Question : ‘‘सूचना किसी भी संगठन के प्रकार्यण का जीवन-रुधिर होती है।’’ निर्णयन में संप्रेषण की उपयोगिता और महत्व को स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : सूचना किसी भी संगठन का जीवन रुधिर होता है क्योंकि यह दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों एवं भावनाओं के आदान-प्रदान से संबंधित होता है। लेकिन संचार का मौलिक भाव सूचनाओं एवं विचारों के आदान-प्रदान से न होकर समझ से है। आज लगभग सभी देश की सरकारों ने सूचना प्रकाशन से संबंधित विभागों की स्थापना किए हैं।
वर्तमान समय में संचार के अभाव में प्रशासन का कोई भी कार्य नहीं किया जा ....
Question : विधायी कार्रवाई पर नैसर्गिक न्याय (नैचुरल जस्टिस) के नियम लागू नहीं होते हैं।’’ नैसर्गिक न्याय के नियम के अपवादों को स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : न्याय की संकल्पना प्राचीन काल से ही राजनीति चिंतन का महत्वपूर्ण विषय रही है। परंतु आधुनिक युग तक आते-आते इसमें मौलिक परिवर्तन आ गया है। पश्चिमी परंपरा के अंतर्गत न्याय के स्वरूप की व्याख्या करने के लिए मुख्यतः न्यायपरायण व्यक्ति अर्थात् सचरित्र मनुष्यों के गुणों पर विचार किया जाता था। मनुष्य में उन गुणों की तलाश की जाती थी जो व्यक्ति को न्याय की ओर प्रेरित करे।
भारतीय परम्परा में मनुष्य के धर्म को प्रमुखता दी ....
Question : ‘‘ ‘जन मांगपत्र’ के दिनों से प्रारंभ करते हुए ‘प्रिकेरियट मांगपत्र’ की नई संकल्पना तक, ‘नागरिक मांगपत्र’ की संकल्पना तथा मांगपत्र की परिधि निरंतर विकसित होती जा रही है।’’ टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : नागरिक घोषणा पत्र नागरिकों के अधिकार संबंधी एक ऐसा दस्तावेज है जिसका उद्देश्य मूल रूप से किसी भी संगठन को पारदर्शी, जवाबदेह एवं नागरिक उन्मुख बनाना है। इस घोषणापत्र द्वारा संचालित कार्यक्रमों के माध्यम से अच्छी सेवा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है एवं आमजनों से सुधार संबंधी सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। वास्तव में एक स्वस्थ लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सेवा प्रदाता और सेवा प्राप्त करने वाले ....
Question : आप इस विचार से किस सीमा तक सहमत हैं कि मीडिया का बढ़ता हुआ प्रभाव सरकार के द्वारा अपनी कार्यसूची निश्चित करने में बाधा डालता है?
(2015)
Answer : जनसमूह के लिए रिपोर्टिंग तथा जनसंचार के मुद्दे मीडिया को दर्शाते हैं जिसमें ब्राडकास्ट, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, मल्टीमीडिया इत्यादि शामिल हैं। तकनीति विकास के परिणामस्वरूप तीव्र सूचना, ज्यादा सूचना विभिन्न स्तरों से सूचना एवं कम लागत पर सूचना को उपलब्ध कराना संभव हुआ है। जैसे-जैसे संचार के माध्यमों का विस्तार हुआ है, वैसे-वैसे सरकार एवं प्रशासन में नजदीकियां बढ़ी हैं। लोकनीतियों एवं कार्यक्रमों को समाज तक पहुंचाने और उसको प्रभावी बनाने में मीडिया एक ....
Question : ‘‘सूचना का अधिकार सभी कुछ नागरिक सशक्तिकरण के लिए नहीं है, आवश्यक रूप से यह जवाबदेही की संकल्पना को पुनर्परिभाषित करता है।’’ चर्चा कीजिए।
(2014)
Answer : सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 को कई बार राजनीतिक मंचों, गैर-सरकारी संगठनों एवं सरकार के कार्यक्रमों में इसे नागरिक सशक्तिकरण के रूप में परिभाषित किया गया है। सूचना का अधिकार अर्थात नागरिकों के हाथ में एक ऐसा उपकरण जिसके द्वारा वह अपने हक की मांग कर सकते हैं।
परन्तु सूचना के अधिकार के दो पहलू हैं-
‘सूचना का अधिकार’ अधिनियम का उद्देश्य कहता है कि इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों का सशक्तिकरण; सरकार के काम-काज में पारदर्शिता ....
Question : “स्वतंत्र अभिकरणों को प्रत्यायोजन (डेलिगेशन), प्रतिस्पर्धा (एम्यूलेशन) द्वारा चालित एक अन्योन्याश्रित प्रक्रम में घटित हुआ है।” आधुनिक विनियामक (रेगुलेटरी) राज्य में स्वतंत्र विनियामक अभिकरणों के संदर्भ मे इस पर चर्चा कीजिए।
(2014)
Answer : नियामक संगठन वे संगठन है जो सरकार के अन्य संगठनों से स्वतंत्र रहकर कुछ विशेष क्षेत्रें में कार्य करते है। ये प्रशासनिक कानूनों के क्षेत्र में कार्य करते है। नियामक संगठन मुख्यतः सरकार की कार्यकारी संगठनों के अंग है। स्वतंत्र नियामक अभिकरण कार्यपालिका का अंग होते हुए भी कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका तीनों अंगों का कार्य करती है।
परन्तु इनका उदय एक निश्चित घटनाक्रम के तहत हुआ है। ये किसी भी देश में उसकी व्यवस्था के ....
Question : “एम.आई.एस. (प्रबंधन सूचना तंत्र) का क्षेत्र आवश्यक रूप से कम्प्यूटर विज्ञान का एक विस्तार नहीं है, बल्कि प्रबंधन और संगठन थियोरी का विस्तार है।” सुस्पष्ट कीजिए।
(2014)
Answer : किसी भी सरकार या कंपनी द्वारा बनायी गयी योजना की सफलता दो बातों पर निर्भर करती है, प्रथम, सूचनाओं का प्रवाह द्वितीय, सिद्धांतों का व्यवहार में पालन।
सूचना का तात्पर्य मात्र आंकड़ों का एकत्रण एवं प्रकाशन नहीं है अपितु यह इनसे कहीं अधिक व्यापक अवधारणा है। सूचनाओं का प्रारूप इसके उपयोग के उद्देश्य के आधार पर परिवर्तित हो जाता है। एक ही सूचना का उपयोग एक संगठन में अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करता ....
Question : “विनियामक ढांचे के बारे में बात करना, शासन के बारे में बात करना है।” इस कथन का लोक-निजी भागीदारियों के संदर्भ में विश्लेषण कीजिये और विनियमन के तत्वों की पहचान कीजिए।
(2013)
Answer : विनियामक ढांचे समकालीन शासन व्यवस्था में तेजी से लोकप्रिय होती अवधारणा है। इसकी आवश्यकता सरकार से सेवा प्रदाता की भूमिका को निजी क्षेत्र की तरफ हस्तांतरण का परिणाम है। नियामक प्राधिकरणों के उदय तथा विकास को लोक निजी सहभागिता, सरकार की परिवर्तनशील भूमिका, प्रशासनिक कार्यों की बढ़ती जटिलता के संदर्भ में देखे जाने की आवश्यकता है।
1980-90 के दशक में यह महसूस किया गया कि सेवा प्रदान करने का दायित्व निजी क्षेत्र को सौंपना अधिक उपयोगी ....
Question : क्या मीडिया उद्भासन को भारत में प्रशासनिक जवाबदेही मे नियमों में शामिल किया जाना चाहिए? अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(2012)
Answer : जवाबदेही लोकतंत्र का विशेष आधार है, जिन्हें लोककर्तव्य दिए गए है, उस संदर्भ में जवाबदेही होनी चाहिये। लोकतंत्र के तीन अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष हैं:
लोकसेवा में पारदर्शिता हो, विधि का आदर हो, सत्यनिष्ठा हो, अनुशासन हो, लोकतांत्रिक मूल्य हो, निष्पक्षता हो, दक्षता हो, पारदर्शिता हो। ऐसे विभिन्न विषय या तो जवाबदेही से बढ़ते हैं या फिर जवाबदेही के लिए होते हैं। जैसे-जैसे ....
Question : भारत में ‘जनलोकपाल’ मुद्दे का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए, प्रशासनिक जवाबदेही को सुगम बनाने में ‘सिविल सोसाइटी’ की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।
(2012)
Answer : जनलोकपाल भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये व प्रशासनिक व राजनीतिक जवाबदेही को सुगम बनाने के लिए सिविल सोसाइटी के आन्दोलन द्वारा तैयार किया गया मसौदा है, जो अभी तक संसद में पारित नहीं हुआ है।
प्रस्तावित कानून के बाद केंद्र में लोकपाल और राज्य में लोकायुक्त सरकार के अधीन नहीं होगा। ACB और CBI का इनमें विलय कर दिया जायेगा। नेताओं या अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और मुकदमें के लिए ....
Question : मीडिया नागरिकों की एक संसद है। स्पष्ट कीजिए।
(2011)
Answer : लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मीडिया लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया को तेज करने में, जनता की जागरुकता को सुनिश्चित करने में और प्रशासन के ऊपर जनता के नियंत्रण को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल हाल के घटनाक्रम ने मीडिया को सरकार एवं जनता के बीच की कड़ी से ऊपर उठाकर लोगों की इच्छाओं और अपेक्षाओं को उजागर करने का एक मंच प्रदान कर निर्णय ....
Question : सूचना का तंत्र प्रबंधकों के द्वारा आयोजना और नियंत्रण को, क्रियान्वयन के प्रचालन के साथ बांध देता है। विशद रूप से स्पष्ट कीजिए।
(2011)
Answer : आधुनिक जटिल औपचारिक संगठनों के प्रबंधकों को उनके उच्च दायित्वों को निर्वहन में सहायता प्रदान करने हेतु अनेक प्रकार की पद्धतियां विकसित हुई हैं। चूंकि वर्तमान समय में सूचना ही शक्ति है, अतः संगठन में प्रत्येक स्तर तथा प्रत्येक व्यक्ति के लिए सूचना प्रणाली महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रबंधकों को नियंत्रण एवं निर्णयन में सहायता प्रदान करने हेतु संगठन की आंतरिक सूचना प्रणाली के रूप में प्रबंध सूचना व्यवस्था का विकास हुआ। यह प्रबंधकों को नियोजन ....
Question : "सूत्र और मंत्रणा के बीच विभेदन परम न हो कर सापेक्ष है।" चर्चा कीजिए।
(2007)
Answer : मुख्य कार्यपालिका सभी कार्यों को खुद निष्पादित नहीं कर सकती है और शासन के प्रत्येक विषय पर उसका ज्ञान तथा अनुभव पर्याप्त है तथा उसे हर कदम पर परामर्शदाताओं तथा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। मुख्य कार्यपालिका के पास कार्य करने तथा विचार करने के लिए बहुत सारी विचारधाराएं होती हैं। मुख्य कार्यपालिका को सहायता तथा परामर्श उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में दो प्रकार के प्रशासनिक अभिकरण कार्य करते हैं-
सूत्र या ....