लॉजिस्टिक्स और मल्टी-मोडल अवसंरचना
लॉजिस्टिक्स यानी वस्तुओं के प्रवाह का प्रबंधन, भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण घटक है। भारत अपनी अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, और इसमें लॉजिस्टिक्स (Logistics) और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी (Multi-modal Connectivity) की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है।
- वर्तमान में, भारत की लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग13-14%है, जो विकसित देशों (8-10%) की तुलना में काफी अधिक है। सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर एकल अंक (single digit) में लाना है।
|
मल्टी-मोडल घटक और भौगोलिक चुनौतियाँ |
|||
|
घटक/मोड |
वर्तमान स्थिति |
महत्त्व एवं दक्षता |
भौगोलिक अंतराल / चुनौतियाँ |
|
सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग) |
कुल .... | ||
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

