ब्रिक्स आतंकवाद विरोधी नीति


17 नवंबर, 2020 को 12वें ब्रिक्स आभासी शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद से कारगर ढंग से निपटने के लिए नई आतंकवाद विरोधी नीति को मंजूरी दी।

उद्देश्य: सदस्य देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाना और आंतकवाद के खतरे को रोकने और उससे निपटने के वैश्विक प्रयासों में सार्थक योगदान करना।

महत्वपूर्ण तथ्य: ब्रिक्स देशों ने इस बात की पुष्टि की है कि किसी भी रूप में आंतकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति सर्वाधिक गम्भीर खतरों में से एक है और कोई भी आंतकवादी कृत्य सिर्फ अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे किसी भी कृत्य को किसी भी आधार पर न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।

  • ब्रिक्स देशों का आतंकवाद निरोधी सहयोग निम्न सिद्धांतों पर आधारित है:-
  1. सदस्य देशों की संप्रभुता के लिए पूरा सम्मान और उनके आंतरिक मामलों में कोई दखल न देना;
  2. अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों की प्रतिबद्धता और शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र की मुख्य और समन्वयक भूमिका को स्वीकार करना;
  3. आतंकवाद के खतरे का मुकाबला करने में क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका की पहचान करना;
  4. खुलापन, सूचना साझाकरण, और सर्वसम्मति-आधारित निर्णय।

अन्य तथ्य: गोल्डमैन शैक्स एसेट मैनेजमेंट (Goldman Sachs Asset Management) के पूर्व अध्यक्ष जिम ओ'नील ने 2001 में ब्रिक (BRIC) की अवधारणा दी। पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वर्ष 2009 में रूस के येकाटेरिनबर्ग में हुआ था। 2010 में दक्षिण अफ्रीका इससे आधिकारिक तौर पर जुड़ा और इसके नाम में ‘S’ जुड़ गया।