Question : ‘‘शबद नीति कार्यान्वयन कुछ बातों में लोक प्रशासन लेबल से तरजीह देने योग्य है।’’ तर्क प्रस्तुत कीजिए।
(2015)
Answer : नीति के व्यवस्थित क्रियान्वयन को नीति के परिपालन की संज्ञा दी जाती है। नीतियों का क्रियान्वयन उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि उनका निर्माण। क्योंकि यदि सही तरह से नीति को लागू न किया जाए तो अच्छी से अच्छी योजनाएं भी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाएगी और वे विकास हेतु उपयोगी नहीं रहेंगी।
नीति निष्पादन एक प्रक्रिया है, जिसमें कई चरण शामिल होते हैं-
Question : ‘‘नीति निर्माताओं की प्रशंसक प्रणालियों में लक्ष्य, मानकों (नॉर्म) और मूल्यों के गौण होते हैं।’’ (विकर्स)। स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : नीति निर्माण लोक-प्रशासन का स्तर है। नीति निर्माण की प्रक्रिया शासन की प्रधान क्रियाओं में से एक है। नीतियां ऐसा प्रमाणिक मार्गदर्शक हैं, जो प्रबंधकों को योजना बनाने, कानूनी आवश्यकताओं के अनुकूल कार्य करने तथा वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता देती है। नीतियां प्रशासक को अपने क्रिया-कलापों को कार्य के लिए एक निश्चित ढांचे के भीतर बनाए रखने में सहायता देती है। नीति ही एक ऐसे ढांचे का निर्धारण करती है जिसके भीतर ....
Question : ‘‘नीति संप्रदान (पौलिसी डिलिवरी) को हिसाब में लिए बिना, नीति विश्लेषण अपूर्ण रहता है।’’ तर्क पेश कीजिए।
(2015)
Answer : सरकार के द्वारा अपने उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु निर्मित नीति को लोक नीति कहते हैं। जनता की विविध मांगों एवं कठिनाइयों का सामना करने के लिए सरकार को बहुत सी नीतियां बनानी पड़ती हैं जिन्हें लोकनीतियां कहते हैं। लोक नीति लिखित या मौखिक रूप में हो सकती है एवं दिन-प्रतिदिन के निर्णय लेने में प्रशासकों का मार्ग दर्शन करती है। लोक नीति में सर्वव्यापकता, वैधता एवं अवपीड़न अनिवार्य तत्व होते हैं। थॉमस आर.डे. के अनुसार ....
Question : ‘‘नीति विकल्प में राजनीतिक साध्यता की संकल्पना एक संभावनात्मक संकल्पना है और वह प्रत्येक नीति विकल्प से संबंधित होती है।’’ उपर्युक्त कथन के संबंध में, ड्रोर के योगदान का विश्लेषण कीजिए।
(2015)
Answer : नीति विज्ञान के क्षेत्र में ड्रोर का योगदान एक विशेष महत्व रखता है। चूंकि सरकार की दीर्घकालीन नीतियां एवं योजनाएं समाज के भावी रूप का निर्धारण करती हैं इसलिए नीति निर्माण संबंधी वैज्ञानिक आधार बनाने की आवश्यकता है। समाज की जटिल समस्याओं को हल करने के लिए ड्रोर ने विज्ञान के विकास की अनुशंसा की।
उन्हीं के शब्दों में नीति विज्ञान को आंशिक रूप में वर्णित किया जा सकता है, जो नीति संबंधी ज्ञान की खोज ....
Question : “जैसे-जैसे सरकारें स्वतंत्रता सीमित करती हैं, नीतियां राजनीति का निर्धारण करती हैं।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।
(2014)
Answer : वैश्वीकरण के इस दौर में कोई भी सरकार मात्र रोटी, कपड़ा, मकान, पानी, जैसे छोटे-छोटे और झूठे वादों के आधार पर बार-बार सत्ता पर काबिज नहीं हो सकती।
जब यह कहा जाता है कि जैसे-जैसे सरकारें स्वतंत्रता सीमित करती है, नीतियां राजनीति का निर्धारण करती हैं तो यहां स्वतंत्रता को सीमित या प्रतिबंधित करने का तात्पर्य आम जनता के अधिकारों या उनके अन्य अधिकारों के सीमित करने की बात नहीं हो रही वरन् यहां मुख्य रूप ....
Question : “लोक नीति विश्लेषण तक निर्गत अध्ययन उपागम (एप्रोच) तार्किक तकनीकों पर और लोक नीति के नियतनकारी आयाम पर अति बल देता है।” इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
(2014)
Answer : सार्वजनिक नीतियों का विश्लेषण शासकीय व्यवहार से जुड़ा है। नीति संबंधी जिज्ञासा का मूल तत्व यह जानना है कि सरकार किन चीजों को चुनकर करना चाहती है और किनको नहीं करना चाहती है। क्यों कोई खास प्रकार का निर्णय लिया जाता है, इन निर्णयों तक कैसे पहुंचा जाता है तथा इनके संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं। इस तरह के प्रश्न नीति विश्लेषकों द्वारा उठाए जाते हैं। चूकि नीतियां समाज के भविष्य की रूप-रेखा तय ....
Question : ‘‘लोक नीति का मूल्यांकन करने के लिए आधारिक संकल्पना के रूप में लोकहित अभी भी अपर्याप्त है।’’ चर्चा कीजिए।
(2013)
Answer : लोक नीति मूल्यांकन नीति प्रक्रिया का अंतिम चरण है। यह चरण अत्यधिक महत्व का है क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई नीति अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में कहां तक सफल रही, नीति का लाभ लक्षित समूह तक पहुंचा या नहीं, जिससे नीति की सफलता व विफलता का आंकलन हो पाता है। नीति मूल्यांकन के लिए दो प्रविधियां है- लागत लाभ प्रविधि तथा सामाजिक लेखा परीक्षण। लोक नीति का मूल्यांकन करने के ....
Question : ‘‘नीति प्रक्रम की संरचना अधिकारीतंत्रीय आयोजना के द्वारा आवश्यक तरीके से नहीं की गई थी।’’
‘‘तर्क के रूप में, वार्धिकता अब नव-उदारवादी राष्ट्रीयता, जो कि बाजारों को क्रमिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक उदारवाद दोनों के विरुद्ध आरोपित कर देती है, के वैषम्य में खड़ी है।’’ इन दो कथनों का विश्लेषण कीजिए।
(2013)
Answer : लोक कल्याणकारी राज्य के समय विकासशील देशों द्वारा तीव्र सामाजिक आर्थिक विकास के लिए योजनाएं, कार्यक्रम एवं परियोजनाओं का निर्माण किया गया। इसके लिए पंचवर्षीय योजनाएं बनाई गई और प्रशासन का ढांचा भी इसी तरह से खड़ा किया गया। परंतु समय के साथ-साथ यह महसूस किया गया कि ये नीति अपने मूलगत रीति से कार्य नहीं कर सकी। इन नीतियों की संरचना में कुछ खामियां रहने की वजह से इसके कार्यान्वयन पर प्रभाव पड़ा। इन ....
Question : नीति उसी समय निर्माण की जा रही होती है, जिस समय वह प्रशासित की जा रही होती है और उसी समय वह प्रशासित की जा रही होती है कि जिस समय उसका निर्माण किया जा रहा होता है। टिप्पणी कीजिए।
(2011)
Answer : किसी संगठन द्वारा अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु जिस प्रक्रिया एवं कार्य प्रणाली का निर्धारण किया जाता है, उसे नीति की संज्ञा दी जाती है। सरकारी क्षेत्र में इसे लोकनीति के नाम से जाना जाता है। संगठन में उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु नीति निर्माण करना एक कठिन कार्य है, साथ ही इससे भी कठिन होता है इसको क्रियान्वित करना या प्रभावित करना। लेकिन एक बात जो देखने में आती है वह यह कि नीति ....
Question : क्रमिक-वृद्धिक प्रतिरूप, लोक नीति निर्माण में एक रूढि़वादी प्रवृत्ति को तथ्य के रूप में मान लेता है।
(2011)
Answer : लोक नीति का निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है चूंकि सरकार विभिन्न वृहतस्तरीय गतिविधियों को ध्यान में रखकर आबादी के विभिन्न हिस्सों के लिए लोकनीति का निर्माण करती है। इसके विभिन्न प्रतिमानों में से कृमिक-वृद्धिक प्रतिमान भी एक हैं। इस प्रतिरूप के अनुसार लोक नीतियां सरकार की मौजूदा नीतियों की अगली कड़ी है, बस केवल संवृद्धिक संशोधन हो जाते हैं अर्थात् सरकार की नीतियों के बीच का अंतर सीमांत होता है, यानी आगामी नीति उसकी वर्तमान ....
Question : ‘‘लागत-लाभ विश्लेषण लोक नीति का मूल्यांकन करने का एक बहुत ही असंतोषजनक दृष्टिकोण है।’’ टिप्पणी कीजिए।
(2010)
Answer : ‘लोक नीति’ से तात्पर्य है जनता की विधिक मांगों एवं कठिनाईयों का सामना करने के लिये सरकार द्वारा बनाई गई नीति से है।
अर्थात् सरकार जो कुछ भी करना या न करना चाहती है, वही ‘लोक नीति’ कहलाती है। संक्षेप में, सरकारी वर्ग का अपने आस-पास की चीजों से संबंध ‘लोक नीति’ कहलाता है। वस्तुतः लोक नीतियां सरकारी निर्णय होती हैं, जो वास्तव में कुछ लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये सरकार द्वारा अपनाई गई ....
Question : “लोक प्रशासन को सम्बन्धों के एक ऐसे पहिए के रूप में चित्रित किया जा सकता है, जिसको लोक नीति के निरूपण और क्रियान्वयन पर फोकस किया गया हो।’’ स्प्ष्ट कीजिए।
(2010)
Answer : लोक प्रशासन को सामान्यतः लोक नीति के क्रियान्वयन पर फोकस करने वाला माना जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण है कि सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन प्रशासन के द्वारा किया जाता है। इस प्रकार प्रशासन के लोग ही वास्तविक कार्यकारी की भूमिका में होते हैं, फिर चाहे वो अधिकारी वर्ग के हों या फिर कर्मचारी वर्ग के।
परंतु व्यवहारिक रूप में प्रशासन को नीति निरुपण का भी कार्य करना होता है। ....
Question : लोक सेवा में नैतिक नियमों को सुनिश्चित करने के सिद्धांतों पर, जैसे कि नोलन समिति रिपोर्ट (1994) में उनके बारे में सिफारिश की गई है, संक्षेप में चर्चा कीजिए।
(2010)
Answer : ब्रिटेन में जान मेजर सरकार द्वारा 1994 के उत्तरार्द्ध में ‘कमेटी ऑन स्टैण्डर्ड इन पब्लिक लाइफ’ का गठन किया गया। इसके अध्यक्ष लार्ड नोलन नियुक्त किये गये। मूलतः इस समिति का गठन संसदों द्वारा ‘प्रश्न के लिए धन’ लेने के मुद्दे पर किया गया था। नोलन समिति ने अपने 1994 से 1997 के कार्यकाल में प्रथम रिपोर्ट 1995 तथा द्वितीय रिपोर्ट 1997 में दी। प्रथम रिपोर्ट में सार्वजनिक जीवन तथा सार्वजनिक पदधारकों के लिये लोक ....
Question : “यदि नीतियां भली प्रकार व्यवस्थित हों, दक्षतापूर्वक कार्यान्वित हो, व्यापक रूप से प्रयुक्त हो, पर्याप्त रूप से वित्तीयित और समर्थित हो, तब भी हम पूछ सकते हैं, कि हमसे क्या? क्या वे कारगर है? उनकी लागतें, परिणाम और प्रभाव क्या हैं?” चर्चा कीजिए।
(2009)
Answer : लोक कल्याणकारी राज्य में जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने तथा ढांचागत परिवर्तन करने के लिए सरकार को तमाम नीतियां बनानी पड़ती है, जिसके सर्वव्यापकता, वैधता और अवपीड़न अनिवार्य तत्व होते हैं। चूंकि इन तत्वों के कारण सरकार द्वारा निर्मित नीतियां नागरिकों को पालन करने के लिए विवश एवं बाध्यकारी बनाती है। इसलिए बिना जनभागीदारी के नीति निर्माण या क्रियान्वयन बेमानी है। आर्थिक विकास तथा समानता के लिए राजकोषीय तथा मौद्रिक नीतिः शिक्षण प्रणाली ....
Question : “अनुवीक्षण और मूल्यांकन में ढिलाई अच्छी से अच्छी नीतियों को निष्फल बना सकती है।” चर्चा कीजिए।
(2008)
Answer : लोक नीतियों का उद्देश्य लोक हित या लोक कल्याण होता है। लोक हित से तात्पर्य है-आम जनता का हित। लोक हित की अवधारण लोक नीति को प्रभावित करती है।
वस्तुतः जनता की विविध मांगों एवं कठिनाइयों का सामना करने के लिए सरकार को बहुत सी नीतियां बनानी पड़ती हैं। इनके निर्माण में गैर सरकारी संस्थाओं और व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
नीतियों का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया का परिणाम होता है तथा इनकी सार्थकता उनके ....
Question : "लोक नीति की क्रियान्वित, क्या कारगर है और क्या नहीं है, इस बात को खोज लेने का प्रक्रम है।" परीक्षण कीजिये।
(2007)
Answer : नीतियों के निर्माण की विशिष्ट प्रासंगिकता है। जननीति का परिचालन उसके गुण व दोषों को प्रकट करता है।
नीति निष्पादन के द्वारा एक नीति में निर्धारित उद्देश्यों को पूर्ण करने का यत्न किया जाता है। नीति निष्पादन के अन्यानेक सोपान होते हैं। प्रथम सोपान नीति के विषयों की समझने से संदर्भित है। निष्पादन एवं परिचालन करने वाली संस्थायें नीति के विषयों का वृहद अध्ययन करती हैं तथा संदेहास्पद बिन्दुओं पर प्रायः स्पष्टीकरण की मांग करती हैं ....
Question : ‘नागरिक समाज’ की परिभाषा दीजिये। नागरिक समाज लोकनीति को किस प्रकार प्रभावित करता है?
(2006)
Answer : नागरिक समाज जैसा कि Centre For Civil Society London School Of Economicsके द्वारा कहा गया है कि यह उन स्वैच्छिक संगठनों को दर्शाता है, जिनके हित जुड़े होते हैं। यह राज्य और बाजार से अलग है और परिवार से ऊपर है, लेकिन राज्य, नागरिक समाज और बाजार को पूरी तरह से अलग कर पाना संभव नहीं है। नागरिक समाज में कई तरह के संगठन सम्मिलित हैं जैसे कि स्वयं सेवी संस्थायें, मजदूर ....
Question : "नीति कार्यान्वयन के संबंध में अनाड़ीपन से ज्यादा तीव्रता से कुछ भी नहीं उभर कर आता है।" चर्चा कीजिए।
(2006)
Answer : राज्य के संचालन के लिए सरकार नीति का निर्माण करती है, इन्हें लोक नीतियां कहते हैं। नीति का निष्पादन उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि उसका निर्माण। नीति निष्पादन में प्रभावशीलता नीति निर्माण के संपूर्ण उद्योग को सफल बनाती है अतः इनके कार्यान्वयन में अत्यंत सावधानी अपेक्षित है।
क्रियान्वयन संस्था अर्थात प्रशासन में स्थायित्व पहली शर्त है क्योंकि प्रशासन में बार-बार स्थानांतरण क्रियान्वयन में बाधा पहुंचाता है। नीतियों को पूरी तरह प्रशासन के सामने स्पष्ट करना ....