार की जरूरत महसूस की। साथ ही सरकार के द्वारा अनेक कार्य निजी क्षेत्र को दिया जाने लगा। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी सरकार की उपलब्धियां संतोषजनक नहीं रही परिणामस्वरूप राज्य के पश्च वेलन और अधिकाधिक सरकारी ....
Question : आयोजना प्रोग्रामन बजटन और शून्य-आधारित बजटन के पतन के पश्चात्, बजटीय क्षमता और अक्षमता के कौन-से नए मॉडल उभर कर आए हैं?
(2013)
Answer : नव निष्पादन बजट उद्यमी शासन की आवश्यकता पर आधारित नई बजट व्यवस्था है। यह परंपरागत निष्पादन बजट व्यवस्था का संवर्धित रूप माना जा सकता है।
नव निष्पादन बजट मात्रत्मक लक्ष्यों के साथ-साथ गुणात्मक लक्ष्यों पर भी बल देता है। आउटकम बजट भारतीय नवाचार है। इसे भारत सरकार ने वर्ष 2005 से प्रारंभ किया है, और अभी 32 मंत्रलयों में लागू हो चुका है। इस बजट का उद्देश्य संसदीय अनुदानों को वास्तविक लक्ष्यों में बदलना है।
इसमें मुख्य ....
Question : जो बजट तैयार करते हैं, वे परिकलन के स्वतःशोध साधनों को अपनाकर अपने अत्यधिक भारों से निपटते हैं (वाइल्डावस्की)। स्पष्ट कीजिए।
(2012)
Answer : बजट पर चर्चा करने से पहले आवश्यक है कि कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो बजट तैयार करे तथा इसे विधायिका को सौंपे। यह जिम्मेदारी मुख्य कार्यपालक की होती है, जो विशेषज्ञ संस्थाओं जैसे ‘ब्यूरो ऑफ बजट अथवा ‘ट्रेजरी’ की सहायता से बजट तैयार करता है और उसे विधायिका के हवाले करता है। सर्वप्रथम सभी राजनीतिक कार्याधिशासी एक समग्र वित्त-नीति का निर्धारण करते हैं। इसके आधार पर आकलन किया जाता है। बजट की तैयारी निम्नतर ....
Question : प्रशासक बजट का, संचार और समन्वय के एक ढांचे के रूप में और इसके साथ-साथ संपूर्ण प्रशासनिक संरचना में प्रशासनिक अनुशासन का परिपालन करने के लिए इस्तेमाल करता है। स्पष्ट कीजिए।
(2011)
Answer : बजट केवल आय-व्यय का ब्यौरा मात्र न होकर इससे कई आगे होता है। यह समूचे देश की आर्थिक व्यवस्था का प्रतिबिंब होने के साथ-साथ प्रशासन में समन्वय एवं उत्तरदायित्व का निर्धारण भी करता है। प्रबंध के प्रमुख तत्व अर्थात् नियोजन, समन्वय, नियंत्रण आदि बजट में देखने को मिलते हैं। बजट निर्माण एवं क्रियान्वयन एक बड़ी प्रक्रिया से गुजरता है जो बेहतर प्रशासन एवं प्रबंध का माध्यम होती है। इसके अलावा बजट निर्माण के समय विभिन्न ....
Question : बजट कीमत टैग लगे हुए लक्ष्यों की एक श्रृंखला होता है। स्पष्ट कीजिए।
(2011)
Answer : वित्तीय प्रशासन में बजट का महत्वपूर्ण स्थान होता है। साधारण अर्थ में बजट को सरकार के एक वित्तीय वर्ष में संपन्न आय और व्यय का ब्यौरा माना जाता है। परंतु वर्तमान लोक कल्याणकारी राज्य के संदर्भ में बजट केवल आय-व्यय का ब्यौरा मात्र न होकर सामाजिक, आर्थिक विकास का साधन होने के साथ-साथ यह भी विधा बताता है कि किस प्रकार विकास को दिशा दी जाएगी एवं इसमें कितने संसाधनों की आवश्यकता पड़ेगी।
बजट में विभिन्न ....
Question : जबकि ‘धन के लिए मूल्य’ लेखा परीक्षा का लक्ष्य बचत होता है और ‘निष्पादन’ लेखा परीक्षा दक्षता को खोजता है, ‘सामाजिक’ लेखा परीक्षा किसी कार्यक्रम या क्रियाकलाप की प्रभाविता के परीक्षण के लिए, इन दोनों से आगे बढ़ जाता है।
(2011)
Answer : किसी भी देश के कुशल एवं सुदृढ़ वित्तीय प्रशासन के लिए तथा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए लेखांकन तथा लेखा परीक्षा का होना एक अनिवार्य आवश्यकता है।
साथ ही यह वित्तीय प्रशासन पर विधायी नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण साधन तथा विधायिका के प्रति प्रशासन की जवाबदेयता का उपकरण है। प्रवृत्ति के अनुसार इसे धन के लिए मूल्य लेखा परीक्षा, निष्पादन लेखा परीक्षा तथा सामाजिक लेखा परीक्षा में बांटा जा सकता है। धन के ....
Question : पी.पी.बी.एस. और निष्पादन बजटन के बीच विभेदन कीजिए।
(2010)
Answer : जेम्स विल्सन द्वारा स्थापित ‘बजट प्रक्रिया’ या ‘पद्धति’ जिसका भारत में जन्मदाता लॉर्ड केनिंग को माना जाता है, का अर्थ है, किसी संगठन की अनुमानित आय तथा प्रस्तावित व्यय का वित्तीय वक्तव्य, जिसे आगामी वर्ष के लिये पहले से तैयार किया जाता है। बजट प्रणाली के अनेक प्रकार हैं, जिनमें प्रमुख हैं-प्लानिंग, प्रोग्राम, बजटिंग सिस्टम (पी.पी.बी.एस.) एवं निष्पादन बजट प्रणाली, किन्तु इन दोनों प्रणालियों में कुछ महत्वपूर्ण विभेद हैं, जो निम्नानुसार हैं:
Question : ठोस बजटीय प्रक्रम में, बढि़या अर्थशास्त्र और घटिया राजनीति एक साथ विद्यमान नहीं रह सकते। स्पर्द्धात्मक राजनीति का अनुभव कर रहे देशों में, विकास संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में इस कथन के संदर्भ पर चर्चा कीजिए।
(2008)
Answer : किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में वित्त की आवश्यकता होती है। शासन की नीतियों व योजनाओं का संचालन बिना धन के नहीं किया जा सकता। कानून व्यवस्था की स्थापना तथा अन्य प्रशासनिक दायित्वों को पूरा करने के लिए भी धन की जरूरत होती है। देश की विभिन्न आवश्यकता व विकास कार्य को चलाने के साथ ही कानून व्यवस्था, जनकल्याण आदि विशिष्ट उद्देश्य को पूरा करने के लिए धन की व्यवस्था करने के लिए बजट का निर्णय ....
Question : निष्पादन बजटन क्या होता है? उसके गुणावगुणों परिसीमाओं और कठिनाईयों पर प्रकाश डालिए?
(2007)
Answer : नव लोक प्रशासन का एक बिन्दु कार्य निष्पादन बजट है। कार्य-निष्पादन बजट की अवधारणा पिछले कुछ वर्षों से एक महत्वपूर्ण अवधारणा बन गई है क्योंकि यह वित्तीय प्रशासन में सुधार की प्रक्रिया का आवश्यक अंग है। कार्यनिष्पादन बजट परम्परागत बजट से बहुत भिन्न होता है। कार्य निष्पादन बजट विशिष्ट उद्देश्यों और कार्यों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। कार्य निष्पादन बजट परम्परागत बजट प्रणाली के एक चुनौती है। यह परम्परागत बजट से इस अर्थ ....
Question : बजटन उपागम (budgeting approach) के सफलतापूर्वक कार्यान्वयन के लिये अनुकूल प्रोत्साहन संरचनाओं की आवश्यकता होती है। चर्चा कीजिए।
(2006)
Answer : लोक वित्त अर्थव्यवस्था का मस्तिष्क है यह दक्षता का उत्प्रेरक और नियंत्रक है। इससे राजस्व और व्यय में संतुलन बनाता है। बजट से लेखा संभव है, लेखा से लेखा परीक्षण संभव है, लेखा परीक्षण से वित्तीय जवाबदेही आती है और वित्तीय जवाबदेही से लोकतांत्रिक नियंत्रण संभव बनता है। विश्व में आज सरकार के कायों का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। वह निजी व्यक्तियों और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा देखने वाले केवल दर्शक नेता ही नहीं है, ....
Question : लेखा-परीक्षण को परायी चीज, बहिरंग चीज और बाधा की प्रकृति की कोई चीज के तौर पर माना जाना जारी है। स्पष्ट
(2006)
Answer : 1976 में संघ स्तर पर लेखा और लेखा परीक्षण का अलगाव किया गया और लेखा कार्यों में महालेखा नियंत्रक को वित्त मंत्रलय के व्यय विभाग में रखा गया।
महालेखा नियंत्रक के द्वारा तैयार किये गये लेखा का परीक्षण नियंत्रक व महालेखा परीक्षक करता है। यह लोक वित्त पर संसदीय नियंत्रण का अपरिहार्य अंग है।
लेन-देन के पूर्ण होने के पश्चात लेखाओं की जांच तथा परीक्षण ही लेखा-परीक्षण कहलाता है। इस जांच का उद्देश्य किसी भी अनधिकृत, ....
Question : ‘बजट समन्वय का एक उपकरण है’। स्पष्ट कीजिए।
(2005)
Answer : बजट आधुनिक राज्यों में राष्ट्र की आर्थिक नीति को संचालित और नियन्त्रित करने के विशिष्ट साधनों में प्रमुख स्थान रखता है। सरकार बजट की सहायता से ही अपने कार्य का संचालन करती है तथा सार्वजनिक आय के विभिन्न ड्डोतों का अधिकतम सदुपयोग करने की योजना बनाती है। जो सरकार इस कार्य को जितनी क्षमता से करती है, वह अपने नागरिकों की आर्थिक भौतिक समृद्धि को उतनी तेजी से बढ़ाती है।
बजट के माध्यम से ही राष्ट्र ....
Question : सरकारी बजट का लोकनीति के एक उपकरण और विधायी नियन्त्रण के एक साधन के रूप में परीक्षण कीजिए।
(2002)
Answer : प्रशासन पर संसदीय-नियन्त्रण की दृष्टि से बजट विवादों को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। विनियोग प्रक्रिया का ऐसा सबसे अधिक व्यापक तथा व्यवस्थित साधन है, जिसके द्वारा विधान मण्डल प्रशासकीय क्रियाओं की समीक्षा करता है। बजट विवादों को एक महान वार्षिक राष्ट्रीय जांच समझा जाता है। विभिन्न विभागों से सम्बन्धित अनुदानों की मांग पर विचारों के समय, संसद, सम्पूर्ण विभाग की कार्य प्रणाली का जांच सूक्ष्म परीक्षण तथा समीक्षा से करती है।
बजट सम्बन्धी वाद-विवाद तथा ....
Question : सरकार में लेखा परीक्षण एक मरणोत्तर चेष्टा है। परीक्षण कीजिए।
(2002)
Answer : लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सरकारी व्यय पर नियन्त्रण बनाए रखना एक कठिन व श्रमसाध्य प्रक्रिया होती है। सरकारी कोष में जमा धन जनता का धन होने के कारण उचित व पर्याप्त महत्व के प्रश्नों पर ही व्यय हो, इसके लिए लेखा परीक्षा एक आवश्यक भाग बन जाता है। भारत में इस कार्य को सम्पन्न करने के लिए नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक की व्यवस्था की गई है। जिसको विभिन्न प्रकार के कार्य सौपे गए हैं, यथा- ....
Question : बर्कहेड का कथन है ‘सरकार का बजट’ राजकोषीय नीति का वाहक और प्रबन्धन का एक साधन होता है। इस कथन की समीक्षा कीजिए।
(2001)
Answer : बजट एक ऐसा परिपत्र है, जिसमें सार्वजनिक राजस्व और व्यय की प्रारम्भिक योजनाएं प्रस्तुत की जाती हैं। यह सम्पूर्ण सहकारी प्राप्तियों तथा अनुमानों की एक भारी रूप-रेखा है। इसमें कुछ प्राप्तियों को संग्रहित करने एवं कुछ को व्यय करने का आदेश भी होता है। लेकिन वर्तमान जनतान्त्रिक संदर्भ में बजट प्रशासन का अर्थ आय-व्यय के लेखे मात्र से कुछ अधिक है। यह अतीत और भविष्य के बारे में ब्यौरेवार तथ्यपूर्ण कथन है और नीति सम्बन्धी ....
Question : संसदीय प्रणाली की सरकार में सांविधिक बाह्य लेखा परीक्षण, लोकतन्त्र के रक्षकों में से एक है। टिप्पणी कीजिए।
(2001)
Answer : भारत में लोक लेखा परीक्षा द्वारा प्रशासन पर नियन्त्रण बनाए रखने का प्रयास किया जाता है एवं यह संसदीय लोकतन्त्र का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
भारत में नियन्त्रक एवं महालेखों का पद संविधान द्वारा स्थापित किया गया हैे। भारतीय संविधान में भी इसका उल्लेख है। इस सम्बन्ध में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में यह व्यवस्था है कि संघ तथा राज्यों के लेखा एवं लेखा परीक्षण के लिए एक स्वतन्त्र नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक होगा, जो ....
Question : भारत सरकार की संघ मन्त्रलयों में निष्पादन कार्यक्रम बजटीय तकनीक को वर्तित करने में विफलता के कारणों को बताइए। भारत में आजतक किस प्रकार का बजटीय तन्त्र व्यवहार में लाया जा रहा है और क्यों?
(2000)
Answer : बजट सरकार के आय-व्यय के मध्य संतुलन एवं इससे प्राप्त उपलब्धियों का विवरण है। बजट सरकारी नीतियों के प्रतिबिम्बित करने का प्रशासनिक प्रयास होता है। बजट विगत वर्षों में कार्यपालिका द्वारा सम्पादित प्रशासनिक तथा आर्थिक कार्यों का सन्तुलित ब्यौरा है। बजट सरकारी क्रिया कलापों के संचालन के लिए आवश्यक धनराशि जुटाने तथा खर्च करने का एक व्यवस्थित मसौदा है एवं व्यवस्थापिका के समक्ष स्वीकृति के लिए पेश किए जाने के कारण नियमित रूप से कार्यपालिका ....
Question : सामाजिक-आर्थिक रूपान्तरण के साधन के रूप में बजट।
(2000)
Answer : किसी भी राष्ट्र की नीतियों का संचालन वित्त की अनुपस्थिति में सम्भव नहीं है। वित्त के द्वारा ही कोई योजना कार्यक्रम तथा नीतियां अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर पाती हैं। राष्ट्र के संसाधनों के समुचित प्रयोग तथा वित्त की पर्याप्तता सुनिश्चित करने के लिए बजट का अविर्भाव हुआ।
बजट सम्पूर्ण सरकारी प्राप्तियों तथा खर्चों का एक पूर्वानुमान तथा अनुमान है और प्राप्तियों का संग्रह करने तथा कुछ खर्चों को करने का एक आदेश है। बजट सरकार ....
Question : बजट वह साधन है जिससे अनेक प्रयोजन सिद्ध होते हैं।
(1998)
Answer : वित्त को प्रशासन का जीवन रक्त कहा जाता है। पुरातन काल से ही वित्त पर ध्यान दिया जाता था। वित्त के अभाव में किसी भी प्रकार के प्रशासन की कल्पना नहीं की जा सकती है। प्राचीन विद्वान का मत है कि फ्शुप्रशासन वित्त पर ही निर्भर करती है। अतः कोषागार के प्रति सर्वाधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।य् प्रत्येक राष्ट्र की सफलता के लिए राष्ट्र की प्रशासनिक व्यवस्था में ठोस व कुशल वित्तीय प्रणाली सरकार के ....
Question : प्रशासन को उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से चलाने के राजकोषीय तकनीकी काफी समय से चली आ रहे हैं, परन्तु फिर भी उनके महत्व को पर्याप्त रूप से समझा नहीं जा रहा,’’ चर्चा कीजिये।
(1997)
Answer : राजकोष के द्वारा केन्द्र तथा राज्य सरकार दोनों की ओर से मुद्रा की प्राप्ति तथा उसके व्यय का कार्य निष्पादन प्रतिदिन किया जाता है तथा दोनों के लिखित अभिलेखों को भी अलग-अलग व्यवस्थित किये जाते हैं। उप राजकोषों द्वारा भी प्रतिदिन अपने लिखित अभिलेख जिला राजकोष को भेजे जाते हैं, जहां इन्हें व्यवस्थित किया जाता है। प्रत्येक एक पखवाडे़ के पश्चात जिला राजकोष अपने विवरणों को राज्य के महालेखपाल के पास सम्प्रेषित करता है। प्रत्येक ....