वनवासियों के अधिकार (Rights of Forest dwellers)
अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006, जिसे वन अधिकार अधिनियम, 2006 के रूप में भी जाना जाता है, वनवासियों के अधिकार के संबंध में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- इस अधिनियम का उद्देश्य वनों में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य परम्परागत वनवासियों की भूमि पट्टेदारी, आजीविका एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- स्थायी उपयोग, जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के रखरखाव के लिए वन अधिकार धारकों पर जिम्मेदारियों और अधिकारों को शामिल करके वनों के संरक्षण शासन को मजबूत करना।
- ये कानून भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर वन में रहने वाले समुदायों, विशेष ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

