महिलाओं से संबंधित आपराधिक मामलों पर दिशा-निर्देश


गृह मंत्रालय ने 10 अक्टूबर, 2020 को सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में पुलिस द्वारा अनिवार्य कार्रवाई के बारे में दिशा-निर्देश जारी किए।

महत्वपूर्ण तथ्य: घटना की रिपोर्टिंग के दो महीने के भीतर बलात्कार के मामलों की जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अनुसार मृतक द्वारा लिखित या मौखिक बयान जांच में प्रासंगिक तथ्य के रूप में माना जाएगा।
  • महिलाओं के खिलाफ अपराध में अनिवार्य आवश्यकताओं का पालन करने के लिए पुलिस की ओर से किसी भी विफलता की पूछताछ की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
  • यदि अपराध किसी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के बाहर किया जाता है, तो पीड़ित 'शून्य प्राथमिकी' (Zero FIR) दर्ज करा सकती है। शून्य प्राथमिकी बाद में क्षेत्राधिकार पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर दी जाती है।

अन्य निर्देश: फॉरेंसिक जांच के लिए सबूतों का संग्रह और यौन उत्पीड़न साक्ष्य संग्रह (SAEC) किट का उपयोग, बार-बार यौन अपराध करने वाले अपराधियों की पहचान करने और उन पर नजर रखने के लिए 'यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डेटाबेस' (National Database on Sexual Offenders) का उपयोग करना आदि।