समुद्र स्तर वृद्धि, तटीय अपरदन एवं तटरेखा मानचित्रण
समुद्री पारितंत्र मानव सभ्यता के विकास, व्यापार, जलवायु नियमन और खाद्य सुरक्षा का आधार रहे हैं। परंतु 21वीं सदी में इन तटीय इलाकों के सामने एक अभूतपूर्व चुनौती उभरकर आई है; समुद्र स्तर में तीव्र वृद्धि, तटीय अपरदन में तेजी, और इनके कारण तटरेखा (Coastline) के स्वरूप में गहन परिवर्तन। जलवायु परिवर्तन के कारण ये प्रक्रियाएँ अब पृथक घटनाएँ नहीं रहीं, बल्कि परस्पर जुड़ी हुई भौगोलिक–जलवायवीय गतिशीलताएँ बन चुकी हैं जो मानव-जीवन, अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और अवसंरचना को गहराई से प्रभावित कर रही हैं।
- भारत की 11,098 किमी लंबी तटरेखा (पहले 7,516 किमी मानी जाती थी) पर 240 मिलियन जनसंख्या निवास करती ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत में क्षेत्रीय असमानताओं और स्थानिक विकास के पैटर्न
- 2 भारत की जनजातियाँ – FRA, PESA और पारिस्थितिक-सांस्कृतिक परिदृश्य
- 3 शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ और सतत शहर
- 4 जनसंख्या गतिशीलता: प्रवासन पैटर्न, जनसांख्यिकीय लाभांश एवं जलवायु-जनित विस्थापन
- 5 वायु गुणवत्ता प्रबंधन – राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) कार्यान्वयन
- 6 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन: नियम, चुनौतियाँ और समाधान
- 7 ठोस अपशिष्ट और लैंडफिल प्रबंधन
- 8 जलवायु-जनित आपदाएँ: अनुकूलन योजना और जलवायु वित्त का एकीकरण
- 9 सूखा: शुष्क क्षेत्र मानचित्रण एवं मरुस्थलीकरण नियंत्रण कार्यक्रम
- 10 चक्रवात: पूर्व चेतावनी प्रणाली और AI आधारित पूर्वानुमान
- 1 वैश्विक एवं क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में भारत की रणनीतिक स्थिति
- 2 भारतीय उपमहाद्वीप का भू-गर्भिक विकास
- 3 प्रायद्वीपीय खंड, हिमालयीय क्षेत्र और सिंधु-गंगा मैदान
- 4 भारत के प्रमुख भू-आकृतिक प्रदेश और उनकी निर्माण प्रक्रियाएँ
- 5 भारत की तटीय एवं मरुस्थलीय भू-आकृतियाँ
- 6 प्रमुख नदी प्रणालियों की उत्पत्ति एवं उनकी विशेषताएँ
- 7 एकीकृत नदी बेसिन शासन: भूगोल एवं जल नीति का संगम
- 8 रिवर इंटरलिंकिंग
- 9 भूजल तनाव मानचित्रण
- 10 शहरी बाढ़ एवं अपवाह मानचित्रण
- 11 वॉटरशेड प्रबंधन एवं नदी पुनर्जीवन
- 12 नदी बेसिन विवाद: कावेरी, कृष्णा, महादयी और नीतिगत मध्यस्थता तंत्र
- 13 भूमिगत जल का दोहन एवं जलभृतों पर बढ़ता दबाव
- 14 भारतीय नदियों एवं डेल्टाओं पर जल-भूवैज्ञानिक प्रभाव
- 15 पड़ोसी देशों के साथ नदीय विवाद
- 16 भारत में प्रमुख मृदाएं
- 17 मृदा का क्षरण, अपरदन एवं संरक्षण तकनीकें
- 18 जैव विविधता हॉटस्पॉट एवं बायोस्फीयर रिज़र्व
- 19 सतत वन प्रबंधन
- 20 खनिज संसाधन: वितरण एवं प्रमुख उत्पादक क्षेत्र
- 21 औद्योगिक कॉरीडोर – DMIC, ईस्ट कोस्ट कॉरीडोर और गति शक्ति
- 22 लॉजिस्टिक्स और मल्टी-मोडल अवसंरचना
- 23 तटीय और ब्लू इकोनॉमी
- 24 बंदरगाह-आधारित विकास
- 25 कृषि संक्रमण – फसल विविधीकरण, कृषि-जलवायु क्षेत्रीयकरण, प्राकृतिक कृषि
- 26 पर्यटन और तीर्थ सर्किट
- 27 पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र एवं भूदृश्य-स्तरीय संरक्षण
- 28 मरुस्थलीकरण एवं भूमि निम्नीकरण
- 29 आर्द्रभूमि, रामसर स्थल एवं अंतर्देशीय जलीय रूपांतरण
- 30 शहरी ऊष्मा द्वीप और नगरीय सूक्ष्म जलवायु: जलवायु अनुकूलन योजना
- 31 वायु प्रदूषण का भूगोल: सिंधु-गंगा का मैदान, NCAP, GRAP और वाहन उत्सर्जन हॉटस्पॉट
- 32 मानसून परिवर्तनशीलता एवं ENSO-IOD प्रतिरूप
- 33 जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ: बदलती प्रकृति और जलवायु प्रभाव
- 34 जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून व्यवहार में परिवर्तन
- 35 हिमनद निवर्तन, नदी प्रवाह में परिवर्तन तथा इसके प्रभाव
- 36 कार्बन सिंक, कार्बन बाज़ार, और भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना
- 37 जलवायु-स्मार्ट कृषि एवं भूमि-उपयोग संक्रमण
- 38 हीट वेव, शहरी जलवायु तनाव और अनुकूलन आधारित नियोजन
- 39 प्रकृति-आधारित समाधान एवं पारिस्थितिकी-आधारित अनुकूलन पहलें
- 40 बाढ़, सूखा एवं भूस्खलन के लिए आपदा जोखिम मानचित्रण
- 41 भूकम्प संभाव्यता क्षेत्र एवं तैयारी उपाय
- 42 चक्रवात: पूर्व चेतावनी प्रणाली और AI आधारित पूर्वानुमान
- 43 सूखा: शुष्क क्षेत्र मानचित्रण एवं मरुस्थलीकरण नियंत्रण कार्यक्रम
- 44 जलवायु-जनित आपदाएँ: अनुकूलन योजना और जलवायु वित्त का एकीकरण
- 45 ठोस अपशिष्ट और लैंडफिल प्रबंधन
- 46 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन: नियम, चुनौतियाँ और समाधान
- 47 वायु गुणवत्ता प्रबंधन – राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) कार्यान्वयन
- 48 जनसंख्या गतिशीलता: प्रवासन पैटर्न, जनसांख्यिकीय लाभांश एवं जलवायु-जनित विस्थापन
- 49 शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ और सतत शहर
- 50 भारत की जनजातियाँ – FRA, PESA और पारिस्थितिक-सांस्कृतिक परिदृश्य
- 51 भारत में क्षेत्रीय असमानताओं और स्थानिक विकास के पैटर्न

