भारत में क्षेत्रीय असमानताओं और स्थानिक विकास के पैटर्न
क्षेत्रीय असमानता का अर्थ है भारत के भौगोलिक परिदृश्य में सामाजिक-आर्थिक अवसरों, अवसंरचना और संपदा का असमान वितरण। यह स्थिति न्यायसंगत विकास के लिए एक बड़ी बाधा है, जिसके समाधान हेतु लक्षित स्थानिक नियोजन और नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है, ताकि संतुलित विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
| आयाम और भौगोलिक जड़ें | |||
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आयाम |
भौगोलिक पैटर्न / एकाग्रता |
प्रमुख आर्थिक संकेतक/आँकड़े |
अंतर्निहित भौगोलिक कारण |
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आर्थिक |
पश्चिमी/दक्षिणी राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु) में उच्च GSDP/प्रति व्यक्ति आय। |
विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उच्च हिस्सेदारी; गरीबी अनुपात कम। |
तट/बंदरगाहों की निकटता, बेहतर मिट्टी/सिंचाई, और स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक औद्योगिकीकरण। |
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सामाजिक/मानव विकास |
उत्तरी/पूर्वी .... | ||
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- 22 लॉजिस्टिक्स और मल्टी-मोडल अवसंरचना
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- 34 जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून व्यवहार में परिवर्तन
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- 36 समुद्र स्तर वृद्धि, तटीय अपरदन एवं तटरेखा मानचित्रण
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- 50 शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ और सतत शहर
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