समुद्र स्तर वृद्धि, तटीय अपरदन एवं तटरेखा मानचित्रण
समुद्री पारितंत्र मानव सभ्यता के विकास, व्यापार, जलवायु नियमन और खाद्य सुरक्षा का आधार रहे हैं। परंतु 21वीं सदी में इन तटीय इलाकों के सामने एक अभूतपूर्व चुनौती उभरकर आई है; समुद्र स्तर में तीव्र वृद्धि, तटीय अपरदन में तेजी, और इनके कारण तटरेखा (Coastline) के स्वरूप में गहन परिवर्तन। जलवायु परिवर्तन के कारण ये प्रक्रियाएँ अब पृथक घटनाएँ नहीं रहीं, बल्कि परस्पर जुड़ी हुई भौगोलिक–जलवायवीय गतिशीलताएँ बन चुकी हैं जो मानव-जीवन, अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और अवसंरचना को गहराई से प्रभावित कर रही हैं।
- भारत की 11,098 किमी लंबी तटरेखा (पहले 7,516 किमी मानी जाती थी) पर 240 मिलियन जनसंख्या निवास करती ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

